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  "type": "article",
  "title": "जोधपुर मंडल ने पांच महीनों में बनाई 19.94 लाख यूनिट सौर बिजली, पिछले साल का 87.5% रिकॉर्ड पार",
  "summary": "उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल ने चालू वित्त वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में ही 19.94 लाख यूनिट सौर ऊर्जा पैदा कर ली है, जो पिछले पूरे वित्त वर्ष के कुल उत्पादन का 87.5 प्रतिशत है।",
  "content": "पश्चिमी राजस्थान में प्रचुर मात्रा में मिलने वाली धूप को उत्तर पश्चिम रेलवे का जोधपुर मंडल अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए प्रभावी साधन बना रहा है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान अगस्त तक महज पांच महीनों में मंडल ने करीब 19.94 लाख यूनिट सौर ऊर्जा का उत्पादन दर्ज किया है। सौर ऊर्जा का यह आंकड़ा दिखाता है कि रेलवे परिसरों में हरित ऊर्जा का विस्तार बहुत तेजी से हो रहा है और स्वच्छ ऊर्जा से अपनी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।\n\nपिछले पूरे साल के आंकड़े के बेहद करीब पहुंचा उत्पादन\nविगत वित्त वर्ष 2025-26 के पूरे बारह महीनों में जोधपुर मंडल ने कुल 22.79 लाख यूनिट सौर ऊर्जा का उत्पादन किया था। इसके विपरीत, मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 में केवल पांच महीनों (अगस्त तक) की अवधि में ही 19.94 लाख यूनिट बिजली बनाई जा चुकी है। इसका सीधा अर्थ यह है कि पिछले पूरे साल में तैयार की गई कुल सौर ऊर्जा का लगभग 87.5 प्रतिशत हिस्सा रेलवे ने चालू वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में ही अर्जित कर लिया है, जो उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय उछाल को दर्शाता है।\n\nस्वच्छ ऊर्जा से पूरी हो रहीं प्रमुख रेलवे परिसरों की जरूरतें\nमंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने जानकारी दी कि सौर ऊर्जा उत्पादन में दर्ज की जा रही यह तेज बढ़ोतरी अक्षय ऊर्जा के उपयोग की दिशा में एक अहम उपलब्धि है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिमी राजस्थान के इस पूरे इलाके में साल भर प्रचुर धूप उपलब्ध रहती है, जिसका रेलवे योजनाबद्ध तरीके से भरपूर दोहन कर रहा है। इससे रेलवे के कुल ऊर्जा उपभोग में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी निरंतर बढ़ रही है।\n\nजोधपुर मंडल के विशाल रेलवे परिसरों, कार्यालयों, वर्कशॉप और स्टेशनों पर दिन-रात भारी मात्रा में विद्युत आपूर्ति की निरंतर आवश्यकता रहती है। इस स्थिति में इन परिसरों में लगे रूफटॉप और अन्य सोलर संयंत्रों से उत्पन्न होने वाली बिजली रेलवे की अपनी आंतरिक आवश्यकताओं की पूर्ति में बड़ा योगदान दे रही है। सौर ऊर्जा से आपूर्ति सुनिश्चित होने के कारण पारंपरिक ग्रिड बिजली पर निर्भरता में तेजी से गिरावट आ रही है, जिससे उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का अधिक टिकाऊ उपयोग संभव हुआ है।\n\nलागत में कमी और यात्री सुविधाओं में निवेश की उम्मीद\nहरित ऊर्जा के इस व्यापक इस्तेमाल से रेलवे के नियमित बिजली बिल खर्च में भी भारी कमी आने की संभावना जताई जा रही है। बिजली पर होने वाली इस वित्तीय बचत का सीधा लाभ रेलवे तंत्र को सुदृढ़ बनाने में मिलेगा। बचाए गए राजस्व और संसाधनों को रेल संचालन के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ यात्री सुविधाओं के विकास और विस्तार से जुड़े विभिन्न निर्माण कार्यों में अधिक प्रभावी ढंग से लगाया जा सकेगा।\n\n102 स्थानों पर सोलर पैनल सक्रिय, तीन नई साइटों पर काम तेज\nजोधपुर मंडल के भीतर स्वच्छ ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अब तक कुल 102 विभिन्न स्थानों पर सोलर पैनल स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें प्रमुख रूप से जोधपुर स्टेशन, भगत की कोठी स्टेशन, भगत की कोठी डीजल शेड, मेड़ता रोड स्टेशन तथा मेड़ता रोड डेमू शेड जैसे व्यस्त और बड़े प्रतिष्ठान शामिल हैं। इन 102 स्थानों पर सौर ऊर्जा का नियमित उत्पादन चल रहा है। इसके अतिरिक्त मंडल के तीन अन्य नए स्थानों पर सोलर पैनल की कमीशनिंग की प्रक्रिया अंतिम चरण में चल रही है, जिसके चालू होते ही उत्पादन क्षमता में और अधिक इजाफा होगा।