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  "type": "article",
  "title": "गुजरात से राजस्थान तक एंबुलेंस में 950 किमी का सफर, दोनों पैरों में रॉड के बावजूद बुजुर्ग महिला ने डाला वोट",
  "summary": "झुंझुनूं के बदनगढ़ में पंचायत चुनाव के दौरान 64 वर्षीय सावित्री देवी ने दोनों पैरों में रॉड होने के बाद भी बड़ौदा से एंबुलेंस से आकर मतदान किया।",
  "content": "लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी निभाने का संकल्प अगर मजबूत हो तो शारीरिक पीड़ा और लंबी दूरी की बाधाएं भी आड़े नहीं आती हैं। राजस्थान के झुंझुनूं जिले की बदनगढ़ ग्राम पंचायत में पंचायत चुनाव के दौरान नागरिक कर्तव्य की एक मिसाल देखने को मिली, जब 64 वर्षीय एक महिला ने केवल अपना मत डालने के लिए गुजरात से राजस्थान तक का लंबा सफर तय किया। दोनों पैरों में सर्जिकल रॉड डली होने की गंभीर शारीरिक परेशानी के बावजूद उन्होंने मतदान केंद्र तक पहुंचकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया।\n\nवडोदरा से बदनगढ़ तक एंबुलेंस से पूरा किया सफर\nमूल रूप से बदनगढ़ गांव की निवासी सावित्री देवी, जो स्वर्गीय भागीरथमल शर्मा की धर्मपत्नी हैं, वर्तमान में अपने परिवार के साथ गुजरात के बड़ौदा शहर में रहती हैं। उनका परिवार वहां कारोबार संभालता है और वह अपने पुत्र विनोद शर्मा के साथ निवास करती हैं। ग्राम पंचायत चुनाव की घोषणा होने और मतदान की तिथि समीप आने पर उन्होंने अपने पैतृक गांव पहुंचकर वोट डालने का दृढ़ संकल्प लिया। दोनों पैरों में रॉड लगी होने के चलते सामान्य बस, ट्रेन या निजी कार से करीब 950 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना उनके स्वास्थ्य के लिए संभव नहीं था। उनकी स्थिति और मतदान के प्रति दृढ़ इच्छाशक्ति को देखते हुए परिजनों ने एंबुलेंस की विशेष व्यवस्था की, ताकि वह बिना किसी चिकित्सकीय जोखिम के सुरक्षित अपने गांव पहुंच सकें।\n\nपरिवार के साथ मतदान केंद्र पहुंचीं सावित्री देवी\nइस चुनावी यात्रा में सावित्री देवी के साथ उनके सुपुत्र व समाजसेवी विनोद शर्मा, पुत्रवधुएं राधा शर्मा और अनिता शर्मा के अलावा पौत्र सचिन शर्मा, शिवानी और हर्ष मौजूद रहे। पूरे परिवार की देखरेख में लगभग 950 किलोमीटर की सड़क यात्रा पूरी करने के बाद वह सीधे बदनगढ़ के मतदान केंद्र पर पहुंचीं और कतारबद्ध प्रक्रिया के तहत वोट डाला। शारीरिक लाचारी के सामने नागरिक कर्तव्य को प्राथमिकता देने की इस घटना ने पूरे गांव और आसपास के चुनावी क्षेत्र में मतदाताओं का ध्यान खींचा। सावित्री देवी का यह कदम उन मतदाताओं के लिए एक सीधा संदेश बना जो हल्की असुविधा, धूप या कतार देखकर मतदान करने से कतराते हैं।\n\nसरपंच पद की सभी छह महिला प्रत्याशियों ने पेश की मिसाल\nबदनगढ़ ग्राम पंचायत चुनाव में इस बार सरपंच पद की सीट सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित की गई थी। इस पद के लिए चुनावी रण में कुल छह महिला उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रही थीं। सामान्य तौर पर चुनावी मुकाबलों में प्रत्याशियों के बीच तनाव और तीखी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है, परंतु यहां मतदान के दिन सभी छह महिला प्रत्याशी सौहार्दपूर्ण माहौल में एक साथ खड़ी दिखाई दीं। छह महिला उम्मीदवारों का एक मंच पर इस तरह आपसी सम्मान के साथ मौजूद रहना और सावित्री देवी का 950 किलोमीटर का एंबुलेंस सफर, दोनों ही घटनाओं ने इस पंचायत चुनाव को लोकतांत्रिक मूल्यों के लिहाज से बेहद खास बना दिया।\n\nइसका आप पर असर\nयह घटना चुनावी भागीदारी और नागरिक कर्तव्य के प्रति मतदाताओं की सोच को सीधे तौर पर प्रभावित करती है।\n\n• मतदान के महत्व पर असर: यह घटना मतदाताओं को याद दिलाती है कि शारीरिक कष्ट के बावजूद वोट देना कितना आवश्यक है। इससे उन लोगों को सीख मिलती है जो मामूली असुविधा के कारण मतदान केंद्रों तक जाने से परहेज करते हैं।\n• झुंझुनूं और बदनगढ़ में: स्थानीय ग्रामीणों में इस समर्पण को देखकर मतदान के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ी है। गांव के अन्य लोगों के लिए यह पहल आने वाले चुनावों में अधिक मतदान प्रतिशत हासिल करने का आधार बनेगी।\n• बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं के लिए: वरिष्ठ नागरिकों की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदारी की महत्ता रेखांकित होती है। इससे चुनावी प्रशासन को भी ऐसे जरूरतमंद मतदाताओं के लिए सुगम व्यवस्थाएं मजबूत करने की प्रेरणा मिलती है।