झुंझुनूं के काजड़ा गांव में शिक्षा की अलख, प्रवासी परिवार ने दान की 60 बीघा जमीन राजस्थान के झुंझुनूं जिले के काजड़ा गांव के एक प्रवासी परिवार ने शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नवोदय विद्यालय को 60 बीघा जमीन दान की है, जिससे यहां स्काउट एवं गाइड परियोजना शुरू होगी। झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ उपखंड से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित काजड़ा गांव करीब 6 हजार बीघा क्षेत्र में फैला हुआ एक स्वच्छ और सुंदर पंचायत समिति स्तर का क्षेत्र है। इस गांव में संचालित नवोदय विद्यालय इलाके के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा के अवसर उपलब्ध करा रहा है। इसी दिशा में एक और उल्लेखनीय कदम उठाते हुए काजड़ा के प्रवासी ओमप्रकाश काजड़िया परिवार ने आगे आकर 60 बीघा भूमि दान दी है, जिससे इस विद्यालय में स्काउट एवं गाइड परियोजना को शुरू करने में मदद मिली है। यह पहल क्षेत्र के शैक्षिक विकास में एक मील का पत्थर साबित हो रही है। शिक्षा और स्थानीय संस्कृति का केंद्र आज के समय में काजड़ा गांव आसपास के विभिन्न गांवों और ढाणियों के बच्चों के लिए शिक्षा का एक प्रमुख हब बनता जा रहा है। यहां कुल 10 विद्यालय संचालित हो रहे हैं, जिनमें प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च शिक्षा यानी महाविद्यालय तक की पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध है। इनमें से 4 स्कूल सरकारी हैं जबकि 6 निजी संस्थानों के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पढ़ाई के साथ-साथ यह इलाका अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के लिए भी जाना जाता है। पर्यटन और ऐतिहासिक महत्व पर्यटन के लिहाज से भी काजड़ा गांव का खास महत्व है। यहां प्रसिद्ध सूरजगढ़ फोर्ट के अलावा कई ऐतिहासिक हवेलियां भी मौजूद हैं जो पर्यटकों को अपनी ओर खींचती हैं। इन हवेलियों की भव्य निर्माण शैली, बेहतरीन शिल्पकला और अद्भुत बनावट बेहद आकर्षक है। ये प्राचीन इमारतें देश ही नहीं बल्कि विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी अपनी तरफ आकर्षित करने में एक बड़ी भूमिका निभाती हैं, जिससे इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होती है। आजीविका और कृषि का बदलता स्वरूप गांव के अधिकांश लोगों की आजीविका मुख्य रूप से खेती और पशुपालन पर निर्भर करती है। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग अन्य जगहों पर रहकर नौकरी भी करते हैं। वक्त के साथ कृषि के तौर-तरीकों में भी बदलाव आया है और अब पारंपरिक फसलों जैसे बाजरा और मूंग की जगह गेहूं, कपास और सरसों की खेती ने ले ली है। हालांकि विकास के इन कामों के बीच गांव के सामने कुछ गंभीर चुनौतियां भी हैं। जमीन के नीचे जलस्तर लगातार नीचे गिर रहा है और पीने के पानी में फ्लोराइड की मात्रा मिलने से स्थानीय नागरिकों की परेशानियां काफी बढ़ गई हैं। सड़क मार्ग और कनेक्टिविटी भौगोलिक स्थिति की बात करें तो काजड़ा गांव जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर और सूरजगढ़ उपखंड से 5 किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ है। सड़क मार्ग के जरिए इसकी कनेक्टिविटी काफी अच्छी है। यह न केवल सूरजगढ़ मुख्यालय से जुड़ा हुआ है बल्कि फरट, डुलानिया, भगीना और जीणी ग्राम पंचायतों के विभिन्न गांवों से भी सड़क मार्ग के माध्यम से आसानी से जुड़ा हुआ है, जिससे आवागमन सरल हो जाता है। करीब 400 साल पुराना इतिहास गांव के पूर्व सरपंच राजेंद्र शर्मा, कैलाश नागवान और मनजीत तंवर ने जानकारी देते हुए बताया कि काजड़ा गांव की स्थापना विक्रम संवत 1613 में पंडित चक्रपाणि नागवान द्वारा की गई थी। उन्होंने ही गांव की अधिष्ठात्री देवी रेजड़ी केजड़ी माता की मूर्ति की स्थापना की थी। ऐसी मान्यता है कि माता केजड़ी के नाम पर ही इस गांव का नाम काजड़ा पड़ा। धार्मिक दृष्टिकोण से भी इस स्थान का विशेष महत्व है क्योंकि यहां रेजड़ी केजड़ी माता का प्राचीन मंदिर है, जिससे बंसल और सिंगी गोत्र के लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। इसके अलावा गांव में एक पुराना तालाब, गांधी पुस्तकालय और इंदिरा पार्क भी अपनी अलग पहचान रखते हैं। बाणिया परिवार और