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  "type": "article",
  "title": "जोधपुर के माचिया जैविक उद्यान की इकलौती शेरनी की मौत, 14 वर्ष की आयु में तोड़ा दम",
  "summary": "माचिया जैविक उद्यान में 14 साल की इकलौती शेरनी ने शुक्रवार सुबह अंतिम सांस ली। चिकित्सकों के दल द्वारा पोस्टमार्टम के बाद वन खंड में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।",
  "content": "जोधपुर स्थित माचिया जैविक उद्यान से एक दुखद खबर सामने आई है, जहाँ पार्क की एकमात्र चौदह वर्षीय शेरनी ने शुक्रवार की सुबह दम तोड़ दिया। इस शेरनी के चले जाने से समूचे जैविक उद्यान परिसर में सन्नाटा पसर गया है। घटना के तुरंत बाद प्रशासनिक प्रोटोकॉल का पालन करते हुए मेडिकल बोर्ड की देखरेख में शव परीक्षण कराया गया और तत्पश्चात माचिया के वन क्षेत्र में ही उसका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। उप वन संरक्षक (वन्यजीव) उदाराम सियोल ने बताया कि 18 मार्च 2016 को इस मादा शेर को गुजरात के जूनागढ़ स्थित विख्यात शक्करबाग चिड़ियाघर से यहाँ लाया गया था।\n\nकुनबा बढ़ाने में निभाई थी अहम भूमिका\nराजस्थान में एशियाई शेरों की वंशवृद्धि और वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से इस शेरनी का योगदान बेहद ऐतिहासिक रहा है। अपने जीवनकाल के दौरान इसने तीन तंदुरुस्त बच्चों को जन्म दिया था, जिनके नाम रियाज, कैलाश और लक्ष्मी रखे गए थे। उद्यान के इतिहास में इन नन्हे शावकों की मौजूदगी ने पर्यटकों के बीच भारी उत्साह पैदा किया था। गौरतलब है कि इस समय माचिया जैविक उद्यान के भीतर जो अकेला नर शेर मौजूद है, वह वास्तव में इसी दिवंगत शेरनी की संतान है।\n\nप्रशासन और डॉक्टरों की मौजूदगी में हुआ अंतिम संस्कार\nशेरनी की मृत्यु के उपरांत नियमानुसार पशु चिकित्सकों के विशेष बोर्ड का गठन किया गया, जिसने बारीकी से पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान वन्यजीव प्रभाग के उप वन संरक्षक, सहायक वन संरक्षक और क्षेत्रीय वन अधिकारी मौके पर मुस्तैद रहे। इसके अलावा पारदर्शी विधिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए पुलिस विभाग के सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) और राजस्व विभाग के राजस्व निरीक्षक (आरआई) सहित कई अन्य कर्मचारी भी संपूर्ण कार्रवाई के साक्षी बने। विधि-विधान और नियमों के तहत वन क्षेत्र में ही देह को पंचतत्व में विलीन किया गया।\n\nपर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों में छाई उदासी\nलंबे अरसे से माचिया सफारी और जैविक उद्यान का मुख्य आकर्षण रही इस शेरनी के संसार से विदा लेने से वन्यजीव प्रेमियों में भारी निराशा है। यहाँ घूमने आने वाले सैलानियों के लिए यह बाड़ा हमेशा से सबसे पसंदीदा पड़ाव हुआ करता था। उसके न रहने से पार्क का एक बड़ा आकर्षण अब थम सा गया है। जब तक वन प्रशासन किसी अन्य चिड़ियाघर से नई मादा शेरनी लाने की व्यवस्था नहीं कर लेता, तब तक यहाँ नन्हे शावकों की हलचल दोबारा देखने को नहीं मिल सकेगी। अब सभी की निगाहें विभाग की आगामी योजनाओं पर टिकी हैं ताकि यहाँ शेरों की नस्ल को फिर से फलने-फूलने का अवसर मिल सके।\n\nइसका आप पर असर\nमाचिया जैविक उद्यान में आने वाले पर्यटकों और स्थानीय वन्यजीव संरक्षण तंत्र पर इस घटना का सीधा असर पड़ेगा।\n\n• राजस्थान में: राज्य के चिड़ियाघरों में शेरों के प्रजनन कार्यक्रम को झटका लगा है। वन विभाग को अब नई शेरनी लाने के लिए अन्य राज्यों के चिड़ियाघरों से समन्वय साधना होगा।\n• जोधपुर में: माचिया जैविक उद्यान आने वाले पर्यटकों को अब केवल एक नर शेर ही देखने को मिलेगा। जब तक नई शेरनी नहीं लाई जाती, तब तक पार्क में नए शावकों का दीदार नहीं हो सकेगा।\n• प्रशासनिक स्तर पर: सफारी प्रबंधन को बाड़ों की व्यवस्था और शेष बचे नर शेर की देखभाल पर विशेष ध्यान देना होगा। पशु चिकित्सा दल को नर शेर की नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।\n• पर्यटन अनुभव पर: आगंतुकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र सीमित हो गया है। सप्ताहांत में आने वाले दर्शकों को अब सफारी के अन्य वन्यजीवों के दीदार पर ही संतोष करना पड़ेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nमाचिया जैविक उद्यान की 14 वर्षीय शेरनी ने अपनी पूर्ण आयु प्राप्त करने के बाद शुक्रवार सुबह स्वाभाविक रूप से अंतिम सांस ली।\n\n• प्राकृतिक आयु सीमा: कैद में पलने वाले शेरों की सामान्य जीवन प्रत्याशा लगभग 14 से 16 वर्ष के आसपास होती है। यह शेरनी अपनी उम्र के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी थी।\n• विधिक पोस्टमार्टम: मृत्यु के वास्तविक कारणों की औपचारिक पुष्टि के लिए पशु चिकित्सकों के मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया गया। प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पुलिस और राजस्व अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।\n• आगामी विभागीय कदम: वन्यजीव नियमों के तहत पोस्टमार्टम रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जाएगी। इसके आधार पर वन विभाग केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से अनुमति लेकर नए साथी की व्यवस्था करेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. माचिया जैविक उद्यान में शेरनी की मौत कब हुई?\nशेरनी ने शुक्रवार की सुबह माचिया जैविक उद्यान में अंतिम सांस ली।\n\n2. मृतक शेरनी की उम्र कितनी थी?\nमृत्यु के समय शेरनी की उम्र 14 वर्ष थी।\n\n3. इस शेरनी को जोधपुर कब और कहाँ से लाया गया था?\nउसे 18 मार्च 2016 को गुजरात के जूनागढ़ स्थित शक्करबाग जंतुआलय से लाया गया था।\n\n4. शेरनी ने अपने जीवनकाल में कितने शावकों को जन्म दिया था?\nउसने तीन शावकों को जन्म दिया था, जिनके नाम रियाज, कैलाश और लक्ष्मी थे।\n\n5. वर्तमान में माचिया जैविक उद्यान में कितने शेर बचे हैं?\nवर्तमान में वहाँ केवल एक नर शेर मौजूद है, जो इसी शेरनी का पुत्र है।\n\n6. पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार के समय कौन से अधिकारी मौजूद थे?\nपशु चिकित्सकों के दल के साथ उप वन संरक्षक, सहायक वन संरक्षक, क्षेत्रीय वन अधिकारी, पुलिस के एएसआई और राजस्व विभाग के आरआई उपस्थित रहे।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-19",
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    "जोधपुर",
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    "शेरनी",
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    "राजस्थान वन विभाग"
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  "site": "TrendKia"
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