\n• चुनावी सौहार्द की मिसाल: प्रत्याशियों के बीच आपसी आदर का दृश्य ग्रामीण स्तर पर राजनीतिक तनाव कम करने में मदद करता है। बदनगढ़ में महिला उम्मीदवारों की एकजुटता ने चुनावी कटुता समाप्त करने का स्पष्ट रास्ता दिखाया है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nसावित्री देवी का यह सफर लोकतंत्र में अपनी आस्था जताने और गांव के विकास में अपनी हिस्सेदारी तय करने के उद्देश्य से हुआ। दोनों पैरों में गंभीर समस्या के बावजूद उन्होंने अपने पारिवारिक दायित्व और नागरिक कर्तव्य के बीच संतुलन बनाया।\n\n• सफर का कारण: सावित्री देवी मूल रूप से बदनगढ़ की रहने वाली हैं और अपनी पंचायत के चुनाव में वोट डालना चाहती थीं। दोनों पैरों में रॉड होने के कारण सामान्य वाहन में बैठना संभव नहीं था, इसलिए परिवार ने एंबुलेंस का प्रबंध किया।\n• पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनका परिवार आजीविका और कारोबार के सिलसिले में गुजरात के वडोदरा में रहता है। स्थानीय चुनाव की तारीख घोषित होते ही उन्होंने अपने गृह राज्य पहुंचकर मताधिकार का प्रयोग करने की इच्छा जताई।\n• महिला प्रत्याशियों की एकता: बदनगढ़ में सरपंच पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित था और सभी छह उम्मीदवारों ने सौहार्द का परिचय दिया। उन्होंने चुनावी प्रतिद्वंद्विता से ऊपर उठकर आपसी गरिमा और लोकतांत्रिक भावना को बढ़ावा देने के लिए एक साथ उपस्थिति दर्ज कराई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सावित्री देवी ने कितनी दूरी तय करके मतदान किया?\nउन्होंने गुजरात के बड़ौदा से राजस्थान के झुंझुनूं जिले के बदनगढ़ गांव तक लगभग 950 किलोमीटर का सफर तय किया।\n\n2. सावित्री देवी को एंबुलेंस से यात्रा क्यों करनी पड़ी?\nउनके दोनों पैरों में सर्जिकल रॉड लगी हुई है, जिससे सामान्य तरीके से सफर करना संभव नहीं था।\n\n3. इस यात्रा में सावित्री देवी के साथ परिवार के कौन से सदस्य थे?\nउनके साथ उनके बेटे विनोद शर्मा, पुत्रवधुएं राधा और अनिता तथा पौत्र सचिन, शिवानी और हर्ष मौजूद थे।\n\n4. बदनगढ़ में सरपंच पद का चुनाव किस वर्ग के लिए आरक्षित था?\nबदनगढ़ ग्राम पंचायत में सरपंच पद की सीट सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित थी।\n\n5. बदनगढ़ पंचायत चुनाव में सरपंच पद के लिए कितनी महिला प्रत्याशी मैदान में थीं?\nसरपंच पद के मुकाबले में कुल छह महिला उम्मीदवार मैदान में थीं और सभी एक साथ उपस्थित नजर आईं।\n\nप्रेरणा और सबक\nसावित्री देवी का यह कदम साबित करता है कि सच्ची इच्छाशक्ति और पारिवारिक सहयोग से किसी भी शारीरिक चुनौती को पार किया जा सकता है।\n\n• कर्तव्यनिष्ठा सर्वोपरि: 64 वर्ष की आयु और पैरों में रॉड होने के बाद भी 950 किमी चलकर वोट डालना यह सिखाता है कि जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए।\n• परिवार का समर्थन: मुश्किल समय में परिजनों का साथ किसी भी असंभव कार्य को संभव बना देता है, जैसा उनके बेटे और परिवार ने एंबुलेंस का इंतजाम करके दिखाया।\n• सौहार्दपूर्ण प्रतिस्पर्धा: चुनाव मैदान में उतरीं छह महिला उम्मीदवारों का एक साथ खड़े होना सिखाता है कि मतभेद विचारों में हो सकते हैं, मन में वैर नहीं होना चाहिए।",
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  "whyItHappened": "सावित्री देवी का यह सफर लोकतंत्र में अपनी आस्था जताने और गांव के विकास में अपनी हिस्सेदारी तय करने के उद्देश्य से हुआ। दोनों पैरों में गंभीर समस्या के बावजूद उन्होंने अपने पारिवारिक दायित्व और नागरिक कर्तव्य के बीच संतुलन बनाया।\n\n• सफर का कारण: सावित्री देवी मूल रूप से बदनगढ़ की रहने वाली हैं और अपनी पंचायत के चुनाव में वोट डालना चाहती थीं। दोनों पैरों में रॉड होने के कारण सामान्य वाहन में बैठना संभव नहीं था, इसलिए परिवार ने एंबुलेंस का प्रबंध किया।\n• पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनका परिवार आजीविका और कारोबार के सिलसिले में गुजरात के वडोदरा में रहता है। स्थानीय चुनाव की तारीख घोषित होते ही उन्होंने अपने गृह राज्य पहुंचकर मताधिकार का प्रयोग करने की इच्छा जताई।\n• महिला प्रत्याशियों की एकता: बदनगढ़ में सरपंच पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित था और सभी छह उम्मीदवारों ने सौहार्द का परिचय दिया। उन्होंने चुनावी प्रतिद्वंद्विता से ऊपर उठकर आपसी गरिमा और लोकतांत्रिक भावना को बढ़ावा देने के लिए एक साथ उपस्थिति दर्ज कराई।",
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