# गोदावरी धाम में दीवारों पर उकेरा गया सुंदरकांड, कोटा में बना अनूठा मानस मंदिर

> कोटा के प्रसिद्ध गोदावरी धाम हनुमान मंदिर परिसर में मानस मंदिर स्थापित किया गया है, जिसकी दीवारों पर पूरा सुंदरकांड लिखा गया है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/godavari-dham-men-divaron-para-ukera-gaya-sundarkand-kota-men-bana-anutha-manas-mandir-45085 · **Language:** Hindi
**Tags:** गोदावरी धाम, कोटा, सुंदरकांड, मानस मंदिर, हनुमान मंदिर, अखंड रामायण

धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करने के लिए सामान्य तौर पर भक्त पोथियों और किताबों का रुख करते हैं, मगर राजस्थान के कोटा शहर में श्रद्धालुओं को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव मिल रहा है। यहां के विख्यात गोदावरी धाम हनुमान मंदिर परिसर में नवनिर्मित मानस मंदिर तैयार किया गया है, जहां भक्तों को पाठ करने के लिए पुस्तक खोलने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इस विशेष भवन की चारों दीवारों पर संपूर्ण सुंदरकांड को बड़े ही व्यवस्थित रूप से अंकित किया गया है, ताकि सामने खड़े होकर ही पूरा पाठ आसानी से संपन्न किया जा सके। इसके साथ ही मंदिर परिसर में गोस्वामी तुलसीदास जी और महर्षि वेदव्यास की भव्य प्रतिमाएं भी प्रतिष्ठित की गई हैं, जिससे इस स्थान की गरिमा और बढ़ गई है। यहां निरंतर चलने वाले अखंड रामायण पाठ का क्रम भी लंबे समय से श्रद्धापूर्वक जारी है।

## श्रद्धालुओं की बढ़ती तादाद के बाद हुआ परिसर का विस्तार
गोदावरी धाम के व्यवस्थापक शैलेंद्र भार्गव ने इस निर्माण की पृष्ठभूमि साझा करते हुए स्पष्ट किया कि हनुमान जी महाराज की प्रतिमा स्थापना के आरंभिक दिनों से ही यहां अखंड रामायण पाठ की परंपरा शुरू कर दी गई थी। शुरुआती दौर में यह धार्मिक आयोजन केवल पावन नवरात्र और श्रावण मास के विशेष अवसरों तक ही सीमित रहता था। जैसे-जैसे समय बीता, दैनिक आरती और नियमित रामायण पाठ में सम्मिलित होने वाले भक्तों की संख्या में भारी इजाफा देखा जाने लगा। पहले से निर्धारित किया गया पाठ कक्ष श्रद्धालुओं की उपस्थिति के लिहाज से छोटा पड़ने लगा था। इसी स्थिति को देखते हुए प्रबंधन ने उस कक्ष का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया और उसे एक भव्य मानस मंदिर का स्वरूप प्रदान किया। विस्तार के साथ ही वहां महर्षि वेदव्यास और गोस्वामी तुलसीदास जी की पावन प्रतिमाएं स्थापित की गईं और पूरे सुंदरकांड को दीवार पर लिखवाया गया।

## अहमदाबाद और बनारस के धार्मिक केंद्रों से मिली प्रेरणा
इस अनूठी रचना का विचार अचानक नहीं आया, बल्कि इसके पीछे अन्य विख्यात धार्मिक स्थलों की प्रेरणा रही है। शैलेंद्र भार्गव के अनुसार, दीवारों पर पवित्र ग्रंथों को उकेरने का विचार बनारस और अहमदाबाद स्थित प्रमुख आस्था केंद्रों से प्रेरित है। बनारस के मानस मंदिर में दीवारों पर समूची रामचरितमानस अंकित की गई है, जबकि अहमदाबाद के एक प्रसिद्ध धाम में श्रीमद्भागवत कथा के श्लोकों को भित्ति पर स्थान दिया गया है। इन्हीं परंपराओं को ध्यान में रखते हुए गोदावरी धाम में पूरे सुंदरकांड को दीवारों पर भव्यता से संजोया गया। उन्होंने रामचरितमानस के उस गहरे आध्यात्मिक संदेश का भी उल्लेख किया जिसमें कहा गया है कि कलियुग में योग, यज्ञ, जप, तप, व्रत या जटिल पूजा-पाठ के बजाय केवल प्रभु राम का स्मरण, उनके गुणों का गान और संतों के मुख से उनकी कथाओं का श्रवण ही सबसे सुगम साधन माना गया है।

## जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का पावन उद्देश्य
शैलेंद्र भार्गव ने बताया कि कलियुग के प्रभाव के बीच प्रभु श्रीराम का नाम जपना, उनका गुणगान करना और उनकी महिमा को सुनना ही मानव कल्याण का सीधा मार्ग है। भागदौड़ भरी दिनचर्या के चलते कई श्रद्धालु अपने घरों में समय निकालकर पाठ करने में असमर्थ रहते हैं, या किसी वजह से स्वयं ग्रंथ नहीं पढ़ पाते। ऐसे सभी लोगों के लिए यह मानस मंदिर एक सुलभ केंद्र बन चुका है, जहां वे आकर शांत चित्त से कुछ समय अखंड रामायण का श्रवण कर सकते हैं। मंदिर प्रबंधन का मुख्य ध्येय यही है कि रामचरितमानस केवल पन्नों तक सिमटकर न रहे, बल्कि उसके आदर्श और संदेश जन-जन के आचरण में उतरें। यदि कोई भी भक्त सुंदरकांड की कुछ चुनिंदा चौपाइयों का भी सच्चे हृदय से पाठ करता है और उनके मर्म को समझता है, तो उसके जीवन को एक सकारात्मक दिशा मिल सकती है। वर्तमान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन यहां हनुमान चालीसा, रामायण और सुंदरकांड का पाठ करने पहुंचते हैं और आत्मिक शांति का अनुभव करते हैं।

