# जयपुर के रामगंज बाजार की अनूठी दुकान, 4 पीढ़ियों से सहेज रही है 120 साल पुराना ग्रामोफोन का संगीत

> जयपुर के रामगंज बाजार में अब्दुल अजीज की दुकान में 120 साल पुरानी संगीत विरासत जीवित है, जहां 4 पीढ़ियों से दुर्लभ ग्रामोफोन, विनाइल रिकॉर्ड और पुरानी ऑडियो मशीनें सहेजी गई हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/jaipur-ke-ramganj-bazaar-ki-anuthi-dukana-4-pirhiyon-se-saheja-rahi-hai-120-sala-purana-gramophone-ka-sngita-32415 · **Language:** Hindi
**Tags:** जयपुर ग्रामोफोन दुकान, रामगंज बाजार जयपुर, अब्दुल अजीज ग्रामोफोन, विंटेज म्यूजिक रिकॉर्ड, एचएमवी ग्रामोफोन, राजस्थान पर्यटन धरोहर

डिजिटल युग और स्मार्टफोन के इस दौर में जहां संगीत सुनने के लिए केवल एक क्लिक की जरूरत होती है, वहीं राजस्थान की राजधानी जयपुर के ऐतिहासिक रामगंज बाजार में एक ऐसी पुरानी दुकान स्थित है जो इतिहास के पन्नों को आज भी तरोताजा रखती है। इस दुकान में लगभग 120 साल पुरानी संगीत विरासत को चार पीढ़ियों से बड़े जतन से सहेजा जा रहा है। यहां आज भी विंटेज ग्रामोफोन की सुरीली धुनें गूंजती हैं, जो लोगों को बीते दौर के सुनहरे दिनों की याद दिलाती हैं।

## चार पीढ़ियों से चला आ रहा है संगीत का यह अनूठा सफर
इस दुकान की कमान फिलहाल 75 वर्षीय अब्दुल अजीज के हाथों में है। इस ऐतिहासिक सफर की शुरुआत उनके दादा ने आज से करीब 120 वर्ष पहले की थी। तब से लेकर अब तक परिवार की चार लगातार पीढ़ियों ने इस काम को नहीं छोड़ा और पुरानी संगीत प्रणाली को जीवंत बनाए रखा। इस दुकान में विंटेज ग्रामोफोन, विनाइल रिकॉर्ड्स, टेप रिकॉर्डर और कैसेट समेत कई दुर्लभ एंटीक म्यूजिक मशीनों का बड़ा संग्रह मौजूद है। अब्दुल अजीज बताते हैं कि उनके पास 5 से 10 ऐसे ग्रामोफोन हैं जो बेहद दुर्लभ और ऐतिहासिक हैं, जिन्हें देखने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग जयपुर आते हैं।

## बिना बिजली के चाबी से बजने वाला जादुई संगीत उपकरण
आधुनिक दौर में जहां इंटरनेट और डिजिटल म्यूजिक का बोलबाला है, वहीं ग्रामोफोन अपने समय का सबसे लोकप्रिय साधन माना जाता था। लकड़ी या धातु के बॉक्सनुमा आकार में बनी इस मशीन को चलाने के लिए किसी भी तरह की बिजली की आवश्यकता नहीं होती थी। इसमें रिकॉर्ड रखकर चाबी (हैंडल) भरी जाती थी और फिर सुई के घर्षण से मधुर संगीत बजने लगता था। समय के साथ जैसे-जैसे नई तकनीकों का आविष्कार हुआ, ग्रामोफोन का चलन धीरे-धीरे कम होता चला गया। आज यह पारंपरिक मशीनें आम घरों से गायब होकर या तो संग्रहालयों का हिस्सा बन चुकी हैं या फिर एंटीक वस्तुओं के शौकीनों के पास ही मिलती हैं।

## रिक्का और एचएमवी जैसे दिग्गजों के दुर्लभ मॉडल का खजाना
इस दुकान की सबसे बड़ी खासियत यहां मौजूद अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय कंपनियों के पुराने ग्रामोफोन हैं। अब्दुल अजीज के अनुसार भारत में ग्रामोफोन की शुरुआत विदेशी कंपनियों के आगमन से हुई थी। उनके कलेक्शन में 'रिक्का' और 'एचएमवी' (हिज मास्टर्स वॉइस) जैसी मशहूर विंटेज कंपनियों के ग्रामोफोन सुरक्षित रखे गए हैं। इनमें से कुछ मॉडल आकार में इतने छोटे और पोर्टेबल हैं कि उन्हें आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता था, जबकि कुछ इतने बड़े और भव्य हैं कि वे किसी बड़ी अलमारी की तरह दिखाई देते हैं। इसके अलावा यहां दशकों पुराने संगीत के दुर्लभ रिकॉर्ड और उपकरण भी संभालकर रखे गए हैं।

