जोधपुर जेल में तय समय के बाद पहुंचे आसाराम, फाटक बंद मिलने पर पुलिस ने दर्ज किया केस इलाज के लिए मिली 20 दिन की पैरोल खत्म होने के बाद आसाराम रात करीब 11 बजे जोधपुर सेंट्रल जेल पहुंचे, जहां सूर्यास्त के नियमों का हवाला देकर उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया। समय पर सरेंडर न करने पर जेल प्रशासन की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। नाबालिग गुरुकुल छात्रा से जुड़े यौन शोषण मामले में उम्रकैद काट रहे आसाराम की जेल वापसी को लेकर जोधपुर में रात के वक्त अजीबोगरीब स्थिति बन गई। स्वास्थ्य कारणों से मिली 20 दिन की अस्थायी पैरोल की मियाद पूरी होने के बाद जब वे बुधवार देर रात जोधपुर सेंट्रल जेल पहुंचे, तो जेल प्रशासन ने नियमों के तहत मुख्य द्वार खोलने से मना कर दिया। समय सीमा बीत जाने के बाद भी तय प्रक्रिया के तहत हाजिरी न देने को जेल प्रबंधन ने नियमों का गंभीर उल्लंघन माना है, जिसके बाद पुलिस में औपचारिक प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। देर रात जेल का दरवाजा बंद रहने की मुख्य वजह आसाराम को उपचार कराने के उद्देश्य से 6 अक्टूबर को 20 दिनों की राहत मंजूर की गई थी। इस अवधि की औपचारिक मियाद समाप्त होने के उपरांत उन्हें निर्धारित समय यानी सूर्यास्त और शाम 5 बजे से पहले कारागार परिसर में व्यक्तिगत रूप से उपस्थिति दर्ज करानी थी। वे तय समय पर नहीं पहुंचे और बाद में विशेष एयर एंबुलेंस के जरिए मध्य प्रदेश के इंदौर से राजस्थान के जोधपुर हवाई अड्डे पर उतरे। हवाई अड्डे से सीधे उन्हें एंबुलेंस द्वारा रात करीब 11 बजे जोधपुर सेंट्रल जेल ले जाया गया। कारागार मैनुअल और जेल अधीक्षक के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के मुताबिक किसी भी बंदी को सूर्यास्त के बाद जेल परिसर में प्रवेश कराने की अनुमति नहीं होती है। निर्धारित समय से कई घंटे देरी से पहुंचने के कारण जेल सुरक्षा दल ने तत्काल गेट खोलने से इनकार कर दिया। गेट न खुलने पर आसाराम अपनी एंबुलेंस में सवार होकर वापस रवाना हो गए, जबकि जेल के बाहर उनके अनुयायियों और समर्थकों का बड़ा जमावड़ा पूरी हलचल को देखता रहा। प्रशासन का कड़ा रुख और थाने में दर्ज प्राथमिकी समय सीमा समाप्त होने के बावजूद तय नियमों के अनुरूप आत्मसमर्पण न करने की इस घटना को जेल प्रबंधन ने गंभीरता से लिया है। जेल प्रशासन की तरफ से जेल प्रहरी बनवारीलाल ने जोधपुर के रातानाडा पुलिस थाने में आसाराम के खिलाफ औपचारिक तौर पर मामला दर्ज करवाया। इस शिकायत में स्पष्ट आरोप लगाया गया है कि पैरोल की मियाद पूरी होने पर भी बंदी ने समय पर कानूनी प्रक्रिया के तहत जेल में समर्पण नहीं किया। शिकायत दर्ज होने के बाद विधिक स्थिति यह बन गई है कि उन्हें पैरोल की शर्तों का उल्लंघन कर फरार रहने वाले बंदी के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी तलाश रातानाडा थाना पुलिस द्वारा की जा रही है। देर रात पहुंचे बंदी को दोबारा किस औपचारिक कानूनी प्रक्रिया के जरिए हिरासत में लिया जाएगा, इसे लेकर विधिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कानूनी परिणाम और भविष्य की अर्जियों पर खतरा नियत समय पर कारागार में रिपोर्ट न करने के इस कृत्य पर राजस्थान कारागार अधिनियम की धारा 58 ख के अंतर्गत कार्रवाई शुरू की गई है। इस कानूनी प्रावधान की सबसे कड़ी बात यह है कि पुलिस संबंधित व्यक्ति को बिना किसी अदालती वारंट के सीधे हिरासत में ले सकती है। इसके अलावा इस धारा के तहत दोष सिद्ध होने पर अधिकतम 3 वर्ष तक की अतिरिक्त जेल की सजा और 3000 रुपये के आर्थिक दंड का स्पष्ट प्रावधान मौजूद है। