जयपुर में कांग्रेस प्रदर्शन के दौरान आपस में भिड़े कार्यकर्ता, जमकर चले लात-घूंसे जयपुर के शहीद स्मारक पर चुनाव आयोग के खिलाफ आयोजित कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं के दो गुट आपस में भिड़ गए। मंच के पास शुरू हुआ विवाद हाथापाई और लात-घूंसे तक पहुंच गया, जिसे पुलिस ने बीच-बचाव कर शांत कराया। राजस्थान की राजधानी जयपुर में चुनाव आयोग के खिलाफ आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई जब कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता आपस में ही उलझ पड़े। जयपुर के शहीद स्मारक पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से यह प्रदर्शन रखा गया था, जिसमें पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ भारी संख्या में समर्थक जुटे हुए थे। कार्यक्रम के दौरान मंच के बिल्कुल पास किसी मामूली बात को लेकर कार्यकर्ताओं के दो गुटों में कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते यह बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों पक्षों के लोग आमने-सामने आ गए और वहां धक्का-मुक्की तथा मारपीट का दौर शुरू हो गया। प्रदर्शन स्थल पर कार्यकर्ताओं के बीच जमकर लात-घूंसे चले, जिससे कुछ देर के लिए माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया और वहां मौजूद लोगों में खलबली मच गई। शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में हुआ हंगामा इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कांग्रेस पार्टी के कई बड़े दिग्गज नेता मौके पर मौजूद थे। कार्यक्रम में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समेत कई प्रमुख पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे। जिस समय पार्टी के ये शीर्ष नेता और कार्यकर्ता चुनाव आयोग के खिलाफ एकजुट होकर अपनी आवाज उठा रहे थे, ठीक उसी समय मंच के पास कार्यकर्ताओं की आपसी भिड़ंत ने पूरे आयोजन का रंग फीका कर दिया। मारपीट की इस घटना के कारण आसपास खड़े अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी असमंजस की स्थिति में आ गए। हंगामे के बढ़ने से प्रदर्शन के मुख्य एजेंडे से ध्यान भटकने की स्थिति पैदा हो गई थी, क्योंकि एक तरफ जहां पार्टी नेतृत्व बड़े मुद्दों को लेकर विरोध जता रहा था, वहीं दूसरी तरफ कार्यकर्ता आपस में ही भिड़ रहे थे। पुलिस ने हस्तक्षेप कर संभाली स्थिति कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ते संघर्ष और हिंसा को देखकर मौके पर तैनात जयपुर पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला। पुलिसकर्मियों ने बिना देर किए बीच-बचाव किया और दोनों पक्षों के झगड़ रहे लोगों को खदेड़ कर अलग किया। पुलिस के त्वरित हस्तक्षेप के चलते स्थिति पर जल्द ही काबू पा लिया गया, वरना मामला और अधिक बिगड़ सकता था। पुलिस की मौजूदगी और सख्त रुख के कारण कुछ ही देर में तनाव शांत हो गया और प्रदर्शन स्थल पर स्थिति सामान्य होने लगी। हालांकि, इस बात का अभी तक आधिकारिक तौर पर पता नहीं चल पाया है कि इस विवाद की असली शुरुआत किस बात को लेकर हुई थी और इस झड़प में कौन-कौन से कार्यकर्ता प्रत्यक्ष रूप से शामिल थे। नेताओं और पार्टी पदाधिकारियों की मौजूदगी में किसी तरह कार्यकर्ताओं को शांत कराया गया, लेकिन इस अंदरूनी कलह और झड़प के कारणों को लेकर पार्टी स्तर पर क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। चुनाव आयोग के खिलाफ निकाला गया मार्च आपसी झड़प और हंगामे की इस घटना के बावजूद कांग्रेस का मुख्य राजनीतिक कार्यक्रम तय योजना के अनुसार आगे बढ़ता रहा। शहीद स्मारक पर आयोजित विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कराना था। कांग्रेस पार्टी ने मुख्य रूप से ‘वोट चोरी’ के गंभीर मुद्दों को लेकर यह मोर्चा खोला था, जिसमें चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और वोटिंग से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाए गए। पार्टी का यह आरोप रहा है कि चुनावी व्यवस्था के अंदर पारदर्शिता का होना बेहद जरूरी है और इस संबंध में निर्वाचन आयोग को जवाबदेह होना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान मंच से नेताओं ने इस मुद्दे पर अपना कड़ा पक्ष रखा और सरकार तथा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की