# जैसलमेर के होटल संचालक की समझदारी से झारखंड के लापता किशोर को मिले पिता, 5 माह बाद छलक पड़े आंसू

> झारखंड के देवरगढ़ से नाराज होकर भागे 14 वर्षीय किशोर को रामदेवरा के होटल संचालक की सतर्कता ने 5 महीने बाद उसके पिता से सुरक्षित मिलवा दिया।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-11-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/jaisalmer-ke-hotala-snchalaka-ki-samajhadari-se-jharkhand-ke-lapata-kishora-ko-mile-pita-5-maha-bada-chhalaka-pare-ansu-54254 · **Language:** Hindi
**Tags:** रामदेवरा, जैसलमेर, झारखंड, लापता किशोर, पुनर्मिलन, राजस्थान

राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित प्रसिद्ध तीर्थ स्थल रामदेवरा में एक बिछड़े परिवार के पुनर्मिलन का अत्यंत भावुक दृश्य देखने को मिला। अपने घर में किसी बात पर हुई कहासुनी के बाद आवेश में आकर करीब 5 महीने पहले घर छोड़ने वाला 14 वर्षीय बालक आखिरकार सही-सलामत अपने पिता की बाहों में पहुंच गया। पिछले कई महीनों से दर-दर की ठोकरें खाने के बाद जब पिता और पुत्र एक-दूसरे के सामने आए, तो दोनों की आंखों से खुशी और आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। इस मार्मिक दृश्य को देखकर आसपास मौजूद हर शख्स भावुक हो उठा।

## घरेलू अनबन के बाद शुरू हुआ था भटकने का दर्दनाक सफर
यह पूरा मामला झारखंड राज्य के देवरगढ़ इलाके से जुड़ा हुआ है। 14 साल का यह बालक लगभग 5 महीने पहले अपने परिवार में हुए मामूली वाद-विवाद से नाराज हो गया था। गुस्से में उसने किसी को भी बिना बताए अपना घर छोड़ दिया। घर से निकलने के बाद वह भटकते हुए राजस्थान के अजमेर शहर पहुंच गया। अजमेर में उसके पास न तो रहने का कोई ठिकाना था और न ही खाने के पैसे थे। अपनी भूख मिटाने और गुजारा करने के लिए उसने कई रातों तक फुटपाथ पर सोकर वक्त काटा और पेट भरने की खातिर स्थानीय छोटे भोजनालयों में झूठे बर्तन धोने का काम शुरू कर दिया।

## अजमेर से रामदेवरा के होटल तक की मजदूरी
अजमेर में कुछ समय बिताने के बाद बालक किसी तरह जैसलमेर जिले के प्रमुख धार्मिक कस्बे रामदेवरा आ पहुंचा। यहां आकर उसने अपनी गुजर-बसर के लिए ‘श्री कृष्णा होटल’ में बर्तन मांजने और साफ-सफाई का काम पकड़ लिया। वह पिछले पांच महीनों से लगातार इसी होटल में रहकर मजदूरी कर रहा था। होटल संचालक घनश्याम शर्मा को जब भी उस पर तरस आता या शक होता, तो वे उससे उसके घर-परिवार के बारे में विस्तार से पूछते थे। हालांकि, बालक सच्चाई छिपा जाता था और हर बार यही दलील देता था कि उसके घर की माली हालत बेहद खराब है, जिसके चलते वह कमाने के लिए परदेस आया हुआ है।

## होटल संचालक की सतर्कता से खुला पूरा राज
होटल संचालक घनश्याम शर्मा लगातार बालक की गतिविधियों और उसकी उम्र को देखते हुए चिंतित थे। आखिरकार काफी प्रयासों के बाद होटल संचालक को बालक के परिजनों का संपर्क नंबर हासिल करने में सफलता मिल गई। संचालक ने जब उस फोन नंबर पर संपर्क साधा, तब जाकर पूरी सच्चाई सामने आई। परिजनों ने बताया कि उनका मासूम बेटा पिछले 5 महीनों से लापता है और वे देश के अलग-अलग राज्यों व शहरों में रात-दिन उसकी तलाश में भटक रहे थे।

