जोधपुर के डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज में रैगिंग पर बड़ा एक्शन, 19 छात्र और जूनियर रेजिडेंट निलंबित जोधपुर स्थित डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज में प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को प्रताड़ित करने के आरोप सही पाए जाने पर कॉलेज प्रशासन ने एक जूनियर रेजिडेंट और 18 अन्य छात्रों को निलंबित कर दिया है. राजस्थान के जोधपुर में स्थित डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने नवप्रवेशित छात्रों के साथ हुई बदसलूकी और उत्पीड़न की घटना पर कड़ा फैसला लिया है. एंटी रैगिंग समिति द्वारा प्रस्तुत विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर एक जूनियर रेजिडेंट और 18 मेडिकल छात्रों सहित कुल 19 लोगों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है. इस दंडात्मक कदम के तहत 5 छात्रों को 3 महीने के लिए तथा शेष 14 विद्यार्थियों को 1 महीने के लिए कॉलेज से बाहर किया गया है. अनुशासनहीनता पर सख्त पाबंदियां निलंबन की इस मियाद के दौरान सभी 19 विद्यार्थियों पर संस्थान की कई प्रमुख गतिविधियों और सुविधाओं के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा. ये छात्र अपनी नियमित कक्षाओं, क्लीनिकल पोस्टिंग और अन्य शैक्षणिक सत्रों में भाग नहीं ले सकेंगे. इसके साथ ही उनके हॉस्टल परिसर में रहने, लाइब्रेरी जाने और रीडिंग रूम का उपयोग करने पर भी रोक लगाई गई है. प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि कैंपस का सुरक्षित माहौल किसी भी सूरत में प्रभावित न हो. सख्त नियमों और उत्पीड़न की शिकायत नए शैक्षणिक सत्र में दाखिला लेने वाले प्रथम वर्ष के छात्रों ने सीनियर्स द्वारा लगातार मानसिक और शारीरिक दबाव बनाए जाने की शिकायत उठाई थी. जूनियर विद्यार्थियों पर मनमाने कायदे थोपे जा रहे थे, जिनमें क्लीन शेव रहने, तयशुदा हेयरकट रखने और सिर्फ औपचारिक पोशाक पहनने का दबाव शामिल था. इतना ही नहीं, कनिष्ठ छात्रों को बेवजह लंबे समय तक खड़े रखकर बेइज्जत करने के मामले भी सामने आए थे. कार्रवाई की जद में आए विद्यार्थियों के नाम जांच निष्कर्षों के बाद जिन 5 लोगों को तीन माह के निलंबन की सख्त सजा दी गई है, उनमें जूनियर रेजिडेंट अंकित ढाका के अलावा शैलेश गुर्जर, लोकेश सैनी, वीकेश चौधरी और राहुल महापुरिया शामिल हैं. वहीं एक माह के लिए निलंबित किए गए 14 छात्रों में सचिन रायवर, गोपाल गाडवीर, लक्ष्मीनारायण, शैलेन्द्र बीजानिया, रविन्द्र बिडियासर, अशोक सियाग, समीर राय, कमलेश पटेल, प्रियांशु यादव, अभिषेक कस्वां, नरेंद्र यादव, रोहिन महला, आदित्य लामोरिया और नन्दलाल मित्तल के नाम शामिल हैं. सफाई अभियान के दिन भड़का था तनाव विवाद की मुख्य शुरुआत 28 अक्टूबर को कैंपस में आयोजित क्लीन कैंपस ड्राइव के दौरान हुई थी. उस दिन वरिष्ठ छात्रों के आक्रामक रवैये के बाद प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन की एंटी रैगिंग हेल्पलाइन का सहारा लिया. शिकायत में वर्ष 2025 बैच से जुड़े सीनियर छात्रों द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न और अनुचित दबाव का ब्यौरा दर्ज कराया गया था. नेशनल हेल्पलाइन से निर्देश मिलते ही मेडिकल कॉलेज की एंटी रैगिंग समिति ने त्वरित जांच शुरू की, जिसमें सभी आरोप प्रमाणित पाए गए. लगातार सामने आते मामलों ने बढ़ाई चिंता संस्थान में केवल एक माह के अंतराल में रैगिंग से जुड़ी दूसरी शिकायत दर्ज होने से कॉलेज प्रशासन की चिंताएं बढ़ गई हैं. लगातार आते मामलों के मद्देनजर समिति ने कड़े कदम उठाने की सिफारिश की थी. अब 19 छात्रों पर कार्रवाई पूरी होने के बाद नए विद्यार्थियों में विश्वास बहाली और परिसर में भयमुक्त वातावरण तैयार करना कॉलेज प्रबंधन की