जालोर के भवरानी गांव में 90 वर्षीय पुनीदेवी और 89 साल के दरगाराम प्रजापत का एक घंटे के भीतर निधन, एक ही चिता पर हुआ अंतिम संस्कार राजस्थान के जालोर जिले के भवरानी गांव में एक बुजुर्ग दंपति ने जीवन के अंतिम पड़ाव में अनोखी मिसाल पेश की। 90 वर्षीय पत्नी पुनीदेवी के निधन के महज एक घंटे बाद 89 वर्षीय पति दरगाराम प्रजापत ने भी दम तोड़ दिया। राजस्थान के जालोर जिले में स्थित भवरानी गांव से एक हृदयस्पर्शी घटना सामने आई है, जहां जीवन भर एक-दूसरे का साथ निभाने वाले एक बुजुर्ग दंपति ने जीवन के अंतिम सफर में भी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। 90 वर्षीय पुनीदेवी और उनके 89 वर्षीय पति दरगाराम प्रजापत का लगभग एक घंटे के समयांतराल में निधन हो गया। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक और श्रद्धा का माहौल बन गया। परिजनों और ग्रामीणों ने दोनों की अंतिम यात्रा एक साथ निकाली और मुक्तिधाम में एक ही चिता पर उनका अंतिम संस्कार किया। सुबह अचानक बिगड़ी तबीयत और घटित हुई घटना भवरानी गांव के निवासी दरगाराम प्रजापत और उनकी पत्नी पुनीदेवी लंबे समय से अपने भरे-पूरे परिवार के साथ सुखद गृहस्थ जीवन बिता रहे थे। दोनों ही बुजुर्ग अपने घर पर सामान्य और स्वस्थ स्थिति में रह रहे थे। घटना वाले दिन सुबह के समय पुनीदेवी को अचानक हल्का चक्कर आया, और इसके कुछ ही देर बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। पत्नी के अचानक चले जाने की सूचना जब दरगाराम तक पहुंची, तो वे अत्यधिक चिंतित हो गए। जीवनसंगिनी के बिछड़ने के गम में उनका स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ने लगा। इस कठिन परिस्थिति में भी दरगाराम ने अद्भुत संयम का परिचय दिया। उन्होंने घर में मौजूद परिजनों को शांत रहने के लिए कहा और यह निर्देश दिया कि जब तक परिवार के अन्य सदस्य घर न पहुंच जाएं, तब तक कोई भी रोए-धोए नहीं। पत्नी के निधन के महज एक घंटे के भीतर ही दरगाराम ने भी घर पर ही शांतिपूर्वक अपना शरीर त्याग दिया। दूल्हा-दुल्हन की तरह बांधी गई अर्थियों की गांठ एक ही घर में एक घंटे के भीतर पति और पत्नी दोनों के चले जाने की खबर जैसे ही भवरानी गांव में फैली, वहां बड़ी संख्या में ग्रामीणों का जमावड़ा लग गया। हर कोई जीवन भर और मृत्यु में भी साथ रहने वाली इस जोड़ी की चर्चा कर रहा था। परिजनों और ग्रामीणों ने तय किया कि दोनों को अंतिम विदाई भी एक साथ दी जाएगी। अंतिम संस्कार की तैयारियों के दौरान एक विशेष परंपरा निभाई गई। जिस प्रकार विवाह संस्कार के समय दूल्हा और दुल्हन का गठबंधन किया जाता है, ठीक उसी तरह परिजनों ने दरगाराम और पुनीदेवी की अर्थियों को एक गठजोड़े से बांध दिया। जब दोनों की अर्थियां एक साथ मुक्तिधाम के लिए रवाना हुईं, तो वहां मौजूद सैकड़ों परिजनों और ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। एक ही चिता पर संपन्न हुआ अंतिम संस्कार मुक्तिधाम में दोनों बुजुर्गों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया। एक साथ अर्थी उठने और एक ही चिता पर अंतिम विदाई दिए जाने का यह दृश्य पूरे क्षेत्र में कौतूहल और श्रद्धा का केंद्र बन गया। ग्रामीणों ने बताया कि लगभग 90 वर्ष की आयु तक साथ रहने के बाद इस तरह एक घंटे के भीतर दोनों का दुनिया से चले जाना कोई सामान्य बात नहीं है। गांव के बुजुर्गों और निवासियों ने इसे पूर्व जन्म के सत्कर्मों और तपस्या का प्रतिफल माना। ग्रामीणों का कहना था कि भरा-पूरा परिवार छोड़कर, जीवन के अंतिम पड़ाव तक सक्रिय रहते हुए इस तरह पति-पत्नी का एक साथ दुनिया से विदा होना बहुत ही दुर्लभ और प्रेरणादायक है। इसका आप पर असर भारत में: यह घटना भारतीय समाज में पारिवारिक रिश्तों, आपसी जुड़ाव और जीवन भर के साथ के मूल्यों को उजागर करती है। जालोर (राजस्थान) में: भवरानी गांव की इस दुखद और भावनात्मक घटना ने स्थानीय समुदाय को बुजुर्गों के प्रति श्रद्धा और जीवन मूल्यों की मिसाल दी है। सवाल-जवाब 1. जालोर के किस गांव में बुजुर्ग दंपति का एक ही दिन निधन हुआ? जालोर जिले के भवरानी गांव में बुजुर्ग दंपति का लगभग एक घंटे के अंतराल में निधन हुआ। 2. मृतक पति और पत्नी का नाम तथा उनकी आयु क्या थी? पति का नाम दरगाराम प्रजापत (89 वर्ष) और पत्नी का नाम पुनीदेवी (90 वर्ष) था। 3. पत्नी के निधन के बाद दरगाराम प्रजापत ने परिजनों से क्या कहा था? उन्होंने परिजनों को शांत रहने और परिवार के अन्य सदस्यों के आने तक न रोने की सलाह दी थी। 4. दोनों का अंतिम संस्कार किस प्रकार किया गया? दोनों की अर्थियों को गठजोड़े से बांधकर अंतिम यात्रा निकाली गई और एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया। 5. पत्नी के निधन के कितने समय बाद पति ने दम तोड़ा? पत्नी के निधन के लगभग एक घंटे बाद पति का भी निधन हो गया। प्रेरणा और सबक जीवन के सबक: • जीवनभर का समर्पण: 90 वर्ष की उम्र तक एक-दूसरे के प्रति अटूट निष्ठा और प्रेम का पालन करना। • विपत्ति में संयम: कठिन घड़ी में भी परिवार को ढांढस बंधाना और धैर्य बनाए रखना। • सकारात्मक पारिवारिक विरासत: जीवन के अंतिम क्षणों तक एक सशक्त और समृद्ध परिवार का मार्गदर्शन करना। https://trendkia.com/rajasthan/jalore-ke-bhavrani-ganva-men-90-varshiya-punidevi-aura-89-sala-ke-dargaram-prajapat-ka-eka-ghnte-ke-bhitara-nidhana-eka-hi-chita-p-20389 TrendKia — Har trend, sabse pehle.