हनुमानगढ़ फर्जी पट्टा प्रकरण में निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल को अदालत ने भेजा जेल, नहीं बढ़ी रिमांड हनुमानगढ़ में 2003 के फर्जी पट्टा मामले में चार दिन की पुलिस हिरासत खत्म होने के बाद सीजेएम कोर्ट ने निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में सरकारी भूमि से जुड़े दो दशक पुराने फर्जी पट्टा मामले में निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। चार दिनों की पुलिस रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद अपराध जांच विभाग की अपराध शाखा (सीआईडी-सीबी) ने उन्हें शुक्रवार को अदालत में पेश किया। जांच एजेंसी ने पूछताछ का दायरा बढ़ाने के लिए अदालत से अतिरिक्त रिमांड की मांग की थी, लेकिन हनुमानगढ़ की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत ने इस अर्जी को खारिज करते हुए विधायक को सीधे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आदेश दे दिया। चार दिन की रिमांड पूरी होने के बाद कानूनी प्रक्रिया फर्जी पट्टा मामले में सीआईडी-सीबी द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद गणेशराज बंसल को चार दिनों के लिए पुलिस हिरासत में सौंपा गया था। रिमांड अवधि पूरी होने के उपरांत शुक्रवार की सुबह जांच दल उन्हें लेकर कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने निकला। अदालत में पेशी की कड़ी में सुबह करीब छह बजे उन्हें संगरिया की एमजेएम अदालत ले जाया गया था। वहां आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी किए जाने के बाद जांच दल विधायक को कुछ समय के लिए संगरिया थाने लेकर पहुंचा। इसके पश्चात उन्हें हनुमानगढ़ की सीजेएम अदालत में प्रस्तुत किया गया, जहां एजेंसी की आगे की रिमांड अर्जी नामंजूर हो गई और उन्हें जेल का रास्ता देखना पड़ा। सीआईडी-सीबी की अतिरिक्त हिरासत की अर्जी नामंजूर सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी सीआईडी-सीबी ने तर्क दिया कि मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल और दस्तावेजों के सत्यापन के लिए विधायक से और पूछताछ की दरकार है। इसी आधार पर रिमांड अवधि में विस्तार की गुहार लगाई गई। हालांकि अदालत ने जांच पक्ष की दलीलों को पर्याप्त नहीं माना और आगे की पुलिस हिरासत देने से साफ इनकार कर दिया। अदालत के इस निर्णय के साथ ही चार दिनों तक चली पुलिस पूछताछ का दौर खत्म हो गया और अब विधायक को न्यायिक अभिरक्षा में रहना होगा। दूसरी तरफ, जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि प्रकरण में कानूनी अनुसंधान का कार्य निरंतर जारी रहेगा। साल 2003 के फर्जी पट्टा प्रकरण की पृष्ठभूमि यह पूरा कानूनी विवाद वर्ष 2003 का है, जो करीब तेईस साल पुराना बताया जा रहा है। मामले के मुख्य आरोपों के अनुसार सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से पट्टे जारी किए गए और प्रशासनिक नियमों की अनदेखी कर गंभीर अनियमितताएं बरती गईं। इस पुराने प्रकरण की विस्तृत छानबीन सीआईडी-सीबी को सौंपी गई थी। जांच के दौरान विधायक गणेशराज बंसल की संलिप्तता पाए जाने पर उन्हें हिरासत में लिया गया था। इस प्रकरण में केवल विधायक ही नामजद नहीं हैं, बल्कि उनकी पत्नी संतोष बंसल सहित कई अन्य व्यक्तियों के नाम भी जांच के दायरे में शामिल हैं। एजेंसी के अनुसार पूरे मामले में किस व्यक्ति की क्या भूमिका रही है, इसका अंतिम निर्धारण जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव हो सकेगा। नगर परिषद सभापति चुनाव और स्थानीय सियासी समीकरण गणेशराज बंसल की गिरफ्तारी की समयावधि ने स्थानीय राजनीति में भारी हलचल पैदा कर दी थी, क्योंकि यह कार्रवाई ठीक उस वक्त हुई जब हनुमानगढ़ नगर परिषद के सभापति पद का चुनाव होना तय था। नगर परिषद के सियासी ढांचे में विधायक समर्थित निर्दलीय पार्षदों का दबदबा बेहद मजबूत माना जा रहा था। कुल 60 वार्डों वाले नगर निकाय में विधायक समर्थक 34 निर्दलीय पार्षदों ने जीत दर्ज की थी, जबकि भारतीय जनता पार्टी के 15 और कांग्रेस पार्टी के 10 पार्षद जीतकर आए थे। इतने बड़े बहुमत के बीच सभापति चुनाव की दहलीज पर विधायक की गिरफ्तारी