# झालावाड़ में 12 महीने के बेटे को गोद में थामे चुनाव ड्यूटी निभाती दिखीं महिला सिपाही अंतिमा सहारिया

> राजस्थान पंचायती राज चुनाव के दौरान महिला कांस्टेबल अंतिमा सहारिया अपने एक साल के बेटे दक्ष को गोद में लेकर सुरक्षा ड्यूटी करती नजर आईं.

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/jhalavara-men-12-mahine-ke-bete-ko-goda-men-thame-chunava-dyuti-nibhati-dikhin-mahila-sipahi-antima-sahariya-52485 · **Language:** Hindi
**Tags:** राजस्थान पंचायत चुनाव, अंतिमा सहारिया, झालावाड़, बारां पुलिस, महिला पुलिसकर्मी, सारोला मतदान केंद्र

राजस्थान में पंचायती राज चुनाव के दौरान झालावाड़ जिले से कर्तव्यनिष्ठा का एक खास दृश्य सामने आया है, जहाँ महिला सिपाही अंतिमा सहारिया अपने एक वर्षीय बच्चे को सीने से लगाए मतदान केंद्र की सुरक्षा संभालती दिखीं. लोकतंत्र की चुनावी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराना और दूसरी ओर अपने छोटे बच्चे की परवरिश करना, इन दोनों मोर्चों पर वह एक साथ डटी रहीं.

## खानपुर के सारोला मतदान केंद्र पर दिखी कर्तव्यपरायणता
मतदान दिवस पर अंतिमा सहारिया खानपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सारोला मतदान केंद्र पर तैनात थीं. इस दौरान उनकी गोद में उनका 12 महीने का मासूम बेटा दक्ष नजर आया. एक पुलिसकर्मी की वर्दी पहनकर कानून-व्यवस्था कायम रखने की सख्त जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ, वह एक मां के रूप में अपने शिशु की देखभाल भी करती रहीं. मतदान केंद्र पर आने वाले मतदाताओं और अन्य कर्मियों के बीच उनके इस समर्पण ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा.

## बारां जिले से झालावाड़ में लगाई गई थी चुनावी ड्यूटी
कांस्टेबल अंतिमा सहारिया मूल रूप से बारां जिले के भंवरगढ़ पुलिस थाने में पदस्थापित हैं. राज्य में चल रहे पंचायती राज चुनाव की प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई थी, जिसके तहत उन्हें बारां से झालावाड़ जिले भेजा गया था. घर और थाने से दूर दूसरे जिले में ड्यूटी होने के बावजूद, वह अपने 12 माह के बेटे दक्ष को साथ लेकर अपने कार्यस्थल पर पहुंचीं और तय जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाया.

## नौकरी और मातृत्व के बीच संतुलन की वास्तविक तस्वीर
यह घटना उन कामकाजी महिलाओं की रोजमर्रा की चुनौतियों को स्पष्ट रूप से रेखांकित करती है, जो अपने परिवार और पेशेवर जिम्मेदारियों को एक साथ संभालती हैं. सुरक्षा बलों में तैनात महिला कर्मियों के लिए फील्ड ड्यूटी और छोटे बच्चों का लालन-पालन साथ करना बेहद चुनौतीपूर्ण काम माना जाता है. अंतिमा का यह प्रयास दर्शाता है कि विपरीत परिस्थितियों और कठिन जिम्मेदारियों के बावजूद समर्पण और धैर्य के साथ दायित्वों का निर्वहन किया जा सकता है.

## इसका आप पर असर
यह घटना कार्यस्थल पर कार्यरत महिलाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के संदर्भ में कई व्यावहारिक पहलुओं को सामने लाती है.

- **भारत में:** यह घटना सुरक्षा बलों और सरकारी सेवाओं में कार्यरत कामकाजी माताओं के लिए शिशु देखभाल सहायता और क्रेच सुविधाओं की आवश्यकता को रेखांकित करती है. नीति निर्माताओं और विभागों के लिए महिला कर्मियों की विशेष परिस्थितियों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण हो जाता है.
- **राजस्थान में:** राज्य में चुनाव ड्यूटी के दौरान महिला कर्मियों की तैनाती और उनके छोटे बच्चों की बुनियादी आवश्यकताओं को लेकर प्रशासनिक स्तर पर संवेदनशीलता बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है. स्थानीय पुलिस बल में कर्मियों के समर्पण से आम नागरिकों के बीच पुलिस की छवि सकारात्मक बनती है.
- **कामकाजी महिलाओं के लिए:** यह प्रसंग दिखाता है कि मातृत्व और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच सामंजस्य बैठाना बेहद कठिन होने के बावजूद संभव है. समाज में ऐसी घटनाएं कामकाजी महिलाओं के संघर्षों के प्रति अधिक सम्मान और समझ विकसित करती हैं.
- **प्रशासनिक स्तर पर:** अंतर-जिला चुनावी तैनाती के समय छोटे बच्चों वाली महिला कर्मियों को गृह जिले या नजदीकी केंद्रों पर प्राथमिकता देने जैसे विचार विमर्श को गति मिल सकती है. इससे कर्मियों की कार्यक्षमता और परिवार की सुरक्षा दोनों में संतुलन बना रहता है.

