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  "type": "article",
  "title": "गलता तीर्थ का 2 करोड़ से होगा कायाकल्प, बंसी पहाड़पुर के गुलाबी पत्थरों और हेरिटेज पार्कों से निखरेगा स्वरूप",
  "summary": "जयपुर विकास प्राधिकरण अगले 6 से 8 महीनों में गलता तीर्थ का जीर्णोद्धार करेगा, जिसमें फाउंटेन पार्क, बंसी पहाड़पुर का पिंक सैंड स्टोन और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार शामिल है।",
  "content": "राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित ऐतिहासिक गलता तीर्थ को नए सिरे से संवारने की व्यापक योजना तैयार की गई है। उत्तर भारत में श्री वैष्णव रामानुज संप्रदाय की प्रधानपीठ के रूप में विख्यात इस पावन स्थल के समग्र विकास और जीर्णोद्धार पर जयपुर विकास प्राधिकरण लगभग 2 करोड़ रुपये खर्च करने जा रहा है। इस पूरी विकास परियोजना का मुख्य उद्देश्य मंदिर परिसर के प्राचीन ऐतिहासिक वैभव को अक्षुण्ण रखते हुए यहां आने वाले देश-दुनिया के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार करना है। विकास कार्यों की समयसीमा अगले 6 से 8 महीने तय की गई है, जिसके दौरान मंदिर को पारंपरिक जयपुर हेरिटेज शैली में तराशा जाएगा।\n\nपारंपरिक जयपुर शैली में होगा नक्काशी और संरक्षण का काम\nगलता तीर्थ के मूल ऐतिहासिक ढांचे को सुरक्षित रखने के लिए निर्माण में पारंपरिक जयपुर वास्तुकला तकनीकों का सहारा लिया जाएगा। मंदिर परिसर में गोला, गरदाना, कंगूरा और बारीकी से सजावटी लाइनिंग का काम कराया जाएगा। दीवारों की मजबूती और उनके ऐतिहासिक आकर्षण को लौटाने के लिए रफ कास्ट प्लास्टर के साथ पारंपरिक पीले और गुलाबी रंग का एक्सटीरियर पेंट तथा डिस्टेंपर लगाया जाएगा। इसके अलावा गलता तीर्थ आने वाले श्रद्धालुओं के विश्राम और आनंद के लिए विशेष लैंडस्केपिंग पार्क और आकर्षक फाउंटेन पार्क विकसित किए जाएंगे, जहां व्यवस्थित हॉर्टिकल्चर और हरियाली से पूरे वातावरण को सुरम्य बनाया जाएगा।\n\nबंसी पहाड़पुर के गुलाबी पत्थर और कडप्पा स्टोन से सजेगा फर्श\nमंदिर की भव्यता में इजाफा करने के लिए बंसी पहाड़पुर के खास 30-35 एमएम मोटाई वाले पिंक सैंड स्टोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा। रास्तों, खुले आंगनों और परिसर के रास्तों पर आकर्षक पैटर्न डिजाइन में ब्लैक कडप्पा कोबल स्टोन की मजबूत फ्लोरिंग बिछाई जाएगी। श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए सीढ़ियों व अलग-अलग हिस्सों के फर्श पर कोटा स्टोन लगाया जाएगा। वहीं दीवारों और प्रसाधन क्षेत्रों में मार्बल और ग्रेनाइट शेड वाली प्रीमियम टाइल्स लगाई जाएंगी। भक्तों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे परिसर में एंगल आयरन पोस्ट के साथ मजबूत चेन लिंक फेंसिंग भी स्थापित की जाएगी।