## पिता और पुत्र का भावुक मिलन, मांगी माफी
बेटे के सुरक्षित मिलने की जानकारी मिलते ही पिता मोहम्मद अंसारी फौरन झारखंड से रवाना होकर रामदेवरा पहुंचे। होटल परिसर में जब पांच महीने बाद पिता और पुत्र का आमना-सामना हुआ, तो दोनों सुबक-सुबक कर रोने लगे। पिता ने अपने बेटे को सीने से लगा लिया और इतने समय तक उसे सुरक्षित रखने के लिए होटल संचालक घनश्याम शर्मा का हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया। पिता को देखकर बालक को भी अपनी गलती समझ आ गई। उसने स्वीकार किया कि गुस्से में उठाया गया उसका कदम बहुत गलत था। उसने अन्य बच्चों से भी करबद्ध अपील की कि वे कभी भी घर न छोड़ें, क्योंकि बाहर की दुनिया बहुत कठिन है जहां इंसान को फुटपाथ पर सोना पड़ता है और झूठे बर्तन धोकर वक्त गुजारना पड़ता है।

## इसका आप पर असर
यह घटना दिखाती है कि आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों की सतर्कता गुमशुदा बच्चों को सुरक्षित घर पहुंचाने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

- **नागरिकों की सतर्कता:** यदि किसी होटल, ढाबे या दुकान पर कोई अकेला बच्चा काम करता दिखे, तो तुरंत उसकी पृष्ठभूमि जानने की कोशिश करें। किसी भी संदिग्ध परिस्थिति में चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 या स्थानीय पुलिस को सूचना देकर किसी बच्चे की जिंदगी बचाई जा सकती है।
- **अभिभावकों के लिए सबक:** पारिवारिक कलह या नाराजगी में बच्चे अक्सर जल्दबाजी में गलत कदम उठा लेते हैं। माता-पिता को चाहिए कि वे घर में संवाद का ऐसा माहौल रखें जिससे बच्चे डर या गुस्से में घर छोड़ने जैसा घातक फैसला न लें।
- **लापता बच्चों की सूचना:** किसी बच्चे के लापता होते ही निकटतम थाने में तुरंत प्राथमिकी दर्ज करवानी चाहिए। समय पर पुलिस और बाल संरक्षण एजेंसियों को सूचना देने से अंतरराज्यीय तलाश में मदद मिलती है।
- **सड़क पर बच्चों के जोखिम:** घर से भागे हुए नाबालिगों को मानव तस्करी, शोषण और भुखमरी का अत्यधिक खतरा रहता है। स्थानीय प्रशासन और समाज की निरंतर निगरानी ही ऐसे भटके हुए बच्चों को सुरक्षित आश्रय तक पहुंचा सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटना एक किशोर द्वारा घरेलू तकरार के बाद उठाए गए अनपेक्षित कदम और बाद में एक जागरूक नागरिक की सूझबूझ से उपजे समाधान को दर्शाती है।

- **आवेश में घर छोड़ना:** पारिवारिक विवाद के चलते 14 वर्षीय बालक अत्यधिक आहत हो गया था। परिपक्व समझ न होने के कारण उसने बिना परिजनों को बताए चुपचाप घर से भागने का फैसला किया।
- **सच्चाई छिपाकर मजदूरी करना:** घर न लौटने की जिद के कारण किशोर ने अपनी पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि छिपाए रखी। उसने भोजनालय संचालक को यह भरोसा दिलाया कि वह गरीबी के कारण काम करने आया है, जिससे वह पांच महीने तक वहीं टिका रहा।
- **होटल संचालक का संदेह:** होटल मालिक को बालक की कम उम्र और बयानों पर निरंतर संदेह था। इसी सतर्कता के चलते उन्होंने लगातार प्रयास कर बालक के परिजनों का फोन नंबर हासिल किया और परिवार को सूचित किया।

## सवाल-जवाब

### 1. यह घटना मुख्य रूप से कहां और किस जगह घटी?
यह घटना राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित धार्मिक कस्बे रामदेवरा के ‘श्री कृष्णा होटल’ में सामने आई।

### 2. किशोर मूल रूप से कहां का रहने वाला है और उसने घर क्यों छोड़ा था?
किशोर झारखंड के देवरगढ़ का रहने वाला है और वह करीब 5 महीने पहले पारिवारिक विवाद से नाराज होकर घर से निकला था।

### 3. होटल संचालक ने परिवार तक संपर्क कैसे साधा?
होटल संचालक घनश्याम शर्मा ने किशोर की कम उम्र को देखते हुए लगातार पूछताछ की और आखिरकार उसके परिजनों का संपर्क नंबर हासिल कर उन्हें सूचित किया।

### 4. घर से भागने के बाद किशोर ने किन शहरों में समय बिताया?
किशोर पहले अजमेर पहुंचा जहां उसने फुटपाथ पर रातें बिताईं और बर्तन धोए, जिसके बाद वह रामदेवरा पहुंचकर होटल में काम करने लगा।

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