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  "title": "राजस्थान के जोधपुर में सातुड़ी तीज से पहले छाई धमोळी की रौनक, रातभर गुलजार रहे बाजार",
  "summary": "जोधपुर में सातुड़ी तीज से पहले धमोळी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। बाजारों में व्यंजनों और श्रृंगार सामग्री की दुकानों पर भारी भीड़ उमड़ी, और आज महिलाएं निर्जला व्रत रख रही हैं।",
  "content": "सांस्कृतिक नगरी जोधपुर में पारंपरिक कजली तीज के आगमन से ठीक एक दिन पहले धमोळी का पर्व बेहद जोश और उत्साह के साथ मनाया गया। सूरज ढलने के बाद शहर के मुख्य व्यापारिक केंद्रों से लेकर सरदारपुरा तक का पूरा इलाका खान-पान और उत्सव के एक बड़े मेले में बदल गया। पारंपरिक पकवानों का स्वाद चखने और खरीदारी करने के लिए शहर के निवासियों के साथ-साथ पर्यटकों की भारी भीड़ देर रात तक सड़कों पर डटी रही।\n\nसज धज कर तैयार हुईं अस्थायी स्टॉल्स और लजीज व्यंजनों की महक\nइस विशेष रात के दौरान शहर के मुख्य बाजारों में सैकड़ों की संख्या में अस्थाई दुकानें लगाई गईं, जहां कई तरह के स्वादिष्ट व्यंजन एक साथ उपलब्ध थे। फिजाओं में मारवाड़ी मिठास जैसे रबड़ी, रसमलाई, घेवर और प्रसिद्ध मावे की कचौरी की महक फैली हुई थी। इसके साथ ही, दक्षिण भारतीय खाने के शौकीनों के लिए इडली, डोसा और सांभर वड़ा, तथा युवाओं के बीच लोकप्रिय सैंडविच और आलू टिक्की के काउंटरों पर खरीदारों का तांता लगा रहा। रात के 10 बजने के बाद भी लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ खान-पान का आनंद लेते दिखाई दिए।\n\nमेहंदी और श्रृंगार की दुकानों पर महिलाओं का उमड़ा उत्साह\nखाने-पीने के दौर के अलावा यह रात महिलाओं के उल्लास और सजने-संवरने का भी खास मौका साबित हुई। त्रिपोलिया, सरदारपुरा और भीतरी शहर के बाजारों में ब्यूटी पार्लरों के साथ-साथ मेहंदी लगाने वाले कारीगरों के बाहर महिलाओं की लंबी कतारें देखी गईं। पर्व के लिए महिलाओं ने अपने हाथों में खूबसूरत मेहंदी लगवाई। इसके अलावा चूड़ियों, बिंदी, सुहाग की अन्य वस्तुओं और पारंपरिक परिधानों की दुकानों पर भी ग्राहकों की जबरदस्त चहल-पहल देर रात तक बनी रही।\n\nआज अखंड सौभाग्य के लिए रखा जा रहा है निर्जला उपवास\nधमोळी के इस रंगारंग माहौल के बाद आज सोमवार को कजली यानी सातुड़ी तीज का पवित्र त्योहार पूरी निष्ठा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। सुहागिन महिलाएं अपने जीवनसाथी की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए पूरे दिन बिना पानी के उपवास रख रही हैं। दूसरी ओर, कुंवारी युवतियां भी मनचाहा और योग्य जीवनसाथी पाने के लिए यह व्रत कर रही हैं। शाम के समय महिलाएं सोलह श्रृंगार करके भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करेंगी और कथा श्रवण करेंगी। इसके बाद रात के समय चांद निकलने पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर सत्तू से व्रत खोला जाएगा।\n\nइसका आप पर असर\nसातुड़ी तीज और धमोळी के इस पर्व का स्थानीय व्यापार और रोजमर्रा की दिनचर्या पर सीधा असर देखने को मिलता है।\n\n• भारत में: पारंपरिक भारतीय त्योहारों के दौरान बाजारों में होने वाली भारी खरीदारी से स्थानीय छोटे व्यापारियों और खान-पान के कारोबारियों को अच्छी आय का अवसर मिलता है।\n• जोधपुर में: शहर के त्रिपोलिया, सरदारपुरा और भीतरी इलाकों के बाजारों में भारी भीड़ के कारण यातायात में बदलाव और शाम के समय आवाजाही में अधिक समय लग सकता है।\n• खान-पान और बाजार: इस दौरान पारंपरिक मिठाइयों, श्रृंगार सामग्री और कपड़ों की मांग बढ़ने से कीमतों और बाजार की गतिविधियों में तेजी बनी रहती है।\n• पारिवारिक और सामाजिक प्रभाव: सुहागिन महिलाओं द्वारा रखे जाने वाले निर्जला उपवास और सामुदायिक आयोजनों से पारिवारिक मेलजोल और सांस्कृतिक परंपराएं मजबूत होती हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जोधपुर में धमोळी का पर्व किस अवसर से पहले मनाया गया?\nधमोळी का पर्व पारंपरिक सातुड़ी या कजली तीज से ठीक एक दिन पहले मनाया गया।\n\n2. धमोळी की रात जोधपुर के किन बाजारों में सबसे ज्यादा भीड़ रही?\nभीतरी शहर, त्रिपोलिया और सरदारपुरा के बाजारों में खान-पान और खरीदारी के लिए भारी भीड़ उमड़ी।\n\n3. धमोळी की रात बाजारों में कौन-से मुख्य व्यंजन उपलब्ध थे?\nबाजारों में रसमलाई, रबड़ी, घेवर, मावे की कचौरी, इडली, डोसा, सांभर वड़ा, सैंडविच और आलू टिक्की जैसे व्यंजन बिके।\n\n4. सातुड़ी तीज का व्रत कौन लोग रख रहे हैं?\nसुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए और कुंवारी कन्याएं योग्य वर पाने के लिए यह व्रत रख रही हैं।\n\n5. व्रत का समापन किस प्रकार किया जाता है?\nशाम को पूजा और कथा सुनने के बाद रात को चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर सत्तू से व्रत का पारणा किया जाता है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-08-31",
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