सौर मंडल के बीच विराजे गणपति, बाड़मेर के पंडाल में श्रद्धालुओं को मिला अंतरिक्ष दर्शन का अनुभव बाड़मेर के जुनी चौकी पाड़ा में कृष्ण कन्हैया सेवा समिति ने गणेश उत्सव के दौरान अंतरिक्ष और ग्रहों की थीम पर विशेष दरबार सजाया है, जहां भक्त बप्पा के दर्शन के साथ खगोलीय दृश्य का आनंद ले रहे हैं। गणेश उत्सव के पावन पर्व पर राजस्थान के बाड़मेर शहर में आस्था और कलात्मक कल्पना का अनूठा दृश्य सामने आया है। शहर के जुनी चौकी पाड़ा क्षेत्र में सजे एक विशेष पंडाल में प्रवेश करते ही भक्तों को किसी दूसरे ग्रह या अंतरिक्ष लोक में पहुंचने जैसा अहसास हो रहा है। स्थानीय आयोजक कृष्ण कन्हैया सेवा समिति ने इस वर्ष पारंपरिक सजावट से अलग हटकर सौर मंडल पर आधारित पंडाल का निर्माण कराया है, जो पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रहों के घेरे में बप्पा की खड़ी प्रतिमा इस अनूठे मंडप के भीतरी हिस्से को ब्रह्मांडीय परिदृश्य की तरह व्यवस्थित किया गया है। रंग-बिरंगी आधुनिक रोशनी और तारों-ग्रहों की प्रतिकृतियों के बीच भगवान गणेश की भव्य खड़ी प्रतिमा स्थापित की गई है। पंडाल की बनावट ऐसी रखी गई है कि केंद्र में विराजमान विघ्नहर्ता के चारों ओर सौर मंडल के विभिन्न ग्रह परिक्रमा करते प्रतीत होते हैं। यह मनोहारी नजारा वहां पहुंचने वाले हर श्रद्धालु को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। वर्ष 2012 से चली आ रही परंपरा आयोजन से जुड़े समिति के सदस्य धर्मेंद्र गुप्ता ने बताया कि कृष्ण कन्हैया सेवा समिति वर्ष 2012 से लगातार शहर में गणेश उत्सव मनाती आ रही है। समिति की यह परंपरा रही है कि प्रत्येक वर्ष आम दर्शनार्थियों के लिए कुछ नया, रचनात्मक और विशिष्ट परिवेश तैयार किया जाए। इस कड़ी में इस बार अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान पर आधारित स्वरूप चुना गया, जिससे धार्मिक आस्था के साथ-साथ एक नया दृष्टिकोण भी देखने को मिले। बच्चों और युवाओं में दिखा भारी उत्साह इस पंडाल की रचनात्मकता विशेष रूप से बाल वर्ग और युवाओं को अपनी ओर खींच रही है। भगवान श्रीगणेश के दर्शन करने पहुंच रहे लोग प्रतिमा की वंदना के उपरांत पंडाल की बारीक सजावट और खगोलीय प्रतिरूपों को कौतूहल से देख रहे हैं। धर्मेंद्र गुप्ता का कहना है कि आयोजन समिति की सोच सदैव यही रहती है कि उत्सव के जरिए भक्तों को आध्यात्मिक शांति के साथ एक यादगार और प्रेरणादायक अनुभव प्रदान किया जाए, और इस वर्ष की अंतरिक्ष थीम को आम जनता का भरपूर स्नेह मिल रहा है। इसका आप पर असर बाड़मेर शहर के निवासियों और त्योहार देखने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन एक नया सांस्कृतिक आकर्षण प्रस्तुत करता है। • भारत में: देश भर में गणेश उत्सव के दौरान नवाचारी और रचनात्मक पंडालों की बढ़ती परंपरा लोक कला और सामुदायिक जुड़ाव को प्रोत्साहित करती है। इससे विभिन्न क्षेत्रों के कारीगरों और युवा आयोजकों को नए वैज्ञानिक व सामाजिक विषयों को धार्मिक आयोजनों से जोड़ने की प्रेरणा मिलती है। • बाड़मेर में: बाड़मेर नगर के जुनी चौकी पाड़ा में रहने वाले परिवारों और बच्चों के लिए यह पंडाल दर्शन के साथ-साथ सौर मंडल की अवधारणा को देखने का एक स्थानीय केंद्र बन गया है। उत्सव के दिनों में शाम के समय परिवार सहित दर्शनार्थी यहां आसानी से पहुंचकर इस अनूठी सजावट का अनुभव ले सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ आयोजकों द्वारा पारंपरिक सजावट के स्थान पर अंतरिक्ष आधारित अवधारणा चुनने के पीछे श्रद्धालुओं को नवीन अनुभव देने की मंशा रही है। • समिति का रचनात्मक संकल्प: आयोजन समिति प्रत्येक वर्ष पंडाल के लिए सामान्य सजावट के बजाय एक अलग विषय चुनती है ताकि आगंतुकों का उत्साह बना रहे। वर्ष 2012 से चली आ रही इस सोच के तहत इस बार खगोलीय संरचना को मुख्य आधार बनाया गया। • नौजवानों और बच्चों का आकर्षण: ब्रह्मांड, तारों और सौर मंडल जैसे विषयों के प्रति नई पीढ़ी में हमेशा स्वाभाविक जिज्ञासा रहती है। इसी रुचि को ध्यान में रखते हुए ग्रहों के बीच भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई ताकि युवा दर्शक आध्यात्मिक माहौल से सहजता से जुड़ सकें। सवाल-जवाब 1. बाड़मेर में यह अंतरिक्ष थीम वाला गणेश पंडाल कहां स्थित है? यह अनूठा पंडाल बाड़मेर शहर के जुनी चौकी पाड़ा क्षेत्र में तैयार किया गया है। 2. इस पंडाल का निर्माण किस संस्था द्वारा कराया गया है? इस आयोजन और पंडाल की सजावट का कार्य कृष्ण कन्हैया सेवा समिति द्वारा किया गया है। 3. कृष्ण कन्हैया सेवा समिति कब से गणेश उत्सव मना रही है? आयोजक धर्मेंद्र गुप्ता के अनुसार समिति वर्ष 2012 से लगातार गणेश उत्सव का आयोजन कर रही है। 4. पंडाल के भीतर भगवान गणेश की प्रतिमा किस रूप में स्थापित है? पंडाल में ग्रहों और अंतरिक्षीय सजावट के बीच भगवान गणेश की खड़ी प्रतिमा स्थापित की गई है। https://trendkia.com/rajasthan/ganesh-idol-set-amid-planets-as-barmer-pandal-recreates-solar-system-theme-35231 TrendKia — Har trend, sabse pehle.