# जयपुर की 150 साल पुरानी सैलून दुकान, जहां कभी 1 पैसे में होती थी शेविंग और आज भी विरासत बचा रहे 70 साल के चंद्रशेखर

> जयपुर के गोपालजी के रास्ते में स्थित 'एक्सपर्ट हेयर ड्रेसर' नामक ऐतिहासिक दुकान करीब डेढ़ सदी पुरानी है। इसके 70 वर्षीय मालिक चंद्रशेखर आधुनिक सैलून की चमक-धमक और पारिवारिक विवादों के बीच अपने बुजुर्गों की इस अनमोल विरासत को अकेले जीवित रखे हुए हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/jaipur-ke-150-sala-purane-barber-shop-ki-kahani-jahan-chandrashekhar-snbhala-rahe-hain-apani-virasata-49660 · **Language:** Hindi
**Tags:** जयपुर, विरासत, ऐतिहासिक दुकान, सैलून, राजस्थान, पारंपरिक कारोबार

जयपुर अपनी अनूठी ऐतिहासिक पहचान और पारंपरिक बाजारों के लिए वैश्विक स्तर पर जाना जाता है। इस शहर के परकोटे के भीतर पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों ने अपने पैतृक कारोबार को संभालकर संजोया है। चाहे छोटा सा कार्यस्थल हो या बड़ा व्यावसायिक प्रतिष्ठान, जयपुर के निवासियों ने पुरानी तहजीब को आज भी जिंदा रखा है। चौड़ा रास्ता इलाके में गोपालजी के रास्ते के भीतर स्थित 'एक्सपर्ट हेयर ड्रेसर' ऐसी ही एक बेमिसाल जगह है। लगभग 150 साल पुरानी यह नाई की दुकान राजधानी के सबसे पुराने हेयर सैलून संस्थानों में शुमार की जाती है, जिसके भीतर कदम रखते ही बीता हुआ दौर आंखों के सामने ताजा हो जाता है।

## शुरुआती दौर और परिवार की पीढ़ियों का सफर
इस दुकान के मौजूदा 70 वर्षीय मालिक चंद्रशेखर ने बातचीत के दौरान साझा किया कि इस प्रतिष्ठान की नींव उनके जन्म से भी बहुत पहले उनके दादा रामसहाय ने रखी थी। उस शुरुआती दौर में यह छोटी सी जगह महज 1 रुपये प्रति महीने के किराए पर ली गई थी। उस वक्त ग्राहकों के बाल काटने और दाढ़ी बनाने का शुल्क 1 पैसे से भी काफी कम हुआ करता था। लंबे समय तक किराए के रूप में काम संचालित करने के बाद उनके दादाजी ने आखिरकार इस जगह का मालिकाना हक खरीद लिया था। उनके देहांत के बाद इस काम की कमान चंद्रशेखर के पिता बाल मुकुंद के हाथों में आई, जिन्होंने कई दशकों तक इस परंपरा को पूरी शिद्दत के साथ आगे बढ़ाया।

## आधुनिक दौर की चमक के बीच संघर्ष और पुरानी यादें
वक्त के साथ बदलते ट्रेंड्स और शहर में खुले आधुनिक एयर-कंडीशंड सैलून के कारण इस ऐतिहासिक दुकान की हालत अब काफी जर्जर हो चुकी है। दुकान की दीवारें पुरानी हो चुकी हैं और वहां रखा प्राचीन लकड़ी का फर्नीचर भी जगह-जगह से टूट चुका है। भले ही आज के दौर में चमचमाते मॉडर्न पार्लर्स के आगे यह दुकान सूनी सी लगती है, लेकिन एक ऐसा दौर भी था जब जयपुर के दिग्गज और प्रतिष्ठित लोग यहां बाल कटवाने व शेविंग करवाने के लिए कतारों में खड़े हुआ करते थे। आज की तारीख में यहां बमुश्किल रोजाना 2 से 4 ग्राहक ही आ पाते हैं, इसके बावजूद चंद्रशेखर हर सुबह पूरी निष्ठा, ऊर्जा और प्रसन्नता के साथ अपनी दुकान का शटर उठाते हैं।

