# झुंझुनूं में खाकी का मानवीय चेहरा, रात की गश्त पर बेसहारा लोगों की मसीहा बनीं महिला थानाधिकारी अभिलाषा

> झुंझुनूं में महिला थानाधिकारी अभिलाषा रात की गश्त के दौरान असहाय लोगों को भोजन और कंबल बांट रही हैं। उनकी यह अनूठी पहल सर्दियों में जरूरतमंदों के लिए बड़ी राहत बन रही है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-26 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/jhunjhunu-men-humanity-ki-misal-raat-ki-gashat-mein-sahara-bani-sho-abhilasha-51945 · **Language:** Hindi
**Tags:** झुंझुनूं, अभिलाषा, महिला थानाधिकारी, पुलिस, इंसानियत, सर्दियां, राजस्थान

पुलिस की ड्यूटी मुख्य रूप से कानून और व्यवस्था बनाए रखने की होती है, लेकिन झुंझुनूं में तैनात महिला थानाधिकारी अभिलाषा ने इस जिम्मेदारी के साथ मानवीय सेवा का अनूठा उदाहरण पेश किया है। जब वे रात के समय शहर की सुरक्षा के लिए गश्त पर निकलती हैं, तो उनकी गाड़ी में अपराधियों पर नजर रखने के साधनों के साथ भोजन के पैकेट और कंबल भी मौजूद रहते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि शहर में कोई भी बेसहारा व्यक्ति भूखा न सोए और सर्द रातों में किसी को भी ठंड से ठिठुरने के लिए मजबूर न होना पड़े।

 

## गश्त के दौरान भोजन और कंबलों का वितरण
 आमतौर पर पुलिस की नाइट पेट्रोलिंग का काम आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाना होता है, लेकिन अभिलाषा ने इस रूटीन में सेवा का भाव भी शामिल कर लिया है। गश्त के दौरान जब वे सड़कों, फुटपाथों या अन्य सार्वजनिक स्थलों पर किसी असहाय और बेसहारा व्यक्ति को देखती हैं, तो अपनी गाड़ी रोककर उन्हें तुरंत भोजन उपलब्ध कराती हैं। इसके अलावा, सर्दियों के मौसम में उनकी गाड़ी में हमेशा कंबल और शॉल भी रखे रहते हैं, ताकि जरूरतमंदों को कड़ाके की ठंड से बचाया जा सके।

 

## भोजन के सदुपयोग का अनूठा तरीका
 अभिलाषा बताती हैं कि वे हर रोज अपनी रात्रिकालीन गश्त पर निकलने से पहले पांच से दस भोजन के पैकेट अपनी गाड़ी में रखवाती हैं। यदि ड्यूटी के दौरान उन्हें कोई जरूरतमंद या भूखा व्यक्ति मिल जाता है, तो वे उसे वे पैकेट दे देती हैं। उनकी इस कार्यशैली में एक गहरी संवेदनशीलता भी नजर आती है। यदि किसी रात गश्त के दौरान कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मिलता जिसे भोजन की आवश्यकता हो, तो वे उस खाने को बर्बाद नहीं होने देतीं, बल्कि अगली सुबह उसे गायों को खिला देती हैं। इस प्रकार उनके द्वारा तैयार किए गए भोजन का शत-प्रतिशत सदुपयोग हो जाता है और कोई भी पैकेट बेकार नहीं जाता है।

 

## परिवार से मिले सेवा के संस्कार
 इस प्रकार की निस्वार्थ सेवा की प्रेरणा के बारे में अभिलाषा का कहना है कि उन्हें यह गुण अपने परिवार से मिले बचपन के संस्कारों से मिला है। यही वजह है कि वे अपनी कठिन पुलिस ड्यूटी के बीच से भी असहाय और जरूरतमंद लोगों के लिए समय निकाल लेती हैं। उनके लिए सेवा का यह कार्य किसी विशेष अवसर तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी दैनिक जीवनचर्या का एक अहम हिस्सा बन चुका है। वे अपने परिवार के सभी खुशी के मौकों को भी इन जरूरतमंद लोगों के साथ ही साझा करती हैं। अपने जन्मदिन या अन्य उत्सवों पर वे अक्सर अनाथालयों और ऐसी जगहों पर जाती हैं जहां बेसहारा बच्चे रहते हैं। उनका दृढ़ विश्वास है कि खुशियां बांटने से हमेशा बढ़ती हैं और किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाना अपने आप में एक बहुत बड़ी मानसिक संतुष्टि देता है।

 

## जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा में मदद का संकल्प
 अभिलाषा की यह सोच केवल भोजन और कपड़े बांटने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वे बालिकाओं और बच्चों की शिक्षा में भी पूरा सहयोग करना चाहती हैं। वे चाहती हैं कि आर्थिक तंगी या खराब परिस्थितियां किसी भी मेधावी बच्चे के सपनों की राह में बाधा न बन सकें। उनका मानना है कि यदि बच्चों को पढ़ाई के लिए सही अवसर और उचित सहयोग मिल जाए, तो वे अपने भविष्य को पूरी तरह से सुधार सकते हैं। इस नेक काम में उनके पति एसआई मुकेश किलानियां भी उनका पूरा साथ देते हैं और उन्हें लगातार प्रोत्साहित करते हैं। उनके पति भी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को कोचिंग दिलाने में अपना सहयोग प्रदान करते हैं। दोनों का संयुक्त प्रयास यही है कि समाज के वंचित बच्चों को शिक्षा के बेहतर विकल्प मिल सकें और वे भविष्य में अपने पैरों पर मजबूती से खड़े हो सकें।