से स्थानीय स्तर पर सियासी आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए थे। उस दौरान विधायक समर्थकों ने विरोध दर्ज कराते हुए प्रदर्शन भी किया था। अब अदालत द्वारा उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाने के फैसले के बाद क्षेत्र के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर चर्चाएं गरमा गई हैं। फिलहाल गणेशराज बंसल जेल में रहेंगे और जांच एजेंसी दस्तावेजों तथा तथ्यों के आधार पर अपनी आगामी कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाएगी। इसका आप पर असर इस अदालती फैसले और विधायक के जेल जाने से हनुमानगढ़ की स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। • भारत में: जन प्रतिनिधियों से जुड़े पुराने भ्रष्टाचार और जमीन घोटालों के मामलों में त्वरित जांच का संदेश जाता है। इससे यह साफ होता है कि पुराने मामलों में भी कानूनी जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता। • हनुमानगढ़ में: नगर परिषद के भावी निर्णयों और विकास कार्यों में स्थानीय शक्ति संतुलन पर असर पड़ेगा। विधायक के जेल में रहने के कारण उनके समर्थक पार्षदों और स्थानीय राजनीति की दिशा प्रभावित हो सकती है। • प्रशासनिक मामलों में: सरकारी जमीन के पट्टों और पुराने राजस्व दस्तावेजों की गहन जांच की प्रक्रिया तेज होगी। जिन लोगों के पास पुराने पट्टे हैं, वे अपने दस्तावेजों की वैधता को लेकर सतर्क रहेंगे। • आम नागरिकों के लिए: क्षेत्र की जनसमस्याओं को लेकर प्रशासनिक पैरवी कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती है। स्थानीय लोग अब अपने जनहित के कार्यों के लिए नगर परिषद और प्रशासन के रुख पर निर्भर रहेंगे। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम तेईस साल पुराने जमीन आवंटन मामले में जांच एजेंसी द्वारा की गई कानूनी पड़ताल और अदालत में पेशी के बाद सामने आया है। • फर्जी पट्टों के आरोप: साल 2003 में सरकारी जमीन पर गैरकानूनी ढंग से पट्टे जारी करने और प्रशासनिक नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे थे। इसी मामले की विस्तृत जांच सीआईडी-सीबी द्वारा की जा रही है। • रिमांड अवधि की समाप्ति: गिरफ्तारी के बाद विधायक को चार दिन की पुलिस हिरासत में सौंपा गया था। रिमांड अवधि पूरी होने पर उन्हें नियमानुसार अदालत में पेश किया गया। • अदालत द्वारा रिमांड से इनकार: जांच एजेंसी ने आगे की पूछताछ के लिए अतिरिक्त पुलिस हिरासत मांगी थी। अदालत ने एजेंसी के तर्कों को अपर्याप्त मानते हुए आगे की पुलिस रिमांड खारिज कर न्यायिक हिरासत में भेजने का निर्णय लिया। • पारिवारिक और अन्य संलिप्तता: जांच एजेंसी के रिकॉर्ड में विधायक के अलावा उनकी पत्नी संतोष बंसल और अन्य लोगों के नाम भी शामिल हैं। मामले के सभी पहलुओं और भूमिकाओं का निर्धारण करने के लिए जांच अभी जारी है। सवाल-जवाब 1. विधायक गणेशराज बंसल को अदालत ने किस मामले में जेल भेजा है? उन्हें साल 2003 से जुड़े सरकारी जमीन के कथित फर्जी पट्टा मामले में चार दिन की रिमांड पूरी होने के बाद न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है। 2. इस मामले की जांच कौन सी एजेंसी कर रही है? इस प्रकरण की जांच राजस्थान पुलिस की सीआईडी-सीबी शाखा कर रही है। 3. क्या अदालत ने सीआईडी-सीबी की रिमांड बढ़ाने की मांग स्वीकार की? नहीं, हनुमानगढ़ की सीजेएम अदालत ने जांच एजेंसी की आगे की रिमांड अर्जी को नामंजूर कर दिया। 4. इस मामले में विधायक के अलावा और किनके नाम सामने आए हैं? जांच के दायरे में विधायक गणेशराज बंसल के अलावा उनकी पत्नी संतोष बंसल और अन्य लोगों के नाम भी शामिल हैं। 5. हनुमानगढ़ नगर परिषद में विधायक का राजनीतिक प्रभाव कैसा था? नगर परिषद के 60 वार्डों में से विधायक समर्थित 34 निर्दलीय पार्षदों ने जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा के 15 और कांग्रेस के 10 पार्षद थे। https://trendkia.com/rajasthan/hanumanagarha-pharji-patta-prakarana-men-nirdaliya-vidhayaka-ganeshraaj-bansal-ko-adalata-ne-bheja-jela-nahin-barhi-rimanda-38649 TrendKia — Har trend, sabse pehle.