गुलाबी नगरी में दीवाली फ्ली मार्केट शुरू, 45 हुनरमंदों के संग्रह और सांस्कृतिक शाम का बिना टिकट लें आनंद जयपुर की कलानेरी आर्ट गैलरी में सजे वार्षिक दीवाली फ्ली मार्केट में 45 कलाकारों के खास उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं, जहां लोग शाम 5 से रात 10 बजे तक मुफ्त प्रवेश पा सकते हैं। दीपावली के आगमन के साथ ही राजस्थान की राजधानी जयपुर के बाजारों में त्योहार की रौनक देखते ही बन रही है। घरों और कार्यस्थलों को सजाने के लिए लोग नई चीजों की खरीदारी में जुटे हैं। इसी त्योहारी उमंग के बीच शहर की कलानेरी आर्ट गैलरी में खास दीवाली फ्ली मार्केट शुरू किया गया है। यह वार्षिक आयोजन केवल पारंपरिक बाजार भर नहीं है, बल्कि यहां आने वाले खरीदारों को कला, शिल्पकला, सुरीले संगीत और लजीज खानपान का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। इस बार के आयोजन में लगभग 45 कलाकार और कला जगत से जुड़े प्रतिभागी अपने नायाब उत्पादों के साथ सम्मिलित हुए हैं, जो घर की सजावट और अपनों को खास तोहफे देने के लिए बेहतरीन विकल्प पेश कर रहे हैं। कारीगरों और पारंपरिक कला का अनूठा मंच साल में केवल एक बार सजने वाले इस विशेष फ्ली मार्केट को इस मर्तबा 'वन वेंडर, वन आर्ट' की खास थीम पर आयोजित किया गया है। इस सोच के तहत अलग-अलग क्षेत्रों से पधारे प्रतिभागी अपनी अनूठी विधा और हस्तशिल्प से तैयार वस्तुओं का प्रदर्शन कर रहे हैं। यहां आने वाले खरीदारों को सिर्फ सामान खरीदने का ही मौका नहीं मिलता, बल्कि वे हर उत्पाद के निर्माण में लगी मेहनत, कारीगरी की बारीकियों और समृद्ध परंपराओं को भी सीधे कारीगरों से समझ सकते हैं। बाजार में परिधान, कलात्मक घरेलू सजावट का सामान, खूबसूरत पेंटिंग्स, मूर्तियां और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स तक बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। हर वर्ग और हर बजट के खरीदार अपनी जरूरत के मुताबिक यहां से दीवाली की खरीदारी कर सकते हैं, जिससे घर और दफ्तर दोनों को नया रूप दिया जा सके। ब्लू पॉटरी से मोलेला तक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत इस फ्ली मार्केट का प्रमुख आकर्षण राजस्थान की विश्वविख्यात पारंपरिक हस्तकलाएं हैं। आयोजन स्थल पर जयपुर की पहचान मानी जाने वाली ब्लू पॉटरी के साथ-साथ सांगानेरी और बगरू की मशहूर ब्लॉक प्रिंटिंग के उत्पाद बड़ी संख्या में देखे जा सकते हैं। इसके अलावा धार्मिक और पारंपरिक कला के रूप में पहचानी जाने वाली पिछवाई पेंटिंग्स तथा मिट्टी से तैयार की जाने वाली मोलेला कला के नमूने भी कला प्रेमियों को लुभा रहे हैं। ये तमाम कलाकृतियां प्रदेश की सदियों पुरानी सांस्कृतिक धरोहर और हस्तशिल्पियों के बेजोड़ कौशल को दर्शाती हैं। जो लोग कला के कद्रदान हैं और स्थानीय कारीगरों के काम को करीब से निहारना चाहते हैं, उनके लिए यह प्रदर्शनी एक शानदार अनुभव साबित हो रही है। संगीत, रोशनी और लजीज व्यंजनों का संगम कलानेरी आर्ट गैलरी में खरीद-फरोख्त के साथ-साथ लोगों के मनोरंजन का भी पूरा ध्यान रखा गया है। शाम ढलते ही यहां का माहौल सांस्कृतिक उत्सव में बदल जाता है, जहां सुरीली गजलें, मधुर गीत, साहित्यिक चर्चाएं और जीवंत संगीत प्रस्तुतियां समां बांध देती हैं। इसके साथ ही शाम के वक्त मनमोहक लाइट शो और अस्सी के दशक के सदाबहार बॉलीवुड गीतों का खास प्रबंध किया गया है, जो पुरानी यादों को ताजा कर देता है। खरीदारी के बीच आगंतुक राजस्थान के पारंपरिक और मशहूर लजीज व्यंजनों के जायके का भी लुत्फ उठा सकते हैं। इस व्यवस्था के चलते यह फ्ली मार्केट पूरे परिवार और दोस्तों के साथ फुर्सत के पल बिताने का एक आदर्श केंद्र बन चुका है। समय, प्रवेश और आगंतुकों के लिए सुविधाएं इस दीवाली फ्ली मार्केट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आम जनता के लिए प्रवेश पूरी तरह निशुल्क रखा गया है। कोई भी व्यक्ति बिना किसी टिकट या पंजीकरण शुल्क के यहां आ सकता है। यह आयोजन प्रतिदिन शाम 5 बजे से लेकर रात 10 बजे तक खुला रहता है, ताकि कामकाजी लोग भी आसानी से समय निकालकर पहुंच सकें। बाजार में आने वाले लोगों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए आयोजकों ने पर्याप्त वाहन पार्किंग और अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाओं का पुख्ता प्रबंध किया है। यदि आप पारंपरिक राजस्थानी शिल्प, कलात्मक उपहार, संगीत और खानपान का आनंद एक ही छत के नीचे लेना चाहते हैं, तो यह बाजार आपके लिए सही गंतव्य साबित हो सकता है। इसका आप पर असर इस आयोजन से स्थानीय कारीगरों को सीधा बाजार मिलने के साथ-साथ शहरवासियों को बिना बिचौलियों के प्रामाणिक हस्तशिल्प खरीदने की सीधी सुविधा मिल रही है। • जयपुर में: शहर के खरीदार एक ही स्थान पर ब्लू पॉटरी और ब्लॉक प्रिंट जैसी पारंपरिक कलाकृतियां सीधे निर्माताओं से खरीद सकते हैं। शाम 5 से रात 10 बजे के बीच मुफ्त प्रवेश होने से सप्ताहांत में परिवार के साथ जाना किफायती और सुविधाजनक है। • भारत में: देश भर से हस्तशिल्प और कला के कद्रदान सीधे स्थानीय कारीगरों से जुड़कर स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहन दे सकते हैं। इससे कारीगरों की सीधी आय बढ़ती है और त्योहारों पर पारंपरिक कला को नया बाजार मिलता है। • बजट और विकल्प: सजावट, कपड़ों और उपहारों के लिए कई मूल्य श्रेणियों के उत्पाद उपलब्ध होने से हर वर्ग अपनी जेब के अनुसार खरीदारी कर सकता है। इससे पारंपरिक वस्तुओं के लिए अलग-अलग बाजारों में घूमने का समय बचता है। • सांस्कृतिक अनुभव: बाजार में खरीद-फरोख्त के साथ 1980 के दशक के संगीत, गजल और स्थानीय व्यंजनों का संगम लोगों को शाम के वक्त एक मुकम्मल उत्सव का माहौल उपलब्ध कराता है। यह परिवारों के लिए शाम बिताने का एक आदर्श विकल्प है। ऐसा क्यों हुआ दीपावली पर्व से पहले घरों की सजावट और उपहारों की भारी मांग को देखते हुए इस विशेष फ्ली मार्केट का आयोजन किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य राजस्थान के परंपरागत कारीगरों को अपनी कला के सीधे प्रदर्शन और बिक्री का एक संगठित मंच प्रदान करना है। • त्योहारी मांग और तैयारी: दीपावली से पूर्व लोग अपने घरों और दफ्तरों को नया रूप देने के लिए अनूठी वस्तुओं की तलाश में रहते हैं। इस मौसमी जरूरत को पूरा करने के लिए कलानेरी आर्ट गैलरी में यह वार्षिक बाजार आयोजित किया गया है। • कारीगरों को सीधा मंच: 'वन वेंडर, वन आर्ट' की रूपरेखा इसलिए तैयार की गई ताकि विभिन्न पारंपरिक कलाओं के 45 हुनरमंद बिना किसी बिचौलिए के अपने उत्पादों को प्रदर्शित कर सकें। इससे खरीदारों को प्रामाणिक सामान और कारीगरों को उनकी कला का उचित पारिश्रमिक मिलता है। • सांस्कृतिक संरक्षण का प्रयास: सांगानेरी, बगरू, पिछवाई और मोलेला जैसी प्राचीन कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए प्रदर्शनी के साथ संगीत और भोजन का संयोजन किया गया है। यह व्यवस्था हर साल दर्शकों को पारंपरिक शिल्पकला की ओर आकर्षित करने में सहायक साबित होती है। सवाल-जवाब 1. जयपुर में यह दीवाली फ्ली मार्केट कहां आयोजित हो रहा है? यह मार्केट जयपुर स्थित कलानेरी आर्ट गैलरी में आयोजित किया गया है। 2. इस फ्ली मार्केट का समय क्या है और क्या इसके लिए कोई टिकट लगता है? यह बाजार प्रतिदिन शाम 5 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है और इसमें सभी के लिए प्रवेश पूरी तरह निशुल्क है। 3. इस बाजार में किस प्रकार के उत्पाद उपलब्ध हैं? यहां कपड़े, सजावटी सामान, पेंटिंग, मूर्तियां, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और पारंपरिक हस्तशिल्प जैसे उत्पाद उपलब्ध हैं। 4. फ्ली मार्केट में राजस्थान की कौन-कौन सी पारंपरिक कलाएं देखी जा सकती हैं? यहां जयपुर की ब्लू पॉटरी, सांगानेरी और बगरू ब्लॉक प्रिंट, पिछवाई तथा मोलेला मिट्टी कला के उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। 5. खरीदारी के अलावा यहां दर्शकों के लिए क्या सुविधाएं और गतिविधियां हैं? यहां गजल, लाइव म्यूजिक, अस्सी के दशक के बॉलीवुड गीत, लाइट शो, राजस्थानी व्यंजन और पार्किंग की व्यवस्था उपलब्ध है। https://trendkia.com/rajasthan/gulabi-nagari-men-divali-phli-marketa-shuru-45-hunaramndon-ke-sngraha-aura-sanskritika-shama-ka-bina-tikata-len-annda-51241 TrendKia — Har trend, sabse pehle.