# हिण्डौन के दो मजदूर दुबई में फंसे, एजेंट पर धोखाधड़ी का आरोप लगाकर वतन वापसी की गुहार लगाई

> सैलरी और भत्तों के झूठे वादों के सहारे संयुक्त अरब अमीरात भेजे गए राजस्थान के दो मजदूरों ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सरकार से सुरक्षित वापसी की मांग की है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/hindaun-ke-do-majadura-dubai-men-phnse-ejenta-para-dhokhadhari-ka-aropa-lagakara-vatana-vapasi-ki-guhara-lagai-43977 · **Language:** Hindi
**Tags:** हिण्डौन सिटी, दुबई, मजदूर, एजेंट ठगी, यूएई, राजस्थान

राजस्थान के हिण्डौन इलाके से रोजी-रोटी कमाने संयुक्त अरब अमीरात गए दो कामगार गंभीर संकट में घिर गए हैं। बेहतर पगार, नियमित ओवरटाइम और सुरक्षित माहौल के वादे पर भरोसा करके खाड़ी देश पहुंचे इन मजदूरों को वहां पहुंचकर हकीकत बिल्कुल उलट मिली। तय समझौते के अनुसार कमाई न होने और काम के हालात बेहद कठिन होने के कारण अब दोनों ने अपनी पीड़ा साझा की है। सोशल मीडिया मंचों पर वीडियो साझा करते हुए दोनों युवकों ने भारत सरकार और स्थानीय प्रशासन से उन्हें सुरक्षित वतन वापस बुलाने की गुहार लगाई है, जबकि उनके गांव में रह रहे परिजन अनहोनी की आशंका से गहरे तनाव में हैं।

## सपनों के सौदे से दुबई के निर्माण स्थल तक का सफर
इस पूरे मामले में शिकार बने मजदूरों की पहचान कोटरा ढहर निवासी महेंद्र जाटव और संतोष नगर निवासी बब्लेश जाटव के रूप में सामने आई है। रोजगार की तलाश में बब्लेश 14 जुलाई 2026 को रवाना हुआ था, जबकि महेंद्र 23 जुलाई 2026 को यूएई पहुंचा। दोनों को खाड़ी देश भेजने की व्यवस्था वजीरपुर क्षेत्र के पावटा गांव के निवासी एजेंट प्रेम सिंह ने की थी। विदेश जाने के लिए बब्लेश ने एजेंट को 56,500 रुपए की रकम सौंपी थी। एजेंट ने उन्हें आश्वस्त किया था कि वहां उन्हें हर महीने 1,595 दिरहम का बुनियादी वेतन मिलेगा और ओवरटाइम के जरिए उनकी कुल आमदनी 42 से 50 हजार रुपए प्रति माह तक पहुंच जाएगी। इस संबंध में बाकायदा एक लिखित अनुबंध भी तैयार कराया गया था।

## वादे से आधी मजदूरी मिलने पर छोड़ना पड़ा काम
दुबई की धरती पर कदम रखने के बाद दोनों युवकों को सोनपुर इलाके में निर्माण कार्य से जुड़ी मजदूरी में झोंक दिया गया। काम शुरू करते ही बब्लेश को अहसास हुआ कि जो वादे भारत में किए गए थे, वे पूरी तरह छलावा थे। वहां उन्हें महज 20 से 25 हजार रुपए के बराबर राशि ही हाथ में दी जा रही थी, जो एजेंट द्वारा किए गए वादों से आधी से भी कम थी। अत्यंत कम पारिश्रमिक और प्रतिकूल कार्य परिस्थितियों से तंग आकर बब्लेश ने निर्माण स्थल पर काम करना बंद कर दिया और वह जल्द से जल्द स्वदेश लौटना चाहता है।

## बीमारी और वापसी के नाम पर एक लाख रुपए की अतिरिक्त ठगी
दूसरी ओर महेंद्र जाटव की परेशानी और भी विकट है। उसने इंटरनेट पर वीडियो संदेश प्रसारित कर बताया कि वह इस समय अस्वस्थ चल रहा है और परदेस में इलाज व देखभाल के बिना कठिन दौर से गुजर रहा है। अपनी बिगड़ती हालत को देखते हुए उसने घर लौटने की गुहार लगाई थी। भारत वापस लाने की व्यवस्था करने के एवज में एजेंट प्रेम सिंह ने उससे एक लाख रुपए अतिरिक्त ऐंठ लिए। एजेंट ने भरोसा दिया था कि 10 से 15 दिन के भीतर उसे टिकट दिलाकर भारत पहुंचा दिया जाएगा। इसके बावजूद समय बीत जाने पर एजेंट ने उसका फोन उठाना पूरी तरह बंद कर दिया।

## एजेंट और कंपनी ने तोड़ा संपर्क, परिजनों में गहराया रोष
मजदूरों का आरोप है कि दुबई की जिस कंपनी में उन्हें तैनात किया गया था, उसके स्थानीय प्रतिनिधियों और भारत स्थित एजेंट दोनों ने ही अब उनसे किनारा कर लिया है। फोन कॉल का जवाब न मिलने से दोनों कामगार वहां बेसहारा महसूस कर रहे हैं। इधर राजस्थान में उनके परिवारों की आर्थिक कमर पहले ही टूट चुकी है। विदेश भेजने के लिए कर्ज लेकर बड़ी रकम चुकाने वाले परिजनों के सामने अब आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। परिवारों ने पुलिस-प्रशासन से मांग की है कि धोखेबाज एजेंट के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और दुबई में लाचार पड़े दोनों श्रमिकों को तत्काल भारत वापस लाया जाए।

