# जालोर में ओवरलोड ग्रेनाइट ट्रकों का खौफ, DTO दफ्तर के सामने भी बिना सुरक्षा बेल्ट दौड़ रहे वाहन बढ़ा रहे हादसे का जोखिम

> जालोर की सड़कों पर बिना सेफ्टी बेल्ट और ओवरलोड ग्रेनाइट ब्लॉक लेकर दौड़ रहे ट्रक राहगीरों के लिए खतरा बने हुए हैं। परिवहन कार्यालय के सामने से गुजरने के बावजूद निगरानी दल की कमी के चलते प्रभावी कार्रवाई में अड़चन आ रही है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-08-26 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/jalore-men-ovaraloda-grenaita-trakon-ka-khaupha-dto-daphtara-ke-samane-bhi-bina-suraksha-belta-daura-rahe-vahana-barha-rahe-hadase-22542 · **Language:** Hindi
**Tags:** जालोर समाचार, ग्रेनाइट ट्रक, ओवरलोडिंग, परिवहन विभाग जालोर, सड़क सुरक्षा, राजस्थान समाचार

जालोर जिले की सड़कों पर हर दिन दौड़ने वाले सैकड़ों भारी ग्रेनाइट ट्रक राहगीरों और वाहन चालकों के लिए जान का जोखिम बनते जा रहे हैं। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले इन वाहनों में विशालकाय पत्थर के ब्लॉक बिना किसी मजबूत सेफ्टी बेल्ट या सुरक्षा इंतजामों के लादे जा रहे हैं। चिंताजनक पहलू यह है कि परिवहन विभाग (DTO) का कार्यालय खुद जिस मुख्य मार्ग पर स्थित है, वहां से भी ये बेकाबू और ओवरलोड वाहन दिन-रात आसानी से गुजरते रहते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों की सरेआम अनदेखी और क्षमता से अधिक भार लादने के कारण कभी भी कोई बड़ा हादसा घट सकता है।

## इंडस्ट्रियल हब से रोजाना गुजरते हैं सैकड़ों ट्रक
जालोर में बड़ी संख्या में ग्रेनाइट प्रसंस्करण और निर्माण इकाइयां कार्यरत हैं। शहर के दोनों किनारों पर टू-फेज और थर्ड-फेज औद्योगिक क्षेत्र फैले हुए हैं। इन औद्योगिक क्षेत्रों से रोजाना लगभग 250 से 300 ट्रक बड़े-बड़े ग्रेनाइट ब्लॉक लोड करके विभिन्न गंतव्यों के लिए रवाना होते हैं। इनमें से अधिकांश माल राजसमंद और किशनगढ़ जैसे प्रमुख व्यापारिक शहरों के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भेजा जाता है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इन वाहनों में से 50 से अधिक ट्रक रोजाना ऐसे होते हैं जिनमें क्षमता से अधिक वजन भरा होता है और भारी पत्थरों को बांधने के लिए सुरक्षा बेल्ट का उपयोग नहीं किया जाता।

## परिवहन कार्यालय के सामने उड़ रही नियमों की धज्जियां
जालोर-भीनमाल रोड पर जिला परिवहन अधिकारी (DTO) का कार्यालय स्थित है। हैरानी की बात यह है कि इस प्रशासनिक दफ्तर के ठीक सामने से बिना सुरक्षा बेल्ट के भारी-भरकम ब्लॉक ले जाते ट्रक लगातार निकलते रहते हैं। स्थानीय नागरिकों ने कई बार इस संबंध में शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन स्थायी समाधान न निकलने से वाहन चालकों के हौसले बुलंद हैं। लोगों का सवाल है कि जब मुख्य सड़क और विभागीय दफ्तर के बाहर ही नियमों की अनदेखी हो रही है, तो जिले के दूर-दराज इलाकों में निगरानी कैसे संभव हो पाएगी। धवला रोड, स्वरूपपुरा रोड और आहोर रोड जैसे व्यस्त मार्गों पर भी यही स्थिति बनी हुई है।

