जनापाव की पहाड़ियों से यमुना तक चंबल का सफर: जानिए कैसे चार बड़े बांधों से होकर गुजरती है यह जीवनदायिनी नदी मध्य प्रदेश की पहाड़ियों से निकलने वाली चंबल नदी पर बने चार विशाल बांध किस तरह पानी को रोकते, बिजली बनाते और खेतों तक पहुंचाते हैं, जानिए इसकी पूरी यात्रा। चंबल नदी का सफर भूगोल और बेहतरीन इंजीनियरिंग का एक ऐसा अनोखा उदाहरण है, जो लाखों लोगों के जीवन को सीधे प्रभावित करता है। मध्य प्रदेश में विंध्याचल पर्वतमाला के पास स्थित जनापाव क्षेत्र से निकलने वाली यह विशाल नदी आगे बढ़ते हुए कई जिलों का पानी अपने साथ समेट लेती है। मानसून के समय जब इस नदी का जलस्तर चरम पर होता है, तो अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि कोटा बैराज तक पहुंचने वाला यह अथाह पानी आखिर आता कहां से है। इसका जवाब चंबल नदी पर बने उन चार बड़े बांधों में छिपा है, जो सिलसिलेवार तरीके से इस पानी को संजोते और आगे बढ़ाते हैं। गांधी सागर बांध: पहला और सबसे विशाल जलाशय इस पूरी परियोजना की शुरुआत मध्य प्रदेश से होती है, जहां चंबल नदी अपने ऊपरी जल ग्रहण क्षेत्र यानी कैचमेंट एरिया, विंध्य की पहाड़ियों और बरसाती नालों व छोटी नदियों के पानी को समेटते हुए आगे बढ़ती है। इस मार्ग पर पहला पड़ाव गांधी सागर बांध है, जो चंबल घाटी परियोजना का सबसे पहला और सबसे बड़ा बांध है। इस बांध में पानी का एक बहुत बड़ा भंडार सुरक्षित रखा जाता है। यहां पानी के भारी दबाव का उपयोग करके जलविद्युत का उत्पादन किया जाता है, जिसके बाद पानी को पूरी तरह नियंत्रित तरीके से आगे राजस्थान की सीमा की ओर छोड़ दिया जाता है। राणा प्रताप सागर तक 52 किलोमीटर का सफर गांधी सागर बांध से छोड़े जाने के बाद यह पानी लगभग 52 किलोमीटर का रास्ता तय करके राणा प्रताप सागर बांध तक पहुंचता है। इस सफर के दौरान रास्ते में पड़ने वाले आस-पास के कैचमेंट एरिया का बरसाती पानी भी नदी में मिल जाता है, जिससे इसका प्रवाह और मजबूत हो जाता है। राणा प्रताप सागर बांध में भी इस पानी का मुख्य उपयोग बिजली बनाने और जल संरक्षण के लिए किया जाता है। इसके बाद यहां से भी नियंत्रित मात्रा में पानी को अगले बांध की तरफ रवाना किया जाता है। जवाहर सागर बांध: बिजली उत्पादन का तीसरा बड़ा केंद्र राणा प्रताप सागर से निकलने के बाद पानी इस श्रृंखला के तीसरे महत्वपूर्ण बांध जवाहर सागर तक पहुंचता है। चंबल घाटी परियोजना के इस तीसरे पड़ाव पर भी बड़े पैमाने पर पनबिजली यानी हाइड्रोइलेक्ट्रिसिटी तैयार की जाती है। बारिश के मौसम में जब स्थानीय पहाड़ी क्षेत्रों का पानी इसमें मिलता है, तो जवाहर सागर का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है। यहां से छोड़ा गया पानी सीधे कोटा की दिशा में आगे बढ़ता है। कोटा बैराज: सिंचाई और पेयजल का आखिरी पड़ाव इस पूरी जल यात्रा का चौथा और अंतिम मुख्य पड़ाव कोटा बैराज है। यहां पहुंचने वाला लगभग पूरा पानी गांधी सागर, राणा प्रताप सागर और जवाहर सागर बांधों से ही बहकर आता है। इस बैराज से दाईं और बाईं ओर दो मुख्य नहरें निकलती हैं, जो राजस्थान और मध्य प्रदेश के लाखों हेक्टेयर कृषि क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी पहुंचाती हैं। वर्षा ऋतु में जब चंबल नदी पूरे उफान पर होती है, तब कोटा बैराज के द्वार खोले जाने का नजारा बेहद खूबसूरत और विहंगम दिखाई देता है। सिंचाई के अलावा कोटा शहर और उसके आस-पास के इलाकों की पूरी पेयजल व्यवस्था इसी बैराज के पानी पर टिकी हुई है। यहां से छोड़ा गया अतिरिक्त पानी चंबल के प्राकृतिक बहाव के साथ आगे बढ़ता है और अंत में उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश कर यमुना नदी में मिल जाता है। इसका आप पर असर • राष्ट्रीय स्तर पर: चंबल नदी घाटी परियोजना दो बड़े राज्यों, मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच जल-साझेदारी और जलविद्युत उत्पादन का एक बेहतरीन मॉडल है जो ग्रिड को स्थिरता देती है। • स्थानीय स्तर पर (कोटा और सीमावर्ती जिलों में): कोटा बैराज और चंबल के अन्य बांध सीधे तौर पर राजस्थान और मध्य प्रदेश के लाखों किसानों की सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा करते हैं और कोटा शहर के लिए पेयजल का मुख्य स्रोत हैं। सवाल-जवाब 1. चंबल नदी का उद्गम स्थल कहाँ है? चंबल नदी का उद्गम मध्य प्रदेश में विंध्याचल पर्वतमाला के पास स्थित जनापाव क्षेत्र से होता है। 2. चंबल नदी पर बने चार मुख्य बांध कौन-कौन से हैं? इस नदी पर बने चार प्रमुख बांध गांधी सागर बांध, राणा प्रताप सागर बांध, जवाहर सागर बांध और कोटा बैराज हैं। 3. राणा प्रताप सागर बांध, गांधी सागर बांध से कितनी दूरी पर स्थित है? यह बांध गांधी सागर बांध से लगभग 52 किलोमीटर नीचे की ओर स्थित है। 4. कोटा बैराज का मुख्य काम अन्य तीन बांधों से किस तरह अलग है? अन्य तीन बांधों का मुख्य काम बिजली बनाना है, जबकि कोटा बैराज का प्राथमिक काम राजस्थान और मध्य प्रदेश में सिंचाई के लिए नहरों द्वारा पानी वितरित करना और पेयजल उपलब्ध कराना है। 5. चंबल नदी का पानी अंत में कहाँ जाकर मिलता है? चंबल नदी का अतिरिक्त पानी उत्तर प्रदेश में जाकर अंततः यमुना नदी में मिल जाता है। https://trendkia.com/rajasthan/janapav-ki-pahariyon-se-yamuna-taka-chambal-ka-saphara-janie-kaise-chara-bare-bandhon-se-hokara-gujarati-hai-yaha-jivanadayini-nad-3235 TrendKia — Har trend, sabse pehle.