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  "type": "article",
  "title": "गाय-भैंस खरीदने जा रहे हैं तो पहले परखें ये 6 लक्षण, कभी नहीं होगा नुकसान",
  "summary": "नया दुधारू पशु खरीदते समय केवल विक्रेता की बातों पर भरोसा करने के बजाय दूध की जांच, दांत, थन, नसों की बनावट और चाल की पूरी पड़ताल करके ही सौदा पक्का करें।",
  "content": "डेयरी व्यवसाय अथवा घरेलू उपयोग के लिए दुधारू मवेशी चुनते समय बरती गई थोड़ी सी भी लापरवाही खरीदार की जेब पर भारी पड़ सकती है। यदि बिना सोचे-समझे केवल बेचने वाले के दावों पर यकीन कर लिया जाए, तो हजारों रुपये का घाटा होना तय है। इसलिए किसी भी गाय अथवा भैंस की खरीदारी को अंतिम रूप देने से पहले उसके दूध देने की वास्तविक क्षमता, थनों की स्थिति, दांतों से उम्र की पहचान, शारीरिक बनावट और स्वभाव की बारीकी से जांच करना बेहद आवश्यक कदम है।\n\nदूध निकालने की तीन बार जांच और लेवटी की बनावट\nपशु की दुग्ध क्षमता का सही आकलन करने के लिए एक बार का दूध देखना काफी नहीं होता। सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि खरीदार लगातार तीन समय अपने हाथों से दूध निकालकर नापे। उदाहरण के तौर पर पहले दिन की शाम, अगले दिन की सुबह और फिर उसी दिन की शाम को दूध निकालें। इससे दूध की औसत मात्रा स्पष्ट हो जाती है। इसके साथ ही लेवटी यानी अयन और थनों की सेहत को भी भलीभांति परखना चाहिए। चारों थन एक समान आकार के होने चाहिए और उनके बीच बराबर दूरी बनी रहनी चाहिए। हल्के हाथों से थनों को टटोलकर देखें कि उनमें कोई सख्त गांठ, सूजन, लाली अथवा दर्द के लक्षण तो नहीं हैं, जो किसी बीमारी का संकेत हो सकते हैं।\n\nदूध की नसें और ब्यांत का सही चुनाव\nपशु के पेट के निचले भाग से शुरू होकर लेवटी तक पहुंचने वाली दूध की नसों का अध्ययन करना अत्यधिक लाभकारी रहता है। यदि यह नसें त्वचा पर साफ उभरी हुई, मोटी और लहरदार यानी टेढ़ी-मेढ़ी नजर आती हैं, तो यह अच्छे दुधारू पशु का मुख्य लक्षण माना जाता है। इसके विपरीत, जिन मवेशियों की नसें सपाट, सीधी या बहुत पतली होती हैं, उनमें प्रायः दूध उत्पादन कम दर्ज किया जाता है। खरीदारी के समय ब्यांत का क्रम भी ध्यान में रखें। अनुभवी जानकारों के अनुसार दूसरे या तीसरे ब्यांत का पशु खरीदना सबसे फायदे का सौदा साबित होता है, क्योंकि इस अवधि में पशु अपने उत्पादन के चरम पर रहता है।\n\nदांत देखकर उम्र का पता लगाना और स्वभाव की परख\nमवेशी की सही आयु जानने का सबसे प्रामाणिक तरीका उसके निचले जबड़े के दांत देखना है। पशु का मुंह खोलकर देखें, यदि उसके निचले जबड़े में चार से छह स्थायी दांत मौजूद हैं, तो वह पूर्णतः युवा माना जाता है। बहुत अधिक घिसे हुए, कमजोर अथवा टूटे दांत यह दर्शाते हैं कि पशु वृद्ध हो चुका है और आगे चलकर उसकी दूध देने की क्षमता घट जाएगी। इसके अतिरिक्त पशु के व्यवहार को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उसकी पीठ पर स्नेह से हाथ फेरें और थनों को छूने का प्रयास करें। यदि पशु अत्यधिक बेचैन होता है, चिड़चिड़ापन दिखाता है, पैर चलाता है या अपरिचित व्यक्ति को पास नहीं आने देता, तो बाद में उसे पालना और दूध निकालना मुश्किल भरा हो सकता है।\n\nशारीरिक ढांचा, 15 से 20 कदम की चाल और बछिया\nउत्तम दुधारू पशु का शरीर आगे से पतला और पीछे से चौड़ा, यानी एक त्रिभुज के आकार जैसा दिखना चाहिए। उसकी त्वचा चमकदार, पतली और ढीली होनी चाहिए। आंखें पूरी तरह साफ व चमकीली दिखें और थूथन यानी नाक पर हल्की नमी बनी रहनी चाहिए। पशु को खूंटे से खोलकर कम से कम 15 से 20 कदम अवश्य चलाएं, ताकि पैरों का लंगड़ापन, चाल की कमजोरी अथवा खुरों के मुड़े होने का दोष सामने आ सके। खुर जरूरत से ज्यादा बड़े या टेढ़े न हों और उसका गोबर भी सामान्य बंधा हुआ होना चाहिए। इसके अलावा, यदि पशु के साथ मादा बच्चा यानी बछिया या कटिया हो, तो उसे प्राथमिकता दें, जिससे भविष्य में घर पर ही एक और दुधारू पशु तैयार हो सके।