# गढ़बोर में देव-पितृ अमावस्या पर चारभुजानाथ का दिव्य दरबार, पारंपरिक मेवाड़ी पाग में दर्शन पाकर निहाल हुए श्रद्धालु

> राजसमंद स्थित प्रसिद्ध कृष्ण धाम चारभुजा गढ़बोर में देव-पितृ श्राद्ध अमावस्या पर भगवान को मेवाड़ी पाग और विशेष पोशाक से अलंकृत किया गया, जहां देश भर से पहुंचे भक्तों ने लापसी व विविध पकवानों का भोग लगाया।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/gadbor-men-dev-pitri-amavasya-para-charbhuja-nath-ka-divya-darabara-parnparika-mewari-pag-men-darshana-pakara-nihala-hue-shraddhal-45960 · **Language:** Hindi
**Tags:** चारभुजानाथ, गढ़बोर, राजसमंद, देव पितृ अमावस्या, मेवाड़ी पाग, कृष्ण मंदिर, राजस्थान समाचार

राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित सुप्रसिद्ध कृष्ण तीर्थ चारभुजा गढ़बोर में देव-पितृ श्राद्ध अमावस्या की पावन तिथि पर भक्ति का अद्भुत वातावरण निर्मित हुआ। सुबह की पहली किरण के साथ ही मेवाड़ के धणी के जयकारों से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा। अपने आराध्य के नयनाभिराम रूप को निहारने और आशीर्वाद लेने के लिए राजस्थान के विभिन्न अंचलों के साथ-साथ सीमावर्ती राज्यों से भी बड़ी तादाद में श्रद्धालु पहुंचे, जिससे पूरे दिन धाम में उत्सव जैसा नजारा बना रहा।

## विविध पुष्पों की महक से महका ठाकुरजी का प्रांगण
पवित्र पर्व को लेकर मंदिर प्रबंधन एवं सेवकों द्वारा गर्भगृह से लेकर पूरे परिसर को बहुरंगी ताजे फूलों से सजाया गया था। फूलों की महक और मनमोहक लड़ियों के मध्य भगवान का दरबार अलौकिक आभा बिखेर रहा था। दूर-दराज से आने वाले दर्शनार्थियों ने ठाकुरजी के अलौकिक दरबार के समक्ष शीश नवाकर अपने कुटुंब की उन्नति, स्वास्थ्य एवं सुख-शांति के लिए प्रार्थना की।

## पारंपरिक मेवाड़ी पाग और विशेष आभूषणों से अलौकिक श्रृंगार
उत्सव के निर्धारित विधान के अनुसार सबसे पहले प्रभु को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ स्नान करवाकर ध्यान की प्रक्रिया पूर्ण की गई। इसके उपरांत प्रभु को एक भव्य पोशाक पहनाई गई। उनके स्वरूप को अस्त्र-शस्त्र, सुशोभित वैजयंती माला और सिर पर राजसी आन-बान की प्रतीक मेवाड़ी पाग धारण कराकर पूर्ण किया गया। भगवान के इस अनुपम स्वरूप को देखते ही श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और हाथ जोड़कर स्तुति करने लगे।

## लापसी, सिंघाड़े की सेव और विशेष नैवेद्य का अर्पण
धाम की प्राचीन परिपाटी के अनुरूप प्रत्येक माह पुजारी की सेवा का क्रम बदलता है। इसी व्यवस्था के तहत वर्तमान औसरे के नवनियुक्त पुजारी परिवार की तरफ से भगवान चारभुजानाथ को पारंपरिक लापसी का महाभोग अर्पित किया गया। भोग की रस्म पूरी होते ही उपस्थित जनसमूह में प्रसाद वितरण किया गया। इसके अतिरिक्त दर्शनार्थियों ने अपनी श्रद्धा अनुसार विविध मिष्ठान्न भेंट किए, जिनमें मावा, कसार, सिंघाड़े की सेव और मौसमी फल सम्मिलित रहे। सभी ने विधि-विधान से पूजा संपन्न कर अपनी मनोकामना पूर्ति का निवेदन किया।

## मेहसाणा संघ ने संभाली भोजन प्रसादी की जिम्मेदारी
इस बड़े धार्मिक समागम के दौरान गुजरात के मेहसाणा से आए चारभुजा अमावस्या संघ ने सेवा कार्य में हाथ बंटाया। संघ के सदस्यों द्वारा प्रभु को विशेष प्रसादी समर्पित करने के पश्चात बाहर से आने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए भोजन शाला में निशुल्क भोजन प्रसादी का प्रबंध किया गया। इस पुनीत कार्य से लंबी यात्रा कर गढ़बोर पहुंचे भक्तों को काफी सहूलियत मिली। पूरे दिन चले इस आध्यात्मिक उत्सव ने क्षेत्र में जन-आस्था की गहरी जड़ों को एक बार फिर उजागर किया।

