गणित के खौफ को कहें अलविदा, प्रोफेसर रफीक अहमद ने कमजोर छात्रों को दिए सफलता के मूलमंत्र राजकीय महाविद्यालय करौली के प्रोफेसर रफीक अहमद के अनुसार शुरुआती सही मार्गदर्शन, बुनियादी समझ और चरणबद्ध तरीके से पढ़ाई करने पर गणित का डर पूरी तरह दूर हो सकता है। कक्षा के दिनों से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं तक कई छात्रों के भीतर गणित को लेकर एक गहरा खौफ घर कर जाता है। किसी के लिए यह विषय तनाव का कारण बन जाता है, तो वहीं कुछ लोग इसे बेहद सरल और मनोरंजक मानकर हल करते हैं। अगर सवालों को देखते ही आपका दिमाग भी सुन्न पड़ जाता है, तो इस मानसिक झिझक से बाहर निकलने के आसान तरीके मौजूद हैं। करौली स्थित राजकीय महाविद्यालय में सेवाएं दे रहे प्रोफेसर रफीक अहमद ने गणित के डर को भगाने और इसमें पकड़ मजबूत करने को लेकर कई महत्वपूर्ण सूत्र साझा किए हैं। तीन दशकों का शिक्षण अनुभव और पढ़ाने की अनूठी शैली राजकीय महाविद्यालय करौली में एसोसिएट प्रोफेसर और कार्यवाहक प्राचार्य के पद पर कार्यरत प्रोफेसर रफीक अहमद पिछले तीन दशक से विद्यार्थियों को गणित का पाठ पढ़ा रहे हैं। उनके अध्यापन का अंदाज इतना प्रभावी माना जाता है कि विद्यार्थी बुनियादी स्तर पर ही सारे सूत्र समझ लेते हैं। उनके मार्गदर्शन में पढ़े छात्र बताते हैं कि एक बार कक्षा में विषय को ठीक से समझ लेने के बाद परीक्षा के दिनों में सिर्फ दोहराव की दरकार रह जाती है, जिससे पूरा तनाव खुद-ब-खुद समाप्त हो जाता है। शुरुआती मार्गदर्शन पर टिका होता है विषय का पूरा आधार गणित को लेकर छात्र के मन में बनने वाली छवि पर बात करते हुए प्रोफेसर रफीक अहमद बताते हैं कि पहली बार इस विषय से सामना होने पर कई बच्चे हिचकिचाते हैं, जबकि कुछ तुरंत रुचि लेने लगते हैं। इस पूरे विषय का आधार शुरुआती मार्गदर्शन से तय होता है। विद्यालय के शुरुआती वर्षों में ही यदि विद्यार्थी के भीतर गणित के सिद्धांतों की सही समझ बैठा दी जाए, तो यह विषय जीवनभर के लिए आसान बन जाता है। इस विषय से घबराहट होना स्वाभाविक है, परंतु इसे सही और रोचक शैली में समझाकर हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है। ऐसा होने पर कमजोर से कमजोर छात्र भी इसमें गहरी दिलचस्पी दिखाने लगते हैं। अपने निजी अध्ययन के दिनों को याद करते हुए वे साझा करते हैं कि वे बाकी सभी विषयों को सामान्य रूप से पढ़ते थे, लेकिन गणित को हमेशा गहरे शौक के साथ हल करते थे। इसी निरंतर लगाव की बदौलत वे गणित में हमेशा अव्वल रहे और परीक्षाओं के बीत जाने के बाद भी सवालों को हल करना जारी रखते थे। प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए क्रमबद्ध अध्ययन जरूरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे वे छात्र जो खुद को इस विषय में पिछड़ा मानते हैं, उनके लिए प्रोफेसर रफीक अहमद ने खास हिदायत दी है। उनका कहना है कि गणित का अध्ययन करते समय कभी भी बीच के अध्यायों को छोड़ना नहीं चाहिए, बल्कि हमेशा तय क्रम के अनुसार ही आगे बढ़ना चाहिए। यदि कोई छात्र क्रमबद्ध तरीके से अध्ययन नहीं करता है, तो विषय उस पर हावी होने लगता है। ऐसी स्थिति बनते ही विषय के प्रति रुचि घटने लगती है, सवाल उलझने लगते हैं और अंततः गणित विद्यार्थी के लिए एक भारी बोझ बनकर रह जाता है। बुनियादी संकल्पनाओं को साफ करना सबसे अहम पड़ाव अन्य विषयों की तुलना में गणित की कार्यप्रणाली बिल्कुल अलग होती है। किसी दूसरे विषय में यदि कोई अध्याय छूट भी जाए, तो अगले पाठ को समझना संभव हो सकता है, लेकिन गणित में यह तरीका पूरी तरह निष्फल साबित होता है। गणित में मजबूत पकड़ बनाने के लिए विद्यार्थी को सबसे पहले अपनी प्रारंभिक और बुनियादी संकल्पनाएं स्पष्ट करनी होती हैं। चरणबद्ध ढंग से सवालों का अभ्यास करना ही इसकी सबसे बेहतरीन तकनीक है। जब तक पीछे के नियम और प्री-कॉन्सेप्ट शीशे की तरह साफ नहीं होंगे, तब तक आगे के सूत्रों को समझ पाना संभव नहीं होगा। हर स्तर पर स्टेप-बाय-स्टेप अभ्यास करने से ही छात्र इस विषय में आत्मविश्वास हासिल कर सकते हैं। इसका