\n\nइसका आप पर असर\nयह मार्गदर्शिका पशुपालकों और डेयरी किसानों को बिना ठगे स्वस्थ व अधिक दूध देने वाले मवेशी चुनने का व्यावहारिक तरीका समझाती है।\n\n• आर्थिक सुरक्षा: गलत व कम दूध देने वाले पशु की खरीदारी से होने वाले हजारों रुपये के नुकसान से बचाव होता है। सही जांच करके पूंजी लगाने से डेयरी व्यवसाय लंबे समय तक लाभ में बना रहता है।\n• दूध उत्पादन का सही अनुमान: तीन समय लगातार दूध निकालने से पशु की असली दैनिक क्षमता का सटीक पता चल जाता है। इससे विक्रेता द्वारा बताए गए बढ़ा-चढ़ाकर दावों की असलियत तुरंत सामने आ जाती है।\n• स्वास्थ्य संबंधी जोखिम में कमी: थनों में गांठ, खुरों की बीमारी या लंगड़ेपन की समय पर पहचान हो जाती है। बीमार पशु खरीदने पर लगने वाले अतिरिक्त पशुचिकित्सा खर्च और परेशानी से मुक्ति मिलती है।\n• भविष्य की संपत्ति का निर्माण: मादा बछिया साथ में खरीदने से आने वाले वर्षों में बिना अतिरिक्त खर्च के एक और दुधारू पशु तैयार हो जाता है। यह किसान के पशुधन के मूल्य को दोगुना करने में मदद करता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nपशु मेलों और सौदों में केवल बाहरी दिखावे या विक्रेता के मौखिक दावों पर भरोसा करने से अक्सर खरीदार ठगी का शिकार हो जाते हैं। शारीरिक संरचना, उम्र और दूध की क्षमता के वैज्ञानिक मापदंडों की समझ न होने के कारण यह स्थिति बनती है।\n\n• विक्रेता के दावों की अतिशयोक्ति: बेचने वाले अक्सर पशु का दूध वास्तविक क्षमता से कहीं अधिक बढ़ाकर बताते हैं। जब खरीदार स्वयं दूध नहीं निकालता, तो घर लाने के बाद उत्पादन अचानक कम मिलता है।\n• छिपी हुई बीमारियों की उपेक्षा: थन में पुरानी गांठ, मास्टाइटिस के शुरुआती लक्षण या खुरों की विकृति खड़े पशु में आसानी से नजर नहीं आती। खूंटे से खोलकर न चलाने और थनों को न छूने के कारण खरीदार इन दोषों को भांप नहीं पाते।\n• उम्र छुपाने का चलन: कई बार अधिक उम्र वाले पशुओं को आकर्षक आहार देकर चमकदार बना दिया जाता है। दांतों की बारीकी से जांच न करने पर किसान बूढ़े पशु को जवान समझकर ऊंची कीमत चुका बैठते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पशु खरीदने से पहले कितनी बार दूध निकाल कर देखना चाहिए?\nसौदा पक्का करने से पहले कम से कम तीन बार अपने हाथों से दूध निकालना चाहिए, जैसे पहली शाम, अगली सुबह और फिर शाम।\n\n2. दुधारू पशु के दूध की नसों की बनावट कैसी होनी चाहिए?\nपेट के निचले भाग से लेवटी तक जाने वाली नसें मोटी, उभरी हुई और टेढ़ी-मेढ़ी होनी चाहिए, जो अधिक दूध की पहचान हैं।\n\n3. दांत देखकर युवा पशु की पहचान कैसे की जाती है?\nजिस पशु के निचले जबड़े में चार से छह स्थायी दांत मौजूद हों, उसे जवान और उत्पादन के लिए उपयुक्त माना जाता है।\n\n4. सौदा करने से पहले पशु को कितने कदम चलाकर देखना जरूरी है?\nपशु को खूंटे से खोलकर कम से कम 15 से 20 कदम चलाकर देखना चाहिए ताकि लंगड़ापन और खुरों के दोष पकड़े जा सकें।\n\n5. किस ब्यांत का दुधारू पशु खरीदना सबसे अच्छा माना जाता है?\nपशुपालकों के अनुसार दूसरे या तीसरे ब्यांत का पशु खरीदना सबसे उपयुक्त और लाभकारी माना जाता है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-21",
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