## इसका आप पर असर
इस बड़े धार्मिक अनुष्ठान से क्षेत्र में तीर्थयात्रियों की आमद और स्थानीय धार्मिक पर्यटन को सीधा संबल मिला है।

- **राजसमंद और मेवाड़ में:** त्योहारों के दौरान हजारों तीर्थयात्रियों के आगमन से स्थानीय परिवहन, फूल विक्रेताओं और आतिथ्य कारोबारियों की आजीविका को बढ़ावा मिलता है। स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवी संगठन भीड़ प्रबंधन की व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ करते हैं।
- **अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए:** स्वयंसेवी संगठनों द्वारा निशुल्क भोजन प्रसादी उपलब्ध कराए जाने से दूरदराज से पहुंचे भक्तों को भोजन और ठहराव में सीधी सुविधा मिलती है। इससे भविष्य के बड़े धार्मिक आयोजनों में भी यात्रियों के लिए निर्बाध यात्रा का मार्ग प्रशस्त होता है।
- **मंदिर परंपरा के संदर्भ में:** मासिक पुजारी बदलाव और पारंपरिक नैवेद्य की रीतियों का निरंतर पालन होने से सनातन सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित रहती है। आम नागरिक अपनी पारंपरिक विरासत और पूजा पद्धतियों से सीधे जुड़े रहते हैं।
- **सामान्य जनजीवन पर प्रभाव:** दर्शन व्यवस्था सुचारु रहने से राजमार्गों और आसपास के गांवों में यातायात का दबाव नियंत्रित रहता है। श्रद्धालुओं को शांतिपूर्ण वातावरण में पूजा अर्चना का अवसर मिलता है।

## ऐसा क्यों हुआ
देव-पितृ श्राद्ध अमावस्या सनातन हिंदू परंपरा में पितरों के तर्पण और देव आराधना का परम पावन दिन माना जाता है, जिसके चलते चारभुजा गढ़बोर में यह भव्य आयोजन किया गया।

- **तिथीय मान्यता:** पितृपक्ष की अंतिम तिथि होने के कारण इस दिन देव पूजा और पितृ शांति का विशेष महत्व माना गया है। इसी धार्मिक विश्वास के चलते मेवाड़ और आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु अपने इष्टदेव के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे।
- **प्राचीन श्रृंगार परंपरा:** चारभुजानाथ को मेवाड़ का रक्षक और धणी माना जाता है, इसलिए प्रमुख अवसरों पर उन्हें राजसी मेवाड़ी पाग और शस्त्र धारण कराने का पुराना विधान है। यह आयोजन इसी ऐतिहासिक परंपरा का पालन करते हुए संपन्न हुआ।
- **पुजारी औसरे का नियम:** मंदिर में सदियों से चली आ रही व्यवस्था के अनुसार हर महीने सेवादार पुजारी परिवार का क्रम बदलता है। नए दायित्व की शुरुआत पर पुजारी परिवार द्वारा ठाकुरजी को लापसी का विशेष भोग समर्पित करने की रीति निभाई गई।
- **सामूहिक सेवा का संकल्प:** गुजरात के मेहसाणा स्थित श्रद्धालु मंडल हर महत्वपूर्ण अवसर पर तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए भोजन की व्यवस्था करता रहा है। इस अमावस्या पर भी संघ ने अपनी इसी सेवा परंपरा को आगे बढ़ाया।

## सवाल-जवाब

### 1. चारभुजानाथ मंदिर में किस अवसर पर विशेष आयोजन किया गया?
राजसमंद के चारभुजा गढ़बोर धाम में देव-पितृ श्राद्ध अमावस्या के पावन पर्व पर विशेष मनोरथ एवं श्रृंगार का आयोजन हुआ।

### 2. ठाकुरजी को किस पारंपरिक स्वरूप में सजाया गया था?
भगवान को विशेष स्नान के बाद सुंदर पोशाक, अस्त्र-शस्त्र, वैजयंती माला और पारंपरिक मेवाड़ी पाग पहनाई गई थी।

### 3. पुजारी परिवार की तरफ से भगवान को किस वस्तु का मुख्य भोग लगाया गया?
मासिक औसरे के तहत सेवा संभालने वाले नए पुजारी परिवार द्वारा ठाकुरजी को पारंपरिक लापसी का भोग अर्पित किया गया।

### 4. श्रद्धालुओं ने पूजा के दौरान कौन-कौन से नैवेद्य अर्पित किए?
भक्तों ने अपनी श्रद्धा अनुसार भगवान को मावा, कसार, सिंघाड़े की सेव और मौसमी फलों का भोग लगाया।

### 5. दूर से आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए भोजन प्रसादी का प्रबंध किसने किया?
गुजरात के मेहसाणा से आए चारभुजा अमावस्या संघ ने सभी दर्शनार्थियों के लिए भोजन प्रसादी की निशुल्क व्यवस्था की।

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