## इसका आप पर असर
कोटा के गोदावरी धाम में बना यह नया मानस मंदिर धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करने वाले और नियमित पाठ करने वाले श्रद्धालुओं के लिए काफी सुविधाजनक साबित होगा।

- **भारत में:** देश भर से धार्मिक यात्राओं पर निकलने वाले श्रद्धालुओं को कोटा में एक नया आध्यात्मिक केंद्र मिलेगा, जहां वे बिना पुस्तक लिए सीधे दीवारों से पाठ कर सकते हैं। यह नवाचार अन्य धार्मिक स्थलों को भी प्राचीन ग्रंथों को संरक्षित करने के नए तरीके अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।
- **कोटा में:** स्थानीय नागरिकों और विद्यार्थियों को अब मंदिर में पाठ करने के लिए अपनी किताबें साथ लाने की आवश्यकता नहीं होगी। जो लोग घर पर समय की कमी या अन्य कारणों से रामायण का पाठ नहीं कर पाते, वे मंदिर आकर कभी भी अखंड रामायण का श्रवण कर मानसिक शांति पा सकते हैं।
- **नियमित पाठकों के लिए:** बुजुर्गों और पाठकों को किताबों के छोटे अक्षरों के बजाय दीवारों पर साफ लिखे सुंदरकांड को पढ़ने में अधिक सुविधा मिलेगी। वे सीधे खड़े होकर या बैठकर सामूहिक रूप से बिना किसी असुविधा के पाठ संपन्न कर सकेंगे।
- **आध्यात्मिक वातावरण:** मंदिर परिसर का विस्तार होने से अब अधिक संख्या में भक्त एक साथ आरती और धार्मिक आयोजनों में बिना किसी भीड़भाड़ के शामिल हो सकेंगे। इससे शहर में धार्मिक पर्यटन और स्थानीय श्रद्धालुओं की सहूलियत दोनों में वृद्धि होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
गोदावरी धाम में मानस मंदिर का निर्माण श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या और परिसर में जगह की कमी के चलते किया गया।

- **स्थान की कमी:** मंदिर में हनुमान जी की स्थापना के बाद से ही अखंड रामायण का पाठ आयोजित किया जा रहा था, लेकिन शुरुआती कक्ष काफी छोटा था। समय बीतने के साथ आरती और पाठ में शामिल होने वाले भक्तों की तादाद इतनी बढ़ गई कि पुराने कक्ष में बैठना मुश्किल होने लगा।
- **परिसर विस्तार का निर्णय:** बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रबंधन ने पुराने कक्ष को तोड़कर एक बड़े और व्यवस्थित मानस मंदिर के रूप में विकसित करने का फैसला लिया। इस विस्तार के साथ वहां महर्षि वेदव्यास और गोस्वामी तुलसीदास जी की मूर्तियां भी स्थापित की गईं।
- **अन्य धामों से प्रेरणा:** दीवारों पर संपूर्ण सुंदरकांड अंकित करने का विचार बनारस के मानस मंदिर और अहमदाबाद के धार्मिक केंद्रों से लिया गया। बनारस में पूरी रामायण और अहमदाबाद में भागवत कथा की दीवारों पर उपस्थिति देखकर कोटा में भी सुंदरकांड को दीवारों पर उकेरा गया।
- **सुगम भक्ति का उद्देश्य:** प्रबंधन का मानना था कि जो लोग घर पर ग्रंथ नहीं पढ़ पाते, उन्हें मंदिर में खुला वातावरण और दृश्य रूप में पाठ उपलब्ध कराया जाए ताकि वे आसानी से इसका लाभ उठा सकें।

## सवाल-जवाब

### 1. कोटा के किस मंदिर में सुंदरकांड को दीवारों पर लिखा गया है?
कोटा के प्रसिद्ध गोदावरी धाम हनुमान मंदिर परिसर में स्थित मानस मंदिर की दीवारों पर संपूर्ण सुंदरकांड अंकित किया गया है।

### 2. मानस मंदिर में किन महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं?
इस मंदिर परिसर में महर्षि वेदव्यास और गोस्वामी तुलसीदास जी की पावन प्रतिमाएं प्रतिष्ठित की गई हैं।

### 3. दीवारों पर सुंदरकांड अंकित करने की प्रेरणा कहां से मिली?
इसकी प्रेरणा बनारस के मानस मंदिर, जहां दीवारों पर रामायण अंकित है, और अहमदाबाद के धाम से मिली, जहां भागवत कथा दीवारों पर लिखी गई है।

### 4. गोदावरी धाम में पहले अखंड रामायण का आयोजन कब होता था?
शुरुआती दौर में यहां अखंड रामायण का आयोजन केवल नवरात्र और सावन के पावन महीनों के दौरान ही किया जाता था।

### 5. मानस मंदिर का विस्तार करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
आरती और रामायण पाठ में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ गई थी, जिसके कारण पहले से बना हुआ पाठ कक्ष छोटा पड़ने लगा था।

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