# जैसलमेर के सूदासरी से खुले आसमान में उड़ान भरेंगे ब्रीडिंग सेंटर में पले गोडावण, जीपीएस रखेगा हर पल नजर

> राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण को बाड़ों से निकालकर पहली बार प्राकृतिक पर्यावास में छोड़ने की तैयारी पूरी कर ली गई है, जिनकी निगरानी अत्याधुनिक जीपीएस टैगिंग से की जाएगी।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/jaisalmer-ke-sudasari-se-khule-asamana-men-urana-bharenge-bridinga-sentara-men-pale-godavana-gps-rakhega-hara-pala-najara-42166 · **Language:** Hindi
**Tags:** गोडावण संरक्षण, जैसलमेर, सूदासरी, भूपेंद्र यादव, थार मरुस्थल, जीपीएस ट्रैकिंग, वन्यजीव संरक्षण

राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण के संरक्षण अभियान में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर दर्ज होने जा रहा है, जब कृत्रिम प्रजनन केंद्र के सुरक्षित घेरे से निकालकर इन परिंदों को पहली बार खुले आसमान में छोड़ा जाएगा। जैसलमेर जिले के सूदासरी स्थित ब्रीडिंग सेंटर में पले-बढ़े इन गोडावणों को उनके मूल प्राकृतिक पर्यावास में आजाद करने की पूरी तैयारी कर ली गई है। थार के रेगिस्तान की पहचान माने जाने वाले इस दुर्लभ पक्षी को बचाने के प्रयासों के तहत यह एक युगांतरकारी कदम है। देश के केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव खुद इस गौरवशाली पल के साक्षी बनने के लिए मौके पर मौजूद रहेंगे।

लंबे समय से विलुप्ति की कगार पर खड़े इस पक्षी की सुरक्षा को लेकर वन विभाग, वैज्ञानिकों और वन्यजीव विशेषज्ञों की टीमें लगातार जुटी हुई थीं। वर्षों के कड़े अनुसंधान, वैज्ञानिक देखरेख और अथक परिश्रम के बाद आखिरकार यह कामयाबी हासिल हुई है। विशेषज्ञों द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण में पूरी तरह खरे और प्राकृतिक वातावरण के अनुकूल पाए जाने के बाद ही इन गोडावणों को प्राकृतिक पर्यावास में नई जिंदगी शुरू करने की हरी झंडी दी गई है। वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों के बीच इस कदम को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

## आधुनिक जीपीएस तकनीक से चौबीसों घंटे निगरानी का खाका
खुले वातावरण में छोड़े जाने वाले गोडावणों की सुरक्षा और उनके व्यवहार को समझने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। इस पूरी योजना के तहत सभी रिलीज किए जाने वाले पक्षियों पर अत्याधुनिक जीपीएस टैगिंग की व्यवस्था की गई है। इस डिवाइस की मदद से वैज्ञानिक और वन विभाग की टीमें बिना किसी रुकावट के चौबीसों घंटे पक्षियों की प्रत्येक गतिविधि पर पैनी निगाह रख सकेंगी।

जीपीएस ट्रैकिंग के जरिए यह आसानी से पता लगाया जा सकेगा कि गोडावण प्रतिदिन कितनी दूरी तय कर रहे हैं, उनके पसंदीदा भोजन क्षेत्र कौन से हैं और वे विश्राम के लिए किन ठिकानों को चुन रहे हैं। इस पल-पल की डिजिटल मॉनिटरिंग से न केवल पक्षियों के व्यवहार संबंधी महत्वपूर्ण आंकड़े एकत्र होंगे, बल्कि किसी भी अप्रत्याशित खतरे की स्थिति में त्वरित कदम उठाना भी मुमकिन हो सकेगा।

