# झुंझुनूं के अशोक जांगिड़ ने सड़क हादसों के पीड़ितों के लिए शुरू की एंबुलेंस सेवा, 17 साल में बचाई 16 हजार से ज्यादा जानें

> सड़क हादसे में चाचा को खोने वाले झुंझुनूं के सूरजगढ़ निवासी अशोक जांगिड़ ने जीवन ज्योति रक्षा समिति की शुरुआत की है। इस समिति के जरिए पिछले 17 वर्षों में हजारों घायलों को बिना किसी शुल्क के अस्पताल पहुंचाया गया है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/jhunjhunu-ke-ashok-jangid-ne-saraka-hadason-ke-piriton-ke-lie-shuru-ki-enbulensa-seva-17-sala-men-bachai-16-hajara-se-jyada-janen-51266 · **Language:** Hindi
**Tags:** झुंझुनूं, सूरजगढ़, सड़क दुर्घटना, एंबुलेंस सेवा, अशोक जांगिड़, जीवन ज्योति रक्षा समिति

झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ में समय पर चिकित्सा सहायता के अभाव में होने वाली मौतों को रोकने के लिए एक बड़ी मानवीय पहल शुरू की गई है। सड़क दुर्घटनाओं के दौरान कई बार घायलों को तुरंत मदद नहीं मिल पाती, जिससे उनकी स्थिति और गंभीर हो जाती है। इसी दर्दनाक अनुभव से प्रेरित होकर झुंझुनूं के एक व्यक्ति ने सड़क पर तड़पते पीड़ितों की सहायता करने का आजीवन संकल्प लिया। आज उनका यह व्यक्तिगत निर्णय सैकड़ों परिवारों के जीवन की रक्षा का मुख्य आधार बन चुका है।

## जीवन ज्योति रक्षा समिति का गठन और कार्य
सूरजगढ़ में सक्रिय जीवन ज्योति रक्षा समिति पिछले 17 वर्षों से सड़क हादसों में घायल होने वाले लोगों को समय पर नजदीकी अस्पताल पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। समिति के आंकड़ों के अनुसार, इस लंबी अवधि में करीब 8 हजार 942 सड़क दुर्घटनाओं के दौरान लगभग 17 हजार 540 घायलों को सुरक्षित चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाया गया है। इनमें से 16 हजार से अधिक लोगों की अमूल्य जान बचाने में सफलता मिली है। वर्तमान में इस समिति के साथ तीन दर्जन से ज्यादा समर्पित लोग जुड़े हुए हैं, जो किसी भी प्रकार के शुल्क के बिना पूरी निष्ठा से घायलों की मदद करने में जुटे रहते हैं।

## दो एंबुलेंस का संचालन और वित्तीय व्यवस्था
इस समिति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी घायल व्यक्ति की मौत केवल इलाज न मिलने की वजह से न हो। इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए समिति के सदस्य चौबीसों घंटे जरूरतमंदों की सहायता के लिए मुस्तैद रहते हैं। घायलों को अस्पताल ले जाने के लिए संगठन के पास दो एंबुलेंस उपलब्ध हैं, जिनका संचालन भी समिति के सदस्य स्वयं ही करते हैं। इस पूरी आपातकालीन सेवा के बदले पीड़ितों या उनके परिजनों से एक भी रुपया नहीं लिया जाता है। एंबुलेंस के रखरखाव, ईंधन और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा करने के लिए समिति के सभी सदस्य हर महीने 200-200 रुपए का सदस्यता शुल्क जमा करते हैं। इसके अतिरिक्त, आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय भामाशाहों का आर्थिक सहयोग भी प्राप्त किया जाता है। पहले यह समिति केवल सूरजगढ़ क्षेत्र तक ही सीमित थी, लेकिन अब सूरजगढ़ से अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर किए जाने वाले मरीजों को झुंझुनूं तक निःशुल्क पहुंचाने की जिम्मेदारी भी पूरी निष्ठा से निभाई जा रही है।

