# जोधपुर में झीलों को दूषित होने से रोकने के लिए बना कृत्रिम कुंड, गणेश विसर्जन पर खास इंतजाम

> जोधपुर में कायलाना झील जैसे जलस्रोतों को साफ रखने के मकसद से हाउसिंग बोर्ड के दशहरा मैदान में विशेष कृत्रिम तालाब तैयार किया गया है। श्रद्धालुओं से मूर्तियों के वस्त्र और प्लास्टिक सामग्री अलग सौंपने की अपील की गई है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/jodhpur-men-jhilon-ko-dushita-hone-se-rokane-ke-lie-bana-kritrima-kunda-ganesh-visarjana-para-khasa-intajama-37312 · **Language:** Hindi
**Tags:** जोधपुर, गणेश विसर्जन, कायलाना झील, पर्यावरण संरक्षण, नगर निगम जोधपुर, प्रदूषण नियंत्रण

जोधपुर में गणेश उत्सव के समापन अवसर पर झीलों और जलाशयों के संरक्षण के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। शहर के प्राकृतिक जलभंडारों में मूर्तियों के विसर्जन से होने वाले नुकसान को ध्यान में रखते हुए सेक्टर 16 हाउसिंग बोर्ड स्थित दशहरा मैदान में एक मानव निर्मित जलाशय तैयार किया गया है। स्थानीय निकाय और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मिलकर यह व्यवस्था की है ताकि भक्त अपनी परंपराओं का निर्वाह बिना प्रकृति को नुकसान पहुंचाए कर सकें।

## कायलाना झील की सुरक्षा और सफाई की मुहिम
शहर की प्रमुख कायलाना झील को स्वच्छ रखने के लिए बीते लगभग 120 दिनों से एक सघन सफाई अभियान चलाया जा रहा है। इस लंबी अवधि के दौरान स्वयंसेवकों और टीमों ने झील के पानी से भारी तादाद में प्लास्टिक की थैलियां, पुराने कपड़े और कचरा बाहर निकाला है। इतने हफ्तों की कड़ी मेहनत के बाद पानी में किसी भी तरह की गंदगी दोबारा न फैले, इसी कारण विसर्जन के लिए प्राकृतिक जलस्रोतों का रुख न करने का संदेश दिया जा रहा है। समिति का मानना है कि जल धरोहरों की हिफाजत केवल सरकारी तंत्र के भरोसे नहीं हो सकती, बल्कि इसमें हर नागरिक की सीधी भागीदारी जरूरी है।

## वस्त्र, प्लास्टिक और पूजन सामग्री के पुनर्चक्रण की योजना
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ता और नगर निगम के ब्रांड एंबेसडर पंडित जीवराज श्रीमाली के मार्गदर्शन में इस पूरे अभियान की रूपरेखा तैयार की गई है। विसर्जन स्थल पर विशेष प्रबंध किए गए हैं ताकि प्रतिमाओं के ऊपर चढ़ाई गई चुनरी, कपड़े, धागे और सजावट में प्रयुक्त प्लास्टिक को अलग से इकट्ठा किया जा सके। इस सामग्री को छांटने के बाद पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग की प्रक्रिया में भेजा जाएगा, जिससे कचरा जमा न हो।

समिति की ओर से आमजन से मिट्टी की मूर्तियों को अपनाने का आग्रह किया जा रहा है। हालांकि, प्लास्टर ऑफ पेरिस या रासायनिक रंगों से तैयार प्रतिमाओं को भी इसी कृत्रिम कुंड में विसर्जित करने की अनुमति दी गई है, ताकि रासायनिक जहर प्राकृतिक झीलों के पानी में घुलकर जलीय जीवन को नष्ट न करे।

## सफाई अभियान से जुड़े सामाजिक संगठन
पर्यावरण के अनुकूल विसर्जन की इस पूरी व्यवस्था को सफल बनाने के लिए कई सामाजिक संस्थाएं एकजुट हुई हैं। नगर निगम के साथ मिलकर उत्थान ग्रुप फाउंडेशन, ग्रीन एनवायरमेंट सोसाइटी, गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा, रॉबिनहुड आर्मी, महादेव व्यायामशाला और नंदनवन मयूर सेवा समिति मैदानी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इन संस्थाओं के कार्यकर्ता विसर्जन स्थल पर व्यवस्था संभालने और श्रद्धालुओं को जागरूक करने में जुटे हैं, जिससे भक्ति भाव के साथ पर्यावरण संरक्षण की मिसाल पेश की जा सके।