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस तरह का अनुशासनहीनता और देरी का रिकॉर्ड तैयार होने से आसाराम द्वारा भविष्य में इलाज या राहत के लिए कोर्ट में लगाई जाने वाली तमाम आगामी अपीलों और अर्जियों पर सीधा प्रतिकूल असर पड़ेगा। इसका आप पर असर यह घटनाक्रम सजायाफ्ता कैदियों के लिए पैरोल नियमों की सख्ती और उनके अनुपालन की कानूनी सीमाओं को रेखांकित करता है। • राजस्थान में: जोधपुर जेल प्रशासन और पुलिस द्वारा की गई इस सख्त कार्रवाई से साफ है कि स्थानीय प्रशासन नियमों के उल्लंघन पर किसी भी कैदी को विशेष छूट देने के पक्ष में नहीं है। पुलिस अब तय कानूनी प्रक्रिया के तहत बंदी की औपचारिक कस्टडी सुनिश्चित करेगी। • अदालती नियमों के संदर्भ में: समय पर आत्मसमर्पण न करने का यह मामला कैदियों को मिलने वाली मेडिकल राहत की शर्तों के पालन का बड़ा उदाहरण बन गया है। इस तरह के रिकॉर्ड के कारण संबंधित बंदी को भविष्य में कोर्ट से किसी भी प्रकार की आपातकालीन पैरोल या राहत मिलना बेहद कठिन हो जाता है। • कानूनी कार्रवाई के स्तर पर: संबंधित धारा के तहत बिना वारंट गिरफ्तारी और अतिरिक्त कारावास का खतरा उत्पन्न हो जाता है। इससे मामले में शामिल कैदी की मौजूदा सजा के साथ-साथ नई कानूनी पेचीदगियां भी जुड़ जाती हैं। • प्रशासनिक व्यवस्था के तहत: जेल मैनुअल के सूर्यास्त नियम को कड़ाई से लागू कर प्रशासन ने यह संदेश दिया है कि रात के वक्त किसी भी कैदी का अनौपचारिक प्रवेश संभव नहीं है। इससे आगे भी जेल सुरक्षा और कैदी प्रबंधन के नियम पूरी तरह प्रभावी रहेंगे। ऐसा क्यों हुआ यह पूरा गतिरोध आसाराम के अस्पताल से लौटने के समय और कारागार नियमावली के सूर्यास्त प्रावधानों के टकराव के कारण उत्पन्न हुआ। • तय समय सीमा का उल्लंघन: इलाज के लिए मिली 20 दिन की पैरोल अवधि समाप्त होने पर बंदी को शाम 5 बजे तक जेल में रिपोर्ट करना अनिवार्य था। वे तय समय तक नहीं पहुंचे और इंदौर से जोधपुर पहुंचने में काफी देर हो गई। • कारागार मैनुअल का सूर्यास्त नियम: जेल नियमों और जेल अधीक्षक के आदेशानुसार सूर्यास्त के बाद किसी भी सामान्य या पैरोल से लौटने वाले बंदी का प्रवेश प्रतिबंधित होता है। रात करीब 11 बजे पहुंचने के कारण सुरक्षा कर्मियों ने मैनुअल का पालन करते हुए गेट खोलने से इनकार कर दिया। • औपचारिक प्राथमिकी का कारण: समय सीमा खत्म होने के बावजूद समय पर समर्पण न करने पर जेल प्रशासन ने इसे कर्तव्य में लापरवाही और फरार होने की श्रेणी में माना। इसी आधार पर जेल प्रहरी की शिकायत पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया। सवाल-जवाब 1. आसाराम को कितने दिनों की पैरोल मिली थी? आसाराम को स्वास्थ्य उपचार के लिए 6 अक्टूबर को 20 दिनों की पैरोल स्वीकृत की गई थी। 2. जोधपुर सेंट्रल जेल में उन्हें रात को प्रवेश क्यों नहीं दिया गया? जेल मैनुअल और नियमों के तहत सूर्यास्त के बाद किसी भी बंदी को जेल में दाखिल करने की अनुमति नहीं होती है, जबकि वे रात 11 बजे पहुंचे थे। 3. आसाराम के खिलाफ किस थाने में और कौन सी धारा के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है? जोधपुर के रातानाडा थाने में कारागार अधिनियम की धारा 58 ख के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। 4. कारागार अधिनियम की धारा 58 ख में क्या सजा का प्रावधान है? इस धारा के तहत दोषी को बिना वारंट गिरफ्तार किया जा सकता है और 3 वर्ष तक की कैद तथा 3000 रुपये के जुर्माने की सजा हो सकती है। https://trendkia.com/rajasthan/jodhpur-jail-men-taya-samaya-ke-bada-pahunche-asaram-phataka-bnda-milane-para-police-ne-darja-kiya-kesa-52832 TrendKia — Har trend, sabse pehle.