# हरियाणा की रेणु हरिवंशी जमीन पर लेटकर तय कर रही हैं खाटूश्यामजी की 273 किमी दूरी

> हरियाणा के झज्जर की रहने वाली रेणु हरिवंशी खाटूश्यामजी तक 273 किलोमीटर की कठिन दंडवत यात्रा कर रही हैं। बिना गद्दे के जमीन पर लेटकर आगे बढ़ रहीं रेणु ने साल 2018 से अन्न छोड़ रखा है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/haryana-ki-renu-harivanshi-jamina-para-letakara-taya-kara-rahi-hain-khatu-shyam-ji-ki-273-kimi-duri-41690 · **Language:** Hindi
**Tags:** रेणु हरिवंशी, खाटूश्यामजी, दंडवत यात्रा, झज्जर, सीकर, सालासर बालाजी

आस्था और कठिन तपस्या का एक असाधारण रूप राजस्थान की सड़कों पर दिखाई दे रहा है, जहां हरियाणा के झज्जर जिले के सुबाणा गांव की निवासी रेणु हरिवंशी खाटूश्यामजी के दरबार की ओर दंडवत आगे बढ़ रही हैं। सड़क की तपिश, घुटनों की असहनीय पीड़ा और शारीरिक थकान के बावजूद उनके कदमों का यह सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। आम पैदल चलने के उलट, वह पूरे शरीर को सड़क पर दंडवत प्रणाम करते हुए एक-एक कदम आगे बढ़ा रही हैं। उनका मुख्य ध्येय सीकर जिले में स्थित प्रसिद्ध धाम खाटूश्यामजी पहुंचकर बाबा श्याम के पावन चरणों में माथा टेकना है। इस कठिन साधना की शुरुआत 5 जुलाई को हुई थी, जिसमें उनकी सहायता और सुरक्षा के लिए लगभग 15 लोग साथ चल रहे हैं। रेणु ने इस बार 273 किलोमीटर की कुल दूरी बिना किसी गद्दे का सहारा लिए सीधे जमीन पर दंडवत करते हुए पूरी करने का कठोर संकल्प लिया है।

## साल 2023 में 67 दिनों के भीतर तय किया था 237 किलोमीटर का सफर
यह पहला अवसर नहीं है जब रेणु इस तरह के दुर्गम मार्ग पर निकली हैं। इससे पहले वर्ष 2023 में भी उन्होंने खाटूश्यामजी के लिए अपनी पहली दंडवत यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न की थी। उस समय उन्होंने 237 किलोमीटर की लंबी दूरी 67 दिनों में जमीन पर दंडवत लेटते हुए पूरी की थी। उस यात्रा में भी उन्होंने अपने शरीर को विश्राम या राहत देने के लिए किसी गद्दे अथवा चटाई का प्रयोग नहीं किया था। अब दूसरी बार वह उसी भक्ति भाव और कठिन प्रण के साथ इस बार 273 किलोमीटर के लंबे मार्ग पर निरंतर बढ़ रही हैं। उनके साथ करीब 15 लोग सहयोगी के रूप में पूरे रास्ते उनकी व्यवस्था और देखरेख में जुटे हुए हैं।

## नौ साल से अन्न का त्याग और सेवा को समर्पित जीवन
धार्मिक आस्था की राह पूरी तरह अपनाने से पहले रेणु हरिवंशी स्वास्थ्य क्षेत्र में काम कर रही थीं। वह गुरुग्राम में एएनएम (ऑक्सिलरी नर्स मिडवाइफ) के पद पर कार्यरत थीं, लेकिन वर्ष 2018 में उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी। उनके पति सिद्धार्थ मल्हान एक सहकारी बैंक में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं। नौकरी छोड़ने के साथ ही रेणु ने वर्ष 2018 से अन्न का पूरी तरह त्याग कर दिया था। तब से वह केवल नारियल पानी का सेवन करके जीवन यापन कर रही हैं। लगभग नौ साल से उन्होंने अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं किया है। सामान्य सांसारिक और पारिवारिक सुख-सुविधाओं को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने लोक सेवा, धार्मिक संकल्प और ईश्वर भक्ति को ही अपनी जीवनचर्या बना लिया है।

## जनकल्याण, सनातन धर्म और गौ रक्षा का संकल्प
रेणु का कहना है कि उनकी इस यात्रा का मकसद केवल मंदिर जाकर दर्शन प्राप्त करना भर नहीं है, बल्कि वह इसके जरिए समाज में बड़ा संदेश देना चाहती हैं। वह जनसाधारण को जनकल्याण और गौ माता के संरक्षण के प्रति जागरूक करना चाहती हैं। उनका एक प्रमुख उद्देश्य गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने के लिए व्यापक जनचेतना जगाना भी है। इसके साथ ही वह सनातन धर्म के मूल्यों और परंपराओं के प्रति लोगों को जागरूक करने की लगातार अपील कर रही हैं।

## श्रीमाधोपुर पहुंचने पर स्थानीय नागरिकों ने किया अभिनंदन
अपनी दंडवत यात्रा के क्रम में देर शाम जब रेणु श्रीमाधोपुर बाईपास मार्ग पर पहुंचीं, तो वहां पहले से मौजूद स्थानीय नागरिकों और विभिन्न संस्थाओं ने उनका आत्मीय स्वागत किया। श्री श्याम नवयुवक मंडल और क्षेत्र के अनेक सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उनका अभिनंदन और सत्कार किया। इस सम्मान के दौरान कुछ पलों के लिए रेणु के कदम ठहरे, उन्होंने लोगों से भेंट की और फिर बिना समय गंवाए जमीन पर दंडवत करते हुए अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान कर दिया।