आप पर असर गणित के डर से जूझ रहे विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों के लिए यह मार्गदर्शन दैनिक अध्ययन की कार्यप्रणाली सुधारने में सीधे तौर पर मददगार है। • अध्ययन की रणनीति: छात्र बिना क्रम तोड़े और बुनियादी फॉर्मूले समझे बिना अगले अध्याय पर कूदने से बचें। इससे हर दिन सवालों को समझने में लगने वाला अनावश्यक समय और मानसिक तनाव दोनों कम होंगे। • परीक्षा की तैयारी: प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी कठिन सूत्रों को रटने के बजाय पहले प्रारंभिक सिद्धांतों को स्पष्ट करें। ऐसा करने से परीक्षा हॉल में नए और घुमावदार सवालों को हल करने में आत्मविश्वास बढ़ेगा। • शुरुआती मार्गदर्शन: अभिभावक और शिक्षक छोटी उम्र से ही बच्चों को रोचक तरीके से सवाल हल करने के लिए प्रेरित करें। इससे आगे चलकर बच्चे के मन में विषय को लेकर स्थायी मानसिक झिझक या डर पैदा नहीं होगा। • रिवीजन का समय: अवधारणाओं की स्पष्टता होने पर परीक्षा के ऐन वक्त पर लंबी पढ़ाई के बजाय केवल संक्षिप्त दोहराव की जरूरत पड़ेगी। इससे छात्र बाकी विषयों के लिए भी पर्याप्त समय निकाल सकेंगे। ऐसा क्यों हुआ गणित को लेकर व्यापक डर पैदा होने और इसके समाधान के पीछे शैक्षणिक पद्धतियां और सीखने का क्रम मुख्य कारक हैं। • शुरुआती मार्गदर्शन का अभाव: स्कूली जीवन में जब पहली बार इस विषय का परिचय बिना रोचक उदाहरणों या स्पष्टता के कराया जाता है, तो छात्रों में भय पनप जाता है। सही शिक्षण शैली न मिलने पर यह डर हमेशा के लिए दिमाग में बैठ जाता है। • क्रमबद्ध अध्ययन न करना: छात्र अक्सर बुनियादी अध्यायों को समझे बिना कठिन विषयों पर कूदने का प्रयास करते हैं। पिछले सिद्धांतों की जानकारी न होने से नए सवाल समझ नहीं आते और विषय भारी लगने लगता है। • विषय की अंतर्निहित प्रकृति: अन्य विषयों के विपरीत गणित में हर अगला पाठ पिछले नियम से जुड़ा होता है। पूर्व-अवधारणाएं स्पष्ट न होने पर आगे की पूरी कड़ी टूट जाती है, जिससे रुचि पूरी तरह खत्म हो जाती है। सवाल-जवाब 1. गणित के कमजोर छात्रों के लिए प्रोफेसर रफीक अहमद ने क्या प्रमुख सलाह दी है? उन्होंने छात्रों को विषय क्रम अनुसार पढ़ने और सबसे पहले अपनी बुनियादी अवधारणाओं यानी प्री-कॉन्सेप्ट्स को पूरी तरह स्पष्ट करने की सलाह दी है। 2. प्रोफेसर रफीक अहमद किस संस्थान में कार्यरत हैं? वे राजकीय महाविद्यालय करौली में गणित के एसोसिएट प्रोफेसर और कार्यवाहक प्राचार्य के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। 3. गणित का डर खत्म करने में शुरुआती मार्गदर्शन क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है? शुरुआती दौर में रोचक और सरल तरीके से पढ़ाया जाए तो छात्र में विषय के प्रति समझ विकसित होती है और डर स्थायी रूप से समाप्त हो जाता है। 4. गणित का अध्ययन करते समय अध्याय छोड़ने से क्या नुकसान होता है? क्रमबद्ध अध्ययन न करने से विषय छात्र पर हावी होने लगता है, उसकी रुचि समाप्त हो जाती है और गणित एक कठिन बोझ बन जाता है। प्रेरणा और सबक प्रोफेसर रफीक अहमद के तीन दशक के अध्यापन और उनके निजी अध्ययन का सफर छात्रों के लिए महत्वपूर्ण सीख पेश करता है। • रुचि को आदत बनाना: अन्य विषयों की तरह औपचारिकता निभाने के बजाय किसी एक विषय में आनंद खोजने से उत्कृष्टता हासिल होती है। परीक्षा समाप्त होने के बाद भी अभ्यास जारी रखना सफलता की कुंजी बनता है। • क्रम और अनुशासन: जीवन या अध्ययन में किसी भी जटिल समस्या को सुलझाने के लिए शॉर्टकट के बजाय चरणबद्ध प्रयास करना जरूरी है। बुनियादी स्तर को मजबूत किए बिना बड़ी उपलब्धियां हासिल नहीं की जा सकतीं। • डर का निवारण संभव: किसी भी विषय या कौशल की कमजोरी स्थायी नहीं होती। सही दृष्टिकोण और निरंतर मार्गदर्शन से सबसे कठिन माने जाने वाले काम को भी आसान बनाया जा सकता है। https://trendkia.com/rajasthan/ganita-ke-khaupha-ko-kahen-alavida-prophesara-rafeeq-ahmad-ne-kamajora-chhatron-ko-die-saphalata-ke-mulamntra-42422 TrendKia — Har trend, sabse pehle.