## ऐसा क्यों हुआ
यह स्थिति पंचायती राज चुनावों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनिवार्य प्रशासनिक तैनाती और घरेलू जिम्मेदारियों के एक साथ आ जाने के कारण उत्पन्न हुई.

- **चुनावी सुरक्षा की अनिवार्यता:** राज्य में पंचायती राज चुनाव निष्पक्ष और शांतिपूर्ण कराने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती सारोला और अन्य केंद्रों पर की गई थी. इस प्रशासनिक आदेश के कारण महिला कांस्टेबल को अपनी निर्धारित ड्यूटी पर उपस्थित होना आवश्यक था.
- **जिले से बाहर प्रतिनियुक्ति:** अंतिमा सहारिया की मूल पोस्टिंग बारां जिले के भंवरगढ़ थाने में थी, लेकिन चुनाव प्रबंधन के तहत उन्हें झालावाड़ भेजा गया. गृह स्थान से दूर होने की वजह से 12 महीने के बेटे को घर पर अकेला छोड़ना संभव नहीं था.
- **शिशु की उम्र और निर्भरता:** उनका बेटा दक्ष केवल एक वर्ष का है और पूरी तरह मां की देखभाल पर निर्भर है. इसी कारण कांस्टेबल अंतिमा को ड्यूटी पर बच्चे को साथ रखने का व्यावहारिक निर्णय लेना पड़ा.

## सवाल-जवाब

### 1. कांस्टेबल अंतिमा सहारिया किस मतदान केंद्र पर ड्यूटी कर रही थीं?
वह झालावाड़ जिले के खानपुर क्षेत्र स्थित सारोला मतदान केंद्र पर चुनाव ड्यूटी निभा रही थीं.

### 2. महिला कांस्टेबल की मूल तैनाती किस थाने में है?
अंतिमा सहारिया बारां जिले के भंवरगढ़ पुलिस थाने में पदस्थापित हैं.

### 3. ड्यूटी के दौरान उनके साथ मौजूद बच्चे की उम्र और नाम क्या है?
उनके साथ मौजूद उनके बेटे का नाम दक्ष है, जिसकी उम्र 12 महीने है.

### 4. अंतिमा सहारिया को झालावाड़ क्यों भेजा गया था?
राजस्थान पंचायती राज चुनावों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्हें बारां से झालावाड़ में प्रतिनियुक्त किया गया था.

## प्रेरणा और सबक
कांस्टेबल अंतिमा सहारिया का यह आचरण कठिन परिस्थितियों में समर्पण, उत्तरदायित्व और संतुलन की एक सशक्त मिसाल पेश करता है.

- **कर्तव्य के प्रति निष्ठा:** व्यक्तिगत कठिनाइयों को आड़े न आने देते हुए उन्होंने अपनी राजकीय जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी. पाठक इससे सीख सकते हैं कि विषम परिस्थितियों में भी अपने काम के प्रति जवाबदेह कैसे बना जाए.
- **परिवार और काम का संतुलन:** उन्होंने मातृत्व और पुलिस सेवा के दायित्वों को अलग-थलग करने के बजाय दोनों को एक साथ निभाकर दिखाया. यह कामकाजी पेशेवरों को विपरीत हालात में भी धैर्यपूर्वक दोनों मोर्चों को संभालने की प्रेरणा देता है.
- **धैर्य और मानसिक मजबूती:** छोटे बच्चे के साथ फील्ड में सुरक्षा संभालना भारी मानसिक और शारीरिक दृढ़ता की मांग करता है. यह दर्शाता है कि आंतरिक संकल्प से सबसे कठिन चुनौतियों का भी सफलतापूर्वक सामना किया जा सकता है.

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