# जालोर की रेतीली जमीन पर लहलहा रहे विदेशी खजूर, कम पानी में बंपर मुनाफे की आस

> राजस्थान के जालोर जिले में किसान पारंपरिक खेती से किनारा कर विदेशी किस्मों के खजूर उगा रहे हैं। भीनमाल उपखंड के इलाकों में सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका की खास किस्मों से अच्छी कमाई की उम्मीद जगी है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/jalore-ki-retili-zameen-par-lal-lah-rahe-foreign-khajur-52628 · **Language:** Hindi
**Tags:** जालोर खजूर खेती, भीनमाल कृषि, विदेशी खजूर की किस्में, बरही खलासा मेजूल, नर्मदा नहर बागवानी, राजस्थान कृषि समाचार

राजस्थान के जालोर जिले में कृषि क्षेत्र की तस्वीर तेजी से बदल रही है और यहां के अन्नदाता अब लीक से हटकर नए तौर-तरीकों पर जोर दे रहे हैं। पारंपरिक फसलों से मिलने वाले सीमित मुनाफे से आगे बढ़कर किसान अब ऐसे विकल्पों की तलाश में हैं जो कम पानी की खपत के साथ बेहतर आर्थिक लाभ दे सकें। इसी कड़ी में खजूर की खेती यहां के किसानों के बीच एक मजबूत और आकर्षक विकल्प के रूप में उभरकर सामने आई है। इस शुष्क इलाके की गर्म और सूखी आबोहवा विदेशी किस्मों के पौधों के लिए बेहद मुफीद साबित हो रही है, जिससे खेती के नए द्वार खुले हैं।

 

## भीनमाल उपखंड में विदेशी खजूर का विस्तार
 जिले के भीनमाल उपखंड के अंतर्गत आने वाले भालणी और दाता गांव के किसानों ने इस दिशा में साहसिक कदम उठाते हुए खजूर की बागवानी को अपनाया है। इन खेतों में मुख्य रूप से सऊदी अरब और साउथ अफ्रीका से लाई गई उन्नत किस्मों के पौधे रोपे गए हैं। इन खास किस्मों में बरही, खलासा और मेजूल शामिल हैं। कृषि जानकारों के मुताबिक, इन विदेशी किस्मों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यदि इन्हें सही देखरेख और मुनासिब पर्यावरणीय परिस्थितियां मिल जाएं, तो इनसे बेहद उच्च गुणवत्ता वाले खजूर का उत्पादन किया जा सकता है, जो बाजार में अच्छी कीमत दिलाते हैं।

 

## कम पानी और बेहतर कमाई का नया समीकरण
 स्थानीय स्तर पर खेती से जुड़े हनीफ मेहर ने बताया कि वे पहले पारंपरिक फसलों की ही बुवाई करते थे, लेकिन जब उन्हें खजूर की बागवानी की बारीकियों की जानकारी मिली तो उन्होंने जोखिम उठाकर इसे आजमाने का फैसला किया। उनका कहना है कि जालोर का मौजूदा मौसम खजूर की पैदावार के लिए काफी अनुकूल है। इसके अलावा, अन्य कई प्रमुख फसलों की तुलना में इसमें पानी की आवश्यकता भी काफी कम होती है। यदि पौधों के रोपण से लेकर उनके बड़े होने तक उचित प्रबंधन और देखभाल की जाए, तो किसानों को इससे शानदार आमदनी मिलने की पूरी उम्मीद रहती है।

 

## उचित पौधे का चयन और प्रबंधन
 खजूर की सफल बागवानी के लिए कुछ तकनीकी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक होता है, जिसमें सबसे अहम काम सही और स्वस्थ पौधों का चयन करना है। इसके साथ ही खेतों में पौधों को एक तय और उचित दूरी पर लगाना भी जरूरी होता है ताकि प्रत्येक पौधे को पर्याप्त धूप और हवा मिल सके। समय के साथ जैसे-जैसे पेड़ विकसित होते हैं, तो उचित दूरी होने के कारण उन पर लगने वाले फलों के गुच्छों की सुरक्षा और रखरखाव का काम भी आसान हो जाता है। इसके अलावा, खेत में जलभराव की स्थिति न बने और जरूरत के हिसाब से ही सिंचाई की जाए, इन बातों पर भी विशेष रूप से गौर करना पड़ता है।

 

## नर्मदा नहर के पानी से बदली तस्वीर
 जालोर की धरती पर खजूर की खेती को गति मिलने के पीछे यहां की आबोहवा के अलावा सिंचाई के साधनों का भी बड़ा योगदान है। नर्मदा नहर प्रणाली से जुड़े जिन इलाकों तक पानी पहुंच रहा है, वहां बागवानी फसलों के लिए अपार संभावनाएं पैदा हुई हैं। यही वजह है कि अब क्षेत्र के अन्य किसान भी पारंपरिक खेती के दायरे से बाहर निकलकर खजूर को अपनी आय बढ़ाने का एक नया साधन मान रहे हैं। बरही, खलासा और मेजूल जैसी विदेशी किस्मों की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यहां का कृषि परिदृश्य बदल रहा है। यदि आने वाले दिनों में खजूर की खेती के तहत रकबे में और विस्तार होता है, तो इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी बल्कि जालोर की कृषि पहचान को भी एक नया आयाम मिलेगा।