आलोचना की। गोविंद सिंह डोटासरा और अशोक गहलोत के नेतृत्व में हुआ मार्च कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़प और अफरा-तफरी के बाद भी पार्टी का नेतृत्व पीछे नहीं हटा। गोविंद सिंह डोटासरा और अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहीद स्मारक से लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की तरफ एक बड़ा मार्च निकाला। इस मार्च में भारी तादाद में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया और हाथों में तख्तियां लेकर सड़कों पर प्रदर्शन किया। मार्च के दौरान कार्यकर्ताओं और नेताओं ने चुनाव आयोग के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की और ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर अपना कड़ा विरोध जताया। कांग्रेस नेताओं ने इस प्रदर्शन के माध्यम से एक बार फिर से चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और आम नागरिकों के मतदाता अधिकारों की रक्षा से जुड़े कई अहम सवाल उठाए। वहीं, दूसरी तरफ प्रदर्शन स्थल पर हुई कार्यकर्ताओं की इस आपसी मारपीट ने राजनीतिक गलियारों में एक नया विषय छेड़ दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस आंतरिक अनुशासनहीनता और झड़प को लेकर पार्टी संगठन या स्थानीय पुलिस प्रशासन की ओर से क्या कोई औपचारिक दंडात्मक कार्रवाई की जाती है या नहीं। इसका आप पर असर जयपुर में हुए इस राजनीतिक प्रदर्शन और अंदरूनी हंगामे का स्थानीय निवासियों और आवागमन पर सीधा असर देखने को मिला। • जयपुर में: शहीद स्मारक के आसपास अचानक बढ़े तनाव और पुलिस बल की तैनाती के कारण स्थानीय ट्रैफिक व्यवस्था कुछ समय के लिए प्रभावित हुई। आवाजाही करने वाले आम नागरिकों को इस मार्ग पर रूट डायवर्जन और मामूली जाम का सामना करना पड़ा। • भारत में: राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ आयोजित होने वाले ऐसे प्रदर्शनों से देश भर के विभिन्न शहरों में प्रशासनिक सतर्कता बढ़ जाती है। आम जनता को चुनावी बहसों और राजनीतिक गतिविधियों के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा उपायों में बदलाव का सामना करना पड़ता है। ऐसा क्यों हुआ जयपुर के शहीद स्मारक पर कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं के बीच हुई इस हिंसक झड़प के पीछे आपसी मतभेद और भीड़भाड़ मुख्य कारण रहे। • तत्कालिक कारण: मंच के ठीक बगल में पार्टी कार्यकर्ताओं के दो अलग-अलग गुटों के बीच किसी अज्ञात बात पर कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते आक्रामक हो गई। • व्यवस्था और अनुशासन की कमी: बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की भीड़ और वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के बावजूद स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच आपसी समन्वय का अभाव इस प्रकार के विवाद का कारण बना। • राजनीतिक तनाव: चुनाव आयोग के खिलाफ ‘वोट चोरी’ जैसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर आयोजित इस बड़े प्रदर्शन के दौरान जोश और उत्तेजना अपने चरम पर थी, जिससे कार्यकर्ताओं में संयम की कमी देखी गई। सवाल-जवाब 1. जयपुर में कांग्रेस का यह विरोध प्रदर्शन कहां आयोजित किया गया था? यह विरोध प्रदर्शन जयपुर के शहीद स्मारक पर आयोजित किया गया था। 2. इस प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा क्या था? यह प्रदर्शन चुनाव आयोग के खिलाफ ‘वोट चोरी’ के मुद्दों और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। 3. प्रदर्शन के दौरान कौन-wel बड़े नेता मौजूद थे? इस कार्यक्रम में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मौजूद थे। 4. कार्यकर्ताओं के बीच विवाद कैसे सुलझाया गया? मौके पर मौजूद जयपुर पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को अलग किया और स्थिति को शांत कराया। 5. प्रदर्शन के बाद कांग्रेस नेताओं ने क्या कदम उठाया? नेताओं के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने शहीद स्मारक से मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर एक मार्च निकाला। https://trendkia.com/rajasthan/jayapura-men-kangresa-pradarshana-ke-daurana-apasa-men-bhire-karyakarta-jamakara-chale-lata-ghunse-39844 TrendKia — Har trend, sabse pehle.