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  "type": "article",
  "title": "हाड़ौती के जंगलों में भेड़ियों का कुनबा बढ़ाने की तैयारी, 800 हेक्टेयर में बनेगा नया आशियाना",
  "summary": "राजस्थान में भेड़ियों की घटती तादाद को संभालने के लिए वन विभाग ने हाड़ौती संभाग में बड़ा संरक्षण अभियान शुरू किया है, जिसके तहत 800 हेक्टेयर जंगल सुरक्षित किया जाएगा.",
  "content": "राजस्थान के जंगलों में भेड़ियों के संरक्षण और उनकी घटती आबादी को फिर से बढ़ाने के लिए वन विभाग ने एक व्यापक कार्ययोजना पर काम शुरू किया है. इस बड़े अभियान का मुख्य केंद्र हाड़ौती संभाग के वन क्षेत्र और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व को बनाया गया है. इसके अलावा मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में भेड़ियों की वास्तविक तादाद, उनके प्राकृतिक वास और रोजमर्रा की गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन करने के लिए एक विस्तृत सर्वे शुरू किया गया है, ताकि वन्यजीवों के इस महत्वपूर्ण हिस्से को नया जीवन दिया जा सके.\n\nजनभागीदारी और डिजिटल फॉर्म से तैयार होगा सुरक्षित कॉरिडोर\nइस पूरे संरक्षण अभियान में वन विभाग ने स्थानीय समुदायों और आम लोगों की सक्रिय भागीदारी पर खास ध्यान दिया है. अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के लिए ग्रामीणों, वन्यजीव प्रेमियों, शोधकर्ताओं और फोटोग्राफरों को सीधे तौर पर शामिल किया जा रहा है. भेड़ियों की सटीक लोकेशन और गतिविधियों की जानकारी जुटाने के लिए विभाग ने एक विशेष गूगल फॉर्म भी उपलब्ध कराया है. जंगल या उसके आसपास किसी भी हिस्से में भेड़िया नजर आने पर कोई भी व्यक्ति उस फॉर्म के माध्यम से विभाग को तुरंत सूचना दे सकता है. कोटा संभाग का वन अमला इस डिजिटल डेटा का विश्लेषण करके भेड़ियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए मजबूत कॉरिडोर विकसित करेगा.\n\nपंद्रह वर्षों में आबादी का बड़ा उतार-चढ़ाव\nप्रदेश में भेड़ियों की संख्या पिछले डेढ़ दशक में लगातार अस्थिर रही है. आंकड़ों के अनुसार साल 2010 में राजस्थान भर में लगभग 1,289 भेड़िये दर्ज थे, लेकिन अगले दस वर्षों में यह संख्या तेजी से गिरकर साल 2020 में केवल 682 रह गई. इसके बाद गिरावट का सिलसिला जारी रहा और साल 2022 की गणना में यह आंकड़ा सिमटकर 532 पर आ गया. हालांकि, साल 2024 की वन्यजीव गणना में कुछ सकारात्मक संकेत दिखे, जब प्रदेश में भेड़ियों की कुल संख्या बढ़कर 771 दर्ज की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हाड़ौती के प्राकृतिक आवासों में सख्त निगरानी और अनुकूल माहौल उपलब्ध कराया जाए, तो इनकी आबादी में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है.\n\nउपरमाल पठार पर 800 हेक्टेयर का सेफ जोन और पर्यटन\nरामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले भीमझरी और बांका-गोपालपुरा बफर क्षेत्रों में पिछले दो वर्षों से भेड़िया संरक्षण से जुड़ी शुरुआती गतिविधियां चल रही थीं. अब इस काम को बड़ा विस्तार देते हुए गोपालपुरा रेंज के उपरमाल पठारी इलाके में करीब 800 हेक्टेयर वन क्षेत्र को भेड़ियों और भालुओं के लिए पूर्ण सुरक्षित प्राकृतिक ठिकाने के रूप में तैयार किया जा रहा है. इस पूरे इलाके की जीपीएस मैपिंग की जा रही है और साथ ही पर्यावरण अनुकूल इको-टूरिज्म की संभावनाओं को भी तलाशा जा रहा है, ताकि वन्यजीवों की मुकम्मल सुरक्षा के साथ स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल सकें.\n\nइसका आप पर असर\nइस संरक्षण परियोजना से वन्यजीव आवास सुरक्षित होने के साथ क्षेत्रीय स्तर पर प्रकृति पर्यटन और ग्रामीण आजीविका के नए रास्ते खुलेंगे.\n\n• राजस्थान में: राज्य में वन्यजीव संतुलन को मजबूत करने के लिए 800 हेक्टेयर क्षेत्र सुरक्षित किया जा रहा है. इससे लुप्तप्राय हो रहे भेड़ियों की आबादी को स्थिर करने में मदद मिलेगी.