# जोधपुर में सास-बहू की जोड़ी ने पेश किया अनोखा कृष्णा थीम स्टूडियो, 15 दिनों में 50 से ज्यादा बच्चों के बने यादगार लम्हे

> जोधपुर में जन्माष्टमी के अवसर पर बच्चों के कृष्णा अवतार में फोटोशूट का क्रेज देखने को मिल रहा है। लवली फोटो स्टूडियो की संगीता और हिमाक्षी परिहार ने इस थीम को खास राजस्थानी और सांस्कृतिक रूप दिया है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/jodhpur-men-sasa-bahu-ki-jori-ne-pesha-kiya-anokha-krishna-thima-studiyo-15-dinon-men-50-se-jyada-bachchon-ke-bane-yadagara-lamhe-27582 · **Language:** Hindi
**Tags:** जोधपुर समाचार, कृष्णा थीम फोटोशूट, जन्माष्टमी 2024, संगीता परिहार, हिमाक्षी परिहार, लवली फोटो स्टूडियो, राजस्थान न्यूज

राजस्थान की सांस्कृतिक नगरी जोधपुर में जन्माष्टमी का पर्व इस बार एक नए अंदाज में मनाया जा रहा है। शहर के परिवारों के बीच नन्हे बच्चों को भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप में सजाकर तस्वीरें खिंचवाने की एक नई लहर देखने को मिल रही है। इस अभिनव पहल को अमलीजामा पहनाया है लवली फोटो स्टूडियो की संचालक संगीता परिहार और उनकी बहू हिमाक्षी परिहार ने। इस सास-बहू की जोड़ी ने अपनी कलात्मक सोच से एक ऐसा हैंडमेड स्टूडियो सेटअप तैयार किया है, जिसने शहर भर के माता-पिता का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया है। महज 15 दिनों के भीतर 50 से अधिक बच्चों की मनमोहक तस्वीरें इस खास परिवेश में उतारी जा चुकी हैं।

## पारंपरिक कला और ग्रामीण माहौल का अनोखा ताना-बाना
इस विशेष फोटोशूट की सबसे बड़ी खूबी इसका पूरी तरह से हस्तनिर्मित होना है। आमतौर पर भव्य और विस्तृत थीम बेस्ड फोटोशूट बड़े मेट्रो शहरों तक ही सीमित रहते थे, लेकिन जोधपुर में इस जोड़ी ने इसे बेहद संजीदगी से साकार किया है। इस सेटअप में भारतीय ग्रामीण जीवन और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की सुंदर झलक देखने को मिलती है। स्टूडियो के भीतर हाथ से रंगे मिट्टी के रंग-बिरंगे मटके, कृत्रिम गायें, मोर, हिरण और छोटी बांसुरियां सजाई गई हैं। इसके साथ ही एक नन्हा झूला और पुराने जमाने का पारंपरिक लकड़ी का पलंग भी रखा गया है, जो पूरे माहौल को एक प्राचीन और जीवंत रूप प्रदान करता है।

## बाल कान्हा और यशोदा मैया के वात्सल्य का जीवंत रूप
फोटोशूट के दौरान छोटे-छोटे बच्चों को पीतांबरी वस्त्र पहनाए जाते हैं। सिर पर मोर मुकुट, हाथों में बांसुरी और चेहरे पर नटखट मुस्कान लिए ये नन्हे कान्हा माखन चुराने के भाव में तस्वीरें खिंचवाते हैं। लेकिन इस पूरे कॉन्सेप्ट का सबसे भावुक और आकर्षक हिस्सा **यशोदा मैया और बाल कृष्ण** के रिश्ते को दर्शाना है। इस थीम में बच्चों की माताओं को भी पारंपरिक राजस्थानी पोशाक में सजाया जाता है। मां और बच्चे के इस पावन रिश्ते को कई तरह के दृश्यों में कैमरे के जरिए कैद किया जाता है, जहाँ कहीं माता अपने बालक को माखन खिला रही हैं तो कहीं दोनों झूले के पास बैठकर दुलार कर रहे हैं।

## संस्कृति को सहेजने और नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास
संगीता परिहार और हिमाक्षी परिहार का कहना है कि इस सेटअप को तैयार करने के पीछे उनका मकसद केवल व्यावसायिक तस्वीरें खींचना भर नहीं है। वे चाहती हैं कि इस तरह की पहलों के माध्यम से आज की नई पीढ़ी अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक परंपराओं को करीब से समझे और उनसे जुड़ी रहे। आधुनिक फोटोग्राफी के इस दौर में अपनी जड़ों से जुड़े रहना और उसे एक सुंदर याद के रूप में जीवन भर के लिए सहेज कर रखना हर परिवार के लिए गर्व की बात है। इस पहल की बदौलत जोधपुर के अनेक परिवारों को अपने बच्चों के बचपन के इन अनमोल पलों को हमेशा के लिए खूबसूरत फ्रेम में सुरक्षित करने का अवसर मिल रहा है।

