जैसलमेर में सिंचाई तंत्र को नई ताकत, इंदिरा गांधी नहर के एस्केप चैनल के लिए 785.87 हेक्टेयर जमीन स्वीकृत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जैसलमेर में बाबा रामदेव सब ब्रांच पर बनने वाले एस्केप चैनल के लिए 785.87 हेक्टेयर भूमि आवंटित करने की मंजूरी दी है। इससे पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके में नहरी ढांचे और जल प्रबंधन को मजबूती मिलेगी। पश्चिमी राजस्थान के थार रेगिस्तानी अंचल में कृषि और जल प्रबंधन को सशक्त बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जैसलमेर जिले में इंदिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र के अंतर्गत एक नए एस्केप चैनल के निर्माण कार्य हेतु 785.87 हेक्टेयर भूमि आवंटन को मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक स्वीकृति के साथ ही बाबा रामदेव सब ब्रांच की बुर्जी पर लंबे समय से प्रस्तावित एस्केप चैनल के जमीनी निर्माण का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है। सरकारी स्तर पर इस कदम को पूरे सीमावर्ती क्षेत्र में सिंचाई नेटवर्क के विस्तार, जल के समुचित प्रवाह और नहरों की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित करने की दिशा में निर्णायक माना जा रहा है। रेगिस्तानी कृषि व्यवस्था के लिए बुनियादी जीवनरेखा जैसलमेर जैसे अत्यधिक शुष्क और भौगोलिक रूप से संवेदनशील सीमांत जिले में आम जनजीवन और खेती किसानी का पूरा ताना बाना बहुत हद तक नहर आधारित सिंचाई व्यवस्था पर टिका हुआ है। रेगिस्तान के इस सुदूर क्षेत्र में वर्षा की भारी कमी रहती है, जिसके कारण स्थानीय किसान पूरी तरह नहरी जल प्रवाह पर निर्भर रहते हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में प्रस्तावित एस्केप चैनल को केवल एक जल निकासी माध्यम के रूप में नहीं देखा जा रहा है, बल्कि यह संपूर्ण नहरी ढांचे के एक मजबूत सुरक्षा और प्रबंधन उपकरण के तौर पर काम करेगा। इसके अस्तित्व में आने से इंदिरा गांधी नहर परियोजना से जुड़े व्यापक सिंचाई नेटवर्क का संतुलन और परिचालन अधिक व्यवस्थित हो सकेगा। भूमि की प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद अब संबंधित विभाग निर्माण से जुड़ी अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं और निविदा चरणों को गति दे सकेंगे। बाबा रामदेव सब ब्रांच और नहरी सुरक्षा तंत्र इंदिरा गांधी नहर परियोजना ने दशकों से पश्चिमी राजस्थान के विशाल भूभाग की तस्वीर बदलने का काम किया है। मुख्य नहरों, शाखाओं, सब ब्रांचों और उनसे जुड़ी जल वितरिकाओं का जो जाल रेगिस्तान में फैला है, वह यहां की बंजर भूमि को हरा भरा बनाने का मुख्य आधार है। इसी विशाल नेटवर्क के तहत जैसलमेर क्षेत्र में स्थित बाबा रामदेव सब ब्रांच की बुर्जी पर यह एस्केप चैनल विकसित किया जाना तय हुआ है। परियोजना के लिए स्वीकृत 785.87 हेक्टेयर जमीन पर आधुनिक तकनीक और योजनाबद्ध तरीके से चैनल तैयार किया जाएगा। जब कभी मुख्य या उप शाखाओं में जल का अतिरिक्त दबाव बनता है या मरम्मत के लिए पानी के त्वरित डायवर्जन की आवश्यकता होती है, तब ऐसे एस्केप चैनल नहरों को टूटने से बचाने और अतिरिक्त जल को सुरक्षित दिशा देने में बेहद कारगर साबित होते हैं। किसानों तक समय पर जल पहुंचाने की सरकारी योजना पश्चिमी राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में आर्थिक स्थिरता सीधे तौर पर खेतों तक पहुंचने वाले पानी से तय होती है। सिंचाई ढांचे में जरा सा भी सुधार किसानों की पैदावार और उनके दैनिक जीवन पर सकारात्मक असर डालता है। जैसलमेर में बनने जा रहे इस नए चैनल से नहरी क्षेत्र में जल प्रबंधन की दक्षता में सुधार आएगा, जिससे अंतिम छोर तक खेती करने वाले किसानों को तय समय पर सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। राज्य प्रशासन का जोर पूरे प्रदेश में सिंचाई तंत्र को आधुनिक बनाने और उपलब्ध जल संसाधनों का एक एक कतरा सहेजने पर है। सरकार की प्राथमिकताओं में पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों की जल अधोसंरचना को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना शामिल है, और जैसलमेर में भूमि का आवंटन इसी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। आगामी चरण और क्षेत्रीय कृषि पर दूरगामी असर जैसलमेर का एक बहुत बड़ा भूभाग कठोर रेगिस्तानी परिस्थितियों के अधीन आता है, जहां परंपरागत खेती करना बेहद कठिन चुनौती है। इंदिरा गांधी नहर के आगमन से यहां सरसों, चना, गेहूं और चारे की फसलों को नई जिंदगी मिली है। अब एस्केप चैनल के जुड़ने से मौजूदा नहरी ढांचे की सहनशीलता और कार्यक्षमता दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। 