## इसका आप पर असर
खाड़ी देशों में रोजगार के नाम पर अवैध एजेंटों के झांसे में आने वाले कामगारों और उनके परिवारों के लिए यह घटना एक गंभीर चेतावनी है।

- **भारत में:** विदेश में नौकरी का प्रस्ताव स्वीकार करने से पहले सरकारी पोर्टल या अधिकृत भर्ती एजेंसियों से अनुबंध का सत्यापन अनिवार्य रूप से करवाएं। अनधिकृत एजेंटों को बिना वैध रसीद या सरकारी अनुमति के नकद भुगतान करने से भविष्य में कानूनी मदद पाना बेहद कठिन हो जाता है।
- **राजस्थान में:** ग्रामीण इलाकों में सक्रिय बिचौलियों के खिलाफ स्थानीय प्रशासन को शिकायत देकर सख्त जांच की मांग करें। पीड़ितों के परिवारों को तुरंत स्थानीय पुलिस और जिला कलेक्टर कार्यालय से संपर्क कर विदेश मंत्रालय के जरिए श्रमिकों की मदद सुनिश्चित करनी चाहिए।
- **मजदूरों और कामगारों के लिए:** वीजा की श्रेणी और कार्य अनुबंध की प्रति पर दिए गए वेतन और भत्तों की जांच रवाना होने से पहले अवश्य करें। यदि विदेशी मुद्रा में तय वेतन भारतीय रुपए में किए गए दावों से मेल नहीं खाता, तो यात्रा टाल देना ही समझदारी है।
- **प्रशासनिक स्तर पर:** संकट में फंसे कामगारों के रिश्तेदार भारतीय दूतावास के हेल्पलाइन नंबरों और ई-माइग्रेट व्यवस्था के जरिए सहायता की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। इससे विदेश में फंसे लोगों को आपातकालीन यात्रा दस्तावेज और राहत मिलने में तेजी आती है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह संकट अनधिकृत भर्ती एजेंट द्वारा किए गए फर्जी दावों और बिना सत्यापन के श्रमिकों को विदेश भेजने के चलते उत्पन्न हुआ है।

- **झूठे वेतन के वादे:** एजेंट ने कामगारों को 1,595 दिरहम मासिक वेतन और ओवरटाइम के जरिए 42 से 50 हजार रुपए कमाने का लालच दिया था, जबकि मौके पर उन्हें महज 20 से 25 हजार रुपए ही दिए जा रहे थे।
- **अनधिकृत एजेंटों का नेटवर्क:** ग्रामीण इलाकों में बिना कानूनी पंजीकरण के काम करने वाले बिचौलिए कानूनी औपचारिकताओं की अनदेखी कर मजदूरों को असुरक्षित माहौल में धकेल देते हैं।
- **वापसी के नाम पर उगाही:** श्रमिक के अस्वस्थ होने के बावजूद एजेंट ने सुरक्षित वापसी का झांसा देकर एक लाख रुपए और ऐंठ लिए और बाद में संपर्क तोड़ दिया।
- **कंपनी और बिचौलियों की मिलीभगत:** निर्माण स्थल की नियोक्ता फर्म और भर्ती एजेंट के बीच तालमेल टूटने या मिलीभगत होने से मजदूरों का फोन उठाना बंद कर दिया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. दुबई में फंसे दोनों मजदूर किस क्षेत्र के निवासी हैं?
दोनों मजदूर राजस्थान के हिण्डौन क्षेत्र के रहने वाले हैं, जिनमें महेंद्र जाटव कोटरा ढहर के और बब्लेश जाटव संतोष नगर के निवासी हैं।

### 2. मजदूरों को विदेश भेजने वाले एजेंट का क्या नाम है?
उन्हें वजीरपुर क्षेत्र के पावटा गांव निवासी एजेंट प्रेम सिंह के जरिए विदेश भेजा गया था।

### 3. बब्लेश को विदेश भेजते समय क्या वेतन तय किया गया था?
एजेंट ने लगभग 1,595 दिरहम मासिक वेतन और ओवरटाइम दिलाने का भरोसा दिया था, जिससे 42 से 50 हजार रुपए मासिक आय की उम्मीद थी।

### 4. दुबई में निर्माण कार्य के दौरान मजदूरों को वास्तव में कितना वेतन मिल रहा था?
वहां पहुंचने के बाद बब्लेश को वादे के अनुसार वेतन नहीं मिला और केवल 20 से 25 हजार रुपए के बराबर राशि ही दी जा रही थी।

### 5. महेंद्र जाटव ने एजेंट को अतिरिक्त एक लाख रुपए क्यों दिए थे?
महेंद्र दुबई में बीमार हो गया था और उसने भारत वापस लौटने के टिकट व व्यवस्था के लिए एजेंट प्रेम सिंह को एक लाख रुपए दिए थे।

### 6. मजदूरों और उनके परिजनों की सरकार से क्या मांग है?
मजदूरों और परिजनों ने सरकार व प्रशासन से एजेंट के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और दोनों श्रमिकों को सुरक्षित भारत वापस लाने की मांग की है।

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