# कन्नौज में सत्ता गंवाने के बाद मिर्जापुर के विजयपुर में गहरवार वंश ने बनाया था ऐतिहासिक किला, जानिए कंतित से जुड़ा अतीत

> कन्नौज के पतन के बाद गहरवार वंश के शासकों ने मिर्जापुर के कंतित को अपनी राजधानी बनाकर विजयपुर में विशाल किला स्थापित किया था, जो आज भी अपनी नक्काशी और स्थापत्य के लिए जाना जाता है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/kannauja-men-satta-gnvane-ke-bada-mirzapur-ke-vijaypur-men-gahadavala-vnsha-ne-banaya-tha-aitihasika-kila-janie-kantit-se-jura-ati-35460 · **Language:** Hindi
**Tags:** मिर्जापुर, विजयपुर किला, गहरवार वंश, कंतित, कन्नौज, उत्तर प्रदेश इतिहास

उत्तर प्रदेश का मिर्जापुर जिला सदियों पुरानी विरासतों, ऐतिहासिक इमारतों और रियासती दौर की स्मृतियों को अपने भीतर समेटे हुए है। इसी जिले के विजयपुर इलाके में स्थित एक प्राचीन किला गहरवार राजवंश के गौरवशाली शासन की गवाही देता है। मिर्जापुर और उसके सीमावर्ती भूभाग पर अपना प्रभुत्व बनाए रखने के मकसद से गहरवार शासकों ने इस किलेनुमा प्रासाद का निर्माण कराया था। इसी मजबूत ठिकाने से कई पीढ़ियों तक इस राजवंश के नरेशों ने पूरे इलाके का शासन संचालित किया और अपनी सत्ता कायम रखी।

बीते दौर की कई उथल-पुथल भरी ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी रहा यह भवन आज भी पूरी मजबूती के साथ अपनी जगह पर कायम है। विजयपुर की यह भव्य संरचना क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण प्राचीन इमारतों में गिनी जाती है। इसकी दीवारों और मेहराबों पर की गई नक्काशीदार कारीगरी को निहारने के लिए दूरदराज से सैलानी पहुंचते हैं और इसकी पारंपरिक शिल्पकला को देखकर चकित रह जाते हैं।

## कन्नौज के बिखराव के बाद विंध्य क्षेत्र में स्थापित हुआ नया केंद्र
ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, कन्नौज में गहरवार वंश की सत्ता बिखरने के बाद इस राजवंश के शासकों ने मिर्जापुर जिले का रुख किया और विजयपुर को अपना मुख्य गढ़ बनाया। शुरुआत में विंध्याचल के निकट स्थित कंतित में अपनी शक्ति को संगठित किया गया, जिसे बाद में विजयपुर तक फैला दिया गया। सदियों के लंबे अंतराल में इन राजाओं ने आसपास के बड़े भूभाग पर अपना कड़ा प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखा।

मुगल साम्राज्य के प्रसार के दौर में और बाद में ब्रिटिश हुकूमत के समय भी इस रियासत ने अपने स्थानीय प्रभाव और इलाके की पहचान को महफूज रखने का प्रयास किया। लंबे समय तक गहरवार वंश के विभिन्न उत्तराधिकारियों ने यहां सत्ता संभाली। हालांकि ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रभुत्व विस्तार के दौरान गहरवार वंश के शासकों को गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इस ऐतिहासिक दौर के महत्वपूर्ण विवरण आज भी सरकारी अभिलेखों और ऐतिहासिक दस्तावेजों में सुरक्षित दर्ज हैं।

## कंतित स्टेट की वंशावली और राजा उग्रसेन का निर्माण
इतिहास के जानकार अनिल सिंह के अनुसार, कंतित स्टेट के राजा गुडनदेव, जो राजा माणिकचंद की 16वीं पीढ़ी के वंशज थे, उन्होंने विंध्याचल के पास कंतित को अपनी नई राजधानी के तौर पर स्थापित किया था। राजा गुडनदेव के विवाह के उपरांत दो पुत्र हुए। इनमें बड़े पुत्र राजा उग्रसेन कंतित के सिंहासन पर आसीन हुए, जबकि दूसरे पुत्र राजा भोजराज ने मांडा की सत्ता संभाली।

विजयपुर में मौजूद इस विशेष और विशाल किले की नींव राजा उग्रसेन ने ही रखी थी। यह किला इतने व्यापक क्षेत्रफल में फैला है कि इसका बाहरी विस्तार देखकर ही उस दौर की सुरक्षा रणनीतियों और राजसी वैभव का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। वर्तमान में इस किले के भीतर कोई रिहायश नहीं है और यह भवन खाली पड़ा है, लेकिन सदियों के ऐतिहासिक घटनाक्रमों और रियासती गौरव का प्रतीक बनकर यह आज भी सीना ताने खड़ा है।