## इसका आप पर असर
खजूर की यह खेती स्थानीय किसानों के लिए कम पानी में बेहतर आमदनी का नया जरिया बन रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

- **भारत में:** देश के शुष्क और गर्म इलाकों के किसानों को पारंपरिक फसलों से हटकर बागवानी और उच्च मूल्य वाली विदेशी फसलों को अपनाने की प्रेरणा मिलती है।
- **जालोर में:** भीनमाल और आसपास के क्षेत्रों के किसानों के लिए कम सिंचाई में अधिक मुनाफा कमाने के नए रास्ते खुल रहे हैं।
- **सिंचाई संसाधन:** नर्मदा नहर के पानी की उपलब्धता से जिन इलाकों में सिंचाई आसान हुई है, वहां बागवानी और आधुनिक खेती को बढ़ावा मिल रहा है।
- **फसल विविधता:** किसानों के पास पारंपरिक अनाजों के अलावा विदेशी खजूर जैसी नकदी फसलों का एक अतिरिक्त विकल्प जुड़ रहा है।
- **आर्थिक लाभ:** बरही, खलासा और मेजूल जैसी उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों के उत्पादन से बाजार में बेहतर भाव मिलने की संभावना बढ़ती है।

## ऐसा क्यों हुआ
जालोर में विदेशी खजूर की सफल खेती के पीछे यहां की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियां मुख्य कारण हैं। कम पानी की उपलब्धता वाले क्षेत्रों में किसानों द्वारा नए प्रयोग करने की प्रवृत्ति ने इस बदलाव को गति दी है।

- **जलवायु अनुकूलता:** जालोर की गर्म और शुष्क आबोहवा सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका से लाई गई खजूर की किस्मों के विकास के लिए बेहद अनुकूल है।
- **सिंचाई का विस्तार:** नर्मदा नहर के जरिए खेतों तक पानी पहुंचने से क्षेत्र में बागवानी फसलों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार हुई हैं।
- **कम पानी की खपत:** पारंपरिक फसलों के मुकाबले खजूर के पौधों को कम सिंचाई की आवश्यकता होती है, जो जल संकट वाले इलाकों में फायदेमंद है।
- **मुनाफे की तलाश:** किसान पारंपरिक खेती के सीमित मुनाफे से निकलकर अधिक आय देने वाली विदेशी किस्मों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. जालोर में किन गांवों के किसानों ने खजूर की खेती अपनाई है?
भीनमाल उपखंड के भालणी और दाता गांव के किसानों ने खजूर की खेती को अपनाया है।

### 2. खजूर की खेती के लिए जालोर की जलवायु कैसी है?
जालोर की गर्म और शुष्क जलवायु खजूर के पौधों के विकास के लिए काफी अनुकूल साबित हो रही है।

### 3. जालोर में खजूर की किन विदेशी किस्मों की खेती हो रही है?
यहां मुख्य रूप से सऊदी अरब और साउथ अफ्रीका की बरही, खलासा और मेजूल किस्मों की खेती की जा रही है।

### 4. खजूर की खेती में पानी की कितनी आवश्यकता होती है?
अन्य कई पारंपरिक फसलों के मुकाबले खजूर की खेती में पानी की जरूरत काफी कम रहती है।

### 5. खजूर की खेती को बढ़ावा मिलने का मुख्य कारण क्या है?
अनुकूल जलवायु के अलावा नर्मदा नहर से मिलने वाली सिंचाई सुविधा ने बागवानी की संभावनाओं को बढ़ाया है।

## प्रेरणा और सबक
जालोर के किसानों का यह नवाचार साबित करता है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और पारंपरिक लीक से हटकर नए प्रयोग करने से कृषि को नया आयाम दिया जा सकता है।

- **नवाचार अपनाएं:** पारंपरिक फसलों के दायरे से बाहर निकलकर अपनी स्थानीय जलवायु के अनुकूल नई और उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती का जोखिम उठाएं।
- **संसाधनों का सदुपयोग:** सीमित जल संसाधनों और नहर के पानी का सही प्रबंधन कर बागवानी जैसी लाभदायक दिशा में कदम बढ़ाएं।
- **सही चयन करें:** कृषि में सफलता के लिए विदेशी या उन्नत किस्मों का चयन अपनी मिट्टी और मौसम की आबोहवा के मुताबिक ही करें।
- **तकनीकी जानकारी लें:** पौधों के बीच उचित दूरी और उनकी नियमित देखभाल जैसे तकनीकी पहलुओं को समझकर पैदावार को बेहतर बनाएं।

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