# झुंझुनूं के मंड्रेला अस्पताल में डॉक्टरों के बीच भारी विवाद, नशे में हंगामे के आरोप पर वरिष्ठ चिकित्सक को मिला नोटिस

> मंड्रेला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी कक्ष में कथित तौर पर नशे की हालत में हंगामा करने पर वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कुमार नूनिया को कारण बताओ नोटिस थमाया गया है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/jhunjhunu-ke-mandrella-aspatala-men-doktaron-ke-bicha-bhari-vivada-nashe-men-hngame-ke-aropa-para-varishtha-chikitsaka-ko-mila-not-39764 · **Language:** Hindi
**Tags:** झुंझुनूं, मंड्रेला, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, डॉक्टर विवाद, डॉ प्रदीप शर्मा, डॉ अशोक कुमार नूनिया, राजस्थान स्वास्थ्य विभाग

राजस्थान के झुंझुनूं जिले में स्थित मंड्रेला कस्बे का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इस समय स्वास्थ्य सेवाओं की बजाय प्रशासनिक अनुशासनहीनता और चिकित्सकों के आपसी तनाव के चलते चर्चा में आ गया है। इस सरकारी अस्पताल के भीतर चिकित्सा अधिकारियों के बीच हुई तीखी नोकझोंक का एक वीडियो सोशल मीडिया मंचों पर व्यापक रूप से सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। कार्यस्थल पर उपजे इस विवाद ने न केवल अस्पताल के भीतर के कामकाजी माहौल को प्रभावित किया है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और जिम्मेदार पदों पर बैठे स्वास्थ्य कर्मियों के आचरण को लेकर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

## प्रभारी कक्ष में हंगामे के बाद थमाया गया नोटिस
अस्पताल परिसर में बढ़ते तनाव और अनुशासनहीनता के इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मंड्रेला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रदीप शर्मा ने कड़ा रुख अपनाया है। डॉ. शर्मा ने अस्पताल में ही कार्यरत वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कुमार नूनिया के खिलाफ आधिकारिक कार्यालय आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश के माध्यम से डॉ. नूनिया से ड्यूटी के दौरान किए गए कथित अशोभनीय आचरण, अस्पताल व्यवस्था में व्यवधान डालने और तय आचार संहिता के उल्लंघन पर औपचारिक लिखित स्पष्टीकरण की मांग की गई है। प्रशासनिक स्तर पर इसे संस्थान की गरिमा और अनुशासन की पुनर्स्थापना के लिए एक आवश्यक कदम माना जा रहा है।

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## ड्यूटी पर नशे की हालत में अभद्रता करने का आरोप
प्रभारी डॉ. प्रदीप शर्मा द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में कई अत्यंत गंभीर और चौंकाने वाले तथ्यों का उल्लेख किया गया है। पत्र के अनुसार, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कुमार नूनिया बिना किसी पूर्व सूचना अथवा आधिकारिक औचित्य के अचानक प्रभारी कक्ष में दाखिल हुए। कक्ष में प्रवेश करते ही उन्होंने डॉ. शर्मा के साथ बिना किसी वाजिब कारण के कथित तौर पर बेहद आपत्तिजनक और असंसदीय भाषा का उपयोग करना शुरू कर दिया। इस शिकायती पत्र में सबसे बड़ा आरोप यह दर्ज किया गया है कि बातचीत, शारीरिक हाव-भाव और हरकतों से डॉ. नूनिया पूरी तरह से भारी शराब के नशे में धुत प्रतीत हो रहे थे। एक जिम्मेदार वरिष्ठ चिकित्सक का ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में पाया जाना बेहद चिंताजनक विषय है।

## साक्ष्य के तौर पर वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित
डॉ. प्रदीप शर्मा ने इस पूरे घटनाक्रम की शिकायत को केवल मौखिक आरोपों तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि ठोस दस्तावेजी साक्ष्यों की तैयारी भी की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब डॉ. नूनिया प्रभारी कक्ष के भीतर हंगामा कर रहे थे, उस दौरान घटित हर एक गतिविधि की स्पष्ट वीडियो रिकॉर्डिंग तैयार कर ली गई थी। यह वीडियो फुटेज आधिकारिक तौर पर पूरी तरह सुरक्षित रख लिया गया है। डॉ. शर्मा का कहना है कि आगामी दिनों में यदि उच्चाधिकारियों द्वारा विभागीय जांच समिति बैठाई जाती है अथवा साक्ष्यों की मांग की जाती है, तो इस संपूर्ण वीडियो क्लिप को आधिकारिक और अकाट्य प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।

## अड़तालीस घंटे की मोहलत और विभागीय कार्रवाई की चेतावनी
प्रभारी चिकित्सा अधिकारी ने अपने कार्यालय पत्र में इस पूरे वाकये को राजकीय सेवा नियमावली, सरकारी कार्यालय की मर्यादा और पेशेवर अनुशासन पर सीधा आघात करार दिया है। जारी नोटिस में डॉ. नूनिया को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे पत्र प्राप्त होने के दो दिन यानी 48 घंटे के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण प्रभारी कार्यालय में प्रस्तुत करें। आदेश में यह सख्त चेतावनी भी दर्ज की गई है कि यदि निर्धारित अवधि में संतोषजनक जवाब नहीं मिला या स्पष्टीकरण देने में आनाकानी की गई, तो मामले की पूरी रिपोर्ट बनाकर कठोर दंडात्मक और अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा के साथ स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को अग्रसारित कर दी जाएगी।

