जवाई बांध में गिरा जलस्तर, प्यास बुझाने के लिए पाली में जोधपुर से वॉटर ट्रेन चलाने की तैयारी कम बारिश के चलते जवाई बांध में केवल 24 फीट पानी बचा है, जिससे पाली जिले में आगामी तीन महीनों में गंभीर जल संकट से निपटने के लिए रेलवे टैंकर चलाने का प्रस्ताव तैयार हो रहा है। पश्चिमी राजस्थान का पाली जिला एक बार फिर गंभीर पेयजल किल्लत के मुहाने पर आकर खड़ा हो गया है। कमजोर मानसूनी वर्षा की वजह से इलाके के अधिकांश जलाशय सूखने की स्थिति में हैं। जिले की जीवनरेखा माने जाने वाले जलाशय में जल का भंडार तेजी से नीचे आ चुका है, जिसके चलते स्थानीय प्रशासन को आपातकालीन उपायों की समीक्षा करनी पड़ रही है। इसी क्रम में जोधपुर से रेलवे टैंकरों के जरिए पानी मंगवाने की कवायद शुरू की जा रही है, जो पहले भी कई मर्तबा संकटकाल का मुख्य सहारा रही है। तीन महकमों की साझा रणनीति और प्रशासनिक प्रस्ताव जिले में संभावित जल संकट से निपटने के लिए संबंधित विभाग मिलकर कार्ययोजना तैयार कर रहे हैं। इस पूरी आपातकालीन व्यवस्था को अमलीजामा पहनाने में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, बिजली वितरण निगम (डिस्कॉम) और उत्तर पश्चिम रेलवे की संयुक्त भूमिका रहती है। पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु राज्य प्रशासन के समक्ष एक औपचारिक प्रस्ताव भेजने की तैयारी की जा रही है, जिससे समय रहते रेल परिवहन की अनुमति और बजट आवंटन तय हो सके। ऐतिहासिक रूप से बड़े क्षेत्र की जरूरतें पूरी करने वाले इस जलस्रोत की मौजूदा स्थिति स्थानीय निवासियों के लिए चिंता का सबब बन चुकी है। महाराजा उम्मेद सिंह का दूरदर्शी कदम और निर्माण यात्रा इस ऐतिहासिक बांध की नींव तत्कालीन रियासती दौर में बारम्बार आने वाले अकाल से इंसानों व मवेशियों की रक्षा के उद्देश्य से रखी गई थी। जोधपुर के तत्कालीन शासक महाराजा उम्मेद सिंह ने 12 मई 1946 को इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास किया था। विख्यात अभियंता एडगर तथा मोती सिंह के कुशल मार्गदर्शन में इस विशाल ढांचे का निर्माण पूरा हुआ था, जिसने मारवाड़ के शुष्क अंचल को नई संजीवनी प्रदान की थी। भराव क्षमता के आंकड़े और मौजूदा भंडार का गणित मारवाड़ अंचल के सबसे वृहद बांध का दर्जा रखने वाला यह जलाशय पहले जोधपुर महानगर और आसपास की कृषि भूमि की प्यास बुझाता रहा। बाद के दौर में जब जोधपुर को इंदिरा गांधी नहर परियोजना से जोड़ दिया गया, तब इस जलाशय का संपूर्ण जल विशेष रूप से पाली जिले की आवश्यकताओं के लिए आरक्षित कर दिया गया। पूर्ण भराव की स्थिति में इस बांध की कुल क्षमता 61.25 फीट है, जो लगभग 7300 मिलियन घन फीट पानी के बराबर मानी जाती है। वर्तमान समय में बांध का जलस्तर सिमटकर महज 24 फीट पर पहुंच गया है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के मौजूदा उपभोग विश्लेषण के मुताबिक, यह 24 फीट जल भंडार पाली शहरी क्षेत्र और उससे जुड़े ग्रामीण अंचलों की पेयजल जरूरतों को सिर्फ अगले 3 माह यानी करीब 90 दिनों तक ही पूरा करने में सक्षम है। वॉटर ट्रेन का सफरनामा और संचालन लागत का ब्योरा पाली में गंभीर सूखे के दौरान सबसे पहले 25 जुलाई 2002 को जोधपुर के भगत की कोठी रेलवे स्टेशन से विशेष जल ट्रेन रवाना की गई थी। इसके उपरांत आपात स्थितियों में वर्ष 2009, 2016, 2019 तथा 2022 में भी इस रेल सेवा का उपयोग किया गया। सामान्यतः इस विशेष ट्रेन में 40 टैंकर बोगियां जोड़ी जाती हैं, जो प्रति चक्कर लगभग 20 से 21 लाख लीटर यानी 2.1 MLD पानी पाली के जलाशयों तक पहुंचाती हैं। इस परिवहन के एवज में रेलवे द्वारा जलदाय महकमे से मालभाड़ा वसूला जाता है। एक फेरे का औसत व्यय करीब 4 लाख से 4.5 लाख रुपये बैठता है। सुचारू आपूर्ति के लिए