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  "type": "article",
  "title": "जालोर में पानी का संकट गहराया, हाईवे पर उतरे ग्रामीण, महंगे टैंकर मंगवाने को मजबूर लोग",
  "summary": "राजस्थान के जालोर जिले के ओटवाला गांव में पिछले पंद्रह दिनों से पानी की नियमित सप्लाई बंद होने से नाराज ग्रामीणों ने हाईवे पर जाम लगा दिया। महिलाएं खाली बर्तन लेकर सड़क पर बैठ गईं और प्रशासन से तत्काल जलापूर्ति बहाल करने की मांग की।",
  "content": "राजस्थान के जालोर जिले के अंतर्गत आने वाले ओटवाला गांव में पेयजल की गंभीर किल्लत से जूझ रहे स्थानीय लोगों का रोष आखिरकार सड़कों पर देखने को मिला। पिछले करीब पंद्रह दिनों से घरों में पानी की नियमित सप्लाई पूरी तरह ठप पड़ी हुई है, जिसके चलते परेशान महिलाओं और ग्रामीणों ने मजबूर होकर जालोर-सायला हाईवे पर जाम लगा दिया। हाथ में खाली बर्तन लेकर सड़क पर बैठी महिलाओं ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और जल्द से जल्द पेयजल आपूर्ति बहाल किए जाने की मांग की। इस विरोध प्रदर्शन की वजह से हाईवे पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।\n\nप्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने अपनी आर्थिक पीड़ा साझा करते हुए बताया कि घरों में एक बूंद पानी नहीं आने के कारण उन्हें पूरी तरह से निजी टैंकरों पर आश्रित होना पड़ रहा है। हालात ये हैं कि एक पानी के टैंकर के लिए ग्रामीणों को छह सौ से सात सौ रुपए तक की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे आम परिवारों को हर छह से सात दिन के अंतराल पर पानी का टैंकर मंगवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे उनके घरेलू बजट पर बहुत बड़ा आर्थिक बोझ पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पानी की समस्या इस क्षेत्र के लिए कोई नई बात नहीं है, बल्कि पिछले चार-पांच सालों से हर गर्मी के मौसम में उन्हें नियमित जलापूर्ति के लिए संघर्ष करना पड़ता है।\n\nइस बार पंद्रह दिन से जलापूर्ति बंद रहने के कारण स्थिति विस्फोटक हो गई है। महिलाओं ने बताया कि पानी की तलाश और उसकी व्यवस्था करने में ही उनका पूरा दिन निकल जाता है, जिसके कारण उन्हें अपने रोजमर्रा के अन्य जरूरी काम छोड़कर सिर्फ टैंकर के पीछे भागना पड़ता है। कई बार टैंकर आने के बाद भी पानी सीमित मात्रा में ही मिल पाता है, जिससे पीने की जरूरतें तो जैसे-तैसे पूरी होती हैं लेकिन बाकी घरेलू कामकाज चलाना बेहद कठिन हो जाता है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि सायला के ग्रामीण इलाकों में कुछ खास कृषि बेरों तक पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है और उस पानी का इस्तेमाल सिंचाई या खेती के कामों में हो रहा है, जबकि आम जनता पीने के पानी के लिए तरस रही है।\n\nनाराज ग्रामीणों ने मांग की है कि इस तरह की अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच की जानी चाहिए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। स्थानीय लोगों के अनुसार पानी की इस विकट समस्या को लेकर वे पहले भी कई बार संबंधित विभागों में शिकायत दर्ज करा चुके हैं। उन्होंने अपनी बात मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाने के साथ-साथ अट्ठारह एक हेल्पलाइन पर भी कई बार शिकायतें दर्ज कराई थीं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकला। जब लंबे समय तक कोई सुनवाई नहीं हुई तो सोमवार की सुबह महिलाओं और ग्रामीणों ने एकजुट होकर सीधे हाईवे पर उतरने का कड़ा कदम उठाया।\n\nहाईवे पर जाम लगने की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और जलदाय विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया और वे तुरंत मौके पर पहुंचे। जलदाय विभाग के कनिष्ठ अभियंता रामगोपाल मीणा के साथ-साथ सायला के तहसीलदार और सायला थाने का भारी पुलिस बल भी स्थिति को संभालने के लिए मौके पर जा पहुंचा। अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों से बातचीत शुरू की और उनकी सभी समस्याओं को ध्यान से सुना। लगभग दो घंटे तक चली लंबी बातचीत और समझाइश के बाद अधिकारियों ने ग्रामीणों को खरल स्थित ट्यूबवेल के माध्यम से वैकल्पिक जलापूर्ति शुरू कराने का पक्का आश्वासन दिया।