# जयपुर के मोतीडूंगरी में गणेश जन्मोत्सव पर बंटी 3500 किलो मेहंदी, विवाह की मनोकामना के साथ उमड़े हजारों श्रद्धालु

> जयपुर के प्रसिद्ध मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में सिंजारा पूजा पर अभिमंत्रित मेहंदी लेने के लिए हजारों युवाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सोजत और जयपुर से लाई गई 3500 किलो मेहंदी भक्तों में प्रसादी के रूप में वितरित की गई।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/jaipur-ke-moti-dungri-men-ganesha-janmotsava-para-bnti-3500-kilo-mehndi-vivaha-ki-manokamana-ke-satha-umare-hajaron-shraddhalu-32124 · **Language:** Hindi
**Tags:** मोतीडूंगरी गणेश मंदिर, जयपुर समाचार, गणेश चतुर्थी, सिंजारा मेहंदी, डंका चौथ

राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित प्रसिद्ध मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में गणेश जन्मोत्सव के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़ देखने को मिली। रविवार शाम को आयोजित विशेष सिंजारा पूजा के दौरान भगवान गणेश को अर्पित की गई प्रसादी मेहंदी प्राप्त करने के लिए हजारों की संख्या में भक्त मंदिर प्रांगण पहुंचे। घंटों लंबी कतारों में खड़े रहने वालों में बड़ी तादाद में अविवाहित युवक और युवतियां भी शामिल थीं, जो इस विशेष प्रसाद को पाने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।

## 200 साल पुरानी परंपरा और 3500 किलो मेहंदी
मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में सिंजारे के दिन भगवान गणेश को मेहंदी चढ़ाने और तत्पश्चात उसे भक्तों के बीच प्रसादी के रूप में बांटने की यह पावन परंपरा लगभग 200 वर्ष पुरानी मानी जाती है। मंदिर के जानकारों के अनुसार, लगभग 70 वर्ष पूर्व इस परंपरा की शुरुआत केवल सवा किलो मेहंदी अर्पित करने के साथ हुई थी। बीते दशकों में श्रद्धालुओं की अगाध श्रद्धा के चलते यह आयोजन विशाल रूप धारण कर चुका है।

इस वर्ष गणेश चतुर्थी उत्सव के लिए जयपुर और सोजत से विशेष रूप से लगभग 3500 किलोग्राम शुद्ध मेहंदी मंगवाई गई थी। विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न होने के बाद इस संपूर्ण मेहंदी को अभिमंत्रित कर मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं में वितरित किया गया।

## मनोकामना से जुड़ी मान्यता और ढूंढाड़ की लोक परंपरा
मोतीडूंगरी मंदिर का यह आयोजन विवाह संबंधी धार्मिक मान्यताओं के लिए बेहद प्रसिद्ध है। जनमानस में यह दृढ़ विश्वास है कि सिंजारे के शुभ दिन प्रथम पूज्य श्री गणेश के दर्शन करने और उनकी अभिमंत्रित प्रसादी मेहंदी प्राप्त करने से शीघ्र विवाह की मनोकामना पूर्ण होती है। इसी आस्था के वशीभूत होकर न केवल जयपुर, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों एवं शहरों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस विशेष प्रसाद को हासिल करने पहुंचे थे।

स्थानीय ढूंढाड़ क्षेत्र की लोक संस्कृति में इस पर्व को डंका चौथ के नाम से जाना जाता है। इस पारंपरिक रिवाज के तहत ननिहाल पक्ष से लड़के के लिए नए वस्त्र, तरह-तरह के मिष्ठान और मेहंदी भेजने की पुरानी परंपरा रही है। गणेश जन्मोत्सव के अवसर पर इसी सांस्कृतिक परंपरा का निर्वहन करते हुए सिंजारा पूजा का आयोजन गरिमामय ढंग से किया जाता है।

## भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और ऑनलाइन प्रसादी
श्रद्धालुओं की संभावित आवक को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन द्वारा मेहंदी वितरण के लिए पांच विशेष निकासी द्वार बनाए गए थे। हालांकि, आयोजन के दौरान उम्मीद से कहीं अधिक जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिससे मंदिर परिसर और उसके आसपास की सड़कों पर भारी भीड़ जमा हो गई। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने रविवार शाम से लेकर देर रात तक मोर्चा संभाला और भीड़ को संभाला।

