जयपुर के चौमूं में रक्तदान की मिसाल: 17 साल में 25 हजार यूनिट खून और 58 बार दान करने वाले अर्जुन यादव की कहानी जयपुर जिले के चौमूं का श्रीकृष्ण यूथ क्लब बीते 17 वर्षों में 25 हजार यूनिट रक्त जुटा चुका है, जबकि क्लब अध्यक्ष अर्जुन यादव अकेले 58 बार रक्तदान कर चुके हैं। रक्तदान को लेकर जागरूकता फैलाने की कोशिशें लगातार जारी हैं, फिर भी आज भी बड़ी संख्या में लोग इसे करने से डरते या हिचकते हैं। जरूरत के वक्त भी वे खुद आगे आने के बजाय यह जिम्मेदारी किसी और के कंधों पर टालना बेहतर समझते हैं। लेकिन इसी समाज में कुछ युवा ऐसे भी हैं जिन्होंने रक्तदान को सेवा का जरिया बना लिया और हजारों लोगों की जिंदगी बचाने का काम किया। इन्हीं की मिसालें दूसरों को सकारात्मक राह दिखा रही हैं। 17 साल से चल रहा है सेवा का सिलसिला जयपुर जिले के चौमूं शहर का श्रीकृष्ण यूथ क्लब पिछले 17 वर्षों से 'रक्तदान महादान' की भावना को जमीन पर उतार रहा है। यह क्लब हर साल स्वामी विवेकानंद जयंती के मौके पर रक्तदान शिविर लगाता है, और अब तक इन्हीं आयोजनों के जरिए 25 हजार यूनिट रक्त इकट्ठा कर जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचा चुका है। क्लब के अध्यक्ष अर्जुन यादव बताते हैं कि संगठन से करीब 200 सक्रिय सदस्य जुड़े हुए हैं। ये सदस्य न सिर्फ खुद रक्तदान करते हैं, बल्कि और भी युवाओं को इस मुहिम का हिस्सा बनाते हैं। मुश्किल वक्त में भी पीछे नहीं हटे अर्जुन यादव के मुताबिक, डेंगू के मौसम और कोरोना महामारी जैसे कठिन दौर में भी क्लब के सदस्य रक्तदान करते रहे और अनेक लोगों की मदद की। क्लब की कोशिश रहती है कि जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की उपलब्धता कभी न टूटे। खुद अर्जुन यादव अब तक 58 बार रक्तदान कर चुके हैं और लगातार युवाओं को नियमित रूप से रक्तदान करने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। 'गुरुजी' की प्रेरक कहानी चौमूं के गांधी चौक में रहने वाले अभिषेक सोरेला, जिन्हें इलाके के लोग 'गुरुजी' के नाम से पुकारते हैं, युवाओं के लिए एक मिसाल बन चुके हैं। वे अब तक 27 बार रक्तदान कर चुके हैं। खास बात यह है कि इनमें 14 बार प्लेटलेट्स यानी एसडीपी और एक बार ग्रेनुलोसाइट्स का दान भी शामिल है। उनका कहना है कि वर्ष 2003 में जब उन्होंने पहली बार रक्तदान किया, तो जो आत्मसंतोष मिला, वही उन्हें आज तक इस सेवा से जोड़े हुए है। एक मासूम की जान बचाने वाला दान अभिषेक सोरेला ने डेंगू समेत कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को कई बार प्लेटलेट्स उपलब्ध कराए हैं। कैंसर से पीड़ित एक छह वर्षीय बच्ची के लिए उन्होंने ग्रेनुलोसाइट्स दान कर मानवता की बड़ी मिसाल पेश की। यह पूरी प्रक्रिया करीब तीन घंटे तक चली, लेकिन उनके लिए एक मासूम की जिंदगी बचाने का संतोष किसी भी पुरस्कार से बड़ा साबित हुआ। https://trendkia.com/rajasthan/jayapura-ke-chaumun-men-raktadana-ki-misala-17-sala-men-25-hajara-yunita-khuna-a-876 TrendKia — Har trend, sabse pehle.