\n\nअधिकारियों के इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने अपना प्रदर्शन समाप्त किया और हाईवे पर लगा जाम खोल दिया। यह विरोध प्रदर्शन सुबह करीब नौ बजे शुरू हुआ था और लगभग ग्यारह बजे के बाद रास्ता पूरी तरह से यातायात के लिए बहाल कर दिया गया। हाईवे बंद रहने के दौरान सड़क के दोनों तरफ वाहनों की आवाजाही पर काफी असर पड़ा। इस संकट के पीछे की वजह बताते हुए जलदाय विभाग के कनिष्ठ अभियंता रामगोपाल मीणा ने स्पष्ट किया कि गुजरात की ओर से नर्मदा नहर के रास्ते आने वाला पानी पिछले दस दिनों से पूरी तरह बंद है, जिसकी वजह से तैतरोल से होने वाली जलापूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है।\n\nविभाग के पास पहले से मौजूद पानी का भंडार भी पूरी तरह खत्म हो चुका था, जिसके कारण ओटवाला और उसके आसपास के तमाम इलाकों में भयंकर पेयजल संकट पैदा हो गया। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल खरल के ट्यूबवेल से वैकल्पिक तौर पर पानी की सप्लाई शुरू कर दी गई है, लेकिन नर्मदा नहर से मुख्य जलापूर्ति दोबारा पूरी तरह सुचारू होने में अभी करीब दस दिन का समय और लग सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक मुख्य जलापूर्ति पूरी तरह बहाल नहीं होती, तब तक प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए गांव में नियमित और पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराना चाहिए, ताकि उन्हें लंबे समय तक महंगे टैंकरों के सहारे न रहना पड़े।\n\nइसका आप पर असर\nजालोर के ओटवाला और आसपास के इलाकों में गहराए इस गंभीर पेयजल संकट का स्थानीय निवासियों के दैनिक जीवन और जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।\n\n• राजस्थान में: ग्रामीण इलाकों में जल जीवन मिशन और ग्रीष्मकालीन जलापूर्ति योजनाओं के क्रियान्वयन पर बड़े सवाल खड़े होते हैं, जिससे प्रशासन को तुरंत वैकल्पिक इंतजाम करने पड़ते हैं।\n• जालोर में: ओटवाला और सायला क्षेत्र के निवासियों को हर छह-सात दिन में छह सौ से सात सौ रुपए खर्च करके निजी टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं, जिससे उनका घरेलू बजट बिगड़ गया है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nओटवाला गांव में उत्पन्न हुए इस भीषण पेयजल संकट के पीछे मुख्य रूप से भू-जल स्तर की समस्या और नहर आधारित जलापूर्ति में अचानक आई तकनीकी बाधा है।\n\n• नर्मदा नहर की सप्लाई बंद: गुजरात से नर्मदा नहर के जरिए आने वाला पानी पिछले दस दिनों से बंद है, जिसके कारण तैतरोल से होने वाली मुख्य जलापूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई।\n• विभागीय भंडार खत्म: जलदाय विभाग के पास रिजर्व में रखा गया पानी भी पूरी तरह समाप्त हो गया, जिससे स्थानीय स्तर पर पानी का कोई वैकल्पिक स्रोत तुरंत उपलब्ध नहीं था।\n• सिंचाई में पानी का डायवर्जन: ग्रामीणों का आरोप है कि ग्रामीण इलाकों में पाइपलाइन के जरिए पानी कृषि बेरों तक पहुंच रहा है, जिससे पेयजल संकट और अधिक विकट हो गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जालोर के किस गांव में पेयजल संकट के कारण हाईवे जाम किया गया?\nजालोर जिले के ओटवाला गांव में पेयजल संकट के कारण ग्रामीणों ने हाईवे जाम किया।\n\n2. ग्रामीणों ने किस हाईवे पर प्रदर्शन किया?\nग्रामीणों और महिलाओं ने जालोर-सायला हाईवे पर खाली बर्तन लेकर प्रदर्शन किया।\n\n3. घरों में पानी की सप्लाई कितने दिनों से बंद थी?\nगांव के घरों में पिछले करीब पंद्रह दिनों से नियमित पानी की सप्लाई बंद थी।\n\n4. निजी पानी टैंकर के लिए ग्रामीणों को कितने रुपए चुकाने पड़ रहे हैं?\nग्रामीणों को एक निजी टैंकर के लिए छह सौ से सात सौ रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं।\n\n5. नर्मदा नहर का पानी क्यों बंद चल रहा है?\nगुजरात से नर्मदा नहर के जरिए आने वाला पानी पिछले दस दिन से बंद है।\n\n6. अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर क्या वैकल्पिक समाधान सुझाया?\nअधिकारियों ने खरल स्थित ट्यूबवेल से वैकल्पिक जलापूर्ति शुरू कराने का आश्वासन दिया।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-28",
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    "पेजयल संकट",
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