# कम बारिश से पश्चिमी राजस्थान में खरीफ फसलों पर संकट, संकटग्रस्त ग्रामीणों ने की सरकारी मुआवजे की मांग

> जोधपुर और आसपास के मारवाड़ क्षेत्र में मानसून की कमी के चलते खरीफ फसलें सूख रही हैं, जिससे किसानों के सामने चारे, पानी और आर्थिक तंगी का गंभीर संकट पैदा हो गया है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/kama-barisha-se-pashchimi-rajasthan-men-kharipha-phasalon-para-snkata-snkatagrasta-graminon-ne-ki-sarakari-muavaje-ki-manga-38219 · **Language:** Hindi
**Tags:** जोधपुर, खरीफ फसल, राजस्थान, मानसून, किसान संकट, फसल बीमा, गिरदावरी

राजस्थान के पश्चिमी अंचल में मानसूनी फुहारों की गैरमौजूदगी ने कृषक समाज को मुश्किल घड़ी में ला खड़ा किया है। जोधपुर जिले समेत विस्तृत मारवाड़ भूभाग के देहाती इलाकों में समय पर जरूरत के मुताबिक वर्षा नहीं हो पाने से खेतों में खड़ी खरीफ फसलें दम तोड़ रही हैं। लंबे समय से मेघ बरसने की बाट जोह रहे काश्तकारों के सामने अब खेतों में लहलहाती हरियाली के स्थान पर सिर्फ झुलसे हुए तिनके ही शेष बचे हैं। पैदावार में होने वाली भारी गिरावट के संकेत साफ नजर आने लगे हैं, जिससे समूचे ग्रामीण परिवेश में गंभीर वित्तीय उथल-पुथल की स्थिति बन चुकी है। खेतों में पसीना बहाने वाले परिवारों का मानना है कि यदि मौसम ने जल्द करवट नहीं ली, तो खेती की शुरुआती तैयारी में लगाया गया मूल धन जुटा पाना भी असंभव प्रतीत होगा।

## ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ा सीधा आघात
मौसम के इस प्रतिकूल मिजाज ने गांव-देहात के आर्थिक चक्र को बुरी तरह से चोट पहुंचाई है। स्थानीय काश्तकार पबाराम और उनके साथी ग्रामीणों के अनुसार, खरीफ बुवाई चक्र के आरंभ में पूरे उत्साह के साथ खेतों को तैयार किया गया था। जमीन को संवारने, महंगे दामों पर प्रमाणित बीजों का प्रबंध करने, पोषक खाद खरीदने, बुवाई करने तथा उसके बाद खरपतवार निकालने जैसी तमाम प्रक्रियाओं में किसानों ने अपनी संचित पूंजी खपा दी। मजदूरी भुगतान और कृषि मशीनरी के उपयोग पर भारी रकम व्यय करने के उपरांत अब जब फसलों के पोषण और विकास का मुख्य पड़ाव आया, तब बादलों की बेरुखी ने पूरी मेहनत को चौपट कर दिया है। अनेक ढाणियों और खेतों में पौधे समय से पहले ही सूखकर नष्ट हो चुके हैं, जबकि अन्य इलाकों में वनस्पतियों का वानस्पतिक विकास पूरी तरह ठप पड़ गया है।

## मवेशियों के चारे और पीने के पानी पर मंडराता खतरा
वर्षा के इस अभाव का प्रभाव मात्र कृषि पैदावार तक सीमित नहीं रहने वाला है। इसका अत्यंत प्रतिकूल असर पशुधन प्रबंधन और ग्रामीण जलापूर्ति प्रणाली पर भी तीव्रता से दिखाई देने की परिस्थिति बन गई है। खेतों में फसल चक्र समाप्त होने के कगार पर पहुंचने से दुधारू और कामकाजी मवेशियों के वास्ते चारे का गंभीर अभाव खड़ा हो गया है। पश्चिमी राजस्थान का ग्रामीण समाज आजीविका के लिए बहुत हद तक गोपालन और पशुपालन के सहारे जीवनयापन करता है, ऐसे में अपने मवेशियों की रक्षा करना पशुपालकों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। वर्षा के अभाव में भूमिगत जल स्तर भी लगातार नीचे जा रहा है, जिससे आगामी हफ्तों में बस्तियों के भीतर पेयजल की भीषण किल्लत उभरने की आशंका है। यदि परिस्थितियां नहीं सुधरीं, तो मवेशियों के आहार और गृहस्थी के पानी के लिए ग्रामीणों को लंबी दौड़ लगानी पड़ सकती है।