## विशेष टनल में दो से तीन महीने तक दी गई कड़ी ट्रेनिंग
ब्रीडिंग सेंटर की चारदीवारी से सीधे खुले जंगल में छोड़ने के बजाय इन पक्षियों को वन्य जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए बाकायदा प्रशिक्षित किया गया है। रिलीज करने से पहले करीब दो से तीन महीने तक इन गोडावणों को एक विशेष रूप से तैयार की गई टनल में रखा गया था, जहां उन्हें प्राकृतिक परिस्थितियों से तालमेल बिठाने का निरंतर अभ्यास कराया गया।

इस विशेष प्रशिक्षण के दौरान पक्षियों ने खुद से लंबी उड़ान भरने, खुले माहौल के उतार-चढ़ाव को समझने और जमीन पर अपने लिए खुद चारा तथा भोजन तलाशने के तौर-तरीके सीखे। जब वन अधिकारियों और शोधकर्ताओं को पूरा यकीन हो गया कि ये पक्षी प्राकृतिक आवास में बिना किसी मानवीय सहारे के सुरक्षित रह सकते हैं और पूरी तरह तंदुरुस्त हैं, तभी उन्हें खुले आसमान में छोड़ने का अंतिम फैसला लिया गया।

## हाईटेंशन बिजली लाइनों के खतरे से बचाव की रणनीति
थार क्षेत्र में गोडावणों के जीवन के सामने सबसे बड़ी चुनौती जमीन के ऊपर से गुजरने वाली हाईटेंशन बिजली की लाइनें रही हैं। भारी शरीर और सीमित दृष्टि कोण के चलते ये पक्षी अक्सर तारों से टकरा जाते हैं, जिससे उनकी जान चली जाती है। जीपीएस ट्रैकिंग के माध्यम से वन विभाग उनकी उड़ानों के मार्ग और मूवमेंट पैटर्न को लगातार ट्रैक करेगा, जिससे यह समझा जा सके कि पक्षी किन संवेदनशील तारों के करीब से गुजर रहे हैं। इससे जोखिम भरे इलाकों की पहचान कर सुरक्षात्मक इंतजामों को और पुख्ता बनाने में मदद मिलेगी। सूदासरी की धरती पर रविवार को शुरू होने वाली यह ऐतिहासिक पहल गोडावणों के अस्तित्व को नई जिंदगी और मजबूती देने का मार्ग प्रशस्त करेगी।

## इसका आप पर असर
यह पहल भारत के सबसे संकटग्रस्त पक्षियों में से एक को विलुप्त होने से बचाने और स्थानीय पारिस्थितिकी संतुलन को सुदृढ़ करने की दिशा में सीधा योगदान देती है।

- **भारत में:** देश भर में विलुप्तप्राय प्रजातियों के कृत्रिम प्रजनन और पुनर्वास के लिए यह परियोजना एक व्यावहारिक वैज्ञानिक मॉडल पेश करती है। इसके सफल क्रियान्वयन से अन्य संकटग्रस्त वन्यजीवों के संरक्षण कार्यक्रमों को भी नई गति और दिशा मिलेगी।
- **जैसलमेर में:** स्थानीय स्तर पर हाईटेंशन बिजली लाइनों और खुले प्राकृतिक इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था को तकनीकी निगरानी के आधार पर कड़ा किया जाएगा। क्षेत्र में पर्यावरणीय संतुलन बेहतर होने के साथ-साथ वन्यजीव आधारित पर्यावरण-पर्यटन की संभावनाओं को भी बढ़ावा मिलेगा।
- **पर्यावरण संरक्षण में:** जीपीएस ट्रैकिंग से मिलने वाले आंकड़े वैज्ञानिकों को खुले वातावरण में पक्षियों के व्यवहार और खतरों को समझने में मदद करेंगे। इससे भविष्य में पक्षी संरक्षण से जुड़े नीतिगत निर्णयों को जमीन पर उतारना आसान हो जाएगा।
- **स्थानीय समुदाय के लिए:** थार क्षेत्र के प्राकृतिक चरागाहों और गोडावण के आवासों की सुरक्षा से मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र का मूल स्वरूप सुरक्षित रहेगा। स्थानीय लोगों में वन्यजीव संरक्षण को लेकर संवेदनशीलता और गौरव की भावना मजबूत होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
गोडावणों की गिरती संख्या और प्राकृतिक खतरों के कारण इन्हें कृत्रिम प्रजनन केंद्रों में तैयार कर जंगलों में दोबारा स्थापित करना आवश्यक हो गया था। इस वैज्ञानिक रणनीति का उद्देश्य प्रजाति को विलुप्ति से बचाना और खुले माहौल में उनकी संख्या को पुनः बढ़ाना है।

