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  "title": "जयपुर में डांगावास फैसले के खिलाफ उमड़ा आक्रोश, चंद्रशेखर आजाद की 10 दिन की चेतावनी के बाद हाईकोर्ट जाने को तैयार हुई राजस्थान सरकार",
  "summary": "नागौर के चर्चित डांगावास मामले में 40 आरोपियों को बरी किए जाने के बाद जयपुर के शहीद स्मारक पर आजाद समाज पार्टी ने बड़ा प्रदर्शन किया। नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद की 10 दिनों की चेतावनी के बाद राज्य के गृह सचिव के साथ हुई वार्ता में सरकार हाईकोर्ट में अपील और विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति पर सहमत हो गई है।",
  "content": "राजस्थान की राजधानी जयपुर में 2015 के चर्चित डांगावास हिंसा मामले को लेकर दलित संगठनों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। मेड़ता स्थित विशेष एससी-एसटी अदालत द्वारा मामले के सभी 40 आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी किए जाने के फैसले के बाद आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शहीद स्मारक पर आयोजित विशाल महापंचायत के दौरान नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार को 10 दिनों का अल्टीमेटम सौंपा है। इस दबाव के बीच राज्य के गृह सचिव के साथ हुई उच्चस्तरीय वार्ता में सरकार ने पीड़ित परिवार की मांगों को स्वीकार करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती देने की सहमति दे दी है।\n\nजयपुर के शहीद स्मारक पर प्रदर्शन और पुलिस की मुस्तैदी\nडांगावास फैसले के विरोध में सोमवार को जयपुर का शहीद स्मारक विरोध प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र बन गया। आजाद समाज पार्टी के बैनर तले आयोजित इस महापंचायत में प्रदेश भर से कार्यकर्ताओं और पीड़ित परिवार के सदस्यों ने भाग लिया। प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक अमले में उस समय हड़कंप मच गया जब यह आशंका जताई गई कि उग्र कार्यकर्ता राजस्थान विधानसभा की ओर कूच कर सकते हैं। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए जयपुर पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया और शहीद स्मारक के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया। कुछ समय के लिए क्षेत्र में काफी तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी, हालांकि पुलिस ने बैरिकेडिंग कर स्थिति को संभाला।\n\nमहापंचायत को संबोधित करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने स्पष्ट किया कि यदि राज्य सरकार निर्धारित 10 दिनों की समयसीमा के भीतर मेड़ता अदालत के फैसले के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर नहीं करती है, तो आंदोलन को पूरे राज्य में व्यापक रूप से फैलाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार को पीड़ित पक्ष की ओर से अदालत में मजबूत पैरवी सुनिश्चित करनी होगी। समय पर उचित विधिक कदम न उठाए जाने की स्थिति में राजस्थान की सड़कों पर एक ऐतिहासिक और उग्र आंदोलन देखने को मिलेगा।\n\nगृह सचिव के साथ वार्ता और मुख्य मांगों पर बनी सहमति\nप्रदर्शन के बढ़ते प्रभाव और अल्टीमेटम के बाद राजस्थान सरकार हरकत में आई। राज्य के गृह सचिव ने आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद और डांगावास पीड़ित परिवार के प्रतिनिधियों से औपचारिक वार्ता की। गृह मंत्रालय के अधिकारियों और प्रतिनिधिमंडल के बीच चली इस बैठक में मामले के विधिक पहलुओं और सुरक्षा से जुड़ी मुख्य मांगों पर गहन चर्चा हुई। वार्ता समाप्त होने के बाद यह जानकारी सामने आई कि राज्य सरकार ने पीड़ित पक्ष की लगभग सभी प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है।\n\nवार्ता के दौरान हुए समझौतों के अनुसार, राजस्थान सरकार मेड़ता स्थित विशेष एससी-एसटी अदालत के बरी करने वाले फैसले के खिलाफ तत्काल प्रभाव से राजस्थान हाईकोर्ट में अपील याचिका दाखिल करेगी। इसके साथ ही, हाईकोर्ट में पीड़ित पक्ष का पक्ष प्रभावी और मजबूती से रखने के लिए एक विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति की जाएगी। बैठक में डांगावास हिंसा के मुख्य गवाहों और पीड़ित परिवारों की व्यक्तिगत सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। सरकार ने आश्वासन दिया है कि गवाहों और पीड़ित परिवारों को किसी भी संभावित खतरे से बचाने के लिए पुलिस सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह चाक-चौबंद किया जाएगा।