जोधपुर की भू-विरासत को यूनेस्को पहचान दिलाने की कवायद, मेहरानगढ़ में सजेगा भू-विविधता उत्सव अंतरराष्ट्रीय भू-विविधता दिवस पर 6 अक्टूबर को मेहरानगढ़ में विशेष हेरिटेज वॉक होगी। इसका मुख्य मकसद मेहरानगढ़ को भारत का पहला यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क बनवाने की मुहिम को गति देना है। राजस्थान के ऐतिहासिक शहर जोधपुर की पहचान केवल भव्य किलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की सहस्राब्दियों पुरानी चट्टानी संरचनाएं भी अपनी अनूठी दास्तान बयां करती हैं। इसी धरती की प्राचीन प्राकृतिक संपदा को संजोने और दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के इरादे से आगामी 6 अक्टूबर 2026 को मेहरानगढ़ दुर्ग परिसर में एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान और हेरिटेज वॉक का ताना-बाना तैयार किया गया है। अंतरराष्ट्रीय भू-विविधता दिवस के उपलक्ष्य में होने वाला यह आयोजन दुर्ग की स्थापत्य कला के साथ उसकी भूगर्भीय नींव को जोड़कर देखने का मंच बनेगा। इस पूरी पहल का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु मेहरानगढ़ को देश के पहले यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क के रूप में मान्यता दिलाने की रूपरेखा तैयार करना है। थीम और समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी इस वर्ष इस अंतरराष्ट्रीय दिवस के लिए ‘हमारे दरवाजे पर भू-विविधता’ का संदेश चुना गया है। आयोजकों का उद्देश्य स्थानीय निवासियों और आगंतुकों को उनकी रोजाना की नजरों के सामने मौजूद टीलों, पहाड़ियों, पत्थरों और पारम्परिक जल संचयन प्रणालियों के वैज्ञानिक मूल्य से परिचित कराना है। आयोजन समिति के सदस्य डॉ. शिव सिंह राठौड़ ने रेखांकित किया है कि इस खास मुहिम से शोधार्थियों, स्कूली छात्र-छात्राओं, पेशेवर टूरिस्ट गाइडों, ट्रैवल उद्योग के प्रतिनिधियों और आम नागरिकों को सीधे तौर पर जोड़ा जाएगा। वैश्विक पटल पर भारत की खाली झोली भरने की कोशिश दुनिया भर में भू-संरक्षण और प्राकृतिक पर्यटन को नई दिशा देने के मामले में यूनेस्को के जियोपार्क बेहद असरदार साबित हुए हैं। इस समय विश्व के 51 अलग-अलग मुल्कों में कुल 241 स्थल यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क का आधिकारिक तमगा हासिल कर चुके हैं। इसके विपरीत भारत जैसा विशाल और भौगोलिक विविधता से संपन्न देश अब तक इस प्रतिष्ठित सूची में अपना खाता भी नहीं खोल पाया है। जोधपुर की अनूठी भूमि, यहां के दुर्लभ भू-आकार, जल संरचनाएं और दुर्ग की ऐतिहासिकता मिलकर वे तमाम खूबियां पेश करते हैं जो किसी स्थान को अंतरराष्ट्रीय जियोपार्क की पात्रता दिला सकती हैं। छह प्रमुख ठिकानों से होकर गुजरेगा पदयात्रा का मार्ग इस जागरूकता पदयात्रा की शुरुआत सुबह 6:30 बजे से प्रस्तावित है। भ्रमण दल दुर्ग क्षेत्र और उससे सटे छह बेहद अहम पड़ावों का बारीकी से मुआयना करेगा। इस दौरान भू-विज्ञान और इतिहास से जुड़े अध्येता प्रतिभागियों को यह समझाएंगे कि किस तरह जोधपुर की कठोर चट्टानों और पारंपरिक जल स्रोतों ने किले की स्थापत्य शैली को सदियों तक सुरक्षा और जीवन प्रदान किया। इस प्रयास से मेहरानगढ़ को केवल राजा-महाराजाओं की विरासत के चश्मे से देखने के बजाय एक जीवंत भू-पारिस्थितिकी के रूप में समझा जा सकेगा। अनुभवी विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और जनसहयोग आयोजन को सफल बनाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के जाने-माने विशेषज्ञ एक साथ आ रहे हैं। इनमें भू-विज्ञान विभाग के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर सुरेश चंद्र माथुर, आयोजन समिति के डॉ. शिव सिंह