जालौर के देसू गांव में स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर, सिरदर्द से लेकर केसर की बारिश तक के चमत्कार राजस्थान के जालौर जिले के देसू गांव में स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर अपनी अनोखी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां सिरदर्द के झाड़े से लेकर महाशिवरात्रि पर केसर की बारिश तक के चमत्कारों की चर्चा दूर-दूर तक फैली हुई है। राजस्थान के जालौर जिले से लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देसू गांव में एक ऊंची पहाड़ी पर संकट मोचन हनुमान जी का प्राचीन मंदिर स्थापित है। यह धार्मिक स्थल इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच अपार श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर केवल सामान्य पूजा-पाठ या आराधना तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहां से जुड़ी हुई कई रहस्यमयी और चमत्कारिक मान्यताएं इसे दूर-दूर तक प्रसिद्ध बनाती हैं। पहाड़ी की चोटी पर बने इस ऐतिहासिक मंदिर में माथा टेकने और अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए न सिर्फ जालौर बल्कि अन्य दूर-दराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। बीमारियों से राहत दिलाने वाला चमत्कारी झाड़ा इस संकट मोचन हनुमान मंदिर की सबसे बड़ी और लोकप्रिय विशेषता यहां होने वाले स्वास्थ्य लाभ से जुड़ी है। स्थानीय निवासियों और यहां आने वाले दर्शनार्थियों का यह दृढ़ विश्वास है कि यदि कोई व्यक्ति गंभीर सिरदर्द या माइग्रेन जैसी पुरानी समस्याओं से जूझ रहा है, तो इस मंदिर में हनुमान जी के नाम का झाड़ा लगवाने मात्र से उसे चमत्कारी रूप से आराम मिल जाता है। इसी गहरी आस्था के कारण माइग्रेन और सिरदर्द से परेशान तमाम मरीज नियमित रूप से देसू गांव की इस पहाड़ी पर आते हैं और संकट मोचन के चरणों में झाड़ा लगवाकर आरोग्य की प्राप्ति की प्रार्थना करते हैं। वर्ष 1701 ईस्वी में हुआ था प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार इस धार्मिक स्थल का इतिहास सदियों पुराना माना जाता है। मंदिर से जुड़े जानकारों और वहां नियमित रूप से आने वाले भक्तों का कहना है कि देसू के इस संकट मोचन हनुमान मंदिर के साथ कई प्राचीन और चमत्कारी प्रसंग जुड़े हुए हैं। इस ऐतिहासिक संरचना के जीर्णोद्धार को लेकर यह तथ्य सामने आता है कि वर्ष 1701 ईस्वी में महंत श्री फतेह गिरी जी महाराज और उस समय के तत्कालीन ठाकुर साहब द्वारा इसका पुनर्निर्माण कराया गया था। तब से लेकर आज तक यह पवित्र स्थान लगातार लोगों की आस्था और विश्वास का एक बहुत बड़ा केंद्र बना हुआ है। शिव परिवार की स्थापना और महाशिवरात्रि पर केसर की वर्षा इस मंदिर परिसर का धार्मिक दायरा केवल हनुमान जी तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां अन्य देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्तियां भी स्थापित हैं जो इसकी महत्ता को और अधिक बढ़ा देती हैं। इस परिसर में भगवान शिव और माता पार्वती अपने संपूर्ण परिवार के साथ विराजमान हैं। इसके अलावा, इस मंदिर से जुड़ा सबसे अनोखा और रहस्यमयी दावा महाशिवरात्रि के पावन पर्व को लेकर किया जाता है। स्थानीय पुजारियों और श्रद्धालुओं का ऐसा मानना है कि महाशिवरात्रि के खास दिन पर इस मंदिर और इसके आसपास की पूरी पहाड़ी पर प्राकृतिक रूप से केसर की वर्षा होती है। मान्यता के अनुसार उस खास दिन पर संपूर्ण वातावरण और पहाड़ी का क्षेत्र केसरिया रंग में रंगा हुआ नजर आता है, जिसे भक्त किसी बड़े चमत्कार से कम नहीं मानते हैं। इसका आप पर असर इस मंदिर से जुड़ी मान्यताएं और धार्मिक आयोजन स्थानीय लोगों के जीवन और आस्था को गहराई से प्रभावित करते हैं। • भारत में: देश भर के विभिन्न धार्मिक स्थलों की तरह यह मंदिर भी लोगों की आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने का कार्य करता है। ऐसे प्राचीन स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से स्थानीय धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है। • जालौर में: जालौर और देसू गांव के आसपास के रहने वाले लोगों के लिए यह मंदिर स्वास्थ्य लाभ और संकट निवारण का मुख्य केंद्र है। महाशिवरात्रि जैसे पर्वों पर यहां जुटने वाली भीड़ से स्थानीय स्तर पर मेल-जोल और सांस्कृतिक आयोजनों में वृद्धि होती है। ऐसा क्यों हुआ इस मंदिर के इतिहास और मान्यताओं के पीछे सदियों पुरानी परंपराएं और स्थानीय लोगों का अटूट विश्वास मुख्य कारण रहा है। • ऐतिहासिक जीर्णोद्धार: वर्ष 1701 ईस्वी में महंत श्री फतेह गिरी जी महाराज और तत्कालीन ठाकुर साहब द्वारा मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया, जिससे इसका ढांचा सुरक्षित रहा और यह पीढ़ी दर पीढ़ी श्रद्धा का केंद्र बना। • पारंपरिक झाड़ा प्रथा: सदियों से चली आ रही मान्यताओं के कारण लोगों में यह विश्वास पुख्ता हुआ है कि यहां झाड़ा लगवाने से माइग्रेन जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। • भौगोलिक और सांस्कृतिक मान्यता: पहाड़ी पर स्थित होने और शिव परिवार की स्थापना के साथ महाशिवरात्रि पर केसर गिरने की जनश्रुतियां इस स्थान को रहस्यमयी और आध्यात्मिक रूप से विशिष्ट बनाती हैं। सवाल-जवाब 1. संकट मोचन हनुमान मंदिर कहां स्थित है? यह मंदिर राजस्थान के जालौर जिले से लगभग 13 किलोमीटर दूर देसू गांव की एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। 2. इस मंदिर में किस बीमारी के इलाज की मान्यता है? यहां सिर में तेज दर्द और माइग्रेन जैसी पुरानी समस्याओं से पीड़ित लोग हनुमान जी के नाम का झाड़ा लगवाने आते हैं। 3. मंदिर का जीर्णोद्धार कब हुआ था? इस ऐतिहासिक मंदिर का जीर्णोद्धार वर्ष 1701 ईस्वी में महंत श्री फतेह गिरी जी महाराज और तत्कालीन ठाकुर साहब ने करवाया था। 4. महाशिवरात्रि पर इस मंदिर से जुड़ी क्या मान्यता है? स्थानीय लोगों और पुजारियों का दावा है कि महाशिवरात्रि के दिन मंदिर और आसपास की पहाड़ी पर केसर की बारिश होती है। 5. मंदिर में हनुमान जी के अलावा कौन से भगवान विराजमान हैं? इस मंदिर परिसर में भगवान शिव और माता पार्वती अपने पूरे परिवार के साथ विराजमान हैं। https://trendkia.com/rajasthan/jalaura-ke-desoo-ganva-men-sthita-sankat-mochan-hanuman-mndira-siradarda-se-lekara-kesara-ki-barisha-taka-ke-chamatkara-39460 TrendKia — Har trend, sabse pehle.