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  "title": "जोधपुर में आयोजित सम्मेलन में सीजेआई सूर्यकांत का बड़ा बयान, लॉ छात्रों को AI के इस्तेमाल पर दी महत्वपूर्ण सलाह",
  "summary": "जोधपुर में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज के कुलपति सम्मेलन- 2.0 को संबोधित करते हुए प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने एआई पर पूर्ण प्रतिबंध के बजाय जिम्मेदार इस्तेमाल पर बल दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक से न्याय प्रक्रिया तेज होनी चाहिए लेकिन निष्पक्षता और मानवीय विवेक से समझौता नहीं होना चाहिए।",
  "content": "आधुनिक न्याय प्रणाली और कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती पैठ के बीच देश के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश दिया है। जोधपुर स्थित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU) में आयोजित प्रतिष्ठित कुलपति सम्मेलन- 2.0 को संबोधित करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि कानूनी पेशा अब तकनीकी प्रगति से दूरी बनाने या उसे अपनाने में देरी करने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने देश की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज से आह्वान किया कि वे तकनीकी बदलावों का केवल अनुसरण करने के बजाय उनकी भावी दिशा निर्धारित करने में अग्रणी भूमिका निभाएं। मुख्य न्यायाधीश ने जोर देकर कहा कि प्रौद्योगिकी चाहे कितनी भी अत्याधुनिक और तेज क्यों न हो जाए, कानून की आधारशिला में निहित न्याय, निष्पक्षता और मानवीय विवेक के सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया जा सकता।\n\nएआई पर प्रतिबंध नहीं, जिम्मेदार और पारदर्शी इस्तेमाल की जरूरत\nअपने संबोधन में सीजेआई सूर्यकांत ने जनरेटिव एआई तकनीक को कानून की पढ़ाई से पूरी तरह बाहर रखने या उस पर कड़े प्रतिबंध लगाने की विचारधारा को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक को रोकने के बजाय छात्रों को इसकी अपार क्षमताओं के साथ-साथ इसकी सीमाओं से भी भली-भांति अवगत कराया जाना चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि लॉ कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के क्लासरूम में एआई के उपयोग को पूरी पारदर्शिता और निगरानी के साथ बढ़ावा दिया जाए। मुख्य न्यायाधीश ने स्वीकार किया कि एआई टूल्स पर जरूरत से ज्यादा निर्भर रहने से छात्रों की मौलिक तर्क शक्ति और विश्लेषणात्मक क्षमता कमजोर हो सकती है। इसके अतिरिक्त, एआई द्वारा अत्यंत आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत किए गए गलत या भ्रामक निष्कर्षों को बिना जांचे सही स्वीकार कर लेने का जोखिम भी बना रहता है। हालांकि, इन समस्याओं का समाधान तकनीक पर पाबंदी लगाना नहीं है, बल्कि छात्रों को ऐसा व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है जिससे वे एआई के आउटपुट पर आंख बंदकर विश्वास करने के स्थान पर उसके निष्कर्षों पर सवाल उठा सकें और स्वतंत्र निर्णय ले सकें।\n\nअदालती कामकाज का बदलता स्वरूप और आधुनिक तकनीकी टूल्स\nभविष्य की कानूनी व्यवस्था का खाका पेश करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि आने वाले समय में वकील और कानून के छात्र ऐसे उन्नत डिजिटल साधनों का उपयोग करेंगे जो मात्र कुछ सेकंड में हजारों पुराने न्यायिक फैसलों का गहन विश्लेषण करने में सक्षम होंगे। वर्तमान में एआई तकनीक लीगल रिसर्च, कॉन्ट्रैक्ट्स तैयार करने, कानूनी जांच-पड़ताल, साक्ष्यों के डिजिटल प्रबंधन तथा विभिन्न विवादों के त्वरित समाधान जैसे जटिल कार्यों को तेजी से नया रूप दे रही है। इन क्रांतिकारी परिवर्तनों को देखते हुए कानून शिक्षण संस्थानों को इस बदलाव का मुख्य केंद्र बनना होगा। सीजेआई ने इस बात पर विशेष बल दिया कि केवल किसी एआई टूल को चलाना सीख लेना ही पर्याप्त नहीं है। जो छात्र बिना सोचे-समझे एआई के नतीजों को स्वीकार कर लेता है, वह समय के साथ पूरी तरह उस पर निर्भर हो जाता है। इसके विपरीत, जो छात्र एआई की धारणाओं की पड़ताल करना, उसके तथ्यों को सत्यापित करना और अपनी स्वतंत्र सोच से निष्कर्ष निकालना सीखता है, वही वास्तव में इस तकनीक का सही और प्रभावी उपयोग कर पाएगा।