## गंभीर चोटों के कारण जान न बचा पाने का मलाल
जीवन ज्योति रक्षा समिति के डायरेक्टर अशोक जांगिड़ बताते हैं कि बीते 11 वर्षों के दौरान उन्होंने हजारों सड़क दुर्घटना पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाया है, जहां समय पर इलाज मिलने से कई लोगों की जिंदगी बचाई जा सकी। हालांकि, इस पूरे सफर के दौरान लगभग 416 ऐसे लोग भी रहे जिन्हें तमाम कोशिशों के बावजूद बचाया नहीं जा सका, जिसका गहरा दुख आज भी उन्हें और समिति के सदस्यों को है। अशोक का कहना है कि हर एक घायल की जान बचाने के लिए पूरी ताकत लगा दी जाती है, लेकिन कई बार दुर्घटना में चोटें इतनी ज्यादा गंभीर होती हैं कि लाख प्रयासों के बावजूद मरीज को नहीं बचाया जा पाता। इन दुखद पलों के बावजूद समिति के सदस्यों ने कभी हार नहीं मानी है और उनका प्रयास लगातार यही रहता है कि सड़क पर पड़े किसी भी जरूरतमंद को समय रहते चिकित्सीय सहायता मिल सके।

## चाचा की दुखद मौत से मिली इस सेवा की प्रेरणा
अशोक जांगिड़ के इस प्रेरणादायक सेवा कार्य के पीछे करीब 17 साल पुरानी एक बेहद दर्दनाक घटना जुड़ी हुई है। उस समय उनके चाचा ओमप्रकाश जांगिड़ लोहारू के पास एक सड़क हादसे का शिकार हो गए थे। अशोक बताते हैं कि उनके चाचा लगभग डेढ़ घंटे तक सड़क पर पड़े तड़पते रहे, लेकिन उस दौरान उन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए कोई भी आगे नहीं आया और अंततः उनकी मृत्यु हो गई। इस हृदय विदारक घटना ने अशोक को भीतर तक हिलाकर रख दिया। अपने चाचा को खोने के इस गहरे दर्द ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और उन्होंने दूसरों की जिंदगी बचाने का बीड़ा उठाया। उन्होंने उसी दिन यह कड़ा संकल्प लिया कि वे पूरी कोशिश करेंगे कि किसी अन्य परिवार को इस तरह अपनों को न खोना पड़े। शुरुआत में अशोक ने अपनी निजी गाड़ी से ही सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को अस्पताल ले जाना शुरू किया। धीरे-धीरे जब लोगों ने उनके इस समर्पण को देखा, तो क्षेत्र के अन्य लोग भी इस नेक काम में हाथ बंटाने के लिए आगे आने लगे। किसी ने अपना समय दिया, किसी ने आर्थिक मदद पहुंचाई तो किसी ने अन्य संसाधन उपलब्ध कराए। इस तरह एक व्यक्ति का छोटा सा प्रयास धीरे-धीरे एक बड़े सामूहिक अभियान में बदल गया और जीवन ज्योति रक्षा समिति की नींव रखी गई।

## भामाशाहों के सहयोग से मजबूत हुआ एंबुलेंस का दायरा
इस संस्था के सेवा कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने में स्थानीय भामाशाहों का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है। समिति को सबसे पहली एंबुलेंस भामाशाह दरिया सिंह तेतरवाल ने प्रदान की थी। लगभग छह वर्षों तक निरंतर संचालन के बाद जब वह एंबुलेंस पुरानी और खराब हो गई, तब उन्होंने समिति को दूसरी गाड़ी भी उपलब्ध करवाई। इसके बाद संगठन ने अन्य भामाशाहों से सहायता जुटाकर एक बोलेरो गाड़ी खरीदी और उसे पूरी तरह से एंबुलेंस के रूप में तैयार करवाया। इन वाहनों के मिलने से सड़क हादसों के पीड़ितों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था और अधिक मजबूत हो गई।

## मानवता और निस्वार्थ सेवा की मिसाल
आज जीवन ज्योति रक्षा समिति के सभी सदस्य किसी भी तरह के आर्थिक लाभ या अपनी पहचान बनाने के लिए यह कार्य नहीं कर रहे हैं, बल्कि पूरी तरह से इंसानियत के नाते इस सेवा में जुटे हुए हैं। उनके लिए सड़क पर घायल अवस्था में पड़ा हर अजनबी व्यक्ति किसी अपने की तरह है, जिसे उस समय मदद की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। अशोक जांगिड़ का संकल्प आज भी उतना ही मजबूत है जितना कि अपने चाचा को खोने के बाद के शुरुआती दिनों में था। सूरजगढ़ में जीवन ज्योति रक्षा समिति इसी मूल सोच के साथ हर जरूरतमंद की सहायता के लिए हमेशा तैयार खड़ी रहती है।

## इसका आप पर असर
झुंझुनूं और आसपास के ग्रामीण इलाकों में सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों के लिए यह सेवा जीवन रक्षा का एक बड़ा माध्यम बन गई है।