काजड़िया परिवार का सहयोग हमेशा से गांव के विकास में अहम रहा है। सिंगी परिवार ने अपनी कुलदेवी के मंदिर का जीर्णोद्धार कराने के साथ ही वहां आधुनिक सुविधाओं का भी विस्तार करवाया है। ईंटों के उत्पादन और संस्कृत शिक्षा का इतिहास इतिहास के पन्नों को पलटें तो सूरजगढ़ क्षेत्र में काजड़ा गांव कभी पक्की ईंटों के निर्माण के लिए बहुत प्रसिद्ध हुआ करता था। उस दौर में यह क्षेत्र शिक्षा, और विशेषकर संस्कृत भाषा की पढ़ाई के एक बड़े केंद्र के रूप में अपनी पहचान रखता था। गांव की वर्तमान बसावट से बहुत पहले यहां पक्की ईंटें बनाई जाती थीं, जिनकी सप्लाई आसपास की बड़ी हवेलियों, सूरजगढ़ फोर्ट और शहर में नए मकानों के निर्माण कार्यों के लिए की जाती थी। इसके अलावा इस गांव में कई परिवार ऐसे भी रहे हैं जो संस्कृत के जाने-माने विद्वानों के रूप में प्रतिष्ठित थे। हालांकि अपने गौरवशाली अतीत और समृद्ध संस्कृति के बावजूद वर्तमान समय में यह गांव विभिन्न प्रकार की समस्याओं से जूझ रहा है जिनका समाधान होना अभी बाकी है। इसका आप पर असर यह पहल क्षेत्र में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करती है और स्थानीय विद्यार्थियों के लिए नए अवसर पैदा करती है। • शैक्षिक विकास: नवोदय विद्यालय में स्काउट एवं गाइड परियोजना के शुरू होने से विद्यार्थियों को शारीरिक और मानसिक विकास के बेहतर अवसर मिलेंगे। • जल संकट: भूजल स्तर में लगातार गिरावट और पानी में फ्लोराइड की समस्या से स्थानीय निवासियों को स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। • ग्रामीण अर्थव्यवस्था: कृषि फसलों में बदलाव और रोजगार के नए माध्यमों से ग्रामीणों की आजीविका पर सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। • संस्कृति और पर्यटन: ऐतिहासिक हवेलियों और विरासत के संरक्षण से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। ऐसा क्यों हुआ दान और ऐतिहासिक विकास से जुड़ी यह पहल स्थानीय समुदाय के सहयोग और पुरानी परंपराओं का परिणाम है। • प्रवासी सहयोग: क्षेत्र के विकास और शिक्षा के प्रसार के लिए बाहर रह रहे प्रवासी परिवारों ने आगे आकर जमीन दान की है। • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: विक्रम संवत 1613 में स्थापित यह गांव शुरू से ही धार्मिक और शैक्षणिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। • सांस्कृतिक जुड़ाव: स्थानीय मंदिरों और धरोहरों के प्रति लोगों की गहरी आस्था ने सामुदायिक विकास कार्यों को हमेशा प्रेरित किया है। सवाल-जवाब 1. काजड़ा गांव कहां स्थित है? काजड़ा गांव राजस्थान के झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ उपखंड से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 2. कितनी जमीन दान दी गई है? प्रवासी ओमप्रकाश काजड़िया परिवार ने नवोदय विद्यालय के लिए 60 बीघा जमीन दान की है। 3. इस दान का उपयोग किस कार्य के लिए होगा? इस दान की गई भूमि का उपयोग नवोदय विद्यालय में स्काउट एवं गाइड परियोजना को लागू करने के लिए किया जाएगा। 4. काजड़ा गांव की स्थापना कब हुई थी? गांव के इतिहास के अनुसार काजड़ा गांव की स्थापना विक्रम संवत 1613 में पंडित चक्रपाणि नागवान द्वारा की गई थी। 5. गांव के सामने वर्तमान में प्रमुख समस्याएं क्या हैं? गांव में भूजल स्तर का लगातार गिरना और पेयजल में फ्लोराइड की मौजूदगी प्रमुख समस्याएं हैं। प्रेरणा और सबक यह सफलता की कहानी समाज सेवा और शिक्षा के प्रति समर्पण का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करती है। • सामुदायिक योगदान: प्रवासी परिवारों द्वारा अपनी मातृभूमि और शिक्षा के विकास के लिए भूमि दान करना समाज के प्रति जिम्मेदारी का बड़ा उदाहरण है। • धरोहर का संरक्षण: स्थानीय लोगों ने अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए आधुनिक विकास में भी सहयोग दिया है। • शिक्षा को प्राथमिकता: सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बावजूद गांव ने शिक्षा के क्षेत्र में खुद को एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया है। https://trendkia.com/rajasthan/jhunjhunu-ke-kajra-ganva-men-shiksha-ki-alakha-pravasi-parivara-ne-dana-ki-60-bigha-jamina-50593 TrendKia — Har trend, sabse pehle.