## इसका आप पर असर
मिर्जापुर स्थित विजयपुर किले का इतिहास क्षेत्रीय सांस्कृतिक विरासत को समझने और स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

- **उत्तर प्रदेश में:** राज्य के ऐतिहासिक पर्यटन मानचित्र पर विंध्य क्षेत्र के मध्यकालीन किलों और रियासतों के अध्ययन को एक नया आयाम मिलता है। जो लोग राज्य की स्थापत्य कला और गहरवार वंश के इतिहास में रुचि रखते हैं, वे विजयपुर और कंतित की यात्रा की योजना बना सकते हैं।
- **मिर्जापुर में:** स्थानीय स्तर पर विरासत संरक्षण के प्रयासों और पर्यटन आधारित रोजगार की संभावनाओं को नई पहचान मिलती है। जिले के नागरिक और इतिहास प्रेमी बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के इस प्राचीन नक्काशीदार संरचना के गौरवशाली अतीत से रूबरू हो सकते हैं।
- **शोधकर्ताओं के लिए:** मध्यकालीन भारत में कन्नौज के बिखराव के बाद क्षेत्रीय शक्तियों के पुनर्गठन को समझने के लिए ठोस ऐतिहासिक संदर्भ उपलब्ध होता है। छात्र और इतिहासकार सरकारी अभिलेखों तथा कंतित रियासत की वंशावली के आधार पर आगे का शोध कर सकते हैं।
- **सैलानियों के लिए:** नक्काशीदार स्थापत्य और पुराने गढ़ीनुमा भवनों के मुआयने का अवसर मिलता है। विंध्याचल दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक अपनी यात्रा में विजयपुर किले के भ्रमण को भी शामिल कर सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
कन्नौज में राजनीतिक पतन के बाद गहरवार शासकों को नए सुरक्षित रणनीतिक ठिकानों की तलाश थी, जिसके कारण विंध्याचल के पास कंतित और विजयपुर में नए सत्ता केंद्र की स्थापना हुई।

- **कन्नौज में सत्ता का ह्रास:** मध्यकालीन संघर्षों के चलते कन्नौज में गहरवार वंश का शासन समाप्त हो गया था। इसके परिणामस्वरूप राजवंश के उत्तराधिकारियों को अपनी सुरक्षा और पुनर्स्थापना के लिए पूर्व की ओर विंध्य पर्वतमाला के निकटवर्ती क्षेत्रों में शरण लेनी पड़ी।
- **भौगोलिक और सामरिक सुरक्षा:** विंध्याचल और मिर्जापुर का इलाका प्राकृतिक पहाड़ियों और नदियों से घिरा हुआ था, जो बाहरी आक्रमणों से बचाव के लिए उपयुक्त था। इसी रणनीतिक लाभ को देखते हुए कंतित को आरंभिक राजधानी और विजयपुर को सैन्य व प्रशासनिक गढ़ी के रूप में चुना गया।
- **साम्राज्य का पारिवारिक विभाजन:** राजा गुडनदेव के दो पुत्रों के बीच सत्ता का व्यवस्थित बंटवारा हुआ। राजा उग्रसेन ने कंतित की कमान संभालते हुए विजयपुर किले का निर्माण कराया, जबकि उनके भाई राजा भोजराज ने मांडा रियासत की बागडोर संभाली।
- **उपनिवेशी विस्तार का दबाव:** सदियों तक स्थानीय प्रभाव बनाए रखने के बावजूद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के आगमन ने इस रियासत की स्वायत्तता को सीमित कर दिया। कंपनी की विस्तारवादी नीतियों और कर व्यवस्था के कारण गहरवार शासकों को कड़े प्रशासनिक अवरोधों का सामना करना पड़ा।

## सवाल-जवाब

### 1. मिर्जापुर के विजयपुर में स्थित किले का निर्माण किस राजवंश ने कराया था?
इस किले का निर्माण गहरवार वंश के शासक राजा उग्रसेन द्वारा कराया गया था।

### 2. गहरवार वंश ने मिर्जापुर को अपना गढ़ क्यों बनाया?
कन्नौज में अपनी सत्ता का पतन होने के बाद गहरवार शासकों ने विंध्य क्षेत्र के कंतित और विजयपुर को अपना नया केंद्र बनाया।

### 3. राजा उग्रसेन और राजा भोजराज के पिता कौन थे?
वे दोनों कंतित स्टेट के राजा गुडनदेव के पुत्र थे, जो राजा माणिकचंद के 16वें वंशज थे।

### 4. राजा भोजराज ने किस क्षेत्र पर शासन किया था?
राजा भोजराज ने मांडा की सत्ता संभाली थी, जबकि उनके भाई राजा उग्रसेन कंतित के राजा बने थे।

### 5. क्या वर्तमान समय में विजयपुर किले में कोई रहता है?
वर्तमान में इस किले में कोई रिहायश नहीं है और यह ऐतिहासिक इमारत खाली है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._