# जोधपुर के बनाड़ क्षेत्र में युवतियों को हुनरमंद बनाने की मुहिम, सिलाई और व्यक्तित्व विकास से संवरेगा भविष्य

> जोधपुर के बनाड़ स्थित सासियों की ढाणी गुजरावास में युवतियों और महिलाओं के लिए निःशुल्क सिलाई व व्यक्तित्व विकास प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया गया है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/jodhpur-ke-banar-kshetra-men-yuvatiyon-ko-hunaramnda-banane-ki-muhima-silai-aura-vyaktitva-vikasa-se-snvarega-bhavishya-40028 · **Language:** Hindi
**Tags:** जोधपुर, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास, सिलाई प्रशिक्षण, गुजरावास, स्वरोजगार

जोधपुर जिले के बनाड़ इलाके में स्थित सासियों की ढाणी गुजरावास में ग्रामीण बालिकाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक विशेष कार्ययोजना धरातल पर उतारी गई है। इस क्षेत्र में लड़कियों की पढ़ाई के साथ-साथ उनके व्यावहारिक कौशल को निखारने के लिए नियमित गतिविधियों का खाका तैयार किया गया है। स्थानीय युवतियां और महिलाएं सिलाई सहित कई जरूरी कार्यों का प्रशिक्षण लेने के लिए बड़ी संख्या में आगे आ रही हैं। इस पूरे प्रयास की मूल भावना यही है कि ग्रामीण परिवेश में रहने वाली महिलाओं को ऐसा हुनर सिखाया जाए जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें और अपने परिवार के साथ-साथ पूरे समाज की प्रगति में सार्थक योगदान दे सकें। इसी कड़ी के तहत क्षेत्र में एक निःशुल्क सिलाई केंद्र की औपचारिक शुरुआत की गई है।

## सामाजिक सोच से आगे बढ़कर शिक्षा और आजीविका पर फोकस
इस केंद्र के उद्घाटन के अवसर पर समाजसेवी अजय सिंह सासी ने बालिकाओं को कौशल विकास के विभिन्न माध्यमों से जुड़ने और जीवन में स्वावलंबी बनने का संदेश दिया। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि किसी भी तबके या समुदाय की प्रगति केवल पारंपरिक, सामाजिक और धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं रह सकती। अगर समाज को वास्तव में आगे ले जाना है तो शिक्षा, आजीविका और रोजगारोन्मुखी प्रयासों को भी उतनी ही तरजीह देनी होगी। जब युवतियां किताबी ज्ञान के साथ-साथ कोई उपयोगी व्यावहारिक हुनर सीखती हैं, तो उनके सामने नौकरी और स्वरोजगार के अनेक नए रास्ते खुलते हैं।

## सिलाई के साथ संवरेगा व्यक्तित्व, सिखाएंगे रिज्यूमे बनाना
गुजरावास में स्थापित किए गए इस नए सिलाई केंद्र की देखरेख और संचालन की जिम्मेदारी समाजसेविका सचिन साहवत और माधुरी को सौंपी गई है। इस केंद्र की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां बालिकाओं को केवल कपड़े सिलने का तकनीकी प्रशिक्षण ही नहीं मिलेगा, बल्कि उनके संपूर्ण व्यक्तित्व विकास पर भी काम किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान युवतियों को अपना बायोडाटा यानी रिज्यूमे तैयार करना, साक्षात्कारों या कार्यस्थलों पर अपनी क्षमताओं को बेहतर ढंग से पेश करना और उपलब्ध अवसरों के अनुरूप खुद को तैयार करने के तौर-तरीके सिखाए जाएंगे। इस कार्यक्रम का मकसद युवतियों में आत्मविश्वास भरना है ताकि वे रोजगार की प्रतिस्पर्धा में मजबूती से अपनी जगह बना सकें।

## कौशल को सरकारी योजनाओं से जोड़ने की तैयारी
आगामी दिनों में इस केंद्र से प्रशिक्षित होने वाली युवतियों और महिलाओं को विभिन्न सरकारी कल्याणकारी एवं स्वरोजगार योजनाओं से भी जोड़ने की योजना है। ऐसा करने से उन्हें अपना खुद का काम शुरू करने या स्थानीय स्तर पर रोजगार प्राप्त करने में वित्तीय व प्रशासनिक मदद मिल सकेगी। यह पूरी कवायद उस व्यापक ग्रामीण अभियान की एक अहम कड़ी है, जो भारत की ग्रामीण आबादी और युवा शक्ति को हुनरमंद बनाने पर केंद्रित है। जब गांव की महिलाएं आत्मनिर्भर होंगी, तो पारिवारिक स्तर पर संपन्नता आएगी और समाज में भी सकारात्मक बदलाव दिखेगा। गुजरावास का यह केंद्र इसी सोच को धरातल पर लाने का एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

## इसका आप पर असर
इस केंद्र के खुलने से ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर हुनर सीखने और भविष्य में आय अर्जित करने के नए साधन मिलेंगे।