 

## पुलिस और जनता के बीच मजबूत होता विश्वास
 पुलिस की वर्दी को आमतौर पर समाज में सख्ती, कड़े अनुशासन और कानूनी कार्रवाई के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। लेकिन महिला थानाधिकारी अभिलाषा की यह अनूठी पहल यह साबित करती है कि कानून का पालन कराते हुए भी समाज के सबसे कमजोर वर्ग के प्रति संवेदनशील हुआ जा सकता है। रात के वक्त शहर की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली गाड़ी में रखे भोजन के पैकेट और कंबल भले ही एक छोटी शुरुआत लगते हों, लेकिन इनके पीछे की भावना बहुत बड़ी है। यह उस वृहद जिम्मेदारी का हिस्सा है जिसमें नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ उनकी बुनियादी जरूरतों के प्रति संवेदनशीलता भी शामिल है। अभिलाषा का यह कदम समाज को स्पष्ट संदेश देता है कि मानवता दिखाने के लिए किसी बड़े आयोजन या विशेष दिन का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं होती है। रात के समय किसी भूखे को भोजन कराना, ठंड से कांपते इंसान को कंबल देना या किसी बच्चे की पढ़ाई में मदद करना भी समाज में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकता है। खाकी के साथ जुड़ी यह संवेदनशीलता पुलिस और आम जनता के बीच आपसी भरोसे और मानवीय रिश्तों को और अधिक मजबूत करने का काम करती है।

## इसका आप पर असर
महिला थानाधिकारी अभिलाषा की यह अनूठी पहल स्थानीय स्तर पर असहाय लोगों के लिए सीधे तौर पर बड़ी राहत लेकर आई है।

- **झुंझुनूं में:** फुटपाथ और खुले आसमान के नीचे सोने वाले बेसहारा लोगों को कड़ाके की ठंड में कंबल और रात के समय ताजा भोजन मिल रहा है। इससे ठंड के मौसम में जरूरतमंदों की कठिनाइयों में कमी आ रही है।

- **भारत में:** यह प्रेरणादायक कदम देश के अन्य पुलिस कर्मियों और नागरिकों के बीच सामाजिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की मिसाल पेश करता है। इससे समाज के वंचित तबके के प्रति आम जनता का सकारात्मक दृष्टिकोण मजबूत होता है।

## ऐसा क्यों हुआ
इस मानवीय पहल के पीछे पारिवारिक संस्कार और सामाजिक संवेदनशीलता की गहरी भावना जुड़ी हुई है।

- **बचपन के संस्कार:** अभिलाषा को बचपन में परिवार से मिले संस्कारों ने हमेशा जरूरतमंदों की मदद करने की प्रेरणा दी, जिसे उन्होंने अपनी पुलिस ड्यूटी का हिस्सा बना लिया।

- **व्यावहारिक संवेदनशीलता:** रात की गश्त के दौरान पुलिसकर्मियों का सीधे तौर पर शहर के असहाय और बेसहारा लोगों से सामना होता है, जिससे उन्हें ठंड और भूख से जूझ रहे लोगों की वास्तविक स्थिति का अहसास हुआ।

- **पारिवारिक सहयोग:** उनके पति एसआई मुकेश किलानियां का समर्थन भी इस सामाजिक और शैक्षणिक सहायता के कार्य को निरंतर आगे बढ़ाने में मददगार साबित हुआ है।

## सवाल-जवाब

### 1. अभिलाषा वर्तमान में किस पद पर तैनात हैं?
अभिलाषा झुंझुनूं में महिला थानाधिकारी के पद पर तैनात हैं।

### 2. वे रात की गश्त के दौरान अपने साथ क्या रखती हैं?
वे गश्त के दौरान पांच से दस भोजन के पैकेट, कंबल और शॉल रखती हैं।

### 3. बचने वाले भोजन का वे क्या करती हैं?
यदि कोई जरूरतमंद नहीं मिलता है, तो वे अगले दिन वह भोजन गायों को खिला देती हैं।

### 4. इस कार्य में उन्हें किसका सहयोग मिलता है?
इस कार्य में उनके पति एसआई मुकेश किलानियां उनका पूरा प्रोत्साहन और सहयोग करते हैं।

### 5. अभिलाषा की सोच भोजन और कपड़ों के अलावा किस क्षेत्र में है?
वे जरूरतमंद बच्चों और बालिकाओं की शिक्षा में भी पूरा सहयोग देना चाहती हैं।

## प्रेरणा और सबक
महिला थानाधिकारी अभिलाषा की यह प्रेरक जीवन यात्रा समाज के लिए कई मूल्यवान सबक प्रस्तुत करती है।

- **कर्तव्य के साथ सेवा:** पेशेवर जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए भी समाज के कमजोर और असहाय लोगों के लिए समय निकाला जा सकता है।

- **संसाधनों का सदुपयोग:** अतिरिक्त भोजन को व्यर्थ न जाने देकर उसे जरूरतमंदों या पशुओं तक पहुंचाना बुद्धिमानी और संवेदनशीलता का प्रतीक है।

- **खुशियां बांटना:** अपने जीवन के खुशी के मौकों को अनाथ बच्चों और वंचितों के साथ साझा करने से वास्तविक मानसिक संतुष्टि मिलती है।

- **शिक्षा में सहयोग:** आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की शिक्षा में मदद करके उनके भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।

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