# जालौर का अनूठा नाड़ी वाले गणपति मंदिर: अधिकारियों के प्रमोशन की मन्नत और मानव नसों जैसी दिखती है भगवान की प्रतिमा

> जालौर जिले के भीनमाल में स्थित नाड़ी वाले गणपति मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है। यहां की मूर्ति पर मानव शरीर जैसी नसें दिखाई देती हैं और ऐसी मान्यता है कि सरकारी अधिकारियों की पदोन्नति की मन्नतें यहां पूरी होती हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/jalore-unique-nadi-wale-ganapati-temple-from-bureaucrat-promotions-to-vein-like-carvings-on-the-idol-32700 · **Language:** Hindi
**Tags:** जालौर मंदिर, भीनमाल गणपति, नाड़ी वाले गणपति, गणेश महोत्सव, राजस्थान पर्यटन, सिद्धिविनायक मंदिर

राजस्थान के जालौर जिले के भीनमाल शहर में स्थित नाड़ी वाले गणपति मंदिर की ख्याति अपनी प्राचीनता, चमत्कारी इतिहास और अनूठी मान्यताओं के कारण दूर-दूर तक फैली हुई है। खजूरिया नाले के निकट बने इस मंदिर में गणेश महोत्सव के दौरान खास धार्मिक आयोजनों की धूम रहती है, जिसमें हिस्सा लेने के लिए भारी तादाद में भक्त पहुंचते हैं। इसके अलावा, सप्ताह के हर बुधवार को इस पावन परिसर में किसी मेले जैसा जीवंत और भव्य दृश्य देखने को मिलता है।

## पौराणिक कथा और राजा क्षेम की तपस्या
मंदिर से जुड़ी प्राचीन लोक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में भीनमाल को श्रीमाल नाम से पुकारा जाता था। उस दौरान राजा क्षेम ने इसी पवित्र भूमि पर भगवान विनायक को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। ऐसी आस्था है कि उनकी साधना से संतुष्ट होकर गणेश जी इसी जगह प्रकट हुए और राजा को एक शाप से पूरी तरह मुक्ति दिलाई। इस प्रसंग के बाद ही यहां भगवान गणपति की स्थापना की गई और नियमित रूप से पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हुआ जो आज भी जारी है।

## मूर्ति में दिखाई देती हैं मानव शरीर की नसें
सिद्धिविनायक मंदिर विकास समिति के सचिव अमृतलाल डी. प्रजापत के अनुसार, यह स्थल अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी माना जाता है। जब उत्सव या विशेष अवसरों पर भगवान गणेश का श्रृंगार किया जाता है, तो उनकी प्रतिमा पर मानव शरीर की नसों जैसी बनावट साफ तौर पर नजर आती है। इस मंदिर की एक खास विशेषता यह भी है कि यहां सरकारी अधिकारी और विभिन्न विभागों के कर्मचारी अपनी पदोन्नति की कामना लेकर आते हैं। केवल भीनमाल ही नहीं बल्कि अन्य दूर-दराज के क्षेत्रों से भी अफसर अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां पहुंचते हैं। लोगों का विश्वास है कि मन्नत पूरी होने के बाद कई अधिकारी उच्च पदों पर आसीन हुए हैं। पूर्व काल में भीनमाल के एसडीएम भी यहां आए थे और बाद में उनका प्रमोशन हुआ था।

## चमत्कार और कारीगर के सुरक्षित बचने की घटना
मंदिर समिति के सचिव ने आस्था को बल देने वाली एक और रोमांचक घटना का भी जिक्र किया। उनके बताए अनुसार, एक बार मंदिर में रंग-रोगन और मरम्मत का काम चल रहा था, तभी एक कारीगर ऊंचे गुंबद की छत से अचानक नीचे आ गिरा। हैरान करने वाली बात यह रही कि उस कारीगर को खरोंच तक नहीं आई और वह सुरक्षित बच गया। मंदिर से जुड़े ऐसे कई प्रसंग और अनुभव श्रद्धालुओं के मन में इस स्थान के प्रति अटूट विश्वास और चमत्कारी मान्यताओं को और अधिक मजबूत बनाते हैं।