प्राथमिक चुनौती बन गया है. इसका आप पर असर इस कार्रवाई से मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग और सीनियर्स द्वारा मनमानी पर कड़ा संदेश गया है. • भारत में: देश भर के मेडिकल संस्थानों में नए छात्रों के लिए यूजीसी एंटी रैगिंग हेल्पलाइन की प्रभावशीलता और सक्रियता साबित हुई है. किसी भी तरह के दुर्व्यवहार की स्थिति में जूनियर छात्र सीधे राष्ट्रीय निगरानी तंत्र तक अपनी शिकायत पहुंचा सकते हैं. • जोधपुर में: डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले प्रथम वर्ष के छात्रों को सुरक्षित और भयमुक्त माहौल मिलेगा. निलंबित छात्रों की क्लीनिकल पोस्टिंग और हॉस्टल सुविधाओं पर रोक लगने से कैंपस में अनुशासन मजबूत होगा. • अभिभावकों के लिए: कॉलेज प्रशासन की त्वरित और कठोर कार्रवाई से अपने बच्चों को हॉस्टल भेजने वाले माता-पिता की चिंताएं कम होंगी. सख्त प्रशासनिक मिसाल से अन्य सीनियर छात्रों में भी गलत व्यवहार करने से डर पैदा होगा. • चिकित्सा शिक्षा पर: सस्पेंड हुए 19 छात्रों का महत्वपूर्ण क्लीनिकल और अकादमिक समय खराब होगा, जो भविष्य में उनके करियर पर असर डाल सकता है. यह कार्रवाई सभी मेडिकल छात्रों के लिए एक गंभीर चेतावनी का काम करेगी. ऐसा क्यों हुआ यह कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रथम वर्ष के छात्रों की ओर से राष्ट्रीय हेल्पलाइन पर दर्ज कराई गई उत्पीड़न की औपचारिक शिकायत के बाद की गई. • प्रत्यक्ष कारण: दिनांक 28 अक्टूबर को परिसर में आयोजित क्लीन कैंपस ड्राइव के दौरान जूनियर छात्रों के साथ सीनियर्स का तीखा विवाद हुआ था. इसके तुरंत बाद कनिष्ठ विद्यार्थियों ने यूजीसी की एंटी रैगिंग हेल्पलाइन पर सीधी शिकायत दर्ज करा दी. • शिकायत की पुष्टि: कॉलेज की एंटी रैगिंग समिति द्वारा की गई जांच में यह प्रमाणित हुआ कि वर्ष 2025 बैच के सीनियर और एक जूनियर रेजिडेंट कनिष्ठों पर अनुचित दबाव बना रहे थे. छात्रों को क्लीन शेव रहने, विशेष बाल कटवाने, फॉर्मल कपड़े पहनने और बेवजह खड़े रहने के लिए विवश किया जाता था. • पूर्व घटनाक्रम: मेडिकल कॉलेज में महज एक महीने की समयावधि के भीतर रैगिंग की यह दूसरी शिकायत सामने आई थी. लगातार दोहराए जा रहे मामलों के कारण प्रशासन पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने और कड़ा संदेश देने का भारी दबाव था. सवाल-जवाब 1. जोधपुर मेडिकल कॉलेज में कुल कितने लोगों पर निलंबन की कार्रवाई हुई है? कॉलेज प्रशासन ने जांच के बाद एक जूनियर रेजिडेंट सहित कुल 19 लोगों को निलंबित किया है. 2. निलंबित विद्यार्थियों को कितने समय के लिए सस्पेंड किया गया है? इनमें से 5 लोगों को 3 महीने के लिए और 14 विद्यार्थियों को 1 महीने के लिए सस्पेंड किया गया है. 3. सीनियर विद्यार्थियों पर जूनियर छात्रों ने क्या आरोप लगाए थे? सीनियर्स पर क्लीन शेव रहने, विशेष हेयरकट रखने, फॉर्मल कपड़े पहनने का दबाव बनाने और जबरन खड़ा रखकर अपमानित करने का आरोप था. 4. विवाद की शुरुआत किस दिन और किस कार्यक्रम के दौरान हुई थी? यह विवाद 28 अक्टूबर को कॉलेज परिसर में आयोजित क्लीन कैंपस ड्राइव के दौरान शुरू हुआ था. 5. पीड़ित छात्रों ने अपनी शिकायत कहां दर्ज कराई थी? प्रथम वर्ष के छात्रों ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन की एंटी रैगिंग हेल्पलाइन पर मामले की शिकायत दर्ज कराई थी. 6. निलंबन के दौरान विद्यार्थियों पर किन चीजों की पाबंदी रहेगी? वे क्लीनिकल पोस्टिंग, कक्षाओं, हॉस्टल में रहने तथा लाइब्रेरी व रीडिंग रूम के इस्तेमाल से वंचित रहेंगे. https://trendkia.com/rajasthan/jodhpur-ke-dr-sn-medical-college-men-raiginga-para-bara-ekshana-19-chhatra-aura-junior-resident-nilnbita-55532 TrendKia — Har trend, sabse pehle.