राठौड़, मेहरानगढ़ म्यूजियम से जुड़े डॉ. महेंद्र सिंह तंवर, कर्नल अजय सिंह शेखावत और जयपुर से आमंत्रित डॉ. सौरभ माथुर उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में लगभग 250 प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। यह आयोजन शिक्षा, शोध, पर्यावरण संरक्षण और जियो-टूरिज्म को प्रोत्साहित करते हुए जोधपुर को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने में जनसहभागिता का एक मजबूत आधार तैयार करेगा। इसका आप पर असर यह पहल जोधपुर के पर्यटन, स्थानीय विरासत के संरक्षण और शहर की वैश्विक प्रतिष्ठा को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। • भारत में: यदि मेहरानगढ़ को यूनेस्को से हरी झंडी मिलती है, तो यह देश का पहला आधिकारिक ग्लोबल जियोपार्क बनकर भारत को अंतरराष्ट्रीय भू-पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित करेगा। इससे देश भर के शोधकर्ताओं और पर्यावरण प्रेमियों के लिए अध्ययन और शोध के नए रास्ते खुलेंगे। • जोधपुर में: स्थानीय गाइडों और आतिथ्य सत्कार से जुड़े युवाओं के लिए नए रोजगार और विशेषज्ञता के अवसर पैदा होंगे। शहर के ऐतिहासिक जल स्रोतों और चट्टानी पहाड़ियों के संरक्षण को प्राथमिकता मिलने से पर्यावरण संतुलन बेहतर होगा। ऐसा क्यों हुआ अंतरराष्ट्रीय भू-विविधता दिवस के अवसर पर लोगों का ध्यान शहर की अनदेखी प्राकृतिक संपदा की ओर आकर्षित करने और यूनेस्को की सूची में भारत की गैर-मौजूदगी को दूर करने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। • सीधा कारण: हर साल 6 अक्टूबर को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय भू-विविधता दिवस इस बार ‘हमारे दरवाजे पर भू-विविधता’ थीम के साथ लोगों को जोड़ने का आधार बना है। यह दिन नागरिकों को अपनी रोजमर्रा की प्राकृतिक संरचनाओं की कद्र सिखाने का अवसर प्रदान करता है। • वैश्विक असंतुलन: दुनिया भर के 51 देशों में 241 यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क सक्रिय हैं, मगर भारत का अब तक एक भी स्थल इसमें शामिल नहीं हो पाया है। मेहरानगढ़ की मजबूत दावेदारी इसी लंबे शून्य को भरने की दिशा में उठाया गया कदम है। • जागरूकता की आवश्यकता: आम जनमानस किलों को सिर्फ ईंट-पत्थर और राजाओं के इतिहास से जोड़कर देखता है, जबकि उनके आधार में छिपी चट्टानें और जल स्रोत उपेक्षित रह जाते हैं। हेरिटेज वॉक के जरिए इतिहास और भू-विज्ञान के इस आपसी रिश्ते को उजागर करने का फैसला किया गया। सवाल-जवाब 1. मेहरानगढ़ में हेरिटेज वॉक किस तारीख और समय पर आयोजित होगी? यह हेरिटेज वॉक 6 अक्टूबर 2026 को सुबह 6:30 बजे शुरू होगी। 2. इस वर्ष के अंतरराष्ट्रीय भू-विविधता दिवस की आधिकारिक थीम क्या है? इस वर्ष के आयोजन की थीम ‘हमारे दरवाजे पर भू-विविधता’ तय की गई है। 3. इस पदयात्रा में कितने प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है? इस आयोजन में शोधार्थियों, छात्रों, गाइडों और आम नागरिकों सहित लगभग 250 प्रतिभागियों के भाग लेने की संभावना है। 4. दुनिया भर में कुल कितने यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क मौजूद हैं? वर्तमान समय में विश्व के 51 देशों में कुल 241 यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क स्थित हैं। 5. हेरिटेज वॉक के दौरान कितने प्रमुख स्थलों का दौरा कराया जाएगा? प्रतिभागियों को मेहरानगढ़ दुर्ग और उसके आसपास के कुल छह महत्वपूर्ण स्थलों का अवलोकन कराया जाएगा। https://trendkia.com/rajasthan/jodhpur-ki-bhu-virasata-ko-unesco-pahachana-dilane-ki-kavayada-mehrangarh-men-sajega-bhu-vividhata-utsava-42429 TrendKia — Har trend, sabse pehle.