## पहले की समझाइश बेअसर, उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग
प्रभारी डॉ. प्रदीप शर्मा के अनुसार, डॉ. नूनिया की ओर से ऐसा आपत्तिजनक आचरण सामने आने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी उनके कामकाजी तौर-तरीकों और व्यवहार में सुधार लाने के लिए उन्हें कई बार व्यक्तिगत स्तर पर मौखिक रूप से समझाया और आगाह किया गया था। प्रशासनिक स्तर पर की गई इन समझाइशों और चेतावनियों का उनके रवैये पर कोई अनुकूल असर देखने को नहीं मिला और कार्यस्थल पर कथित अशोभनीय व्यवहार की पुनरावृत्ति जारी रही। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए डॉ. शर्मा ने स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से अपील की है कि वे इस पूरे प्रकरण का अविलंब संज्ञान लें और कार्यस्थल की मर्यादा भंग करने के जिम्मेदार व्यक्ति पर कठोर विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करें।

## इसका आप पर असर
सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों के इस विवाद से स्वास्थ्य केंद्र की सामान्य कार्यप्रणाली और मरीजों के उपचार पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।

- **भारत में:** सरकारी चिकित्सा संस्थानों में चिकित्सकों के अनुशासन और जवाबदेही को लेकर नियम और सख्त किए जाने की मांग तेज हो सकती है। इससे स्वास्थ्य कर्मियों के आचरण पर प्रशासनिक निगरानी बढ़ाई जा सकती है।
- **झुंझुनूं में:** मंड्रेला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आने वाले स्थानीय मरीजों को डॉक्टरों के आपसी तनाव के कारण स्वास्थ्य सेवाओं में देरी का सामना करना पड़ सकता है। स्थानीय निवासियों को अस्पताल में ओपीडी या आपातकालीन परामर्श के लिए अतिरिक्त समय लग सकता है।
- **स्वास्थ्य कर्मियों पर प्रभाव:** सरकारी ड्यूटी के दौरान अनुशासनहीनता या नशे के आरोपों में विभागीय जांच और निलंबन जैसी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। सभी कर्मचारियों को कार्यस्थल पर तय आचार संहिता का कड़ाई से पालन करना होगा।
- **प्रशासनिक निगरानी:** अस्पताल प्रशासन द्वारा कार्यस्थल पर आंतरिक सुरक्षा और वीडियो साक्ष्यों के जरिए कर्मचारियों की उपस्थिति तथा आचरण की समीक्षा बढ़ा दी जाएगी। इससे अनुशासनहीन गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने में मदद मिलेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह विवाद मंड्रेला स्वास्थ्य केंद्र में एक वरिष्ठ डॉक्टर द्वारा कार्यस्थल पर अनुशासनहीन आचरण और कथित रूप से शराब के नशे में प्रभारी कक्ष में पहुंचकर हंगामा करने के कारण उत्पन्न हुआ।

- **सीधा कारण:** वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कुमार नूनिया बिना पूर्व सूचना के प्रभारी कक्ष में दाखिल हुए और डॉ. प्रदीप शर्मा के साथ कथित तौर पर अशोभनीय व्यवहार किया। उनके हाव-भाव और गतिविधियों से उनके भारी नशे में होने का अंदेशा लगाया गया।
- **पृष्ठभूमि और तनाव:** प्रभारी चिकित्सा अधिकारी के अनुसार डॉ. नूनिया को उनके व्यवहार और कार्यशैली को लेकर पूर्व में भी कई बार मौखिक चेतावनियां दी गई थीं। इन चेतावनियों पर ध्यान न दिए जाने से दोनों पक्षों के बीच तनाव बना हुआ था।
- **सोशल मीडिया पर वीडियो:** कक्ष में हुए हंगामे की वीडियो रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हो गई, जिसने पूरे मामले को तूल दे दिया। वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन को लिखित कार्रवाई करने के लिए विवश होना पड़ा।
- **आगामी कदम:** आरोपी चिकित्सक से 48 घंटे में स्पष्टीकरण मांगा गया है। जवाब संतोषजनक न होने की स्थिति में उच्चाधिकारियों द्वारा मामले की विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

## सवाल-जवाब

### 1. यह विवाद किस अस्पताल का है?
यह घटना राजस्थान के झुंझुनूं जिले के मंड्रेला कस्बे में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की है।

### 2. किस वरिष्ठ डॉक्टर को नोटिस जारी किया गया है?
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापित वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कुमार नूनिया को नोटिस थमाया गया है।

### 3. डॉ. नूनिया पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
उन पर प्रभारी कक्ष में अचानक आकर अभद्र व्यवहार करने, व्यवस्था बिगाड़ने और शराब के नशे में हंगामा करने के आरोप लगे हैं।

### 4. नोटिस जारी करने वाले अधिकारी कौन हैं?
मंड्रेला सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रदीप शर्मा ने यह नोटिस जारी किया है।

### 5. स्पष्टीकरण देने के लिए कितना समय दिया गया है?
डॉ. नूनिया को नोटिस का लिखित जवाब प्रस्तुत करने के लिए दो दिन यानी 48 घंटे का समय दिया गया है।

### 6. यदि जवाब असंतोषजनक रहा तो क्या कार्रवाई होगी?
निर्धारित समय में जवाब न मिलने या असंतोषजनक पाए जाने पर नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई हेतु उच्चाधिकारियों को लिखा जाएगा।

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