# जालौर में 700 साल पुरानी सुंदर रायका की छतरी आज भी देवासी समाज की आस्था का बड़ा केंद्र

> राजस्थान के जालौर में स्थित लगभग सात शताब्दियों पुरानी सुंदर रायका की छतरी और ऐतिहासिक प्रतिमाएं देवासी समाज की समृद्ध लोक परंपरा और पूर्वजों के प्रति गहरी श्रद्धा का जीवंत प्रतीक बनी हुई हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/jalore-men-700-sala-purani-sundar-raika-ki-chhatari-aja-bhi-dewasi-samaja-ki-astha-ka-bara-kendra-49631 · **Language:** Hindi
**Tags:** जालौर, राजस्थान, सुंदर रायका, देवासी समाज, रायका समाज, ऐतिहासिक छतरी, सुंदर भाड़का, धरोहर

राजस्थान की ऐतिहासिक भूमि जालौर अपने भीतर अनगिनत प्राचीन गाथाएं और सांस्कृतिक विरासतें समेटे हुए है। इस क्षेत्र में मौजूद ऐतिहासिक निशानियां केवल स्थापत्य कला के नमूने नहीं हैं, बल्कि वे विभिन्न समाजों के गौरवशाली अतीत की गवाही भी देती हैं। जालौर के ऐसे ही विशिष्ट ऐतिहासिक स्थलों में सुंदर रायका से जुड़ी प्राचीन धरोहर शामिल है, जिसका नाता सदियों से रायका अथवा देवासी समाज की सांस्कृतिक परंपरा और अटूट श्रद्धा से रहा है। यहाँ स्थापित छतरी और प्राचीन मूर्तियां लगभग 700 साल पुरानी मानी जाती हैं, जो बदलते वक्त के बावजूद आज भी पूरी गरिमा के साथ सुरक्षित हैं।

## सात शताब्दियों पुरानी छतरी और ऐतिहासिक मूर्तियां
इस पावन स्थल पर मौजूद स्थापत्य संरचनाओं में एक मुख्य छतरी और कई कलात्मक पाषाण प्रतिमाएं सम्मिलित हैं। जानकारों और स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, यह स्मारक करीब सात सौ वर्ष पुराना है। यह पूरा परिसर सुंदर रायका की स्मृति को समर्पित किया गया है, जिन्हें देवासी समाज में एक अत्यंत प्रतापी और सम्मानीय पूर्वज के तौर पर पूजा जाता है। इसके अतिरिक्त, यहाँ सुंदर भाड़का और सुंदर रायका से संबंधित दुर्लभ मूर्तियां भी स्थापित हैं। पत्थरों पर उकेरी गई ये आकृतियां उस कालखंड की शिल्पकला के साथ-साथ लोक जीवन के विभिन्न पहलुओं को भी उजागर करती हैं।

## रायका समाज के लिए पूर्वजों के प्रति अगाध श्रद्धा
देवासी समाज के बंधुओं के लिए यह स्थान सिर्फ पत्थरों का ढांचा या कोई साधारण स्मारक नहीं है। यह उनके लिए अपने पुरखों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और अपनी सामाजिक पहचान को संजोने का एक पवित्र माध्यम है। पीढ़ी दर पीढ़ी यहाँ के बुजुर्ग अपने बच्चों को सुंदर रायका और सुंदर भाड़का के जीवन से जुड़ी कथाएं सुनाते आए हैं। इसी मौखिक परंपरा के कारण सैकड़ों वर्षों से चली आ रही लोकगाथाएं आज भी जनमानस में पूरी तरह जीवित हैं। सामाजिक मेलजोल और विशेष अवसरों पर समाज के लोग यहाँ आकर शीश नवाते हैं और अपने पूर्वजों के बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हैं।

## नई पीढ़ी को प्राचीन जड़ों से जोड़ने वाली विरासत
आधुनिकता के इस दौर में जहाँ अनेक ऐतिहासिक स्थल विस्मृत होते जा रहे हैं, वहीं जालौर का यह परिसर आज भी युवाओं को अपनी जड़ों की ओर खींचता है। जब समाज की युवा पीढ़ी यहाँ पहुँचती है, तो उन्हें अपने समृद्ध इतिहास, त्याग और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रत्यक्ष अहसास होता है। सदियों का लंबा सफर तय करने के बाद भी सुंदर रायका की स्मृति देवासी समाज के दिलों में उसी ताजगी और आदर के साथ बसी हुई है। यह धरोहर इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि अगर समाज अपनी लोक परंपराओं का आदर करे, तो सदियों पुरानी स्मृतियां भी इतिहास के पन्नों से निकलकर वर्तमान में जीवंत बनी रहती हैं।