## वर्तमान मंदिर का निर्माण और जीर्णोद्धार कार्य
मंदिर के इतिहास के बारे में सचिव बताते हैं कि प्राचीन मंदिर के समय के साथ ध्वस्त हो जाने के बाद लंबे अरसे तक यहां केवल पुराने अवशेष ही बचे रहे थे। इसके बाद आज से करीब 50 वर्ष पूर्व वर्तमान भव्य मंदिर का निर्माण करवाया गया। समय के साथ मंदिर की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करने और इसके सौंदर्यीकरण के लिए वर्ष 2007 में सिद्धिविनायक मंदिर विकास समिति का औपचारिक गठन किया गया। इस समिति के प्रयासों से मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया, सुरक्षा के लिए चारदीवारी बनाई गई, पास की नाड़ी का सौंदर्यीकरण किया गया और पूरे परिसर में बड़े पैमाने पर पौधरोपण जैसे सकारात्मक कार्य संपन्न कराए गए।

## गणेश महोत्सव और साप्ताहिक आयोजनों की रौनक
पवित्र गणेश महोत्सव के दौरान इस मंदिर को रंग-बिरंगी और आकर्षक रोशनी से बेहद खूबसूरती से सजाया जाता है, और कई प्रकार के विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं। इसके अतिरिक्त, हर बुधवार को भक्तों का तांता लगा रहता है और दूर-दराज से लोग दर्शन लाभ पाने आते हैं। समृद्ध इतिहास, अनूठी मान्यताओं और गहरी आस्था का यह केंद्र आज भी भीनमाल के प्रमुख और विशिष्ट धार्मिक स्थलों में अपनी एक अलग और अनूठी पहचान संजोए हुए है।

## इसका आप पर असर
इस मंदिर की अनूठी मान्यताओं और धार्मिक आयोजनों का स्थानीय स्तर पर गहरा प्रभाव है, जिससे क्षेत्र में पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।

- **भारत में:** देश भर के प्राचीन और ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था मजबूत होती है और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है।
- **जालौर में:** भीनमाल और आसपास के क्षेत्रों के स्थानीय निवासियों, श्रद्धालुओं तथा प्रशासनिक अधिकारियों के बीच यह मंदिर गहरी आस्था और मेलजोल का मुख्य केंद्र बना रहता है।

## ऐसा क्यों हुआ
मंदिर के इतिहास और मान्यताओं के पीछे सदियों पुरानी पौराणिक कथाएं और स्थानीय लोगों की गहरी आस्तिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं।

- **राजा क्षेम की तपस्या:** प्राचीन काल में राजा क्षेम द्वारा किए गए तप के फलस्वरूप भगवान विनायक के अवतरित होने की मान्यता इस स्थान के धार्मिक महत्व का मुख्य आधार है।
- **ऐतिहासिक जीर्णोद्धार:** पुराने अवशेषों के नष्ट होने के बाद लगभग 50 वर्ष पूर्व नए मंदिर के निर्माण और 2007 में समिति के गठन से इसके विकास को व्यवस्थित रूप मिला।
- **चमत्कारी प्रसंग:** कारीगर के सुरक्षित बचने जैसी घटनाओं और अनूठी शारीरिक बनावट वाली मूर्ति ने श्रद्धालुओं के बीच इस स्थान की प्रतिष्ठा को और अधिक सुदृढ़ किया है।

## सवाल-जवाब

### 1. नाड़ी वाले गणपति मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर राजस्थान के जालौर जिले के भीनमाल में खजूरिया नाले के पास स्थित है।

### 2. इस मंदिर से कौन सी प्रमुख मान्यता जुड़ी है?
ऐसी मान्यता है कि यहां सरकारी अधिकारी अपनी पदोन्नति की मन्नत मांगने आते हैं और मन्नत पूरी होने पर ऊंचे पदों पर पहुंचते हैं।

### 3. मंदिर की मूर्ति में क्या अनोखी विशेषता दिखाई देती है?
भगवान गणेश का श्रृंगार करने पर उनकी मूर्ति में मानव शरीर जैसी नसें दिखाई देती हैं।

### 4. वर्तमान मंदिर का निर्माण कब हुआ था?
पुराने मंदिर के अवशेषों के बाद वर्तमान मंदिर का निर्माण लगभग 50 वर्ष पहले करवाया गया था।

### 5. सिद्धिविनायक मंदिर विकास समिति का गठन कब किया गया था?
मंदिर की व्यवस्थाओं और विकास कार्यों को बेहतर बनाने के लिए वर्ष 2007 में इस समिति का गठन किया गया था।

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