झुंझुनूं के टांई गांव में व्यवस्थाओं की पोल, श्मशान घाट तक शव ले जाने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली का लेना पड़ा सहारा राजस्थान के झुंझुनूं जिले के टांई गांव में जलभराव और कीचड़ के कारण एक महिला का शव श्मशान घाट तक ट्रैक्टर-ट्रॉली में ले जाना पड़ा। ग्रामीणों का आरोप है कि कलेक्टर के आश्वासन के दो महीने बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। राजस्थान के झुंझुनूं जिले की बिसाऊ तहसील के अंतर्गत आने वाले टांई गांव से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो प्रशासनिक दावों और जल निकासी की पोल खोलती है। यहां श्मशान घाट के रास्ते पर बदहाली इस कदर हावी थी कि एक महिला के अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को मजबूरन ट्रैक्टर-ट्रॉली का सहारा लेना पड़ा। इस घटना के सामने आने के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति गहरा रोष देखा जा रहा है। श्मशान यात्रा में आई अमानवीय बाधा टांई गांव की निवासी सोनिया पत्नी देवकरण स्वामी का निधन हो गया था। उनके निधन के बाद परिजन, रिश्तेदार और अन्य ग्रामीण गमगीन माहौल में शव को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट ले जाने के वास्ते निकले थे। हालांकि, रास्ते में जलभराव और घुटनों तक जमे कीचड़ ने स्थिति को बेहद विकट बना दिया था। सामान्य तौर पर कंधा देकर निकाली जाने वाली शवयात्रा के लिए पैदल चलना भी पूरी तरह असंभव हो चुका था। ऐसे में ग्रामीणों के पास कोई और विकल्प नहीं बचा और उन्होंने मजबूरी में शव को ट्रैक्टर-ट्रॉली पर रखा। इसके बाद कीचड़ और गंदे पानी से भरे रास्ते को पार करते हुए वे ट्रैक्टर के जरिए श्मशान घाट पहुंचे और अंतिम संस्कार संपन्न किया। वर्षों पुरानी समस्या और नाले के पानी का संकट स्थानीय लोगों का कहना है कि श्मशान मार्ग पर जलभराव की यह तकलीफ कोई आज की नहीं है, बल्कि यह पिछले कई वर्षों से बनी चली आ रही है। गांव में जल निकासी की मुकम्मल व्यवस्था न होने की वजह से नालियों का और बरसात का गंदा पानी सीधे मुख्य सड़क पर फैल जाता है। इस वजह से न सिर्फ पैदल चलने वालों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है, बल्कि वाहनों का निकलना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों ने इस सिलसिले में ग्राम पंचायत से लेकर कई बड़े अधिकारियों तक मौखिक और लिखित शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस और स्थायी हल नहीं निकाला जा सका है। कलेक्टर के आश्वासन के दो महीने बाद भी हालात जस के तस प्रशासन की लगातार अनदेखी से आजिज आकर ग्रामीण बीते 9 जून को एकजुट होकर जिला कलेक्टर से भी मिलने पहुंचे थे। उस मुलाकात के दौरान जिला कलेक्टर ने इस मामले पर गंभीरता दिखाते हुए आगामी 15 दिनों के भीतर जल निकासी और रास्ते की बदहाली का स्थायी समाधान कराने का भरोसा दिलाया था। हालांकि, उस वादे को पूरे हुए दो महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। ग्रामीणों ने एक बार फिर प्रशासन के समक्ष पुरजोर मांग उठाई है कि श्मशान घाट के रास्ते से कीचड़ और पानी की इस समस्या का तुरंत समाधान किया जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को अपनों के अंतिम सफर के दौरान ऐसी अमानवीय और दयनीय परिस्थितियों का सामना न करना पड़े। इसका आप पर असर राजस्थान में: यह घटना स्थानीय स्तर पर बुनियादी ढांचे की बदहाली और प्रशासनिक वादों की हकीकत को उजागर करती है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को दैनिक आवाजाही और आपातकालीन स्थितियों में गंभीर दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है। सवाल-जवाब 1. यह घटना राजस्थान के किस जिले में हुई है? यह घटना राजस्थान के झुंझुनूं जिले की बिसाऊ तहसील के टांई गांव में हुई है। 2. शव को श्मशान घाट तक किस वाहन से ले जाना पड़ा? रास्ते में भारी कीचड़ और जलभराव होने के कारण शव को ट्रैक्टर-ट्रॉली में रखकर ले जाना पड़ा। 3. ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से कब मुलाकात की थी? ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर बीते 9 जून को जिला कलेक्टर से मुलाकात की थी। 4. कलेक्टर ने समाधान के लिए कितना समय दिया था? जिला कलेक्टर ने 15 दिनों के भीतर जल निकासी और रास्ते की समस्या का स्थायी समाधान कराने का आश्वासन दिया था। https://trendkia.com/rajasthan/jhunjhunun-ke-tani-ganva-men-vyavasthaon-ki-pola-shmashana-ghata-taka-shava-le-jane-ke-lie-traiktara-troli-ka-lena-para-sahara-20985 TrendKia — Har trend, sabse pehle.