## इसका आप पर असर
गणेश विसर्जन के दौरान जोधपुर में प्राकृतिक झीलों के बजाय कृत्रिम तालाब का उपयोग करने से स्थानीय पर्यावरण और शहर की पेयजल व्यवस्था सुरक्षित रहेगी।

- **जोधपुर में:** कायलाना झील में विसर्जन पूरी तरह रोककर पानी को रसायनों और प्लास्टिक कचरे से बचाया जा सकेगा। शहर के निवासियों को सेक्टर 16 हाउसिंग बोर्ड के दशहरा मैदान पहुंचकर ही प्रतिमा विसर्जित करनी होगी।
- **पूजा सामग्री प्रबंधन:** मूर्तियों के वस्त्र, चुनरी और प्लास्टिक सजावट को कुंड में डालने के बजाय अलग जमा कराया जाएगा। इससे रिसाइकिलिंग संभव होगी और कचरे का सुरक्षित निस्तारण किया जा सकेगा।
- **नागरिकों की सुविधा:** पीओपी और मिट्टी दोनों तरह की मूर्तियों के लिए अलग कृत्रिम व्यवस्था होने से परंपरा का पालन बिना रोकटोक होगा। श्रद्धालुओं को व्यवस्थित स्थल मिलने से झीलों पर लगने वाली भीड़ और हादसों का जोखिम भी घटेगा।
- **भारत में:** देश के अन्य शहरों के लिए यह मॉडल एक उपयोगी उदाहरण पेश करता है। स्थानीय संस्थाओं और नगर निगम की संयुक्त पहल से पारंपरिक पर्वों को प्रदूषण मुक्त बनाया जा सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पहल जोधपुर के प्रमुख जलस्रोतों, विशेषकर कायलाना झील को मूर्तियों के रासायनिक रंगों, पीओपी और प्लास्टिक कचरे के गंभीर प्रदूषण से बचाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

- **कायलाना की सफाई मुहिम:** पिछले 120 दिनों से झील से भारी मात्रा में कचरा और प्लास्टिक निकाला जा रहा है। विसर्जन के कचरे से इस मेहनत पर पानी फिरने का सीधा खतरा मंडरा रहा था।
- **रासायनिक प्रदूषण की रोकथाम:** मूर्तियों में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक रंग और पीओपी पानी में घुलकर जलीय जीवन और जल गुणवत्ता को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। इसे रोकने के लिए विसर्जन को कृत्रिम ढांचे तक सीमित किया गया।
- **सामूहिक सामाजिक पहल:** नगर निगम के साथ कई सामाजिक संस्थाओं ने मिलकर यह तय किया कि आस्था और प्रकृति संरक्षण दोनों का संतुलन बनाया जाए। इसी वजह से पूजन सामग्री को अलग छांटने और रिसाइकिल करने की योजना बनाई गई।

## सवाल-जवाब

### 1. जोधपुर में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए कृत्रिम तालाब कहां तैयार किया गया है?
यह कृत्रिम तालाब सेक्टर 16 हाउसिंग बोर्ड स्थित दशहरा मैदान में तैयार किया गया है।

### 2. कायलाना झील में कितने दिनों से सफाई अभियान चलाया जा रहा है?
कायलाना झील की स्वच्छता के लिए बीते करीब 120 दिनों से लगातार सफाई अभियान चलाया जा रहा है।

### 3. प्रतिमाओं के साथ आने वाले कपड़ों और प्लास्टिक का क्या किया जाएगा?
विसर्जन स्थल पर इन सामग्रियों को अलग से एकत्र कर पुनर्चक्रण और दोबारा उपयोग के लिए भेजा जाएगा।

### 4. क्या कृत्रिम तालाब में पीओपी से बनी मूर्तियों का विसर्जन किया जा सकता है?
हां, प्राकृतिक जलस्रोतों को सुरक्षित रखने के लिए पीओपी और रासायनिक रंगों वाली मूर्तियों को भी इस कृत्रिम तालाब में स्वीकार किया जाएगा।

### 5. इस अभियान में नगर निगम के अलावा कौन-कौन से संगठन सहयोग दे रहे हैं?
इस अभियान में उत्थान ग्रुप फाउंडेशन, ग्रीन एनवायरमेंट सोसाइटी, गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा, रॉबिनहुड आर्मी, महादेव व्यायामशाला और नंदनवन मयूर सेवा समिति सहयोग कर रही हैं।

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