\n• हाड़ौती और बूंदी में: स्थानीय ग्रामीणों और गाइडों को इको-टूरिज्म गतिविधियों के जरिए रोजगार के सीधे मौके मिलेंगे. इसके अलावा सुरक्षित कॉरिडोर बनने से मानव-वन्यजीव टकराव में कमी आएगी.\n• पर्यटकों और शोधकर्ताओं के लिए: जंगल में निगरानी और मैपिंग बढ़ने से वन्यजीव अध्ययन के बेहतर अवसर बनेंगे. शोधकर्ता और आगंतुक तय नियमों के तहत इस नए प्राकृतिक क्षेत्र का अनुभव कर सकेंगे.\n• आम नागरिकों के लिए: वन्यजीव देखने पर सीधे गूगल फॉर्म से सूचना देने की सुविधा दी गई है. आम लोग संरक्षण कार्यों में सक्रिय भागीदार बनकर प्रशासन का सहयोग कर सकते हैं.\n\nऐसा क्यों हुआ\nराजस्थान में भेड़ियों की तादाद में आई तेज गिरावट और प्राकृतिक पर्यावास के सिकुड़ने की वजह से वन विभाग को यह विशेष संरक्षण अभियान शुरू करना पड़ा है.\n\n• आबादी में भारी गिरावट: राज्य में 2010 से 2022 के बीच भेड़ियों की संख्या 1,289 से घटकर सीधे 532 पर आ गई थी. इस गंभीर कमी को थामने के लिए दीर्घकालिक सुरक्षात्मक कदमों की जरूरत महसूस की गई.\n• आवास और कॉरिडोर की कमी: इंसानी दखल और बफर इलाकों में दबाव के कारण भेड़ियों के सुरक्षित आवागमन के रास्ते प्रभावित हुए थे. रामगढ़ विषधारी और मुकुंदरा हिल्स के आसपास प्राकृतिक ठिकाने तय करना अनिवार्य हो गया था.\n• जनसहयोग की आवश्यकता: स्थानीय लोगों के सहयोग के बिना वन्यजीवों की सटीक निगरानी संभव नहीं थी. इसलिए गूगल फॉर्म और जनभागीदारी मॉडल को अभियान का मुख्य आधार बनाया गया.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राजस्थान में भेड़िया संरक्षण अभियान कहां शुरू किया गया है?\nयह अभियान हाड़ौती संभाग के जंगलों, रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व और मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के आसपास के इलाकों में शुरू किया गया है.\n\n2. भेड़ियों और भालुओं के लिए कितने क्षेत्र में सेफ जोन बनाया जा रहा है?\nगोपालपुरा रेंज के तहत उपरमाल के पठारी इलाके में लगभग 800 हेक्टेयर जंगल को सुरक्षित प्राकृतिक आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है.\n\n3. आम लोग भेड़ियों की सूचना वन विभाग को कैसे दे सकते हैं?\nवन विभाग ने एक विशेष गूगल फॉर्म जारी किया है, जिसके जरिए भेड़िया दिखने पर सटीक जानकारी सीधे विभाग तक पहुंचाई जा सकती है.\n\n4. राजस्थान में साल 2024 की गणना में कितने भेड़िये दर्ज किए गए?\nसाल 2024 की वन्यजीव गणना में राज्य भर में 771 भेड़िये दर्ज किए गए थे.\n\n5. साल 2010 से 2022 के दौरान भेड़ियों की संख्या में क्या बदलाव आया?\nसाल 2010 में भेड़ियों की संख्या 1,289 थी, जो 2020 में घटकर 682 और 2022 में गिरकर 532 रह गई थी.",
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  "publishedAt": "2026-11-02",
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  "whyItHappened": "राजस्थान में भेड़ियों की तादाद में आई तेज गिरावट और प्राकृतिक पर्यावास के सिकुड़ने की वजह से वन विभाग को यह विशेष संरक्षण अभियान शुरू करना पड़ा है.\n\n• आबादी में भारी गिरावट: राज्य में 2010 से 2022 के बीच भेड़ियों की संख्या 1,289 से घटकर सीधे 532 पर आ गई थी. इस गंभीर कमी को थामने के लिए दीर्घकालिक सुरक्षात्मक कदमों की जरूरत महसूस की गई.\n• आवास और कॉरिडोर की कमी: इंसानी दखल और बफर इलाकों में दबाव के कारण भेड़ियों के सुरक्षित आवागमन के रास्ते प्रभावित हुए थे. रामगढ़ विषधारी और मुकुंदरा हिल्स के आसपास प्राकृतिक ठिकाने तय करना अनिवार्य हो गया था.\n• जनसहयोग की आवश्यकता: स्थानीय लोगों के सहयोग के बिना वन्यजीवों की सटीक निगरानी संभव नहीं थी. इसलिए गूगल फॉर्म और जनभागीदारी मॉडल को अभियान का मुख्य आधार बनाया गया.",
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