- **भारत में:** सड़क हादसों के समय त्वरित चिकित्सा सहायता और मुफ्त एंबुलेंस सेवाओं की आवश्यकता देश भर के ग्रामीण क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। इस प्रकार की सामुदायिक पहल आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के महत्व को उजागर करती है।
- **झुंझुनूं में:** सूरजगढ़ क्षेत्र और आसपास के निवासियों को सड़क दुर्घटनाओं के बाद अस्पताल पहुंचने के लिए निःशुल्क एंबुलेंस सुविधा का सीधा लाभ मिल रहा है। इस व्यवस्था से गंभीर रूप से घायल मरीजों को समय पर इलाज मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

## ऐसा क्यों हुआ
सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में समय पर चिकित्सीय सहायता का अभाव और एंबुलेंस सेवाओं की कमी अक्सर गंभीर रूप से घायलों की जान पर भारी पड़ती है। इसी पृष्ठभूमि ने इस सामुदायिक पहल को जन्म दिया।

- **समय पर उपचार का अभाव:** सड़क हादसों के समय शुरुआती घंटों में चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण कई बार पीड़ितों की जान चली जाती है। यही अभाव इस समिति की स्थापना का मुख्य कारण बना।
- **निजी त्रासदी से प्रेरणा:** संस्थापक के परिवार में हुई एक दुखद घटना ने इस बात को स्पष्ट किया कि आपात स्थिति में त्वरित परिवहन कितना आवश्यक है।
- **सामूहिक सहयोग:** स्थानीय नागरिकों और भामाशाहों के निरंतर योगदान ने इस व्यक्तिगत प्रयास को एक संगठित और स्थायी सेवा में बदल दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. जीवन ज्योति रक्षा समिति की शुरुआत कब और किसने की थी?
इस समिति की शुरुआत अशोक जांगिड़ ने लगभग 17 साल पहले झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ में की थी।

### 2. समिति द्वारा अब तक कितने लोगों की जान बचाई जा चुकी है?
समिति के अनुसार, पिछले 17 वर्षों में 16 हजार से अधिक लोगों की जान बचाई जा चुकी है।

### 3. एंबुलेंस सेवा के लिए मरीजों से कितना शुल्क लिया जाता है?
घायलों या उनके परिजनों से एंबुलेंस सेवा के लिए कोई पैसा नहीं लिया जाता है, यह पूरी तरह निःशुल्क है।

### 4. समिति के पास वर्तमान में कितनी एंबुलेंस हैं?
घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए समिति के पास दो एंबुलेंस मौजूद हैं।

### 5. एंबुलेंस और अन्य खर्चों के लिए धन कहां से आता है?
समिति के सदस्य हर महीने 200-200 रुपए का सदस्यता शुल्क जमा करते हैं और जरूरत पड़ने पर भामाशाहों का सहयोग लिया जाता है।

### 6. अशोक जांगिड़ को इस सेवा कार्य की प्रेरणा कहां से मिली?
करीब 17 साल पहले सड़क हादसे में समय पर इलाज न मिलने के कारण अपने चाचा ओमप्रकाश जांगिड़ को खोने के बाद उन्होंने यह संकल्प लिया था।

## प्रेरणा और सबक
अशोक जांगिड़ और जीवन ज्योति रक्षा समिति की यह यात्रा व्यक्तिगत पीड़ा को सकारात्मक सामाजिक बदलाव में बदलने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

- **निजी पीड़ा को प्रेरणा बनाएं:** जीवन की किसी बड़ी दुर्घटना या दुखद अनुभव को समाज की भलाई और दूसरों की मदद करने का संकल्प बनाया जा सकता है।
- **सामूहिक सहयोग की शक्ति:** एक अकेला व्यक्ति भी यदि नेक नीयत से शुरुआत करे, तो धीरे-धीरे लोग जुड़ते जाते हैं और एक बड़ा अभियान खड़ा हो जाता है।
- **बिना स्वार्थ के सेवा:** समाज में वास्तविक बदलाव लाने के लिए बिना किसी आर्थिक लाभ की लालसा के पूरी ईमानदारी से काम करना जरूरी होता है।
- **संसाधनों का सही उपयोग:** स्थानीय भामाशाहों और समुदाय की मदद से आवश्यक संसाधनों को जुटाकर बड़े स्तर पर जरूरतमंदों की सहायता की जा सकती है।

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