# जल जीवन मिशन घोटाला: महेश जोशी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत

> सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी को जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़े एसीबी मामले में जमानत दे दी है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/jal-jeevan-mission-scam-mahesh-joshi-gets-bail-from-supreme-court-48130 · **Language:** Hindi
**Tags:** महेश जोशी, सुप्रीम कोर्ट, जल जीवन मिशन, एसीबी, राजस्थान

शीर्ष अदालत ने राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी को एक बड़ी राहत प्रदान की है। जल जीवन मिशन से जुड़े कथित घोटाले के मामले में उन्हें सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिल गई है। यह मामला राजस्थान पुलिस के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी द्वारा दर्ज किया गया था, जिसमें अदालत ने उनकी याचिका को स्वीकार कर लिया है। इस कानूनी कार्रवाई के दौरान एक अन्य आरोपी को भी अदालत से राहत मिली है।

## सुप्रीम कोर्ट की बेंच का फैसला
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने महेश जोशी की स्पेशल लीव पेटिशन यानी एसएलपी पर सुनवाई पूरी करने के बाद यह आदेश पारित किया। इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने उनकी जमानत अर्जी को खारिज कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कुछ दिन पहले ही अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

## प्रवर्तन निदेशालय के मामले से जुड़ा पुराना संदर्भ
महेश जोशी को इससे पहले केंद्रीय एजेंसी यानी प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज किए गए धन शोधन के मामले में भी कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। उस मामले में लंबी हिरासत के बाद 3 दिसंबर 2025 को उन्हें शीर्ष अदालत से नियमित जमानत प्राप्त हुई थी। उस दौरान अदालत ने उनकी लंबी कैद और आयु का संज्ञान लिया था।

## एसीबी की गिरफ्तारी और ताजा घटनाक्रम
ईडी के मामले में राहत मिलने के कुछ समय पश्चात, 7 मई 2026 को राजस्थान एसीबी ने उन्हें जयपुर स्थित उनके आवास से फिर से हिरासत में ले लिया था। यह कार्रवाई नौ सौ करोड़ रुपये से अधिक के कथित टेंडर आवंटन और रिश्वतखोरी से जुड़े प्रकरण में की गई थी। इस गिरफ्तारी के बाद से वह लगातार हिरासत में थे। हालांकि कानूनी जानकारों का मानना है कि जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से पूर्ण मुक्ति नहीं है और मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।

## इसका आप पर असर
इस अदालती फैसले का सीधा असर भ्रष्टाचार के मामलों और कानूनी प्रक्रियाओं पर नजर रखने वाले लोगों और नीति निर्धारकों पर पड़ता है।

- **भारत में:** यह निर्णय विभिन्न राज्यों में चल रहे बड़े बुनियादी ढांचा घोटालों और उनमें नेताओं की गिरफ्तारी तथा जमानत के कानूनी प्रावधानों को प्रभावित करता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि लंबी हिरासत के बाद अदालतों का रुख किस तरह से बदल सकता है।
- **जयपुर में:** स्थानीय स्तर पर इस मामले से जुड़े राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। महेश जोशी के समर्थकों और विरोधियों के बीच इस कानूनी राहत को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह कानूनी स्थिति भ्रष्टाचार के विभिन्न मामलों में एजेंसियों की जांच और न्यायालयों द्वारा आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और हिरासत की अवधि के बीच संतुलन बनाने के कारण उत्पन्न हुई है।

- **जांच का दायरा:** राजस्थान एसीबी ने नौ सौ करोड़ रुपये से अधिक के कथित टेंडर आवंटन और रिश्वतखोरी के आरोपों के तहत यह मामला दर्ज किया था।
- **हिरासत की अवधि:** महेश जोशी पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय के मामले में लंबी अवधि तक जेल में रह चुके थे, जिसके आधार पर वकीलों ने शीर्ष अदालत में राहत की गुहार लगाई थी।
- **न्यायिक समीक्षा:** हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद आरोपी पक्ष ने स्पेशल लीव पेटिशन के जरिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां पीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद यह आदेश दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. महेश जोशी को किस मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है?
सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़े एसीबी मामले में जमानत दी है।

### 2. इस मामले में सुनवाई किस अदालत की पीठ ने की?
यह फैसला जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने सुनाया है।

### 3. महेश जोशी को एसीबी ने कब गिरफ्तार किया था?
राजस्थान एसीबी ने उन्हें 7 मई 2026 को उनके जयपुर स्थित आवास से गिरफ्तार किया था।

### 4. यह घोटाला कितने金额 से जुड़ा हुआ है?
यह कथित टेंडर आवंटन घोटाला 900 करोड़ रुपये से अधिक का है।

### 5. क्या जमानत मिलने से वे आरोपों से पूरी तरह बरी हो गए हैं?
नहीं, जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है और कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी।

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