785.87 हेक्टेयर जमीन की आधिकारिक उपलब्धता सुनिश्चित होने के बाद निर्माण एजेंसियों को जमीनी स्तर पर कार्य शुरू करने में कोई कानूनी या प्रशासनिक बाधा नहीं आएगी। हालांकि इस पूरी व्यवस्था के वास्तविक फायदे और कृषि पैदावार पर इसके असर का सही आकलन निर्माण पूरा होने और चैनल के सुचारू संचालन के बाद ही सामने आ सकेगा, लेकिन वर्तमान में सरकार का पूरा ध्यान पश्चिमी राजस्थान के किसानों को स्थायी और भरोसेमंद जल सुरक्षा उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। इसका आप पर असर जैसलमेर में एस्केप चैनल के लिए जमीन आवंटन से सीमावर्ती थार क्षेत्र के किसानों को अधिक सुरक्षित और नियमित सिंचाई जल मिलने का रास्ता खुला है। • भारत में: सीमावर्ती कृषि क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विस्तार देश की खाद्य सुरक्षा और मरुस्थलीय विकास को मजबूती प्रदान करता है। इससे शुष्क इलाकों में कृषि उत्पादन की स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। • राजस्थान में: पश्चिमी राजस्थान के किसानों को नहरी टूटने के जोखिम से सुरक्षा मिलेगी और अतिरिक्त पानी का सुचारू प्रबंधन हो सकेगा। जल का दबाव नियंत्रित रहने से टेल तक खेती करने वाले किसानों को फसलों के लिए समय पर पानी मिल सकेगा। • किसानों के लिए: बाबा रामदेव सब ब्रांच पर निर्भर कृषक वर्ग को पानी की बर्बादी और नहर कटने से खेतों में होने वाले जलभराव से निजात मिलेगी। किसान अपनी मौसमी फसलों की बुवाई के लिए जल उपलब्धता का बेहतर पूर्वानुमान लगा सकेंगे। • स्थानीय प्रशासन के लिए: सिंचाई विभाग को भारी प्रवाह के दौरान नहर तंत्र को बिना नुकसान पहुंचाए अतिरिक्त पानी मोड़ने की तकनीकी सुविधा मिल जाएगी। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में नहरों की मरम्मत और रखरखाव पर होने वाला भारी खर्च बचेगा। ऐसा क्यों हुआ पश्चिमी राजस्थान का रेगिस्तानी क्षेत्र अत्यधिक शुष्क होने के कारण पूरी तरह नहरी सिंचाई पर निर्भर है, जहां पानी के अनियंत्रित प्रवाह से निपटने के लिए मजबूत जल निकासी ढांचे की दरकार थी। अतिरिक्त जल प्रवाह को संभालने और नहरों की सुरक्षा के लिए इस तरह की तकनीकी व्यवस्था लंबे समय से आवश्यक मानी जा रही थी। • नहरी सुरक्षा की तात्कालिक जरूरत: भारी इनफ्लो या तकनीकी खराबी के समय नहरों में पानी का दबाव अचानक बढ़ जाता है, जिससे किनारों के टूटने का खतरा रहता है। एस्केप चैनल इस तरह के अतिरिक्त पानी को सुरक्षित रूप से बाहर निकालने का रास्ता प्रदान करता है। • जमीन की आधिकारिक उपलब्धता: किसी भी बड़े नहरी ढांचे के निर्माण से पहले पर्याप्त भूमि का कानूनी आवंटन अनिवार्य होता है। मुख्यमंत्री स्तर से 785.87 हेक्टेयर जमीन की मंजूरी मिलने के बाद ही निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना संभव हो सका है। • मरुस्थलीय जल प्रबंधन की रणनीति: रेगिस्तानी भूभाग में पानी की हर बूंद का उपयोग सुनिश्चित करना और सिंचाई प्रणाली को दक्ष बनाना सरकारी प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी नीतिगत फोकस के तहत बाबा रामदेव सब ब्रांच पर यह बुनियादी ढांचा तैयार करने का फैसला किया गया। सवाल-जवाब 1. जैसलमेर में किस परियोजना के लिए 785.87 हेक्टेयर भूमि स्वीकृत की गई है? यह भूमि जैसलमेर में इंदिरा गांधी नहर परियोजना के तहत एस्केप चैनल के निर्माण के लिए स्वीकृत की गई है। 2. यह एस्केप चैनल किस शाखा पर बनाया जाएगा? प्रस्तावित एस्केप चैनल का निर्माण बाबा रामदेव सब ब्रांच की बुर्जी पर किया जाएगा। 3. भूमि आवंटन की मंजूरी किसके द्वारा दी गई है? मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने परियोजना के लिए 785.87 हेक्टेयर भूमि आवंटन की औपचारिक स्वीकृति दी है। 4. इस एस्केप चैनल से पश्चिमी राजस्थान के किसानों को क्या लाभ मिलेगा? इससे नहरी तंत्र अधिक मजबूत होगा, जल प्रबंधन सुधरेगा और किसानों को खेती के लिए बेहतर व नियमित सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। 5. भूमि आवंटन के बाद अगला कदम क्या होगा? भूमि मंजूरी के बाद अब एस्केप चैनल के निर्माण कार्य से जुड़े अगले प्रशासनिक और तकनीकी चरण शुरू हो सकेंगे। https://trendkia.com/rajasthan/jaisalmer-men-sinchai-tntra-ko-nai-takata-indira-gandhi-canal-ke-eskepa-chainala-ke-lie-785-87-hekteyara-jamina-svikrita-37505 TrendKia — Har trend, sabse pehle.