## इसका आप पर असर
इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ी प्रमुख बातें आम पाठकों और स्थानीय लोगों को अपनी जड़ों को समझने का अवसर प्रदान करती हैं।

- **राजस्थान में:** राज्य की समृद्ध स्थापत्य और लोक संस्कृति को जानने के इच्छुक पर्यटकों तथा शोधकर्ताओं के लिए यह स्थल अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र है। लोग जालौर यात्रा के दौरान इस 700 साल पुरानी ऐतिहासिक संरचना के दर्शन कर सकते हैं।
- **जालौर में:** स्थानीय निवासियों और देवासी समाज के परिवारों के लिए यह स्थल सामाजिक एकजुटता और पूर्वजों की स्मृति को नमन करने का मुख्य केंद्र बना हुआ है। युवा वर्ग यहाँ जाकर अपने समाज के गौरवशाली इतिहास और पारंपरिक मान्यताओं को सीधे अनुभव कर सकता है।
- **सांस्कृतिक पहचान:** सदियों पुरानी लोक परंपराओं और मौखिक इतिहास का संरक्षण स्थानीय समुदायों की सामूहिक पहचान को मजबूत बनाए रखता है। इससे भावी पीढ़ियां अपने सांस्कृतिक मूल्यों और पुरखों के योगदान से हमेशा जुड़ी रहती हैं।
- **धरोहर संरक्षण:** ऐतिहासिक स्मारकों और छतरियों की देखभाल से स्थानीय स्तर पर प्राचीन कला और स्थापत्य को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है। समुदाय आधारित इस तरह की आस्था धरोहरों को उपेक्षा और क्षरण से बचाने में अत्यंत प्रभावी साबित होती है।

## ऐसा क्यों हुआ
जालौर में स्थित सुंदर रायका की छतरी और मूर्तियां 700 साल पहले स्थापित की गई थीं ताकि समाज के एक प्रतापी पूर्वज के जीवन मूल्यों और स्मृति को हमेशा के लिए संजोकर रखा जा सके।

- **पूर्वज स्मृति का निर्माण:** प्राचीन काल में समाज के आदरणीय और पराक्रमी पुरखों के सम्मान में छतरियां और प्रतिमाएं स्थापित करने की सुदृढ़ परंपरा रही है। सुंदर रायका के प्रति समाज के अगाध सम्मान के कारण लगभग 700 वर्ष पूर्व इस स्मारक का निर्माण कराया गया था।
- **मौखिक परंपरा का निरंतर प्रवाह:** देवासी समाज के बुजुर्गों ने सदियों से सुंदर रायका और सुंदर भाड़का के आख्यानों को लोकगीतों और कथाओं के जरिए जीवित रखा। इस निरंतर संवाद ने इस स्थल के प्रति सामाजिक विश्वास और आस्था को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया।
- **सामुदायिक पहचान का प्रतीक:** खानाबदोश और पशुपालक पृष्ठभूमि वाले समुदायों में ऐसी ऐतिहासिक निशानियां सामाजिक पहचान और एकता का केंद्र बन जाती हैं। यही कारण है कि सदियों के राजनीतिक और सामाजिक बदलावों के बावजूद यह स्थल आज भी अपनी महत्ता बनाए हुए है।

## सवाल-जवाब

### 1. सुंदर रायका की यह ऐतिहासिक छतरी राजस्थान के किस जिले में स्थित है?
यह 700 साल पुरानी प्राचीन छतरी राजस्थान के जालौर जिले में स्थित है।

### 2. यह ऐतिहासिक स्थल किस समाज की आस्था और परंपरा से जुड़ा हुआ है?
यह पवित्र स्थल मुख्य रूप से रायका यानी देवासी समाज की गहरी आस्था और प्राचीन परंपराओं से जुड़ा है।

### 3. जालौर में स्थित यह स्मारक लगभग कितना पुराना माना जाता है?
स्थानीय मान्यताओं और जानकारों के अनुसार यह छतरी और यहाँ स्थापित मूर्तियां करीब 700 वर्ष पुरानी हैं।

### 4. इस स्मारक परिसर में किन-किन से जुड़ी मूर्तियां स्थापित हैं?
यहाँ सुंदर रायका और सुंदर भाड़का से संबंधित प्राचीन पाषाण प्रतिमाएं स्थापित हैं।

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