## सोशल मीडिया पर खूब पसंद की जा रही हैं तस्वीरें
इस थीम फोटोशूट की लोकप्रिय तस्वीरों को जब माता-पिता अपने रिश्तेदारों और सोशल मीडिया पर साझा करते हैं, तो उन्हें खूब सराहना मिलती है। मटकी से माखन चुराते और नटखट अंदाज़ में मुस्कुराते बच्चों की मासूमियत देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है। महज दो हफ्तों में 50 से ज्यादा फोटोशूट पूरे कर लेना यह साबित करता है कि स्थानीय स्तर पर इस सांस्कृतिक पहल को कितना जबरदस्त समर्थन मिला है। यह अभिनव प्रयास न केवल पारंपरिक मूल्यों को संजो रहा है, बल्कि छोटे शहरों में रचनात्मक फोटोग्राफी की असीम संभावनाओं को भी दर्शा रहा है।

## इसका आप पर असर
संस्कृतिक और रचनात्मक थीम फोटोशूट क्षेत्रीय शहरों में नए व्यावसायिक और सांस्कृतिक अवसर पैदा कर रहे हैं।

- **भारत भर में:** छोटे और मध्यम शहरों में थीम-बेस्ड हैंडमेड फोटोशूट का चलन बढ़ रहा है, जिससे स्थानीय कलाकारों और फोटोग्राफरों को नए रोजगार मिल रहे हैं। इससे लोग बिना बड़े शहरों में गए गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं।
- **जोधपुर में:** स्थानीय परिवारों को अपने बच्चों की बाल लीलाओं को राजस्थानी परिवेश और सांस्कृतिक धरोहर के साथ यादगार बनाने का बेहतरीन मौका मिल रहा है। लवली फोटो स्टूडियो में यह सुविधा आसानी से उपलब्ध है।
- **अभिभावकों के लिए:** माता-पिता को अपने नन्हे-मुन्नों के बचपन की यादों को एक खास कलात्मक फ्रेम में सहेजने का विकल्प मिल रहा है। इससे डिजिटल युग में भी पारंपरिक पहनावे और संस्कृति से जुड़ाव मजबूत होता है।
- **स्थानीय कारीगरों के लिए:** हैंडमेड सेटअप में इस्तेमाल होने वाले मिट्टी के मटकों, लकड़ी के सामान और राजस्थानी पोशाकों की मांग बढ़ने से स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा मिल रहा है। इससे सूक्ष्म कुटीर कला को आर्थिक संबल मिलता है।

## सवाल-जवाब

### 1. यह कृष्णा थीम फोटोशूट जोधपुर में कहाँ आयोजित हो रहा है?
यह विशेष हैंडमेड कृष्णा थीम फोटोशूट जोधपुर स्थित 'लवली फोटो स्टूडियो' में आयोजित किया जा रहा है।

### 2. इस फोटोशूट सेटअप को किसने तैयार किया है?
इस सेटअप को लवली फोटो स्टूडियो की संगीता परिहार और हिमाक्षी परिहार की सास-बहू जोड़ी ने हाथ से तैयार किया है।

### 3. इस फोटोशूट सेटअप में कौन-कौन सी खास चीजें शामिल हैं?
इसमें मिट्टी की मटकियां, कृत्रिम गायें, मोर, हिरण, बांसुरी, झूला और पारंपरिक लकड़ी का पुराना पलंग शामिल है।

### 4. 15 दिनों में कितने बच्चों का फोटोशूट हो चुका है?
इस थीम के शुरू होने के पहले 15 दिनों के भीतर 50 से अधिक बच्चों का फोटोशूट किया जा चुका है।

### 5. फोटोशूट में माताओं की क्या भूमिका रहती है?
माताओं को पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में सजाकर 'यशोदा मैया और बाल कृष्ण' के प्रेम भाव को तस्वीरों में उतारा जाता है।

## प्रेरणा और सबक
जोधपुर की सास-बहू की जोड़ी ने अपनी रचनात्मकता और सांस्कृतिक सोच से एक सफल व्यावसायिक मॉडल तैयार किया है, जिससे ये सबक सीखे जा सकते हैं।

- **अपनी जड़ों से जुड़कर काम करें:** अपनी संस्कृति और परंपराओं को आधुनिक काम में शामिल करने से लोगों का जुड़ाव तेजी से बनता है।
- **हाथ की कला का सही इस्तेमाल:** बड़े बजट के बजाय खुद हाथ से बनाए गए यूनिक सेटअप से भी ग्राहकों को आकर्षित किया जा सकता है।
- **पारिवारिक टीमवर्क की ताकत:** सास और बहू का एक साथ मिलकर सोचना और काम करना यह दिखाता है कि आपसी सहयोग से नए विचार सफल हो सकते हैं।
- **स्थानीय मांग को पहचानना:** बड़े शहरों की सेवाओं को अपने शहर के माहौल के हिसाब से पेश करना व्यापार में बड़ी सफलता दिला सकता है।

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