रोजाना 4 से 5 फेरे लगाए जाते हैं, जिससे प्रतिदिन का कुल वित्तीय भार लगभग 18 से 22 लाख रुपये तक पहुंच जाता है। इसका आप पर असर पाली में गहराते जल संकट और संभावित वॉटर ट्रेन संचालन से स्थानीय निवासियों पर सीधा असर पड़ेगा। • भारत में: जलवायु परिवर्तन और मानसून की अनिश्चितता से निपटने के लिए अंतर-विभागीय आपदा तंत्र के संचालन का उदाहरण सामने आया है। यह दर्शाता है कि भविष्य में अन्य शुष्क क्षेत्रों में भी रेलवे आधारित जल आपूर्ति मॉडल का उपयोग बढ़ सकता है। • पाली में: शहरी और ग्रामीण इलाकों में पाइपलाइन आपूर्ति का समय सीमित हो सकता है और पानी की राशनिंग शुरू हो सकती है। नागरिकों को अगले 90 दिनों तक दैनिक उपभोग में संयम बरतने और भंडारण के उचित प्रबंध करने होंगे। • राजकोषीय प्रभाव: प्रतिदिन 18 से 22 लाख रुपये का संचालन खर्च सार्वजनिक खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय भार डालेगा। इस विशेष बजट आवंटन से सरकार को अन्य स्थानीय विकास कार्यों के फंड का संतुलन बनाना पड़ सकता है। • परिवहन और आपूर्ति: भगत की कोठी और पाली के बीच प्रतिदिन 4 से 5 रेल फेरे लगने से ट्रैक पर मालगाड़ी संचालन का विशेष शेड्यूल लागू रहेगा। इससे स्थानीय जल वितरण केंद्रों पर टैंकरों की आवाजाही में तेजी आएगी। ऐसा क्यों हुआ पाली जिले में यह संकट कम मानसूनी बारिश और जवाई बांध में घटते जल संचय के कारण उत्पन्न हुआ है। • सीधा कारण: चालू मानसूनी सत्र में पर्याप्त वर्षा न होने से जवाई बांध अपनी पूर्ण भराव क्षमता 61.25 फीट के मुकाबले घटकर केवल 24 फीट पर आ गया है। इस सीमित जल भंडार से केवल 90 दिनों की आपूर्ति संभव बची है। • ऐतिहासिक निर्भरता: जोधपुर को पूर्व में इंदिरा गांधी नहर से जोड़ने के बाद जवाई बांध का संपूर्ण पानी केवल पाली जिले के लिए निर्धारित कर दिया गया था, जिससे इस एक जलाशय पर पाली की निर्भरता अत्यधिक बढ़ गई। • पूर्व संकटों की पुनरावृत्ति: यह स्थिति पहली बार नहीं बनी है, बल्कि 2002, 2009, 2016, 2019 और 2022 के सूखे के दौरान भी ट्रेन द्वारा पानी पहुंचाने की नौबत आ चुकी है। • अगला प्रशासनिक कदम: जलदाय विभाग, बिजली निगम और रेलवे के संयुक्त समन्वय से राज्य सरकार को बजट व संचालन प्रस्ताव भेजा जा रहा है ताकि आपूर्ति टूटने से पहले ट्रेनें शुरू की जा सकें। सवाल-जवाब 1. जवाई बांध में वर्तमान में कितना पानी शेष है? जवाई बांध में वर्तमान में केवल 24 फीट पानी बचा है, जबकि इसकी कुल भराव क्षमता 61.25 फीट है। 2. बचा हुआ पानी पाली के लिए कितने समय तक पर्याप्त है? मौजूदा खपत दर के अनुसार यह 24 फीट पानी पाली शहर और जुड़े ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अगले लगभग 90 दिन (3 माह) ही चल पाएगा। 3. पाली के लिए वॉटर ट्रेन पहली बार कब चलाई गई थी? पाली में पहली बार वॉटर ट्रेन 25 जुलाई 2002 को जोधपुर के भगत की कोठी रेलवे स्टेशन से चलाई गई थी। 4. वॉटर ट्रेन के प्रतिदिन संचालन पर कितना खर्च आता है? प्रतिदिन 4 से 5 फेरों के संचालन पर कुल खर्च लगभग 18 लाख से 22 लाख रुपये आता है, जिसमें प्रति फेरा खर्च 4 लाख से 4.5 लाख रुपये है। 5. एक ट्रेन फेरे में कितना पानी लाया जाता है? 40 टैंकर बोगियों वाली यह ट्रेन प्रति फेरे में लगभग 20 से 21 लाख लीटर (2.1 MLD) पानी पहुंचाती है। 6. जवाई बांध का निर्माण किसने और कब करवाया था? जोधपुर के तत्कालीन महाराजा उम्मेद सिंह ने अकाल से राहत के लिए 12 मई 1946 को इसकी नींव रखी थी, जिसका निर्माण कार्य इंजीनियर एडगर और मोती सिंह की देखरेख में हुआ था। https://trendkia.com/rajasthan/jawai-dam-men-gira-jalastara-pyasa-bujhane-ke-lie-pali-men-jodhpur-se-water-train-chalane-ki-taiyari-42797 TrendKia — Har trend, sabse pehle.