- **भारत में:** ग्रामीण युवतियों को वोकेशनल ट्रेनिंग से जोड़ने वाले ऐसे जमीनी मॉडल देशभर में महिला श्रम भागीदारी बढ़ाने में सहायक होते हैं। इससे परिवारों की बुनियादी आय में सुधार होता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।
- **जोधपुर में:** बनाड़ क्षेत्र की सासियों की ढाणी गुजरावास की युवतियों को बिना किसी शुल्क के सिलाई और रिज्यूमे तैयार करने का व्यावहारिक ज्ञान मिलेगा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वे सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर अपना स्वरोजगार स्थापित कर सकेंगी।
- **रोजगार के अवसर:** व्यक्तित्व विकास और बायोडाटा निर्माण के सत्रों से लड़कियों का संकोच दूर होगा और वे स्थानीय स्तर पर काम तलाशने के काबिल बनेंगी। इससे उन्हें पारंपरिक बंदिशों से निकलकर खुद के पैरों पर खड़े होने में सीधी मदद मिलेगी।
- **सामाजिक विकास:** जब ग्रामीण महिलाएं हुनरमंद होकर कमाई शुरू करती हैं, तो परिवार के स्वास्थ्य और बच्चों की शिक्षा पर होने वाले खर्च में सीधा सुधार देखा जाता है। यह पहल समुदाय के भीतर बालिकाओं की शिक्षा और स्वतंत्रता के प्रति सकारात्मक नजरिया विकसित करेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
बनाड़ क्षेत्र के इस ग्रामीण इलाके में लड़कियों के पास पारंपरिक शिक्षा के बाद व्यावहारिक कौशल और आजीविका के अवसरों का स्पष्ट अभाव था। इसी खाई को पाटने के लिए स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संगठित रूप से यह केंद्र शुरू किया।

- **आजीविका के सीमित विकल्प:** ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था अक्सर महिलाओं की भूमिका को घर-परिवार या सीमित दायरे तक बांधकर रखती है। औपचारिक शिक्षा के साथ किसी उपयोगी तकनीकी हुनर की कमी के कारण युवतियां आत्मनिर्भर नहीं बन पाती थीं।
- **व्यावहारिक प्रशिक्षण की आवश्यकता:** केवल किताबी ज्ञान से ग्रामीण युवतियों के लिए सीधे काम पाना चुनौतीपूर्ण होता है, जिसके लिए सिलाई और संचार जैसे कौशलों की जरूरत महसूस की गई। आयोजकों ने महसूस किया कि सिलाई के साथ व्यक्तित्व विकास जोड़ने से वास्तविक परिणाम तेजी से मिलेंगे।
- **सरकारी सहायता का सेतु बनना:** ग्रामीण स्तर पर अक्सर सरकारी योजनाओं की जानकारी या पहुंच नहीं होती, जिससे जरूरतमंद लाभ से वंचित रह जाते हैं। इस केंद्र को एक ऐसे मंच के रूप में तैयार किया गया है जो कौशल देने के बाद महिलाओं को सरकारी योजनाओं से सीधे जोड़ेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. गुजरावास में किस प्रकार का प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया गया है?
यहां बालिकाओं और महिलाओं के लिए निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण और व्यक्तित्व विकास का केंद्र शुरू किया गया है।

### 2. यह प्रशिक्षण केंद्र जोधपुर के किस इलाके में स्थित है?
यह केंद्र जोधपुर जिले के बनाड़ क्षेत्र के अंतर्गत सासियों की ढाणी गुजरावास में शुरू हुआ है।

### 3. इस केंद्र का संचालन किन लोगों द्वारा किया जा रहा है?
इस सिलाई केंद्र का संचालन समाजसेविका सचिन साहवत और माधुरी द्वारा किया जा रहा है।

### 4. सिलाई के अलावा इस केंद्र में युवतियों को और क्या सिखाया जाएगा?
युवतियों को व्यक्तित्व विकास, अपना बायोडाटा तैयार करने और काम के अवसरों के लिए खुद को प्रस्तुत करने का प्रशिक्षण मिलेगा।

### 5. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद महिलाओं को किस प्रकार की मदद दी जाएगी?
प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली युवतियों और महिलाओं को रोजगार व स्वरोजगार के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा।

## प्रेरणा और सबक
गुजरावास में शुरू हुआ यह प्रयास सिखाता है कि कैसे सीमित संसाधनों और सामाजिक सहयोग से बेटियों के भविष्य को संवारा जा सकता है।

- **हुनर से आत्मनिर्भरता:** औपचारिक शिक्षा के साथ कोई व्यावहारिक शिल्प सीखना स्वावलंबन की सबसे ठोस बुनियाद बनाता है। अपने हाथों का हुनर महिलाओं को किसी भी परिस्थिति में आर्थिक संबल देता है।
- **संकोच छोड़कर आगे आना:** ग्रामीण युवतियों द्वारा सिलाई और व्यक्तित्व विकास की कक्षाओं में बढ़-चढ़कर भाग लेना दिखाता है कि बदलाव के लिए पहल जरूरी है। सीखने की ललक ही सामाजिक सीमाओं को पार करने का पहला कदम बनती है।
- **सामूहिक भागीदारी का असर:** जब स्थानीय समाज के लोग मिलकर बेटियों की तरक्की के लिए मंच तैयार करते हैं, तो पूरे क्षेत्र की सोच बदलती है। सामुदायिक प्रयास व्यक्तिगत विकास को सामाजिक क्रांति में बदल सकते हैं।

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