## पारिवारिक मतभेद और विरासत को बचाने की जद्दोजहद
चंद्रशेखर बताते हैं कि आज की युवा पीढ़ी इस पुराने पारंपरिक काम में बिल्कुल भी रुचि नहीं रखती है। उनके परिवार के अन्य सदस्य इस ऐतिहासिक दुकान को सिर्फ एक प्रॉपर्टी या जमीन का टुकड़ा भर मानते हैं। कारोबार से नाममात्र की आमदनी होने के कारण इस संपत्ति को बेचने को लेकर उनके भाइयों के बीच काफी समय से मनमुटाव और विवाद चल रहा है। परिजन यही चाहते हैं कि इस घाटे में चल रहे काम को बंद कर दुकान बेच दी जाए, लेकिन चंद्रशेखर इसे अपने दादा और पिता की आखिरी निशानी के तौर पर देखते हैं। वह इस पुरानी दुकान को अपनी आने वाली पीढ़ियों के वास्ते एक धरोहर के रूप में बचाकर रखना चाहते हैं और इसी उम्मीद की डोर थामे हर रोज दुकान का दरवाजा खोलते हैं।

## इसका आप पर असर
यह खबर मुख्य रूप से पारंपरिक भारतीय पारिवारिक व्यवसायों, पुरानी शहरी विरासतों और आधुनिक युग में उनके सामने आ रहे अस्तित्व के संकट को दर्शाती है।

- **जयपुर में:** स्थानीय दुकानदारों और परकोटे के ऐतिहासिक व्यापारियों को आधुनिक मॉर्डन सैलून और मॉल संस्कृति से मिल रही कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ रहा है। इस दुकान के बहाने शहर की पुरानी संपत्तियों और पारिवारिक बटवारे के बीच पुश्तैनी काम को बचाने की चुनौती साफ दिखाई देती है।
- **व्यापार और परिवार स्तर पर:** कम आमदनी वाले पारंपरिक पारिवारिक व्यवसायों से नई पीढ़ी का मोहभंग होना और व्यावसायिक संपत्ति को लेकर होने वाले पारिवारिक विवाद आम होते जा रहे हैं। ऐसे मामलों में विरासत प्रेम और आर्थिक व्यावहारिकता के बीच संतुलन बिठाना परिवार के बुजुर्गों और संरक्षकों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह स्थिति आधुनिक जीवनशैली में बदलाव, नई पीढ़ी की प्राथमिकताओं और पारंपरिक शिल्पों व व्यवसायों की अर्थिक स्थिति में आई गिरावट का परिणाम है। समय के साथ लोगों के रहन-सहन और ग्रूमिंग के तरीकों में बड़ा बदलाव आया है, जिससे पुरानी दुकानों का ग्राहक वर्ग सिमट गया है।

- **आधुनिक प्रतिस्पर्धा:** बाजार में आधुनिक उपकरणों और एयर-कंडीशनर से लैस सैलून के आने से ग्राहक पुरानी दुकानों के बजाय नए विकल्पों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
- **आर्थिक तंगी:** दुकान से पर्याप्त कमाई न होने के कारण यह कारोबार वित्तीय रूप से घाटे का सौदा बन चुका है, जिससे परिवार के अन्य सदस्यों में इसे बेचने का दबाव बढ़ गया है।
- **पीढ़ीगत बदलाव:** आधुनिक शिक्षा और नौकरी के अवसरों की ओर आकर्षित होकर युवा पीढ़ी इस पारंपरिक और कम आय वाले काम से दूरी बना रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. इस ऐतिहासिक दुकान का नाम क्या है और यह कहां स्थित है?
इस दुकान का नाम 'एक्सपर्ट हेयर ड्रेसर' है और यह जयपुर के चौड़ा रास्ता स्थित गोपालजी के रास्ते में स्थित है।

### 2. इस दुकान की स्थापना किसने की थी?
इस दुकान की शुरुआत चंद्रशेखर के दादा रामसहाय ने की थी।

### 3. यह दुकान कितनी पुरानी है?
यह दुकान लगभग 150 साल पुरानी है और जयपुर की सबसे पुरानी सैलून दुकानों में गिनी जाती है।

### 4. शुरुआत में इस दुकान का किराया और शेविंग का शुल्क कितना था?
शुरुआत में इस दुकान का किराया महज 1 रुपये प्रति महीना था और कटिंग-शेविंग की कीमत 1 पैसे से भी कम थी।

### 5. वर्तमान में दुकान को कौन चला रहा है और रोजाना कितने ग्राहक आते हैं?
वर्तमान में 70 वर्षीय चंद्रशेखर इस दुकान को चला रहे हैं और यहां रोजाना केवल 2 से 4 ग्राहक ही आते हैं।

### 6. परिवार के अन्य सदस्य दुकान को लेकर क्या चाहते हैं?
परिवार के अन्य सदस्य इस दुकान से आमदनी न होने के कारण इसे एक संपत्ति के रूप में बेच देना चाहते हैं।

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