जालोर के रेवतड़ा में सात प्रवासी घरों में सेंधमारी, 40 लाख से अधिक के जेवर और नकदी ले उड़े चोर राजस्थान के जालोर जिले में स्थित रेवतड़ा गांव में चोरों ने सात बंद मकानों के ताले तोड़कर 40 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति चुरा ली, जिसके विरोध में ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। राजस्थान के जालोर जिले में स्थित सायला थाना क्षेत्र के अंतर्गत रेवतड़ा गांव में सिलसिलेवार चोरियों की घटनाओं ने भारी दहशत फैला दी है। अज्ञात अपराधियों ने एक के बाद एक कुल सात आवासीय परिसरों को अपना निशाना बनाया और वहां से भारी मात्रा में धन और आभूषण पार कर दिए। इन घटनाओं में लगभग 40 लाख रुपये से ज्यादा की नकदी सहित सोने और चांदी के बहुमूल्य जेवरात चोरी चले गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में हुई सेंधमारी के बाद भी स्थानीय प्रशासन द्वारा अब तक किसी भी संदिग्ध को नहीं पकड़ा जा सका है, जिससे इलाके के बाशिंदों में रोष बढ़ता जा रहा है। प्रवासी परिवारों की गैरमौजूदगी का उठाया फायदा रेवतड़ा गांव की एक बड़ी आबादी आजीविका के उद्देश्य से अन्य प्रांतों में निवास करती है। गांव के अधिकांश परिवारों के सदस्य व्यापार, निजी नौकरियों और अन्य व्यावसायिक कार्यों के चलते दक्षिण भारत के विभिन्न शहरों, मुंबई और देश के अन्य हिस्सों में वर्षों से बसे हुए हैं। इस परिस्थिति के कारण उनके पैतृक आवास साल के अधिकांश महीनों में पूरी तरह वीरान और तालों में बंद रहते हैं। शातिर अपराधियों ने इसी शून्य का लाभ उठाया। उन्होंने पहले से निगरानी रखकर केवल उन्हीं मकानों को चुना जो लंबे समय से बंद पड़े थे। इसके बाद दरवाजों और खिड़कियों की चौखटों को क्षतिग्रस्त कर अंदर प्रवेश किया और कमरों में रखी अलमारियों और तिजोरियों के ताले चटकाकर सारा सामान समेट लिया। लगातार वारदातों से ग्रामीणों में गहराता डर एक ही गांव में सात अलग-अलग स्थानों पर हुई इस संगठित चोरी के चलते आम नागरिकों के बीच असुरक्षा की भावना घर कर गई है। जो लोग रोजगार के सिलसिले में सुदूर राज्यों में रह रहे हैं, उन्हें अपने गांव की संपत्ति की चिंता सताने लगी है। अब तक सामने आए ब्योरे के मुताबिक, कुल नुकसान का आंकड़ा 40 लाख रुपये से ऊपर पहुंच चुका है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सायला थाने की पुलिस अब तक एक भी मामले की गुत्थी सुलझाने में कामयाब नहीं हो पाई है। पुलिस तंत्र की इस विफलता के कारण असामाजिक तत्वों के मन से कानून का डर खत्म होता दिखाई दे रहा है और उनके हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। गश्त तेज करने की मांग और प्रदर्शन की चेतावनी अपराध की इन वारदातों पर अंकुश न लगने से क्षुब्ध ग्रामीणों और बाहर रहने वाले प्रवासियों ने प्रशासन के समक्ष कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि पुलिस ने मामलों की गहन पड़ताल कर शीघ्र ही अपराधियों की धरपकड़ नहीं की, तो ग्रामीणों को सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ेगा। स्थानीय लोगों ने मांग रखी है कि रेवतड़ा क्षेत्र में रात्रि गश्त को तत्काल प्रभाव से सघन किया जाए। विशेष तौर पर उन मोहल्लों और गलियों में नियमित निगरानी रखी जाए जहां प्रवासियों के मकान बंद पड़े हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के सुनियोजित अपराधों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। इसका आप पर असर इस सिलसिलेवार चोरी की घटना का