\n\nलॉ यूनिवर्सिटीज को आगे बढ़कर तय करनी होगी बदलाव की दिशा\nसीजेआई सूर्यकांत ने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि जो शिक्षण संस्थान तकनीकी बदलावों को अपनाने से हिचकिचाएंगे या उनसे दूर भागेंगे, वे आने वाले समय में अपनी प्रासंगिकता और मुख्य भूमिका खो सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानूनी शिक्षा का उद्देश्य केवल इतना नहीं होना चाहिए कि वह तकनीक में आ रहे बदलावों के बाद स्वयं को उनके अनुसार ढाले, बल्कि लॉ यूनिवर्सिटीज को यह तय करने में नेतृत्व करना चाहिए कि तकनीक न्याय व्यवस्था को किस दिशा में मोड़ेगी। तकनीकी विकास को हमेशा कानून और उसके नैतिक मूल्यों की सेवा में काम करना चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य अदालती प्रक्रियाओं और न्याय वितरण को अधिक सक्षम, सुलभ और तेज बनाना होना चाहिए, लेकिन इस प्रक्रिया में निष्पक्षता और मानवीय सूझबूझ को कभी भी दांव पर नहीं लगाया जा सकता।\n\nडिजिटल न्याय, डेटा सुरक्षा और अंतर-विश्वविद्यालयी सहयोग पर बल\nकानूनी शोध के दायरे को विस्तृत करने का आह्वान करते हुए सीजेआई ने देश की विभिन्न नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि कानून और तकनीक के इस विकसित होते संबंधों पर गंभीर और व्यापक शोध कार्य किए जाने चाहिए। इसके अंतर्गत एल्गोरिदम की जवाबदेही तय करने, डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को मजबूत करने, डिजिटल माध्यमों से समाज के हर वर्ग तक न्याय की पहुंच आसान बनाने तथा विवाद निपटारे में तकनीक की भूमिका जैसे अहम विषयों पर काम किया जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश का अंतिम और स्पष्ट संदेश यही था कि एआई कभी भी अदालतों, जजों और वकीलों का विकल्प नहीं बन सकता, बल्कि इसका प्रयोग केवल न्याय व्यवस्था की प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए होना चाहिए। तकनीक न्याय प्रदान करने की गति को भले बढ़ा दे, परंतु उसे कभी भी न्याय की निष्पक्षता को कम नहीं करने देना चाहिए।\n\nइसका आप पर असर\nक्या है इस खबर का मुख्य असर:\n\n• भारत में: नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज में AI के सिलेबस और क्लासरूम ट्रेनिंग में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिससे भावी वकीलों को तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल का प्रशिक्षण मिलेगा।\n• कानूनी क्षेत्र में: अदालती कामकाज और लीगल रिसर्च में AI का उपयोग तेजी से बढ़ेगा, लेकिन जजों और वकीलों की जगह मानवीय निर्णय और विवेक ही सर्वोपरि रहेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जोधपुर में सीजेआई सूर्यकांत ने किस कार्यक्रम को संबोधित किया?\nउन्होंने जोधपुर स्थित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में आयोजित कुलपति सम्मेलन- 2.0 को संबोधित किया।\n\n2. एआई के इस्तेमाल को लेकर सीजेआई सूर्यकांत का क्या नजरिया है?\nउन्होंने जनरेटिव एआई पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के विचार को खारिज करते हुए कक्षाओं में इसके पारदर्शी और निगरानी वाले इस्तेमाल पर जोर दिया।\n\n3. लॉ छात्रों के लिए एआई के इस्तेमाल में क्या जोखिम हैं?\nएआई पर अत्यधिक निर्भरता से छात्रों की अपनी तर्क क्षमता कमजोर हो सकती है और वे एआई के गलत उत्तरों को भी सच मान सकते हैं।\n\n4. भविष्य की कानूनी व्यवस्था में एआई कौन-कौन से काम तेजी से करेगा?\nएआई पुराने फैसलों के विश्लेषण, कॉन्ट्रैक्ट ड्राफ्टिंग, लीगल रिसर्च, सबूतों के प्रबंधन और विवाद समाधान में तेजी लाएगा।\n\n5. सीजेआई ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज से क्या भूमिका निभाने की अपील की?\nउन्होंने अपील की कि लॉ यूनिवर्सिटीज केवल तकनीकी बदलावों के पीछे न चलें, बल्कि यह तय करने में नेतृत्व करें कि तकनीक कानूनी व्यवस्था को किस दिशा में ले जाएगी।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-08-16",
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