\n\nबुनियादी ढांचे की मजबूती, नई पाइपलाइन और दिशा सूचक बोर्ड\nजीर्णोद्धार कार्य के तहत गलता मंदिर परिसर में मौजूद सभी छोटे-बड़े मंदिरों के बुनियादी ढांचे को दुरुस्त किया जाएगा। इसमें मंदिरों की नींव को मजबूती देना, दीवारों की आवश्यक मरम्मत और एक सुव्यवस्थित ड्रेनेज सिस्टम तैयार करना शामिल है। छतों को बारिश और सीलन से सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक वाटरप्रूफिंग के साथ कॉरुगेटेड जीएस शीट रूफिंग की जाएगी। श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए नए टॉयलेट ब्लॉक का निर्माण होगा, जिसे पीवीसी पाइपलाइन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही परिसर के रास्तों पर यात्रियों के मार्गदर्शन के लिए आईआरसी मानकों के अनुरूप रेट्रो-रिफ्लेक्टिव दिशा सूचक बोर्ड लगाए जाएंगे, ताकि रात के समय भी रास्ता खोजने में कोई परेशानी न हो। बैठने के लिए छायादार और आकर्षक पौधों से सजे भव्य ग्रीन लॉन तैयार किए जाएंगे।\n\n15 से अधिक मंदिरों का समूह और गो मुख कुंड का धार्मिक महत्व\nगलता तीर्थ जयपुर के अन्य धार्मिक स्थलों की तुलना में बेहद अनूठा और विशिष्ट है। यहां एक ही विशाल परिसर में 15 से अधिक मंदिर स्थापित हैं। यह स्थल हिंदू देवी-देवताओं, पौराणिक कथाओं और विवाह प्रसंगों पर आधारित अपने दुर्लभ भित्तिचित्रों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। मंदिर परिसर का सबसे प्रमुख आकर्षण पहाड़ियों के बीच से निकलने वाला प्राकृतिक जल स्रोत और विशाल गो मुख कुंड है। इस प्राचीन कुंड में स्नान करने का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। विशेषकर कार्तिक मास, मकर संक्रांति, सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण जैसे पावन अवसरों पर यहां डुबकी लगाने के लिए लाखों श्रद्धालु जुटते हैं।\n\nराजस्थान का मंकी टेंपल और वन्यजीवों का विशेष आकर्षण\nगलता तीर्थ को दुनिया भर में राजस्थान के 'मंकी टेंपल' के नाम से भी प्रसिद्धि हासिल है। इस पहाड़ी परिसर में विभिन्न प्रजातियों के सैकड़ों और हजारों की संख्या में बंदर स्वच्छंद रूप से निवास करते हैं। हाल ही में इस स्थल को मंकी टेंपल के रूप में पहचान देते हुए बंदरों के संरक्षण और देखभाल के लिए विशेष बजट आवंटित किया गया था। यहां के बंदर पर्यटकों के साथ अपने बेहद सहज और सादगीपूर्ण व्यवहार के लिए जाने जाते हैं। बंदरों के इसी अनूठे व्यवहार और जीवनशैली पर नेशनल ज्योग्राफिक चैनल ने एक पूरी डॉक्यूमेंट्री सीरीज तैयार कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित की थी। विकास कार्यों से इस ऐतिहासिक धरोहर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर और भी मजबूत पहचान मिलने की उम्मीद है।\n\nइसका आप पर असर\nजयपुर के ऐतिहासिक गलता तीर्थ में जीर्णोद्धार कार्य शुरू होने से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आधुनिक जनसुविधाएं और बेहतर माहौल मिलेगा।\n\n• भारत में: देश भर से आने वाले तीर्थयात्रियों को गो मुख कुंड और मंदिर परिसर में बेहतर रास्ते, सुरक्षा घेरा और आधुनिक प्रसाधन सुविधाएं मिलेंगी। मकर संक्रांति और कार्तिक मास के प्रमुख स्नान पर्वों पर भीड़ प्रबंधन पहले से कहीं अधिक व्यवस्थित होगा।\n• जयपुर में: स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को 6 से 8 महीने के भीतर आकर्षक फाउंटेन और हेरिटेज लैंडस्केपिंग पार्क की सुविधा उपलब्ध होगी। सड़क और परिसर में आईआरसी मानकों वाले साइनबोर्ड लगने से गलता तीर्थ तक पहुंचना आसान और सुरक्षित बनेगा।