- **विलुप्ति का मंडराता संकट:** थार के रेगिस्तान में गोडावणों की घटती संख्या ने संरक्षण एजेंसियों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी थी। बाड़ों में प्रजनन करवाकर स्वस्थ पक्षी तैयार करना उनके वंश को जीवित रखने का सबसे प्रभावी उपाय साबित हुआ।
- **प्राकृतिक जीवन का कड़ा प्रशिक्षण:** पिंजरों में पले पक्षी खुले जंगल में जीवित रह सकें, इसके लिए उन्हें दो से तीन महीने विशेष टनल में रखकर उड़ने और भोजन ढूंढने का अभ्यास कराया गया। इस अनुकूलन प्रक्रिया के पूरी तरह सफल होने के बाद ही रिलीज का कदम उठाया गया।
- **बिजली के तारों से लगातार नुकसान:** खुले इलाके में हाईटेंशन तारों से टकराने के कारण अतीत में कई पक्षियों की मृत्यु दर्ज की गई है। इस खतरे से निपटने के लिए जीपीएस ट्रैकिंग का सहारा लिया गया है, ताकि उनके उड़ान मार्गों की मैपिंग कर आवश्यक सुरक्षा कदम उठाए जा सकें।
- **आगे की राह:** रविवार को सूदासरी में रिलीज के बाद वैज्ञानिक दल 24 घंटे उनकी गतिविधियों पर नजर रखेगा। इस प्रयोग के नतीजों के आधार पर आने वाले समय में और अधिक पक्षियों को खुले जंगल में छोड़ने की योजना आगे बढ़ेगी।

## सवाल-जवाब

### 1. गोडावणों को खुले आसमान में कहां से और किस स्थान पर छोड़ा जा रहा है?
इन्हें राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित सूदासरी के ब्रीडिंग सेंटर से उनके प्राकृतिक पर्यावास में छोड़ा जा रहा है।

### 2. इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में कौन से केंद्रीय मंत्री उपस्थित रहेंगे?
देश के केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव इस महत्वपूर्ण अवसर के साक्षी बनेंगे।

### 3. रिलीज किए गए गोडावणों की निगरानी किस तकनीक से की जाएगी?
इन पक्षियों के साथ अत्याधुनिक जीपीएस टैगिंग की गई है, जिससे वैज्ञानिक और वन विभाग की टीमें 24 घंटे उनकी उड़ानों, भोजन और ठिकानों की निगरानी कर सकेंगी।

### 4. खुले में छोड़ने से पहले गोडावणों को किस प्रकार की ट्रेनिंग दी गई?
इन्हें करीब दो से तीन महीने तक एक विशेष टनल में रखा गया, जहां उन्होंने खुद उड़ने, वातावरण से तालमेल बिठाने और स्वयं भोजन तलाशने का अभ्यास किया।

### 5. प्राकृतिक वातावरण में गोडावणों के लिए सबसे बड़ा खतरा क्या है?
खुले पर्यावास में हाईटेंशन बिजली की लाइनें सबसे बड़ा खतरा हैं, जिनसे टकराने की आशंका को कम करने के लिए जीपीएस से उनकी मूवमेंट ट्रैक की जाएगी।

### 6. यह रिलीज किस दिन आयोजित की जा रही है?
सूदासरी की धरती पर इस ऐतिहासिक पहल की शुरुआत रविवार के दिन होने जा रही है।

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