\n\n2015 का डांगावास जमीन विवाद और 6 लोगों की मौत की घटना\nयह पूरा मामला नागौर जिले के डांगावास गांव में वर्ष 2015 में हुए एक भीषण भूमि विवाद से जुड़ा हुआ है। डांगावास में स्थित 23 बीघा विवादित भूमि पर कब्जे की होड़ को लेकर दो पक्षों के बीच अचानक हिंसक झड़प शुरू हो गई थी। इस हिंसा ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया था, जिसमें कुल 6 लोगों की जान चली गई थी। जान गंवाने वाले लोगों में 5 दलित समुदाय के व्यक्ति शामिल थे। इस हिंसक वारदात के दौरान कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए थे, जिसके बाद पूरे राजस्थान में राजनीतिक और सामाजिक पारा चढ़ गया था।\n\nमामले की संवेदनशीलता, जनआक्रोश और निष्पक्ष जांच की मांग को देखते हुए तत्कालीन समय में इस पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई को सौंप दी गई थी। सीबीआई ने मामले में गहन जांच करते हुए कई आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके बाद यह मामला मेड़ता स्थित एससी-एसटी मामलों की विशेष अदालत में लंबे समय तक विचाराधीन रहा।\n\n11 साल की लंबी सुनवाई और सभी 40 आरोपियों की बरीयत\nडांगावास हिंसा मामले में कानूनी प्रक्रिया लगभग 11 वर्षों तक चली। लंबी सुनवाई और गवाहों के बयानों के बाद हाल ही में मेड़ता की विशेष एससी-एसटी अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुनाया। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहा। साक्ष्यों के अभाव का हवाला देते हुए अदालत ने इस मामले में नामजद सभी 40 आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया। 11 साल लंबे इंतजार के बाद आए इस फैसले ने पीड़ित परिवार और दलित संगठनों को गहरा झटका दिया।\n\nअदालत के इस फैसले के आते ही मानवाधिकार संगठनों और दलित अधिकारों के लिए काम करने वाले समूहों में भारी नाराजगी फैल गई। विभिन्न संगठनों का तर्क है कि 6 लोगों की हत्या के इतने बड़े मामले में किसी भी आरोपी को सजा न मिलना न्याय व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। इसी आक्रोश के परिणामस्वरूप जयपुर में महापंचायत का आयोजन किया गया। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार द्वारा हाईकोर्ट में दाखिल की जाने वाली अपील और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं, जबकि आजाद समाज पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि 10 दिनों की मोहलत खत्म होने के बाद यदि ठोस प्रगति नहीं दिखी तो आंदोलन और उग्र होगा।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: यह घटना देश भर में हाशिए के समुदायों से जुड़े गंभीर आपराधिक मामलों में पीड़ित परिवारों के लिए कानूनी अपील, गवाह सुरक्षा और विशेष अभियोजकों की भूमिका की अहमियत को रेखांकित करती है।\n\nराजस्थान में: डांगावास मामले में राज्य सरकार द्वारा हाईकोर्ट में अपील दाखिल करने के फैसले से नागौर और प्रदेश भर के प्रभावित परिवारों को कानूनी न्याय की नई उम्मीद मिली है और गवाहों की पुलिस सुरक्षा मजबूत होगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. डांगावास मामला क्या है?\nयह वर्ष 2015 का मामला है, जहां नागौर के डांगावास गांव में 23 बीघा जमीन के विवाद को लेकर हुए हिंसक संघर्ष में 5 दलितों समेत 6 लोगों की मौत हो गई थी।\n\n2. मेड़ता कोर्ट ने डांगावास मामले में क्या फैसला सुनाया?\nमेड़ता स्थित विशेष एससी-एसटी कोर्ट ने 11 साल की सुनवाई के बाद साक्ष्यों के अभाव में सभी 40 आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया।\n\n3. चंद्रशेखर आजाद ने सरकार के सामने क्या मांग रखी?\nउन्होंने राजस्थान सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में अपील करने और विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने की मांग रखी।\n\n4. गृह सचिव के साथ हुई वार्ता में क्या सहमति बनी?\nसरकार मेड़ता कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में तत्काल अपील दाखिल करने, विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति करने और गवाहों व पीड़ितों को सुरक्षा देने पर सहमत हुई।\n\n5. डांगावास मामले की जांच किस एजेंसी ने की थी?\nघटना की गंभीरता और व्यापक जनाक्रोश को देखते हुए डांगावास हिंसा मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी गई थी।",
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  "publishedAt": "2026-08-22",
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