## नवरात्र तक खाटू धाम और उसके बाद सालासर की पदयात्रा का लक्ष्य
इस पूरी धार्मिक साधना में रेणु के पति सिद्धार्थ मल्हान भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं और उनके साथ यात्रा की व्यवस्थाओं में लगे हैं। रेणु को विश्वास है कि वह नवरात्रों के पावन पर्व तक खाटूश्यामजी पहुंच जाएंगी। खाटूश्यामजी में बाबा श्याम के विग्रह के दर्शन करने और शीश नवाने के बाद उनका संकल्प यहीं समाप्त नहीं होगा। वहां से वह सालासर बालाजी धाम के लिए पदयात्रा शुरू करेंगी। रेणु के लिए यह सफर केवल 273 किलोमीटर का फासला तय करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके लंबे साधना पथ का विस्तार है। इससे पहले वह धार्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण ब्रज चौरासी कोस की चार पैदल परिक्रमाएं भी पूरी कर चुकी हैं।

## इसका आप पर असर
इस कठिन यात्रा से आम श्रद्धालुओं और यात्रा मार्ग के स्थानीय नागरिकों पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

- **भारत में:** यह यात्रा आस्था और असाधारण संकल्प का उदाहरण पेश करती है। देश भर के श्याम भक्तों को इससे प्रेरणा मिलती है और वे धार्मिक यात्राओं व गौ संरक्षण के प्रति जागरूक होते हैं।
- **हरियाणा और राजस्थान में:** हरियाणा के झज्जर से राजस्थान के सीकर और श्रीमाधोपुर मार्ग पर स्थानीय लोग इस यात्रा का स्वागत कर रहे हैं। मार्ग से गुजरने वाले श्रद्धालुओं और राहगीरों को सड़क पर यात्रा दल के चलते सावधानी से वाहन चलाने की आवश्यकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
रेणु हरिवंशी की यह दंडवत यात्रा गहरी धार्मिक आस्था और सामाजिक संकल्पों को पूरा करने के उद्देश्य से की जा रही है।

- **बाबा श्याम के प्रति आस्था:** मुख्य रूप से यह यात्रा खाटूश्यामजी मंदिर में बाबा श्याम के दरबार में दर्शन और नमन करने के लिए शुरू की गई है। वह कठिन शारीरिक तप के माध्यम से अपनी भक्ति व्यक्त कर रही हैं।
- **गौ संरक्षण और राष्ट्र माता का दर्जा:** रेणु समाज में गौ माता की रक्षा और उन्हें राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर जागरूकता फैलाना चाहती हैं। इसके साथ ही वह सनातन धर्म और जनकल्याण के संदेश का प्रसार कर रही हैं।
- **पूर्व संकल्पों की निरंतरता:** वह वर्ष 2023 में 237 किमी की दंडवत यात्रा और ब्रज चौरासी कोस की चार पदयात्राएं पहले भी कर चुकी हैं। इसी क्रम में उन्होंने इस वर्ष 273 किमी की यात्रा पूरी करने का नया संकल्प लिया।

## सवाल-जवाब

### 1. रेणु हरिवंशी कहां की रहने वाली हैं?
रेणु हरिवंशी हरियाणा के झज्जर जिले के सुबाणा गांव की निवासी हैं।

### 2. वह कितनी दूरी की दंडवत यात्रा कर रही हैं?
वह झज्जर से खाटूश्यामजी तक करीब 273 किलोमीटर की दूरी बिना गद्दे के दंडवत करते हुए तय कर रही हैं।

### 3. रेणु ने अपनी यात्रा कब शुरू की थी और कब तक पहुंचने की उम्मीद है?
उन्होंने अपनी यात्रा 5 जुलाई को शुरू की थी और उन्हें नवरात्रों तक खाटूश्यामजी पहुंचने की उम्मीद है।

### 4. क्या रेणु ने पहले भी ऐसी कोई यात्रा की है?
हां, वर्ष 2023 में उन्होंने 237 किलोमीटर की दूरी 67 दिनों में दंडवत करते हुए पूरी की थी और वह चार बार ब्रज चौरासी कोस की पदयात्रा भी कर चुकी हैं।

### 5. रेणु के खान-पान और पूर्व पेशे के बारे में क्या जानकारी है?
वह गुरुग्राम में एएनएम थीं जिन्होंने 2018 में नौकरी छोड़ दी थी, और वह करीब नौ साल से अन्न छोड़कर केवल नारियल पानी पर रह रही हैं।

### 6. खाटूश्यामजी पहुंचने के बाद उनकी क्या योजना है?
खाटूश्यामजी में बाबा श्याम के दर्शन करने के बाद वह वहां से सालासर के लिए पदयात्रा करेंगी।

## प्रेरणा और सबक
रेणु हरिवंशी का यह सफर इच्छाशक्ति, सादगी और निस्वार्थ समर्पण की अनूठी मिसाल पेश करता है।

- **दृढ़ संकल्प की शक्ति:** कठिन शारीरिक दर्द और लंबी दूरी के बावजूद लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ते रहना सिखाता है कि मानसिक दृढ़ता किसी भी बाधा को पार कर सकती है।
- **सादगी और त्याग का महत्व:** भौतिक सुखों और अन्न का त्याग कर केवल नारियल पानी पर जीवन जीना दर्शाता है कि न्यूनतम आवश्यकताओं में भी उच्च संकल्प साधा जा सकता है।
- **व्यक्तिगत साधना को व्यापक उद्देश्य से जोड़ना:** केवल निजी प्रार्थना तक सीमित न रहकर गौ रक्षा और जनकल्याण जैसे सामाजिक विषयों को अपनी यात्रा का हिस्सा बनाना सिखाता है कि आस्था समाज सेवा से अलग नहीं है।

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