## तुरंत गिरदावरी और राहत पैकेजों की उठी मांग
खेतों में हुए व्यापक नुकसान और मुरझाई फसलों को देखते हुए जोधपुर के कृषकों एवं विभिन्न ग्रामवासियों ने प्रदेश सरकार तथा जिला प्रशासन से तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया है। प्रभावित क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर विशेष सर्वेक्षण दलों का गठन होना चाहिए, जो निष्पक्ष रूप से खेतों का मुआयना करें और शीघ्र अति शीघ्र विशेष गिरदावरी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। नुकसान का पारदर्शी और समयबद्ध मूल्यांकन होने पर ही प्रभावित किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और राजकीय आपदा राहत कोष के तहत आर्थिक सहयोग प्राप्त हो सकेगा। इसके साथ ही ग्रामीणों ने शासन से यह भी आग्रह किया है कि संकटग्रस्त गांवों में बिना विलंब किए अकाल राहत से जुड़े कार्य प्रारंभ किए जाएं, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से बिखरने से समय रहते बचाया जा सके।

## इसका आप पर असर
कम बारिश के कारण पश्चिमी राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में खरीफ फसलों के सूखने से उपज और आवश्यक संसाधनों पर भारी दबाव बन गया है।

- **भारत में:** कम वर्षा के चलते प्रमुख खरीफ फसलों के उत्पादन में गिरावट आ सकती है। इससे आने वाले महीनों में कृषि उपजों और पशु चारे की कीमतों में बढ़ोतरी का असर देखने को मिल सकता है।
- **जोधपुर में:** खेतों में फसलें सूखने से किसानों की पूरी लागत डूबने के कगार पर पहुंच गई है। ग्रामीणों को तुरंत राहत पाने के लिए फसल बीमा क्लेम और विशेष गिरदावरी रिपोर्ट के पंजीकरण पर निर्भर रहना होगा।
- **पशुपालकों पर प्रभाव:** मवेशियों के लिए हरे और सूखे चारे की उपलब्धता लगभग खत्म हो चुकी है। मवेशी पालकों को आने वाले दिनों में चारे की व्यवस्था करने के लिए अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।
- **पेयजल आपूर्ति:** भूजल स्तर में भारी गिरावट आने से ग्रामीण बस्तियों में पानी की किल्लत बढ़ सकती है। स्थानीय प्रशासन द्वारा समय पर टैंकर या अन्य पेयजल व्यवस्था नहीं किए जाने पर लोगों को लंबी दूरी तय करनी होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
जोधपुर तथा मारवाड़ के ग्रामीण इलाकों में पर्याप्त मानसूनी बारिश न होने के कारण खेतों में खड़ी खरीफ फसलें सूख रही हैं। इस सूखे की स्थिति ने कृषि के साथ-साथ पशुपालन और ग्रामीण जल आपूर्ति को भी अपनी चपेट में ले लिया है।

- **मानसून की बेरुखी:** इस खरीफ सत्र के दौरान पश्चिमी राजस्थान में आवश्यकता अनुसार मानसूनी वर्षा नहीं हुई। खेतों में नमी खत्म होने से फसलें पकने के महत्वपूर्ण समय पर ही झुलसने लगी हैं।
- **लागत का भारी बोझ:** किसानों ने जुताई, बीज, खाद, खरपतवार नियंत्रण और मशीनरी पर अपनी पूरी जमा पूंजी लगा दी थी। पानी की कमी के चलते पौधों का विकास रुकने से यह पूरा निवेश डूबने के कगार पर पहुंच गया है।
- **प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव:** पर्याप्त वर्षा के अभाव में भूजल का संचयन रुक गया है और जल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। इस परिस्थिति ने कृषि के साथ-साथ चारे और पीने के पानी की दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है।

## सवाल-जवाब

### 1. जोधपुर और मारवाड़ में खरीफ फसलों पर क्या संकट आया है?
पर्याप्त मानसूनी बारिश नहीं होने के कारण खेतों में खड़ी खरीफ की फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं।

### 2. फसलों के खराब होने से किसानों को क्या आर्थिक नुकसान हो रहा है?
किसानों ने जुताई, बीज, खाद, मजदूरी और उपकरणों पर अपनी जमा पूंजी लगा दी थी, जिसकी लागत भी वापस निकलना अब मुश्किल लग रहा है।

### 3. कम बारिश का पशुपालन और पेयजल पर क्या असर पड़ रहा है?
फसलों के सूखने से पशुओं के लिए हरे और सूखे चारे की कमी हो गई है, जबकि भूजल स्तर गिरने से पेयजल संकट गहरा रहा है।

### 4. ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन से क्या मांग की है?
किसानों ने विशेष टीमों से नुकसान का निष्पक्ष सर्वे करवाकर तुरंत गिरदावरी कराने, फसल बीमा का लाभ देने और अकाल राहत कार्य शुरू करने की मांग की है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._