सीधा असर गांव में रहने वाले लोगों और बाहर बसे प्रवासी परिवारों की सुरक्षा प्राथमिकताओं पर पड़ा है। • राजस्थान में: ग्रामीण इलाकों में बंद मकानों की निगरानी के प्रति लोगों को अधिक सजग होना पड़ेगा। अपने पैतृक घरों में नकदी और सोने-चांदी के जेवरात छोड़ने के बजाय बैंक लॉकर या सुरक्षित स्थानों का इस्तेमाल करना जरूरी हो गया है। • जालोर में: रेवतड़ा और आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को रात के समय सतर्कता बढ़ानी होगी। ग्रामीण अपने स्तर पर पहरेदारी की व्यवस्था कर सकते हैं और पुलिस से अपने क्षेत्रों में नियमित रात्रि गश्त सुनिश्चित करने का आग्रह कर सकते हैं। • प्रवासी परिवारों के लिए: जो परिवार मुंबई या दक्षिण भारत में रहते हैं, उन्हें अपने बंद घरों में डिजिटल सुरक्षा कैमरे या निगरानी उपकरण लगाने पर विचार करना चाहिए। साथ ही पड़ोसियों या रिश्तेदारों को नियमित रूप से घर की देखरेख का जिम्मा सौंपना सुरक्षित रहेगा। • पुलिस जवाबदेही पर: स्थानीय नागरिकों द्वारा आंदोलन की चेतावनी दिए जाने के बाद पुलिस प्रशासन पर गश्त बढ़ाने और मामलों को जल्द सुलझाने का दबाव बढ़ेगा। इससे क्षेत्र में सुरक्षा गश्त की कार्यप्रणाली में सुधार की संभावना बनेगी। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम लंबे समय से बंद पड़े मकानों की स्थिति और स्थानीय स्तर पर सुरक्षा निगरानी की कमी के चलते घटित हुआ। • बंद पड़े मकानों की आसान उपलब्धता: रेवतड़ा के अनेक निवासी काम के सिलसिले में मुंबई और दक्षिण भारत में रहते हैं, जिससे उनके पैतृक मकान लंबे समय तक खाली रहते हैं। इसी स्थिति ने चोरों को बिना किसी प्रत्यक्ष विरोध के अंदर घुसने का अनुकूल अवसर प्रदान किया। • रेकी और पूर्व योजना: अपराधियों ने केवल उन्हीं सात घरों को चुना जो पूरी तरह सूने थे, जो यह दर्शाता है कि वारदातों को अंजाम देने से पहले इलाके की बाकायदा रेकी की गई थी। दरवाजों और खिड़कियों को तोड़कर अलमारियों को निशाना बनाया गया। • पुलिस गश्त की अपर्याप्तता: क्षेत्र में नियमित रात्रि गश्त और पुलिस उपस्थिति की कमी के चलते बदमाशों ने बिना पकड़े जाने के डर से एक के बाद एक कई मकानों में सेंधमारी की। स्थानीय सायला थाना पुलिस अब तक किसी संदिग्ध की पहचान नहीं कर पाई है। सवाल-जवाब 1. रेवतड़ा गांव में कुल कितने मकानों में चोरी हुई? चोरों ने गांव के कुल सात सूने मकानों के ताले तोड़कर वारदात को अंजाम दिया। 2. इन चोरियों में कितनी संपत्ति का नुकसान हुआ है? चोर इन सात घरों से 40 लाख रुपये से अधिक की नकदी और सोने-चांदी के आभूषण ले उड़े हैं। 3. यह घटना किस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आती है? यह घटना राजस्थान के जालोर जिले में स्थित सायला पुलिस थाना क्षेत्र की है। 4. चोरों ने विशेष रूप से किन घरों को निशाना बनाया? चोरों ने उन प्रवासी परिवारों के बंद मकानों को निशाना बनाया जो रोजगार के सिलसिले में मुंबई, दक्षिण भारत और अन्य राज्यों में रहते हैं। 5. ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से क्या मांग की है? ग्रामीणों ने रात्रि गश्त बढ़ाने और चोरों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की है, साथ ही कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। https://trendkia.com/rajasthan/jalore-ke-rewatda-men-sata-pravasi-gharon-men-sendhamari-40-lakha-se-adhika-ke-jevara-aura-nakadi-le-ure-chora-31793 TrendKia — Har trend, sabse pehle.