## संगीत प्रेमियों और बॉलीवुड का रहा है इस दुकान से गहरा नाता
यद्यपि आज की युवा पीढ़ी ग्रामोफोन और विनाइल रिकॉर्ड की कार्यप्रणाली से ज्यादा परिचित नहीं है, फिर भी पुराने गानों और एंटीक वस्तुओं के शौकीन आज भी इस दुकान पर खिंचे चले आते हैं। लोग यहां पुराने गानों की दुर्लभ रिकॉर्डिंग और कैसेट की खोज में पहुंचते हैं। अब्दुल अजीज याद करते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब बॉलीवुड और फिल्म जगत से जुड़े लोग भी पुरानी रिकॉर्डिंग कैसेट और म्यूजिक रिकॉर्ड खरीदने के लिए विशेष रूप से उनकी दुकान पर आते थे। जयपुर की यह दुकान केवल एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं है, बल्कि यह संगीत के क्रमिक विकास और उसके अनमोल इतिहास का एक जीवंत प्रतीक है।

## इसका आप पर असर
जयपुर के इस ऐतिहासिक स्टोर की कहानी विंटेज वस्तुओं के शौकीनों और पर्यटकों के लिए बेहद उपयोगी जानकारी प्रदान करती है।

- **भारत में:** देश भर के एंटीक वस्तु संग्राहक और पुराने गानों के शौकीन यहां जाकर दुर्लभ विनाइल रिकॉर्ड्स और ऑडियो कैसेट ढूंढ सकते हैं। इससे पुरानी भारतीय संगीत धरोहर को भौतिक रूप में सहेजने की प्रेरणा मिलती है।
- **जयपुर में:** जयपुर आने वाले पर्यटक और स्थानीय निवासी रामगंज बाजार स्थित इस 120 साल पुरानी दुकान पर जाकर इतिहास की दुर्लभ ग्रामोफोन मशीनों (एचएमवी और रिक्का) को काम करते हुए देख सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
डिजिटल युग के आने के बाद भी जयपुर की यह दुकान 120 सालों से इसलिए टिकी हुई है क्योंकि एक ही परिवार ने चार पीढ़ियों तक इसे अपनी सांस्कृतिक जिम्मेदारी मानकर सहेजा है।

- **पारिवारिक प्रतिबद्धता:** 75 वर्षीय अब्दुल अजीज के दादा ने करीब 120 साल पहले इसकी शुरुआत की थी, जिसके बाद से परिवार की लगातार चार पीढ़ियों ने इस व्यवसाय और संग्रह को जीवित रखा।
- **तकनीकी बदलाव:** डिजिटल मीडिया और स्मार्टफोन के आने से ग्रामोफोन आम घरों से गायब हो गए, लेकिन दुर्लभता के कारण यह दुकान एंटीक संग्राहकों के लिए एक बड़ा केंद्र बन गई।
- **दुर्लभ संग्रह की उपलब्धता:** रिक्का और एचएमवी जैसी ऐतिहासिक विदेशी कंपनियों के 5 से 10 दुर्लभ ग्रामोफोन और कैसेट की मौजूदगी ने इसे आज भी प्रासंगिक बनाए रखा है।

## सवाल-जवाब

### 1. जयपुर में 120 साल पुरानी ग्रामोफोन की दुकान कहां स्थित है?
यह दुकान जयपुर के ऐतिहासिक रामगंज बाजार में स्थित है।

### 2. इस दुकान को वर्तमान में कौन संभाल रहा है?
इस दुकान को फिलहाल 75 वर्ष के अब्दुल अजीज संभाल रहे हैं, जिनके दादा ने इसे शुरू किया था।

### 3. ग्रामोफोन को चलाने के लिए क्या बिजली की जरूरत होती है?
नहीं, पुराने ग्रामोफोन बिना बिजली के चलते हैं और इनमें चाबी (हैंडल) भरकर रिकॉर्ड बजाया जाता है।

### 4. दुकान में कौन सी मशहूर कंपनियों के ग्रामोफोन मौजूद हैं?
दुकान के संग्रह में 'रिक्का' और 'एचएमवी' (हिज मास्टर्स वॉइस) जैसी पुरानी और दुर्लभ कंपनियों के ग्रामोफोन शामिल हैं।

## प्रेरणा और सबक
चार पीढ़ियों से 120 साल पुरानी विरासत को सहेजने वाली अब्दुल अजीज की कहानी परंपरा और धैर्य की अनूठी मिसाल है।

- **विरासत के प्रति निष्ठा:** तकनीक बदलने पर भी अपनी जड़ों और खानदानी काम को न छोड़ना पुरानी धरोहरों को जीवित रखता है।
- **संरक्षण का महत्व:** पुरानी और लुप्तप्राय वस्तुओं की सही देखभाल उन्हें केवल कबाड़ बनने से बचाकर इतिहास का अनमोल हिस्सा बना देती है।
- **जुनून ही पहचान है:** व्यावसायिक लाभ से परे जाकर जब किसी कला या संग्रह को सहेजा जाता है, तो वह पूरे शहर की सांस्कृतिक पहचान बन जाता है।

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