## पहले भी हो चुके हैं खतरनाक हादसे
शहर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा में हुई इस लापरवाही के कारण पूर्व में भी गंभीर घटनाएं घट चुकी हैं। लगभग आठ महीने पहले आहोर उपखंड के कोराना गांव में सड़क धंसने से ग्रेनाइट ब्लॉक से भरा एक ट्रक अनियंत्रित हो गया था। इस दौरान ट्रक से तीन बेहद भारी पत्थर के ब्लॉक सड़क पर गिर गए थे। गनीमत यह रही कि उस समय वहां से कोई पैदल यात्री या अन्य वाहन नहीं गुजर रहा था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। इसी तरह करीब एक साल पहले रामसीन के सिरोही रोड पर सड़क के बीचोबीच एक विशाल ग्रेनाइट ब्लॉक गिर गया था, जिसने न केवल यातायात को ठप कर दिया था बल्कि सड़क को भी भारी नुकसान पहुंचाया था।

## संसाधनों की कमी और विभागीय कार्रवाई का ब्योरा
मामले में जालोर के DTO ओम प्रकाश ने बताया कि जिले में ओवरलोडिंग और यातायात नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी निगरानी रखने के लिए कम से कम दो फ्लाइंग टीमों की आवश्यकता है। हालांकि, वर्तमान में विभाग के पास केवल एक ही फ्लाइंग टीम उपलब्ध है। इसके बावजूद विभाग अपनी सीमाओं के भीतर रहकर लगातार कार्रवाई कर रहा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, बीते एक वर्ष में बिना सेफ्टी बेल्ट और ओवरलोडिंग के कुल 329 चालान काटे गए हैं। इसके अतिरिक्त खनिज और अन्य सामग्रियों की रवानगी के दौरान चेकिंग के माध्यम से 887 वाहनों के खिलाफ ऑनलाइन चालान जारी किए गए हैं।

## कलेक्टर और एसपी के निर्देश पर समझाइश अभियान
DTO ने यह भी जानकारी दी कि जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP) के स्पष्ट निर्देशों के तहत वाहन चालकों और ट्रांसपोर्टरों को नियमों का पालन करने के लिए नियमित रूप से समझाया जा रहा है। इसके बाद भी कई ट्रक चालक लापरवाही बरतते हुए ओवरलोड गाड़ियां सड़कों पर उतार रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि केवल चालान काटने तक सीमित न रहकर सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत पालन अनिवार्य कराया जाए। ग्रेनाइट ब्लॉक को बेल्ट से कसकर बांधने और क्षमता से अधिक वजन न लादने की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि आमजन की जान-माल की रक्षा हो सके।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** ओवरलोडिंग और बिना सुरक्षा बेल्ट के चल रहे भारी मालवाहकों पर सख्त कार्रवाई न होने से राष्ट्रीय राजमार्गों पर हादसों का खतरा बढ़ता है।

**जालोर में:** जालोर-भीनमाल, धवला और आहोर मार्ग पर यात्रा करने वाले स्थानीय राहगीरों और वाहन चालकों को अनियंत्रित ग्रेनाइट ब्लॉकों से जान-माल का सीधा खतरा बना हुआ है।

## सवाल-जवाब

### 1. जालोर में ग्रेनाइट ट्रकों से क्या खतरा बना हुआ है?
ट्रकों में भारी ग्रेनाइट ब्लॉक बिना किसी सेफ्टी बेल्ट और क्षमता से अधिक लादे जा रहे हैं, जिससे सड़क पर ब्लॉक गिरने और बड़े हादसे होने का डर है।

### 2. ग्रेनाइट फैक्ट्रियों से रोजाना कितने ट्रक निकलते हैं?
जालोर के टू-फेज और थर्ड-फेज औद्योगिक क्षेत्रों से रोजाना लगभग 250 से 300 ट्रक निकलते हैं, जिनमें से 50 से अधिक में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई जाती है।

### 3. क्या जालोर में पहले भी ग्रेनाइट ब्लॉक गिरने के हादसे हुए हैं?
हां, करीब 8 महीने पहले कोराना गांव में सड़क धंसने से 3 भारी ब्लॉक गिरे थे और 1 साल पहले रामसीन सिरोही रोड पर भी एक विशाल ब्लॉक गिरा था।

### 4. परिवहन विभाग प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रहा है?
DTO के अनुसार जिले में प्रभावी निगरानी के लिए कम से कम 2 फ्लाइंग टीमों की जरूरत है, जबकि वर्तमान में केवल 1 टीम ही उपलब्ध है।

### 5. परिवहन विभाग ने अब तक कितने चालान काटे हैं?
विभाग ने बीते एक वर्ष में ओवरलोडिंग और बिना सीट बेल्ट के 329 चालान किए हैं और रवानगी के दौरान 887 ऑनलाइन चालान काटे हैं।

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