अत्यधिक भीड़ के चलते परिसर में भगदड़ जैसी स्थिति बनने की आशंका भी जताई जा रही थी। घटनाक्रम के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नेटिजन्स द्वारा मंदिर परिसर की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्थाओं को लेकर व्यापक चर्चा की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि मंदिर प्रबंधन ने दूर-दराज के भक्तों की सुविधा के लिए इस बार कूरियर सेवा के जरिए अभिमंत्रित मेहंदी और भगवान को चढ़ाया गया मोदक प्रसाद ऑनलाइन घर भेजने का नया इंतजाम भी किया था। इसके बावजूद भौतिक रूप से मंदिर पहुंचकर प्रसाद प्राप्त करने वाले श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नजर नहीं आई।

## इसका आप पर असर
जयपुर स्थित मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में सिंजारा मेहंदी वितरण से श्रद्धालुओं की यात्रा, दर्शन और प्रसादी व्यवस्था सीधे प्रभावित हुई है।

- **भारत भर में:** देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं को मंदिर पहुंचने पर घंटों लंबी लाइनों का सामना करना पड़ा। भविष्य में ऐसे बड़े उत्सवों पर ऑनलाइन प्रसाद बुकिंग का लाभ उठाकर लंबी कतारों से बचा जा सकता है।
- **जयपुर में:** स्थानीय निवासियों और वाहन चालकों को रविवार शाम मंदिर क्षेत्र के आसपास यातायात जाम और भारी भीड़ का सामना करना पड़ा। आगंतुकों को सलाह दी जाती है कि वे मंदिर प्रशासन द्वारा शुरू की गई कूरियर सेवा के माध्यम से घर बैठे प्रसादी मोदक और मेहंदी प्राप्त कर सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
गणेश जन्मोत्सव के पावन अवसर पर मोतीडूंगरी मंदिर में 3500 किलो अभिमंत्रित मेहंदी वितरण और विवाह संबंधी धार्मिक मान्यताओं के चलते रविवार को रिकॉर्ड भीड़ उमड़ी।

- **सदियों पुरानी परंपरा:** 200 साल पुरानी सिंजारा परंपरा और अभिमंत्रित मेहंदी से शीघ्र विवाह की मनोकामना पूरी होने की अटूट मान्यता के कारण हजारों अविवाहित युवक-युवतियां मंदिर पहुंचे।
- **स्थानीय लोक संस्कृति:** ढूंढाड़ क्षेत्र में 'डंका चौथ' के अवसर पर ननिहाल से मेहंदी और कपड़े आने की सांस्कृतिक परंपरा ने भी श्रद्धालुओं के उत्साह को दोगुना किया।
- **अत्यधिक आवक:** मंदिर प्रशासन द्वारा 5 निकासी द्वार बनाने और ऑनलाइन कूरियर प्रसादी की व्यवस्था करने के बावजूद उम्मीद से अधिक लोग भौतिक रूप से दर्शन करने पहुंचे।

## सवाल-जवाब

### 1. मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में इस वर्ष कितनी मेहंदी बांटी गई?
इस वर्ष जयपुर और सोजत से मंगवाई गई लगभग 3500 किलोग्राम शुद्ध अभिमंत्रित मेहंदी श्रद्धालुओं में प्रसादी के रूप में बांटी गई।

### 2. सिंजारे की मेहंदी लेने के पीछे क्या धार्मिक मान्यता है?
मान्यता है कि सिंजारे पर गणेशजी के दर्शन करने और अभिमंत्रित मेहंदी प्राप्त करने से विवाह की मनोकामना शीघ्र पूरी होती है।

### 3. ढूंढाड़ क्षेत्र में इस परंपरा को किस नाम से जाना जाता है?
ढूंढाड़ की लोक परंपरा में इस पर्व को 'डंका चौथ' के नाम से जाना जाता है, जिसमें ननिहाल से मेहंदी और कपड़े भेजने का रिवाज है।

### 4. दूर-दराज के श्रद्धालुओं के लिए मंदिर प्रबंधन ने क्या सुविधा दी है?
मंदिर प्रबंधन ने ऑनलाइन माध्यम से अभिमंत्रित मेहंदी और मोदक प्रसाद कूरियर के जरिए भक्तों के घर भेजने का प्रबंध किया है।

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