\n\nइसका आप पर असर\nजोधपुर मंडल में सौर ऊर्जा के बड़े पैमाने पर उत्पादन से रेलवे के बिजली खर्च में कमी आएगी और यात्रियों के लिए सुविधाएं बेहतर होंगी।\n\n• भारत में: भारतीय रेलवे के सौर ऊर्जा विस्तार से जीवाश्म ईंधन और पारंपरिक बिजली ग्रिड पर निर्भरता घटती है। इससे सार्वजनिक परिवहन तंत्र अधिक पर्यावरण अनुकूल बनता है और संचालन लागत में बचत होती है।\n• जोधपुर और राजस्थान में: जोधपुर, भगत की कोठी और मेड़ता रोड जैसे प्रमुख स्टेशनों पर सौर ऊर्जा से बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है। बिजली खर्च से होने वाली बचत का उपयोग स्थानीय स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं के सुधार और मेंटेनेंस में किया जा सकेगा।\n• अक्षय ऊर्जा उपयोग: पश्चिमी राजस्थान की धूप का कुशल उपयोग करते हुए 102 स्थानों पर सौर संयंत्र काम कर रहे हैं। तीन अतिरिक्त साइट्स के चालू होने के बाद स्थानीय स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी और बढ़ेगी।\n• संसाधनों का आवंटन: ऊर्जा बिलों में कमी आने से रेलवे प्रशासन के पास वित्तीय लचीलापन बढ़ेगा। यह बचत भविष्य में रेल संचालन को सुगम बनाने और बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने में मददगार साबित होगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nजोधपुर मंडल में सौर ऊर्जा उत्पादन में यह भारी उछाल भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल दोहन और व्यापक बुनियादी ढांचा विस्तार की वजह से हुआ है।\n\n• भौगोलिक अनुकूलता: पश्चिमी राजस्थान में साल भर पर्याप्त और तेज धूप उपलब्ध रहती है। रेलवे ने इस प्राकृतिक अनुकूलता का लाभ उठाने के लिए अपने स्टेशनों, वर्कशॉप और शेड्स की छतों का इस्तेमाल किया है।\n• बुनियादी ढांचे का विस्तार: जोधपुर मंडल ने अब तक 102 अलग-अलग स्थानों पर सोलर पैनल सक्रिय कर दिए हैं। इतने बड़े पैमाने पर पैनल लगने से दैनिक उत्पादन क्षमता में पूर्व वर्षों की तुलना में भारी वृद्धि दर्ज की गई है।\n• स्वच्छ ऊर्जा नीति: रेलवे प्रशासन ने पारंपरिक बिजली पर निर्भरता और वित्तीय लागत घटाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी योजना के तहत बड़े शेड और व्यस्त स्टेशनों को प्राथमिकता देकर सौर ऊर्जा से जोड़ा गया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जोधपुर मंडल ने वित्त वर्ष 2026-27 में अगस्त तक कितनी सौर ऊर्जा का उत्पादन किया है?\nमंडल ने वित्त वर्ष 2026-27 में अगस्त तक लगभग 19.94 लाख यूनिट सौर बिजली तैयार की है।\n\n2. चालू वर्ष का उत्पादन पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले कैसा रहा है?\nपिछले पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में 22.79 लाख यूनिट उत्पादन हुआ था, जिसका करीब 87.5 प्रतिशत हिस्सा चालू वर्ष के पहले पांच महीनों में ही हासिल कर लिया गया है।\n\n3. जोधपुर मंडल में सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए कौन से प्रमुख स्थान शामिल हैं?\nजोधपुर स्टेशन, भगत की कोठी स्टेशन, भगत की कोठी डीजल शेड, मेड़ता रोड स्टेशन और मेड़ता रोड डेमू शेड प्रमुख उत्पादक केंद्रों में शामिल हैं।\n\n4. मंडल में कितने स्थानों पर सोलर पैनल लगाए गए हैं?\nकुल 102 स्थानों पर सोलर पैनल स्थापित किए जा चुके हैं और तीन अन्य स्थानों पर कमीशनिंग का कार्य प्रगति पर है।\n\n5. सौर ऊर्जा में बढ़ोतरी से रेलवे को क्या मुख्य लाभ मिलेगा?\nइससे पारंपरिक ग्रिड बिजली पर निर्भरता घटेगी, बिजली के खर्च में कमी आएगी और बचत का उपयोग यात्री सुविधाओं व संचालन में किया जा सकेगा।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-20",
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    "भारतीय रेलवे",
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