\n• पर्यटन अर्थव्यवस्था पर: विश्व प्रसिद्ध मंकी टेंपल के भव्य कायाकल्प से विदेशी और घरेलू सैलानियों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। इससे जयपुर के स्थानीय गाइडों, परिवहन संचालकों और आसपास के दुकानदारों के कारोबार को सीधा लाभ पहुंचेगा।\n• धार्मिक धरोहर पर: 15 से अधिक प्राचीन मंदिरों और ऐतिहासिक भित्तिचित्रों को वॉटरप्रूफिंग तथा ड्रेनेज सुधार से नया जीवन मिलेगा। पारंपरिक जयपुर शैली और बंसी पहाड़पुर के पत्थरों से यह सदियों पुरानी सांस्कृतिक धरोहर लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nजयपुर विकास प्राधिकरण ने गलता तीर्थ के प्राचीन गौरव को बनाए रखने और लगातार बढ़ते पर्यटन दबाव को संभालने के लिए यह कदम उठाया है।\n\n• प्राचीन संरचना का जीर्णोद्धार: सदियों पुराने इस मंदिर परिसर की दीवारों, छतों और नीवों को समय के साथ प्राकृतिक क्षरण से बचाने के लिए मरम्मत की सख्त जरूरत थी। जल रिसाव रोकने और ड्रेनेज सुधारने के लिए वॉटरप्रूफिंग तथा नई पाइपलाइन बिछाने की योजना तैयार की गई।\n• बढ़ती पर्यटक संख्या: गलता तीर्थ जयपुर के सर्वाधिक भ्रमण किए जाने वाले धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां रोजाना हजारों देशी-विदेशी सैलानी आते हैं। बुनियादी जनसुविधाओं, शौचालयों, रास्तों और सुरक्षा फेंसिंग के अभाव को दूर करने के लिए यह बजट स्वीकृत किया गया।\n• हेरिटेज पहचान को मजबूती: बंसी पहाड़पुर के गुलाबी पत्थर और पारंपरिक जयपुर नक्काशी को जोड़कर परिसर को उसके मूल स्वरूप में निखारना प्राथमिक उद्देश्य है। मंकी टेंपल के रूप में वैश्विक पहचान रखने वाले इस केंद्र को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार सुसज्जित किया जा रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. गलता तीर्थ के जीर्णोद्धार पर कुल कितना खर्च किया जाएगा?\nजयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा गलता तीर्थ के विकास और कायाकल्प पर लगभग 2 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।\n\n2. इस विकास परियोजना को पूरा होने में कितना समय लगेगा?\nइस पूरे प्रोजेक्ट को अगले 6 से 8 महीनों की अवधि में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।\n\n3. मंदिर परिसर के निर्माण में कौन से खास पत्थरों का उपयोग होगा?\nपरिसर में बंसी पहाड़पुर का 30-35 एमएम मोटाई वाला पिंक सैंड स्टोन, ब्लैक कडप्पा कोबल स्टोन और कोटा स्टोन लगाया जाएगा।\n\n4. गलता तीर्थ को मंकी टेंपल क्यों कहा जाता है?\nयहां विभिन्न प्रजातियों के हजारों बंदर रहते हैं जो पर्यटकों से सहज व्यवहार करते हैं, जिस पर नेशनल ज्योग्राफिक चैनल ने एक पूरी सीरीज भी प्रसारित की थी।\n\n5. गो मुख कुंड का क्या धार्मिक महत्व है?\nपहाड़ियों से निकलने वाले इस पावन जल कुंड में कार्तिक मास, मकर संक्रांति, सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण पर पवित्र स्नान का विशेष महत्व है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-04",
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